scorecardresearch

कैसे SIR को हथियार बनाकर चुनावी बढ़त हासिल करना चाहते हैं स्टालिन?

DMK ने चुनाव आयोग के वोटर सत्यापन अभियान को जोर-शोर से अपनी बड़ी चुनावी लामबंदी में बदला है

10 दिसंबर को DMK की बूथ कमेटी मीटिंग के दौरान एम. के. स्टालिन
अपडेटेड 2 जनवरी , 2026

शायद ही कोई नजूमी पक्के तौर पर यह बता पाए कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के बाद तमिलनाडु की वोटर लिस्ट भला कैसी होगी. एक अंदाजा तो यकीनन लगाया ही जा सकता है कि सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कलगम (द्रमुक) अपनी तोपों का रुख बदल देगी, और विवादित वोटर लिस्ट अपडेट को ही 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए सबसे धारदार हथियार बना लेगी.

इसका संकेत दिसंबर की एक बदली छाई दोपहर को मिला, जब एम.के. स्टालिन अलवारपेट में एक बूथ कमेटी की बैठक में पहुंचे. मायलापुर का यह डिवीजन 24 ऐसी जगह तो कतई नहीं, जहां सीएम सुबह बिताना पसंद करें. लेकिन यहां बात अलग थी. यह कमान ब्रीफिंग का मामला था, दूर-दराज के वॉर रूम में बैठकर नहीं, बल्कि ऐन मोर्चे पर.

बूथ किलेबंदी
वहां स्टालिन द्रमुक के राज्यव्यापी 'मेरा बूथ, विजय बूथ' अभियान के दूसरे चरण की आधिकारिक तौर पर शुरुआत कर रहे थे. यह ऐसी लामबंदी की कोशिश है, जिसे हर मतदान केंद्र को किलेबंद मोर्चे में बदलने के खातिर डिजाइन किया गया है. मकसद उस रणनीति का इजहार है, जो एसआइआर के जरिए एक मायने में द्रमुक को थमा दी गई है. यानी वोटों की लड़ाई रैलियों या रोड शो में नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सबसे छोटी, सबसे निचली इकाई बूथ पर लड़ी जाएगी.

एसआइआर के पहले चरण में ही द्रविड़ पार्टी ने उसका जोरदार और खुलकर विरोध किया था. स्टालिन अगस्त में बिहार भी गए थे ताकि इंडिया ब्लॉक सहयोगियों के साथ उस अभियान के पहले संस्करण के खिलाफ रैली में शामिल हों जो बाद में देशव्यापी मतदाता सुधार बन गया. इसे उन्होंने चुनौती की तरह लिया क्योंकि लड़ाई सिर पर आ गई है. तमिलनाडु में एसआइआर महीनों से गहरे विवाद का विषय रहा है. द्रमुक ने चुनावों के इतने करीब उसकी टाइमिंग, उसकी जरूरत और उसके संभावित नतीजों पर सवाल उठाए.

द्रमुक नेताओं ने कहा कि जल्दबाजी में किए गए पुनरीक्षण से असली वोटरों के वोट देने का अधिकार छिन सकता है, क्योंकि इससे उन पर एक अनुचित प्रक्रिया में जुड़ने का बोझ पड़ेगा. वे चुनाव आयोग पर पूर्वग्रह का आरोप लगाते हुए कहते हैं कि यह दुश्मन के किलों पर हमले जैसा है, जिसमें बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) जाने-अनजाने में, सभी दीवारों पर कमजोरियों की तलाश करने वाली हमलावर पार्टियों में बदल गए हैं.

फिर, स्टालिन ने सियासी विरोध के बावजूद एसआइआर को आगे बढ़ता देख, नुक्सान को ताकत में बदलने के लिए रणनीति में बदलाव किया. द्रमुक ने बीएलओ और वोटरों की मदद के लिए 6.8 लाख बूथ कमेटी सदस्य तैनात किए, जिससे यह महा जन-संपर्क अभियान बन गया है. शुरुआत तो धीमी थी, मगर जल्दी ही यह अभियान पूरे राज्य में गति पकड़ चुका है. द्रमुक अब इसका इस्तेमाल अपने संगठन के लिए बड़े पैमाने पर ट्रेनिंग कैंप के रूप में कर रही है.

मतदाता सूची पुनरीक्षण के तहत थूथुकुडी में 4 नवंबर को घर-घर मतदाता सत्यापन का एक नजारा

जमीनी लामबंदी
द्रमुक की टोलियां 10 दिसंबर से राज्य के सभी 68,463 बूथों का दौरा कर रही हैं और यह एक महीने तक चलेगा, ताकि बूथों के लिहाज से रणनीति बनाई जा सके. पार्टी की ब्रीफिंग से पता चलता है कि यह बड़े पैमाने पर होगा. उसमें 1,900 से ज्यादा क्षेत्रीय, यूनियन, शहर और कस्बा पंचायत सचिवों को शामिल किया गया है; उनके साथ 78 जिला सचिव, 33 सांसद, 124 विधायक और राज्य और जिला पदाधिकारी भी शामिल होंगे.

लक्ष्य है व्यवस्थित मतदाता सत्यापन और 6.8 लाख जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाना. हर जगह कार्यकर्ताओं को एक ही निर्देश दिया जा रहा है: हर बूथ को 2021 के अपने आंकड़ों से बेहतर प्रदर्शन करना होगा. स्टालिन ने अलवारपेट में एक लाइव डेमो दिया. उन्होंने उस बूथ के लिए 440 वोटों का सटीक लक्ष्य तय किया और उसे अलग-अलग छोटी-छोटी जिम्मेदारियों में बांट दिया.

इन बयानों से जल्द ही जमीनी अभियान को हवाई मदद मिलने लगी. वहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 15 दिसंबर को दौरा तय था, जो फिर टाल दिया गया. लेकिन उससे कयास लगने लगे कि क्या राजनैतिक उठापटक शुरू हो सकती है.

यह स्टालिन के लिए हमला करने का मौका बन गया: उन्होंने एक्स पर लिखा कि द्रमुक के 'काले और लाल शर्ट वाले' 'दिल्ली के शाहों का मुकाबला करेंगे', और कहा कि तमिलनाडु ने हमेशा उत्तर के दबदबे का विरोध किया है. प्रदेश भाजपा प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने एक्स पर जवाब दिया: '''रूसी स्टालिन' जैसी सोच वाले किसी भी स्टालिन को सबक सिखाया जाएगा.'' मगर राज्य भाजपा असल में यही उम्मीद कर रही है कि शाह आएंगे और अन्नाद्रमुक के साथ कमजोर गठबंधन की गांठें मजबूत करेंगे.

खास बातें

> द्रमुक ने निगरानी के लिए बीएलओ और वोटरों की मदद के लिए 6.8 लाख बूथ कमेटी सदस्य तैनात किए; सांसद और विधायक भी पार्टी पदाधिकारियों का साथ देंगे

> 'मेरा बूथ, विजय बूथ' से स्टालिन ने स्पष्ट रूप से तमिलनाडु के सभी 68,463 बूथों का माइक्रो-टार्गेट तय कर दिया है. इसका मकसद 2021 से बेहतर प्रदर्शन करना है

Advertisement
Advertisement