
साल 2024 में क्रिसमस के ठीक अगले दिन बालेश्वर जिले के छानाखानपुर गांव की निवासी अनु सिंह ने मिशनरी से जुड़ी सुभासिनी सिंह को अपने घर बुलाया. सुभासिनी उन्हें कथित तौर पर तीन माह से फिजियोथेरेपी दे रही थीं, जिसके बाद अनु चलने लगी थीं.
खुशी में केक काटने से पहले वे लोग ईसा मसीह की प्रार्थना करने वाले थे. बकौल सुभासिनी, ठीक उसी वक्त हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े लोग आए और धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए अनु, पति गोविंद सिंह को बुरी तरीके से मारा. फिर सुभासिनी के साथ हिंसा की, जिसमें सार्वजनिक रूप से नग्न कर, जननांग पर हमला शामिल था.
वहीं, बीती 4 जनवरी को ढेंकानाल जिले के परजंग गांव में पादरी बिपिन बिहारी नायक ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी पत्नी बंदना और कुछ अन्य लोगों के साथ परिवार के सदस्य कृष्णा नायक के घर में प्रार्थना सभा कर रहे थे तो 15 से 20 लोगों की भीड़ ने उन्हें डंडों से पीटा, चेहरे पर लाल सिंदूर पोत दिया. उसके बाद गले में चप्पल की माला पहनाई, मंदिर के सामने झुकने के लिए मजबूर किया, नाले के पानी में गोबर मिला उसे पीने के लिए मजबूर किया.
इन दोनों घटनाओं के दौरान पूरे ओडिशा में इस तरह के 87 से अधिक केस आ चुके हैं, जिनमें ईसाई, मुस्लिम, दलित और आदिवासियों को निशाना बनाया गया है. मयूरभंज जिले के बहलदा निवासी, मुस्लिम युवक शेख सरूफ को पीटकर नग्न अवस्था में घुमाया गया, हाथ बांधकर जय श्री राम का नारा लगवाया गया. एक अन्य घटना में, 28 वर्षीय राज मिस्त्री शेख मकंदर मोहम्मद को बालेश्वर सदर थाना क्षेत्र में गो-तस्करी के आरोप में पीटा गया और मौत से पहले जय श्री राम का नारा लगाने को मजबूर किया गया.
राज्य में ठेलेवालों और फेरीवालों के उत्पीड़न, हमले और अपमान की सैकड़ों घटनाएं आम हो चुकी हैं. बांग्लादेश में सियासी अस्थिरता के बाद तटीय ओडिशा के कुछ हिस्सों में बंगाली प्रवासी मजदूरों और विक्रेताओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले बैनर दिखते हैं. ईसाई संगठनों का आरोप है कि ये घटनाएं संगठित अपराध हैं जो भगवा संगठनों की निगरानी में हुई हैं. एलाइड डिफेंस फोरम और यूनाइडेट क्रिश्चियन फोरम ने मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा है, जिसमें अगली सुनवाई 7 फरवरी को है.

क्यों बढ़ रहे हमले
राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा के महासचिव डॉ. पल्लब कुमार लीमा कहते हैं, ''चाहे कांग्रेस की सरकार रही हो या बीजेडी की, हमारे समुदाय पर हमले होते रहे हैं. ओडिशा में ईसाइयों के मुकाबले मुस्लिमों की आबादी कम है, ऐसे में भाजपा शासन में ध्रुवीकरण के लिए ईसाई समुदाय का इस्तेमाल किया जा रहा है.'' वे कहते हैं, ''हालात ये हैं कि गजपति जिले के मालबेड़ा गांव में 28 अप्रैल, 2025 को एक क्रिश्चियन मजदूर श्रवण गोंडो को मौत के बाद दफना दिया गया. लेकिन संघ से जुड़े सांस्कृतिक जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने उसे कब्र से निकाल कर फिर जलाया.'' राज्य कांग्रेस के मीडिया प्रभाग के उपाध्यक्ष अमीय पांडव कहते हैं, ''जिस राज्य का सीएम ग्राहम स्टेन और उनके बच्चों को जलाकर मारने वाले दारा सिंह को जेल से निकालने के लिए पूर्व में धरने पर बैठा हो, उनसे न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं.''
