राजस्थान में दिल्ली-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 8 पर टोल वसूली की हैरानी भरी तस्वीर नजर आती है. यहां मनोहरपुरा और दौलतपुरा टोल प्लाजा की दूरी महज 31 किलोमीटर (किमी) है. मनोहरपुरा पर 90 रुपए और दौलतपुरा पर 75 रुपए टोल के देने पड़ते हैं. इसके बाद दौलतपुरा से करीब 50 किमी दूर ठिकरिया पर फिर 95 रुपए का टोल देना होता है. यानी 81 किमी की दूरी में तीन जगह से कुल 260 रुपए की टोल वसूली होती है.
विडंबना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क संग्रहण नियम 2008 के मुताबिक, 60 किमी की दूरी पर टोल वसूली का प्रावधान है जबकि राजस्थान राज्यमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियम, 2015 केवल 40 किमी की दूरी पर ही टोल वसूलने की बात कहता है. मगर मनोहरपुरा एवं दौलतपुरा टोल प्लाजा से स्पष्ट है कि जमीनी हकीकत इन दोनों प्रावधानों से उलट है. केंद्र और राज्य सरकार के नियमों की गफलत राजस्थान में नेशनल हाइवे और स्टेट हाइवे से गुजरने वाले वाहन सवारों की जेब पर भारी पड़ रही है.
राजस्थान से गुजरने वाले कई राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूलने की औसत दूरी 50 किमी से भी कम है और कुछ स्थानों पर तो यह 30-35 किमी तक सिमट जाती है. राज्यमार्गों पर स्थिति और भी सघन है जहां 25-30 किमी की दूरी पर ही नया टोल सामने आ जाता है.
जयपुर से अजमेर के बीच मात्र 125 किमी के सफर में तीन टोल प्लाजा—जयपुर, किशनगढ़ और गेगल—हैं, जहां कुल 225 रुपए चुकाने पड़ते हैं. दूसरी ओर, सड़कों पर जाम लगता है और वे गड्ढों से मुक्त भी नहीं, तो फिर इतनी भारी वसूली क्यों की जा रही है?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आंकड़े भी कई सवाल खड़े करते हैं. दिल्ली-कोटपूतली राष्ट्रीय राजमार्ग की लागत 6,430 करोड़ रुपए बताई गई, जबकि इस मार्ग पर अब तक 9,218 करोड़ रुपए से ज्यादा की टोल वसूली हो चुकी है. यानी, लागत से करीब 70 फीसद ज्यादा. इसके बावजूद यह मार्ग ट्रैफिक जाम और बड़े गड्ढों की समस्या से पूरी तरह नहीं उबर पाया है.
राष्ट्रीय राजमार्ग आठ ही नहीं, राजस्थान से गुजरने वाले अन्य राष्ट्रीय एवं राज्यमार्गों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है. यही कारण है कि सड़क हादसों में जान गंवाने के मामलों में राजस्थान देश में छठे नंबर पर है. पिछले तीन साल (2023-2025) में राजस्थान में सड़क दुर्घटनाओं में 35,619 लोगों ने जान गंवाई. इन सड़क हादसों की बड़ी वजह खराब सड़कें रही हैं.
टोंक जिले में 65 किमी की दूरी में तीन टोल चुकाने पड़ रहे हैं. यहां राष्ट्रीय राजमार्ग 552 पर ढिकोलिया और राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर सोनवा और राज्यमार्ग पर छान के पास टोल चुकाना पड़ता है. इसी तरह बयाना से जयपुर के बीच मात्र 41 किमी की दूरी में तीन टोल प्लाजा (ब्रह्मवाद, भेडागांव और छोंकरवाड़ा) हैं. राज्यसभा की संसदीय समिति की 8 फरवरी 2024 को पेश हुई 'ऑपरेशन ऐंड मेंटेनेंस ऑफ नेशनल हाइवे ऐंड मेंटेनेंस ऑफ टोल प्लाजा’ रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ कि राजस्थान में टोल प्लाजा निर्माण में 60 किमी की दूरी के नियमों की अवहेलना हुई है.
वहीं, केंद्र और राज्य के नियमों के तहत टोल प्लाजा के 20 किमी परिधि में आने वाले गांवों के लोगों से टोल नहीं वसूला जा सकता, मगर प्रदेश के राजगढ़ से झुंझुनूं आने वाले राज्यमार्ग पर लंबोर बड़ी टोल और धनूरी टोल प्लाजा पर इन नियमों की अनदेखी की जा रही है. स्थानीय लोग इसके खिलाफ पिछले काफी समय से आंदोलनरत हैं. इसी तरह उदयपुरवाटी-झुंझुनूं मार्ग पर 35 किमी में टोल वसूला जा रहा है.
कई मार्ग तो ऐसे हैं जहां टोल वसूलने की मियाद दो साल पहले ही खत्म हो गई, मगर अफसर, नेता और ठेकेदारों के गठजोड़ के चलते टोल वसूली बेरोकटोक जारी रही. मसलन, सीकर से लुहारु राजमार्ग को ही देख लें. 2005 में बीओटी के आधार पर बने इस राजमार्ग पर चार टोल शुरू हुए. टोल वसूली का समय 2011 तक था मगर टोल माफिया ने झुंझुनूं शहर में 1.70 करोड़ रुपए की एक फर्जी नाली का निर्माण कराया जाना बताकर इसका समय छह साल के लिए और बढ़ा लिया.
