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बंबई नगरिया का नया नायक

मुंबई नगर निगम की लड़ाई में ठाकरे बंधुओं के फिर साथ आने के बावजूद भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने जीत के झंडे गाड़े

बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय की तस्वीर
अपडेटेड 5 फ़रवरी , 2026

मुंबई ने 15 जनवरी को उस बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की किस्मत तय करने के लिए वोट दिया, जो भारत का सबसे अमीर नगर निकाय है और जिसकी स्थापना 1888 में हुई थी. यह चुनाव मराठी और गैरमराठी मतदाताओं के बीच और धार्मिक आधारों पर तीखे ध्रुवीकरण के बीच लड़ा गया.

एक विरला मोड़ तब आया जब एक-दूसरे से विमुख और अनमने चचेरे भाई— उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—राजनैतिक जरूरत के चलते दो दशक बाद फिर साथ आ गए. उधर, भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीयता पर केंद्रित अभियान चलाया. उसने राष्ट्रीय दिग्गजों के बजाए राज्य और शहर के नेतृत्व पर भरोसा किया.

गौरतलब यह कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार से दूर रहे. यह रणनीति कारगर रही. भाजपा की अगुआई वाले महायुति गठबंधन ने आधी से ज्यादा सीटें जीत लीं और भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.

मुंबई की सत्ता का नक्शा: किसके हाथ क्या लगा

भाजपा
इसने बीएमसी में अपनी सीटों की संख्या दो दशकों में तिगुनी से ज्यादा—2007 में महज 28 से 89—कर ली और सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. ठाकरे परिवार के साथ चल रही लंबी अदावत में यह नतीजा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मुकुट में साफ तौर पर सुर्खाब का पंख है.

शिवसेना
हालांकि इसका प्रदर्शन उम्मीद से कमतर रहा—91 सीटों पर चुनाव लड़कर महज 29 जीतीं—लेकिन भाजपा के अपने दम पर बहुमत नहीं ला पाने के बाद सत्ता की चाबी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के हाथ में है. मेयर पद सहित सत्ता में ज्यादा साझेदारी के लिए वे कड़ी सौदेबाजी कर रहे हैं.

शिवसेना-यूबीटी और एमएनएस
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दशकों से ठाकरे परिवार का गढ़ रहे बीएमसी का नियंत्रण हासिल करने में नाकाम रहे. लेकिन उनके फिर साथ आने से मराठी वोट एकजुट हुआ. जिन 52 चुनावी वार्डों में शिंदे की शिवसेना के साथ उनका सीधा मुकाबला था, गठबंधन ने 36 जीते. भाजपा (66%) के बाद शिवसेना-यूबीटी का स्ट्राइक रेट (41%) रहा

एनसीपी
पार्टी वैसे भी मुंबई में हाशिए की खिलाड़ी थी, जिसने अकेले लड़ने का फैसला किया, और ज्यादा कमजोर होकर निकली, क्योंकि उसके अल्पसंख्यक वोटों का एक हिस्सा छिटक गया. अजित पवार के मुंबई के सिपहसालार नवाब मलिक के परिवार के लिए नतीजे मिलेजुले रहे—भाई कप्तान हार गए, तो बहन डॉ. सईदा जीत गईं

कांग्रेस
लोकसभा सांसद वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में पार्टी चौथे स्थान पर रही. चुनाव पूर्व गठबंधन से इनकार करके वह ठाकरे परिवार की संभावनाओं में पहले ही पलीता लगा चुकी थी. अलबत्ता उसने अपने मूल मतदाताओं का समर्थन बनाए रखा, जिनमें मुसलमानों का एक हिस्सा भी था

एआइएमआइएम
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने मुंबई में अपनी मौजूदगी बढ़ा ली. पूर्वी उपनगरों के मुस्लिम बहुल इलाकों को बुहारकर उसने अपनी सीटों की संख्या दो से बढ़ाकर आठ कर ली. इस तरह वह समाजवादी पार्टी को हटाकर उसकी जगह लेने में कामयाब रही

ग्राफिक: तन्मय चक्रवर्ती

बीएमसी क्यों अहम है

> भाजपा ने महाराष्ट्र में पुणे, नागपुर और नासिक जैसे अन्य नगर निगमों में भी जीत हासिल की है

> लेकिन बीएमसी इसके मुकुट में जड़ा नगीना है क्योंकि यह देश का सबसे अमीर शहरी निकाय है जिसकी ग्रेटर मुंबई की 1.03 करोड़ मतदाताओं पर हुकूमत है और इसका बजट 74,500 करोड़ रु. है

> इसका महत्व ऐसे समझें कि पुणे नगर निगम का बजट 12,618 करोड़ रु. है जबकि पूरे गोवा राज्य का वार्षिक बजट 28,162 करोड़ रु. है

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