पूरे आरोप पर आरएसएस के ओडिशा प्रचार प्रमुख सुमंत पांडा कहते हैं, ''यह बात सही है कि तटीय इलाकों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहे हैं. इससे स्थानीय लोग ही क्रोधित हं और प्रतिक्रिया में कभी कोई घटना घट जाती है. लेकिन ये सांगठनिक बिल्कुल नहीं होता है.'' वहीं भाजपा के प्रदेश महासचिव जतिन मोहंती भी संघ और मोहन माझी सरकार पर लग रहे अल्पसंख्यक विरोधी आरोपों का बचाव करते हुए कहते हैं, ''अभी तक एक भी ऐसी घटना में भाजपा या उसके विचार परिवार के किसी व्यक्ति की संलिप्तता की बात सामने नहीं आई है. संवेदनशील इलाकों के जनजातीय समुदायों में पहले से ही नफरत का वातावरण है.''
11 साल में हजारों घटनाएं
यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम के संयोजक एसी माइकल कहते हैं, ''2014 से 2025 तक देशभर में ईसाई समुदाय पर हमलों की कुल 4,956 घटनाएं हुई हैं. 2014 में जहां 127 घटनाएं घटी थीं, वहीं सबसे ज्यादा 2024 में 834 घटनाएं घटीं.'' वे कहते हैं, ''हम पर सबसे बड़ा आरोप जबरन धर्मांतरण का है. बीते 1 सितंबर, 2022 में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीजेआइ डी.वाइ. चंद्रचूड़ के सामने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जबरन धर्मांतरण को हिंसा की वजह बताया था. सीजेआइ ने इस पर रिपोर्ट मांगी थी, जिसे सरकार आज तक जमा नहीं कर पाई है.''
देशभर में ईसाइयों पर हो रहे हमले के संबंध में 19 मार्च, 2025 को संसद में राज्यवार आंकड़े मांगे गए. जवाब में अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि पुलिस और पब्लिक ऑर्डर राज्य का विषय है. ऐसे में केंद्र सरकार के पास ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है. हालांकि, 13 जनवरी को अमेरिकी थिंक टैंक इंडिया हेट लैब ने भारत में हेट स्पीच, यानी किसी धर्म के खिलाफ भड़काऊ बातें कहे जाने की घटनाओं पर रिपोर्ट जारी की. जिसके मुताबिक, साल 2023 से 2025 तक देशभर में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ ऐसे 3,151 मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से अधिकतर घटनाएं उन राज्यों से सामने आई हैं, जहां भाजपा की सरकार है. उत्तर प्रदेश 266 घटनाओं के साथ सबसे ऊपर है. इसके बाद महाराष्ट्र (193), मध्य प्रदेश (172), उत्तराखंड (155) और दिल्ली (76) हैं.
ईसाई समुदाय पर हो रहे हमलों को लेकर साल 2023 में देशभर के सेवामुक्त हो चुके 93 ब्यूरोक्रेट ने 4 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था, ''ईसाई भारत की कुल आबादी का मात्र 2.3 प्रतिशत हैं और 1951 की जनगणना से अब तक यह प्रतिशत लगभग समान ही रहा है. फिर भी कुछ लोगों के मुताबिक यह अत्यंत अल्प संख्या देश की 80 प्रतिशत हिंदू आबादी के लिए खतरा है. ईसाइयों के खिलाफ मुख्य आरोप जबरन धर्मांतरण का है और इसी के चलते उनके व्यक्तियों तथा संस्थानों पर मौखिक, शारीरिक और मानसिक हमले किए जा रहे हैं.''
ओडिशा से सामने आए कुछ मामलों में एफआइआर दर्ज की गई हैं, लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का अभाव है, जिससे दलित समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की सरकार के सामने अपनी छवि सुधारने की चुनौती खड़ी हुई है.