यानी, 46 करोड़ रुपए की लागत से बनी इस सड़क पर छह साल तक टोल वसूली होनी थी जिसे 1.70 करोड़ रुपए की नाली के कारण छह साल के लिए और बढ़ा दिया गया. राजस्थान में अवैध टोल के खिलाफ आंदोलन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता यशवर्धन सिंह शेखावत इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गए जिसके चलते यहां टोल की वसूली बंद हुई और संबंधित ठेकेदार से 127 करोड़ रुपए की वसूली का आदेश हुआ. इसी तरह चिड़ावा, पचेरी, सिंघाना रोड़ पर स्थित टोल प्लाजा की अवधि दो साल पहले ही खत्म हो गई थी मगर वसूली जारी रही. शेखावत के संघर्ष के बाद संबंधित फर्म से आठ करोड़ रुपए की वसूली का आदेश निकला.
शेखावत कहते हैं, ''सरकार को जनता चुनती है मगर टोल वसूली में वह जनता का नहीं बल्कि टोल माफिया का साथ देती है. सत्ताधारी दल के नेता टोल चला रहे हैं, ऐसे में उन्हें अवैध वसूली से कौन रोकने वाला है.’’
राजस्थान में टोल वसूली ही नहीं बल्कि टोल प्लाजा की संख्या भी चर्चा का विषय है. क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान भले ही महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात जैसे राज्यों की श्रेणी में आता है, मगर टोल प्लाजा के मामलों में राजस्थान देश में सबसे आगे है. राजस्थान में मध्य प्रदेश, हरियाणा, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों से दोगुने टोल प्लाजा चल रहे हैं. देश के 15 फीसद टोल अकेले राजस्थान में हैं.
राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल 174 टोल प्लाजा संचालित हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या 137, मध्य प्रदेश में 97, महाराष्ट्र में 98, हरियाणा में 75 और गुजरात में महज 66 हैं. यही कारण है कि पिछले 15 साल में राजस्थान में टोल वसूली की दर 25 फीसद तब बढ़ गई है. अगर टोल की इस संख्या में राज्यमार्गों को भी शामिल कर लिया जाए तो राजस्थान में कुल टोल बूथों की संख्या 300 से भी ज्यादा है. राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर महीने औसतन 650 करोड़ रुपए की टोल वसूली हो रही है, जो उत्तर प्रदेश के बाद देश में सबसे ज्यादा है.
ज्यादा टोल वसूली के पीछे यह कारण भी नहीं है कि मानो राजस्थान में देश की सबसे ज्यादा सड़कें बनी हों. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले छह साल में उत्तर प्रदेश और राजस्थान में सबसे ज्यादा टोल खुले हैं, जबकि सड़कें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में बनी हैं. साल 2020-2025 के बीच उत्तर प्रदेश में 81, राजस्थान में 79, मध्य प्रदेश में 62, महाराष्ट्र में 55 और हरियाणा में 53 नए टोल प्लाजा शुरू हुए हैं.
अगर, इसी अवधि में सड़क निर्माण की गति को देखें तो महाराष्ट्र में सर्वाधिक 10,579 किमी नए राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं जबकि सबसे ज्यादा टोल वसूलने वाले उत्तर प्रदेश में 4,923 किलोमीटर, राजस्थान में 4,942 किलोमीटर लंबे नए राष्ट्रीय राजमार्ग बने हैं. पिछले चार साल में देश में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 14 टोल प्लाजा बंद किए गए हैं उनमें से एक भी राजस्थान का नहीं है.
राजस्थान में सार्वजनिक निर्माण विभाग के एक आला अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि राजस्थान राजमार्ग शुल्क (दरों का निर्धारण एवं संग्रहण) नियम 2015 के प्रावधानों के अनुसार, राजस्थान में टोल प्लाजा के बीच की दूरी 40 किमी निर्धारित है मगर प्रभारी अधिकारी उस सड़क पर पुल, उपमार्ग या सुरंग की निर्माण लागत को ध्यान में रखते हुए 40 किमी की दूरी के भीतर दूसरा टोल खुलवा सकता है. यही नियम एनएचएआइ के टोल प्लाजा पर भी लागू है.
राजस्थान में एनएचएआइ के चीफ इंजीनियर सतीश अग्रवाल कहते हैं, ''राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल फीस का निर्धारण सड़कों की लंबाई, लागत और कई दूसरे मापदंडों के आधार पर प्राधिकरण करता है. टोल प्लाजा हटाना और फीस घटाना भी उसका जिम्मा है. फिलहाल, राजस्थान में टोल प्लाजा की संख्या घटाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है.’’
जाहिर है, राजस्थान में लोगों को कदम-कदम पर टोल देते रहना होगा भले ही सड़कों की हालत कैसी भी हो. यानी टोल टैक्स अब अनिवार्य वसूली हो गया है.

