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विजय बनाम विजयकांत

विजय की टीवीके ने स्थिर द्विध्रुवीय राजनीति में एक अस्थिर तीसरा कोण जोड़ा. सत्ता विरोधी लहर और एक नए प्रतिस्पर्धी की मौजूदगी के बीच मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अब क्या होगी रणनीति?

डीएमडीके प्रमुख प्रेमलता विजयकांत, मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और डीएमके के दूसरे नेताओं के साथ
अपडेटेड 19 मार्च , 2026

तमिलनाडु का विधानसभा चुनाव हाल के समय में सबसे दिलचस्प होने के आसार हैं. दरअसल, अभिनेता से राजनेता बने विजय ने पुरानी स्थिर द्विध्रुवीय राजनीति में एक अस्थिर तीसरा कोण जोड़ दिया है. वे नए-पुराने और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोशिशों में जुटे हैं. राज्य ने पहले भी त्रिकोणीय मोर्चे देखे हैं और नाटकीयता भरे प्रयोगों का भी गवाह बना है. हालांकि, उनमें से ज्यादातर नाकाम ही रहे. 2026 में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या विजय का तमिलगा वेत्रि कलगम (टीवीके) कामयाबी पा सकेगा? सियासी परिदृश्य में नए बदलाव ने दो पारंपरिक पार्टियों के बीच गठबंधन को पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण बना दिया है. पार्टियों के एक-दूसरे से जुड़ने का हर फैसला गठबंधन को नया रूप दे रहा है.

सत्ता विरोधी लहर और एक नए प्रतिस्पर्धी की मौजूदगी के बीच मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन एक मंझे हुए सीईओ की तरह 15 पार्टियों वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव एलायंस (एसपीए) का नेतृत्व कर रहे हैं. एक तरफ कांग्रेस के साथ तनावपूर्ण बातचीत के बाद सफलता मिलती दिख रही है तो दूसरी तरफ, एक समानांतर घटनाक्रम ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है. 19 फरवरी को देसीय मुरपोक्कू द्रविड़ कलगम (डीएमडीके) पाला बदलकर द्रमुक के साथ आ गया. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस पार्टी का असर घटा है लेकिन दिवंगत अभिनेता विजयकांत की डीएमडीके ने कभी वही भूमिका निभाई थी जिसके लिए आज विजय की टीवीके कोशिश कर रही है—राज्य की एक ताकतवर तीसरी पार्टी.

पति विजयकांत के 2023 में इंतकाल के बाद से पार्टी का नेतृत्व संभाल रहीं प्रेमलता विजयकांत ने अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कलगम (अन्नाद्रमुक) के राज्यसभा सीट देने के वादे से मुकरने के बाद पाला बदला है. 2011 में अन्नाद्रमुक की जीत में डीएमडीके की अहम भूमिका थी. दरअसल, डीएमडीके ने 29 सीटें जीती थीं यानी द्रमुक से छह ज्यादा. लेकिन 234 सदस्यीय विधानसभा में 150 सीटें हासिल करने वाली दिवंगत जयललिता की अन्नाद्रमुक ऐसे सहयोगी नहीं चाहती थी जो ताकतवर होने का दम भरें. आखिरकार, विजयकांत सदन में नेता विपक्ष बन गए!

छोटी लेकिन प्रासंगिक पार्टी
विजयकांत के निधन के बाद डीएमडीके के सुनहरे दिन भले बीत चुके हों लेकिन जानकारों का कहना है कि उत्तरी और मध्य तमिलनाडु में और शहरी निम्न मध्य वर्ग के कुछ हिस्से में पार्टी का प्रतीकात्मक और संगठनात्मक महत्व बरकरार है. इसने 2006-11 में 8 फीसद वोट हिस्सेदारी के साथ एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से पर कब्जा बरकरार रखा था. इस तरह रणनीतिक लिहाज से देखें तो करीबी मुकाबले वाली स्थिति में पार्टी निर्णायक साबित हो सकती है.

कांग्रेस का मनोबल कमजोर
कांग्रेस के साथ गठबंधन लगभग तय हो चुका है. हालांकि स्टालिन ने गठबंधन सरकार के उसके प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. कांग्रेस ने शुरू में सीटों में 'सम्मानजनक' हिस्सेदारी—45 सीटों तक—और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप 'शासन में भूमिका' देने की मांग रखी थी. हालांकि, अब नजरिया ज्यादा यथार्थवादी हो गया है, जिसमें बड़े-छोटे के दर्जे के बजाए एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है. चर्चा है कि '25+1' फॉर्मूला बरकरार रखा जाएगा यानी 10 फीसद से ज्यादा सीटें और राज्यसभा के लिए एक टिकट. हालांकि, यह कांग्रेस की महत्वाकांक्षा से काफी कम है.

रही बात अन्नाद्रमुक की तो 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले मैदान में उतरने के बाद उसे एक भी सीट नहीं मिली, जिसके बाद उसने अपने दंभ को घटाया और गठबंधन के साथ मैदान में उतरना बेहतर समझा. पिछले अप्रैल में भाजपा के साथ फिर हाथ मिलाने के साथ इसकी शुरुआत हुई. अन्नाद्रमुक ने अभिनेता विजय की नवोदित पार्टी को अपने साथ लाने की कोशिश की लेकिन विजय के बढ़ते प्रभाव ने उस योजना पर पानी फेर दिया. फिर भी, जनवरी आते-आते उसने टी.टी.वी. दिनकरन के विभाजित कलगम, अम्मा मक्काल मुनेत्र कलगम (एएमएमके) और उत्तरी तमिलनाडु में खासा असर रखने वाली पट्टालि मक्काल काच्चि (पीएमके) को अपने गठबंधन का हिस्सा बना ही लिया. 

आखिरी कहानी पीएमके के संस्थापक एस. रामदास और उनके बेटे तथा पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अंबुमणि रामदास के बीच सार्वजनिक विवाद की है, जिसने उनका वन्नियार वोट बैंक विभाजित होने का खतरा बढ़ा दिया है.

अंबुमणि ने अन्नाद्रमुक गठबंधन में शामिल होने का विकल्प चुना है, जबकि रामदास सीनियर कथित तौर पर द्रमुक के साथ जाने के इच्छुक हैं. लेकिन द्रमुक को दलित-उन्मुख विदुतलै चिरुतैगल काच्चि (वीसीके) की भावनाओं का ध्यान रखना होगा, जो पीएमके या उसकी राजनीति की समर्थक नहीं रही है.

खास बातें

> राज्यसभा सीट का वादा पूरा न होने पर डीएमडीके अब डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ

> गठबंधन सरकार में जगह देने की कांग्रेस की मांग को स्टालिन ने किया खारिज

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