यह ऐसा मामला है जो भारत में कहीं भी देखने को मिल सकता है: ऐसे 'बाबा' जिन्हें 'आस्था के नाम पर बलात्कार' करने का जुनून होता है, यानी धर्म की आड़ में सम्मोहन करके जबरन यौन संबंध बनाना. महाराष्ट्र का सबसे नया कांड अशोक कुमार एकनाथ खरात से जुड़ा है जो देखने में तो किसी सरकारी अधिकारी जैसा लगता है, लेकिन असल में वह एक तांत्रिक शिकारी है जिसके पास टोने-टोटकों का पूरा मायाजाल है.
अंधविश्वास का सहारा लेकर—या रिमोट-कंट्रोल वाले नकली सांप जैसी चीजों के जरिए उसने कई पीड़ितों को अपने जाल में फांस लिया था. वीआइपी भक्तों से उसके सीधे संपर्क थे, और उसके पास इन लोगों की इतनी काली करतूतें थीं कि राजनैतिक पार्टियां भी उससे घबराती थीं. सत्रह मार्च को उसकी गिरफ्तारी से उसकी कई करतूतों का पर्दाफाश हुआ है—राजनैतिक संपर्कों के मामले में भी और इस सनसनीखेज कांड के बारे में भी.
यहां तक कि इसमें नरबलि और कालाजादू निषेध कानूनों का भी उल्लंघन किया गया. उस नरक का दरवाजा देखने में काफी सहज-सामान्य था: लोगों को नौकरी दिलाना या रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी परेशानियों से निजात दिलाने में मदद करना खरात की सार्वजनिक 'सेवाओं' में शामिल था.
जिस पीड़ित महिला की शिकायत पर यह गिरफ्तारी हुई, वह आम मामलों जैसा ही था. वह शादीशुदा जिंदगी के बारे में सलाह लेने गई थी मगर लगातार हवस के घुटन भरे जाल में फंस गई: 2022 से लेकर तीन साल तक वह उसे अपनी वासना का शिकार बनाता रहा. वह खुद को अलौकिक शक्तियों वाला बताता था और धमकाता था कि अगर उसने विरोध किया, तो उसके पति की मौत हो जाएगी या उसकी शादी टूट जाएगी.
खुद को 'कैप्टन खरात' कहने वाला यह शख्स दिसंबर में ही लोगों की नजर में आ गया था. उसने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी कि कुछ लोग उसके अश्लील वीडियो होने का दावा करके उससे पैसे वसूलने की कोशिश कर रहे हैं. उसके ऑफिस के लड़के, नीरज जाधव ने नासिक के कनाडा कॉर्नर स्थित उसके दफ्तर में खुफिया कैमरे लगा दिए थे. उसने ऐसा उस वक्त किया, जब उसकी एक परिचित गर्भवती महिला ने उसको बताया था कि खरात ने उसका किस तरह यौन उत्पीड़न किया था. फरवरी में खरात के कहने पर उसके जाल में फंसी एक महिला ने पुलिस में झूठी शिकायत दर्ज कराई ताकि पुलिस जाधव के पीछे पड़े. एक पुलिस अधिकारी बताते हैं, ''लेकिन हमें यह समझ आ गया कि खरात ही गलत है, और हमने उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा किए.''
तांत्रिक का पिटारा
एक गवाह सामने आया, जिसके पास खरात और आठ महिलाओं से जुड़े 35 वीडियो थे. केस पुख्ता होने पर पुलिस ने खरात के देश छोड़कर भागने पर रोक लगा दी और इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआइटी) बनाया. उसकी गिरफ्तारी के बाद पीड़ितों के बयान आने लगे. उसके पास अजीबोगरीब चीजें थीं: रिमोट-कंट्रोल वाले सांपों के अलावा, उस पर लोमड़ी के कान, बाघ की खाल, पॉलिश किए गए इमली के बीज और अन्य नकली चमकीली चीजें जमा करने का भी आरोप है, जिन्हें वह 'सिद्ध' रत्न बताकर बेचता था. उस पर टोना-टोटका करने के भी आरोप लग रहे हैं.
इस बात को लेकर अटकलें गर्म हैं कि जब खरात अपने वीआइपी ग्राहकों के राज खोलेगा तो सत्ता के गलियारों में उनका क्या असर होगा. पहला शिकार: एनसीपी महिला शाखा की अध्यक्ष रूपाली चाकणकर हुईं. वे राज्य महिला आयोग की प्रमुख थीं, लेकिन उन्होंने खरात के पांव धोए थे. तस्वीरों और वीडियो में वे पूरी तरह श्रद्धा में डूबी नजर आ रही हैं; उन्होंने तो खरात की तुलना भगवान विठोबा तक से कर दी थी.
विपक्ष सत्ताधारी महायुति के और भी नेताओं पर उंगलियां उठा रहा है. शिवसेना (यूबीटी) की नेता सुषमा अंधारे का कहना है कि पूर्व शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर, जो उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में हैं, की जांच होनी चाहिए. चाकणकर की तरह वे भी खुद को बेकसूर बता रहे हैं. वे पूछते हैं, ''उससे इतने सारे लोग मिले, करीब 39 विधायक. फिर मेरा नाम ही क्यों लिया जा रहा है?'' अंधारे ने खरात के साथ शिंदे के संबंधों पर भी सवाल उठाए हैं.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस बात का समर्थन करते हैं कि 'सिर्फ जान-पहचान होना कोई गुनाह नहीं है.' वे कहते हैं, ''हम किसी को भी नहीं बचाएंगे, लेकिन सिर्फ इसलिए किसी पर केस भी नहीं चला सकते कि (खरात के साथ) उनकी कोई फोटो है.'' फडणवीस के ऐसा कहने की वजह है: खरात के साथ भाजपा के कई बड़े नेताओं के फोटो हैं, जिनमें फडणवीस से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक शामिल हैं.
इस मामले से सभी को परेशानी होगी. 2018 में भाजपा के एक मंत्री ने खरात के ट्रस्ट को धन दिया था. उद्धव ठाकरे की सरकार ने उन्हें एक बांध से पानी दिया. महाराष्ट्र की तर्कवादी संस्था अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति पर पिछले कम से कम दो दशक से खरात नजर रखे हुए था. सचाई पर इतना मोटा पर्दा पड़ा था कि वह हट नहीं पाया. यहां तक कि 2022 में कैबिनेट के एक बड़े मंत्री ने अचानक उसके मंदिर का दौरा किया.

