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आप को नई सियासी संजीवनी

दिल्ली की एक अदालत ने कथित शराब घोटाले पर सीबीआइ के आरोपों को सिरे से खारिज किया. आप और इसके मुखिया अरविंद केजरीवाल को मिला मतदाताओं का भरोसा फिर से हासिल करने का नैतिक बल मिला है

27 फरवरी को दिल्ली में आप मुख्यालय पहुंचते केजरीवाल
अपडेटेड 25 मार्च , 2026

भारतीय राजनीति एक ऐसा रंगमंच है जहां कभी-कभी वापसी की असंभव लगती कहानी भी संभव हो जाती है. और यह फिल्मों-खेलों से भी ज्यादा रोमांचक होती है. 27 फरवरी को दिल्ली की एक अदालत ने मानो ऐसी ही कहानी की शुरुआती पटकथा लिख दी, जब उसने आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्व सरकार के खिलाफ कथित शराब घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की ओर से दाखिल आरोपपत्र को खारिज कर दिया.

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने फैसले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. इनमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 दूसरे लोग शामिल हैं. जांच एजेंसियों पर तल्ख टिप्पणियां भी की गईं. अदालत ने कहा, ''लगता है जांच पहले से तय दिशा में बढ़ती गई, जिसमें नीति निर्माण या क्रियान्वयन से जुड़े लगभग हर शख्स को इस तरह शामिल किया गया मानो किसी कमजोर कहानी को गहराई और विश्वसनीयता का भ्रम देने की कोशिश की जा रही हो.''

फैसले के बाद अदालत के बाहर, आप प्रमुख केजरीवाल कैमरों के सामने जज्बाती नजर आए. उन्होंने कहा, ''एक कार्यरत मुख्यमंत्री को उसके घर से घसीटकर जेल में डाल दिया गया और छह महीने तक बंद रखा गया, देश में ऐसा पहली बार हुआ.''

यह फैसला संकटग्रस्त आप के लिए संजीवनी साबित हो सकता है. अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष का मामला पूरी तरह अमान्य सबूतों और अपुष्ट गवाहियों पर आधारित था. लगभग 300 गवाहों की पड़ताल के बावजूद सीबीआइ कोई नकद बरामदगी, वित्तीय लेन-देन का स्पष्ट सुराग, कोई आपत्तिजनक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य या ऐसा दस्तावेज पेश नहीं कर सकी जो किसी भी आरोपी को रिश्वत से जोड़ सके.

अदालत ने नतीजा निकाला कि आप की दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 एक पारदर्शी और परामर्श आधारित प्रक्रिया से बनी और उसकी उचित संस्थागत निगरानी भी की गई. इससे पूरे मामले की बुनियाद ही पलट गई. जुलाई 2022 में दिल्ली के मुख्य सचिव ने उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को एक रिपोर्ट सौंपी जिसके बाद सीबीआइ जांच शुरू हुई थी.

रिपोर्ट में नई नीति के कारण प्रक्रियागत खामियों और 580 करोड़ रुपए से ज्यादा के नुक्सान का आरोप लगाया गया. एक अलग आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 100 करोड़ रुपएके रिश्वत की लेनदेन का आरोप लगाया था. अदालत में चुनौतियों के बीच आप सरकार ने उस नीति को वापस ले लिया था.

अब पार्टी के सामने उन मतदाताओं का भरोसा वापस जीतने की चुनौती है, जिन्होंने पिछले साल किसी और को चुन लिया. दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज के राजनीतिशास्त्र विभाग के प्रोफेसर तनवीर ऐजाज कहते हैं ''हार के बावजूद आप और भाजपा के वोट शेयर में ज्यादा अंतर नहीं था.'' आप को 70 में से सिर्फ 22 सीटों पर तो भाजपा को 48 सीटों पर जीत मिली थी. मगर दोनों के वोट शेयर में सिर्फ 2.2 फीसद का अंतर था. भाजपा को 45.8 फीसद और आप को 43.5 फीसद वोट मिले, जबकि कांग्रेस ने 6.4 फीसद वोट लेकर समीकरण बिगाड़ दिया.

लंबी सियासी बाजी

इस सियासी परिदृश्य में यह फैसला अहम माना जा रहा. आप में नंबर दो माने जाने वाले सिसोदिया ने इंडिया टुडे से कहा कि दिल्ली में जीत हासिल करने के लिए भाजपा ने 'साजिश रची थी.' उनके शब्दों में, ''अगर आज चुनाव हो जाएं तो केजरीवाल सभी 70 सीटें जीतेंगे क्योंकि अदालत ने भी उन्हें ईमानदार नेता प्रमाणित कर दिया है.''

इसके लिए इंतजार करना होगा क्योंकि दिल्ली में अगला चुनाव 2030 में होना है. मगर आप की सत्ता वाले पंजाब में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं. आप इस फैसले को वहां खुद को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल कर सकती है. पंजाब में पार्टी का चेहरा और मुख्यमंत्री भगवंत मान मतदाताओं को इसे 'सत्य की जीत' बताने के लिए घर-घर अभियान चलाने की बात कर चुके हैं. उनका कहना है कि इस फैसले से भाजपा का पूरा नैरैटिव ढह गया है.

वैसे, दिल्ली में सत्तारूढ़ भाजपा की अलग राय है. दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा कहते हैं, ''फैसले में कई खामियां हैं. हम अपील में इन्हें उठाएंगे.''

अब सब कुछ आने वाले चुनावी मुकाबलों में आप के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा. अगर पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा तो राष्ट्रीय पार्टी का उसका दर्जा भी खतरे में पड़ सकता है. इसी बीच विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ सीबीआइ की अपील 9 मार्च को दिल्ली हाइकोर्ट में सुनवाई के लिए आएगी जबकि ईडी की मनी-लॉन्ड्रिंग कार्यवाही अभी भी जारी है.

ऐसे में आगे का आप का रास्ता आसान नहीं होगा. सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के राहुल वर्मा कहते हैं, ''जो लोग सोचते थे कि केजरीवाल खत्म हो चुके हैं, वे गफलत में थे. पर यह भी सच है कि विचारधारा आपको केवल एक सीमा तक ही आगे ले जा सकती है. पंजाब में उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं है.'' फिर भी केजरीवाल और आप को फिलहाल एक राहत जरूर मिल गई है. अब देखना यह है कि वे इस मौके का कितना फायदा उठा पाते हैं. 

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