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कायापलट की कवायद

अदालत के फरमान पर हो रहे नगर निकाय चुनाव और राजकाज की नई व्यवस्थाओं से बेंगलूरू एक नई शहरी व्यवस्था के लिए तैयार हो रहा है

यातायात अव्यवस्था में जकड़ा बेंगलूरु कायेलहंका इलाका शहर के बुनियादी ढांचे पर बढ़े दबाव की तस्दीक कर रहा
अपडेटेड 13 मार्च , 2026

- अजय सुकुमारन

भारत की तकनीकी राजधानी कहा जाने वाला बेंगलूरू शहर लंबे वक्त से विरोधाभासों में जी रहा है. नवाचारों के लिए मशहूर मगर नागरिक व्यवस्थाओं की बदहाली से बेजार. पांच से ज्यादा वर्षों से यहां के बाशिंदे टूटी-फूटी सड़कों, कूड़ा इकट्ठा करने की गड़बड़ियों और जलभराव की लाइलाज परेशानियों से जूझते रहे हैं, मगर चुने हुए नगर निकाय का मार्गदर्शक हाथ कहीं नजर नहीं आता.

अब सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया है कि कर्नाटक सरकार को लंबे वक्त से टलते आ रहे बेंगलूरू नगर निगम के चुनाव 30 जून तक करवाने होंगे. याचिकाओं में असमान्य देरी की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद जारी इस आदेश ने अधिकारियों को वार्ड आरक्षण और मतदाता सूचियों की प्रक्रिया तेज करने के लिए मजबूर कर दिया. सियासी दल भी जुट गए हैं.

यह चुनाव नाटकीय रूप से बदले हुए प्रशासनिक परिदृश्य में होगा. 2025 में कर्नाटक विधानसभा में पारित ग्रेटर बेंगलूरू गवर्नेंस ऐक्ट के जरिए बृहद बेंगलूरू महानगर पालिका (बीबीएमपी) को खत्म कर दिया गया है. 18 वर्षों तक कार्यरत बीबीएमपी तेजी से फैलते शहर के लिए अत्यधिक बोझिल और जटिल हो गया था. इसकी जगह पांच नगर निगमों की तजवीज की गई है जो करीब 712 वर्ग किमी के शहरी फैलाव पर शासन देखेगा.

ये निगम जहां स्थानीय मामलों की व्यवस्था संभालेंगे, समग्र योजना बनाने का काम नया बना ग्रेटर बेंगलूरू अथॉरिटी (जीबीए) करेगा. इसकी परिकल्पना ऐसे मंच के तौर पर की गई जो सभी मेयर और नागरिक सुविधाओं के लिए जिम्मेदार दूसरे अधिकारियों को साथ लाएगा. यह बेंगलूरू के अलग-थलग काम कर रहे कई नगर निकायों की समस्या को हल करने की कोशिश है. वॉर्ड, निगम और शीर्ष जीबीए का तीन स्तरीय ढांचा दिल्ली में पेश आई दिक्कतों से बचने के लिए भी बनाया गया है. दिल्ली ने नगर निकाय को 2012 में तीन हिस्सों में बांटा था जिन्हें एक दशक बाद फिर एक करना पड़ा.

खिंच गईं तलवारें
पिछली परिषद का कार्यकाल 2020 में खत्म होने के बाद बेंगलूरू के निवासी बिगड़ते बुनियादी ढांचे को लेकर हताशा जताते रहे. बेंगलूरू की उत्तरी जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालने वाले लोगों में से एक अब्दुल वाजिद की राय में यह पुनर्गठन चुनौतियों के बावजूद संभावनाओं से भरा है. वे कहते हैं, ''यह शुरुआत है. हमें नहीं पता आगे क्या होगा.''

पार्टियां इसे ऊंचे दांव वाला मुकाबला मान रही हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने जीबीए चुनाव की देखरेख का काम 20 जनवरी को पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री और आरएसएस के दिग्गज नेता राम माधव को सौंपा. हाल ही बृहन्मुंबई नगर निगम में सत्ता पाने के बाद पार्टी ने एक और सुर्खियों में रहने वाली चुनावी जंग के लिए कमर कस ली है. माधव ने इसकी अहमियत को सामने रखते हुए एक्स पर लिखा कि यह चुनाव 'विधानसभा की लड़ाई से कम नहीं' होगा.

राज्य में सत्तासीन कांग्रेस ने 2025 के अंत तक उम्मीदवारों से आवेदन मंगवा लिए. उपमुख्यमंत्री और बेंगलूरू के विकास की देखरेख कर रहे डी.के. शिवकुमार ने भरोसा जताया कि पार्टी सभी पांचों निगम जीतेगी. फिर भी, भाजपा बढ़त में है. जीबीए के इलाके में पड़ने वाले 27 विधानसभा क्षेत्रों में से 16 पर उसके विधायक हैं.

जनवरी में प्रकाशित मसौदा मतदाता सूचियों से पता चलता है कि 369 वार्डों में करीब 90 लाख मतदाता हैं. ये 2015 में हुए पिछले नगर निकाय चुनावों के दौरान मौजूद 198 वॉर्डों से करीब दोगुने हैं. बेंगलूरू में अपने पहले नगर निकाय चुनाव की तैयारी कर रही आम आदमी पार्टी के राज्य संयोजक पृथ्वी रेड्डी कहते हैं, ''पहले वॉर्ड के आकार बेतुकी तादाद तक बढ़ गए थे. बाहरी छोर पर स्थित कुछ वॉर्ड में 80,000-90,000 लोग थे. यह विधानसभा क्षेत्र की तरह था. हम इसे मुद्दा आधारित बनाकर मतदाताओं को बाहर लाने की कोशिश कर रहे हैं.''

इस मुकाबले में इस बात की पड़ताल भी होगी कि क्या बेंगलूरू में नई सियासी शुरुआत नागरिक सुविधाओं का कायापलट कर सकती है.

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