बिहार विधानसभा के हाल के बजट सत्र में भाजपा विधायक जीबेश मिश्र ने पूछा कि सांप पालतू जानवर है या जंगली? पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्री अरुण कुमार ने जैसे ही इसे जंगली बताया, मिश्र ने मसला उठाया कि बिहार सरकार वन्य प्राणियों की वजह से मरने वालों को 10 लाख रुपए का मुआवजा देती है, जबकि सर्पदंश का शिकार हुए मृतकों के लिए यह राशि चार लाख रुपए है.
मिश्र ने सदन को जानकारी दी कि 3 मार्च, 2020 को बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और तत्कालीन पर्यावरण मंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी ने सदन में सांप को वन्य प्राणी की श्रेणी में रखने और मुआवजे को 10 लाख रुपए करने की बात कही थी. मिश्र के प्रस्ताव को विधानसभा में रजनीश कुमार और मिथिलेश तिवारी जैसे कई सदस्यों से समर्थन मिला.
विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी 17 फरवरी को संबंधित विधायकों, मंत्री और विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की बैठक बुलाई. बिहार सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने बाघ, तेंदुआ, हाथी, भालू जैसे 13 जानवरों के किसी को शारीरिक क्षति पहुंचाने की स्थिति में मुआवजे का प्रावधान दिया है.
विभाग इंसानों की मृत्यु या स्थायी अक्षमता की स्थिति में 10 लाख, गहरी चोट पर 1.44 लाख, हल्की चोट पर 24,000 रुपए का मुआवजा देता है. साथ ही, अगर इन जानवरों की वजह से भैंस, गाय, बैल, या भेड़-बकरियों की मृत्यु होती है तो अलग-अलग राशियों का प्रावधान है. इस सूची में सांप के न होने की वजह वन विभाग के एक अधिकारी बताते हैं, ''सांप की स्थिति इन 13 जानवरों से बिल्कुल अलग है. इन जानवरों का जंगल से मानव बस्ती में जाना असामान्य स्थिति है. लेकिन सांप पर कोई नियंत्रण नहीं. चूंकि ज्यादातर मामले बाढ़ के मौसम में आते हैं,
इसलिए सर्पदंश से मरने वालों को आपदा प्रबंधन विभाग मुआवजा देता है.'' वहीं वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के चीफ इकोलॉजिस्ट समीर कुमार सिन्हा कहते हैं, ''सर्पदंश का मामला वन विभाग से ज्यादा स्वास्थ्य विभाग का है. इसमें मौत सिर्फ इसलिए हो जाती है क्योंकि समय से इलाज नहीं मिलता. मुआवजा राशि बढ़ाने से ज्यादा जरूरी ग्रामीण अस्पतालों में ऐंटीवेनम सीरम की निरंतर उपलब्धता है.'' हालांकि स्नेक रेस्क्यूअर और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट अभिषेक कहते हैं, ''सांप काटने के बाद जान बचाने के लिए अमूमन तीन घंटे का समय होता है, ऐसे में लोग ओझा की शरण में जाते हैं. महत्वपूर्ण समय इसी में बीत जाता है.''
सर्पदंश के आंकड़ों को लेकर भी बिहार में भ्रम की स्थिति दिखती है. राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक राज्य में 2023-24 में सांप के काटने से मरने वाले 154 लोगों को मुआवजा दिया गया जबकि बिहार सरकार के हेल्थ मैनेजमेंट सिस्टम के मुताबिक, अप्रैल 2023 से मार्च 2024 के बीच राज्य में इस वजह से 934 मौतें हुईं. इसी दौरान सरकारी अस्पतालों में स्नेक बाइट के 17,859 मरीज इलाज के लिए आए. वहीं जुलाई, 2024 में सांसद राजीव प्रताप रूडी ने लोकसभा में जानकारी दी थी कि बिहार में हर साल सांप काटने से 10,000 लोगों की मौत हो जाती है.
आंकड़ों से जाहिर है कि स्नेक बाइट से मरने वाले ज्यादातर लोग मौजूदा मुआवजे के चार लाख रुपए से भी वंचित हैं. साफ है कि ज्यादातर लोग अस्पताल पहुंचते ही नहीं. मगर जितने लोगों की मौत सरकारी अस्पतालों में होती है, उन्हें भी मुआवजा नहीं मिल पाता. सिन्हा कहते हैं, ''सही दिशा में काम नहीं हुआ तो वन विभाग की सूची में सांप को शामिल करने से भी कुछ खास नहीं बदलेगा.''

