राजस्थान में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार कुछ विशेष इलाकों में जमीन-मकान जैसी संपत्तियों की खरीद-बिक्री को नियंत्रित करने के लिए कानून लाने की तैयारी में है. इस संबंध में भजनलाल मंत्रिमंडल ने गत 21 जनवरी को 'राजस्थान अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर रोक और किराएदारों को बेदखली से संरक्षण विधेयक, 2026' के मसौदे को मंजूरी दी.
विधानसभा के बजट सत्र में इस मसौदे को कानूनी जामा पहनाए जाने की कवायद चल रही है. इस मसौदे में जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया है कि वह किसी भी दंगा या हिंसा प्रभावित इलाके को तीन वर्ष के लिए 'अशांत क्षेत्र' घोषित कर सकता है. ऐसे घोषित क्षेत्रों में सक्षम अधिकारी (जिला कलेक्टर) की मंजूरी के बिना जमीन या मकान की खरीद-बिक्री नहीं हो सकेगी.
उसकी मंजूरी के लिए संपत्ति मालिक को यह हलफनामा देना होगा कि वह अपनी मर्जी से उचित कीमत पर अपनी संपत्ति बेच रहा है.
इस प्रस्तावित कानून की पृष्ठभूमि जयपुर के किशनपोल, हवामहल, ब्रह्मपुरी, रामगढ़ रोड और शास्त्री नगर जैसे इलाकों में लगे 'पलायन' संबंधी पोस्टरों से जुड़ी है. भजनलाल सरकार के गठन के तुरंत बाद लगाए गए उन पोस्टरों में इन क्षेत्रों से एक समुदाय विशेष के परिवारों के पलायन का दावा किया गया था. उसको लेकर खूब सियासी विवाद खड़ा हुआ तो उसकी गूंज राजस्थान विधानसभा तक सुनाई दी. मगर, पुलिस ने अपनी जांच में किसी भी तरह के पलायन की पुष्टि नहीं की और न ही पुलिस के सामने कभी ऐसा कोई मामला सामने आया जिसमें संपत्ति बेचने और खरीदने को लेकर विवाद हुआ हो.
प्रस्तावित कानून की मंशा के बारे में राज्य के संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल बताते हैं, ''दंगे और सांप्रदायिक तनाव के बाद कई बार भय, दबाव और अफवाहों के माहौल में लोग अपनी संपत्ति कम कीमत पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं. इसके चलते कुछ विशेष इलाकों में जनसांख्यिकीय असंतुलन बिगड़ गया है. इसको रोकने, कानून-व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए यह कानून लाया जा रहा है. यह कानून उन लोगों के हितों की रक्षा करेगा जो भय के माहौल में संपत्ति बेचने को विवश हो जाते हैं.''
भजनलाल मंत्रिमंडल ने विधेयक के जिस मसौदे को हरी झंडी दी है उसके अनुसार, कानून का उल्लंघन गैरजमानती अपराध माना जाएगा. भय और दवाब में संपत्ति खरीदने और बेचने का दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की सजा और दो लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है. जिला कलेक्टर को सौदे की जांच करने, संदेह होने पर उसे निरस्त करने और जनसांख्यिकीय असंतुलन की आशंका होने पर रोक लगाने का अधिकार होगा. इस तरह से इसमें कलेक्टर को असीमित अधिकार दिए गए हैं. अगर उसे लगता है कि किसी विशेष इलाके में एक ही समुदाय के लोग ज्यादा बस रहे या ध्रुवीकरण के हालात हैं, तब वहां भी संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक लगाई जा सकेगी.
बताया जा रहा कि राजस्थान सरकार को इस अधिनियम की प्रेरणा गुजरात में 1991 में लाए 'गुजरात अशांत क्षेत्रों में अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर प्रतिबंध और किरायेदारों को परिसर से बेदखली से संरक्षण का प्रावधान अधिनियम, 1991' से मिली है. गुजरात की तत्कालीन चिमनभाई पटेल सरकार के वक्त यह कानून बना था और 2002 के दंगों के बाद इसमें संशोधन कर प्रावधानों को और कड़ा कर दिया गया.
साल 2010 और 2020-21 में फिर इसमें सख्त संशोधन किए गए और इसका दायरा गुजरात के अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, भरूच, गोधरा जैसे कई शहरों के संवेदनशील हिस्सों में लागू कर दिया गया. गुजरात के इस कानून के तहत बिना अनुमति के संपत्ति बेचने पर छह माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि राजस्थान के प्रस्तावित विधेयक में पांच साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है. इस मायने में यह कानून गुजरात से भी सख्त है.
विपक्षी कांग्रेस ने इस विधेयक को संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ और भाजपा की मनमानी करार दिया है. कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है, ''राजस्थान जैसे शांतिपूर्ण राज्य में अस्थिरता पैदा करने के लिए यह कानून लाया जा रहा है. यह कौन तय करेगा कि कौन-सा इलाका अशांत है? वे पहले मोहल्ला अशांत करेंगे, बाद में कस्बा तथा जिला, और फिर यह पूरा लोकतंत्र अशांत घोषित करने की साजिश है.'' उनका आरोप है, ''इस कानून का स्पष्ट उद्देश्य प्रदेश में भय का माहौल बनाना और नौकरशाही को बेलगाम शक्तियां देना है. भाजपा गुजरात मॉडल का अनुसरण करके सत्ता में बने रहना चाहती है.''
वहीं, भाजपा के हवामहल से विधायक बालमुकुंद आचार्य आरोप लगाते हैं, ''जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सनातनी लोगों को डरा-धमकाकर मकान बेचने पर मजबूर किया जा रहा है. जयपुर के परकोटा इलाके में तो इसके कारण जनसांख्यिकी असमानता सामने आई है. शहर में बहुसंख्यक समाज पलायन कर रहा है, छोटी-छोटी बातों पर दंगा हो जाता है. कानून लाने से ही फर्जी रजिस्ट्रियां, पलायन और हिंसा रुकेगी.''
दूसरी ओर, मानवाधिकार कार्यकर्ता और कानूनविद् भी इस विधेयक को संविधान की मूल भावना के खिलाफ मानते हैं. पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) की राष्ट्रीय अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव कहती हैं, ''दंगों और भीड़ की हिंसा से निबटने के लिए पहले से काफी कानून और नियम हैं. असल में, किसी भी इलाके को अशांत क्षेत्र घोषित कर सरकार लोगों को प्रताड़ित करेगी. हमारा संविधान हर व्यक्ति को संपत्ति खरीदने और बेचने का अधिकार देता है. ऐसे में कानून बनाकर इसे रोकना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.''
राजस्थान हाइकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विभूत भूषण की भी ऐसी ही राय है. उनका कहना है, ''सरकार इस कानून का उद्देश्य सामाजिक तनाव को रोकना मानती है, मगर इसके कई प्रावधान संविधान और रूल ऑफ लॉ की मूल भावना के खिलाफ हैं. जनसंख्या असंतुलन या अशांत क्षेत्र जैसे अस्पष्ट शब्दों की आड़ में सरकार और प्रशासन मनमानी करेगा. संविधान हर व्यक्ति को निजी संपत्ति रखने और बेचने का अधिकार देता है. ऐसे में इसके लिए कलेक्टर की अनुमति अनिवार्य नागरिक स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ है.'' उनका मानना है कि इस कानून के लागू होने से रियल एस्टेट बाजार में अनिश्चितता, संपत्ति के मूल्यों में गिरावट और निवेश में कमी आने की आशंका है.
वहीं, जमात-ए-इस्लामी हिंदी के प्रदेशाध्यक्ष नाजिमुद्दीन राज्य में पलायन सरीखे आरोपों को झूठा और अमन-चैन बिगाड़ने की साजिश करार देते हैं. उनका कहना है, ''पिछले कई साल से राजस्थान में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश चल रही है. चारदीवारी के इलाकों में बार-बार पोस्टर लगाकर यह साबित करने का प्रयास किया जाता है कि भय और दबाव के चलते एक समुदाय विशेष के लोग यहां से पलायन कर रहे हैं जबकि हकीकत कुछ और है. यहां सभी धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते आए हैं जो कुछ लोगों को हजम नहीं हो रहा है.''
बहरहाल, यह विधेयक राजस्थान विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां इस पर पक्ष-विपक्ष के बीच व्यापक बहस होने की संभावना है. ऐसे में 'अशांत क्षेत्र' का यह प्रस्ताव आने वाले दिनों में कानूनी और सियासी दोनों मोर्चों पर जंग का नया मैदान बनने जा रहा है. मगर, बड़ा सवाल यही है कि क्या यह कानून दंगा प्रभावित इलाकों में शांति और विश्वास बहाली का जरिया बनेगा? या फिर, निजी संपत्ति के अधिकार और सामाजिक ताने-बाने में दरार की कोई नई कहानी पैदा करेगा?

