अरविंद केजरीवाल के राजनैतिक करियर के लिए साल 2024 कई मायनों में ऐतिहासिक रहा. यह वह साल है जब आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और तब दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे केजरीवाल खुद आपराधिक जांच के केंद्र में फंस गए. जेल जाने वाले पहले मुख्यमंत्री के रूप में गलत वजहों से इतिहास बना डाला.
सितंबर तक उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पद को तिलांजलि दे दी. और नवंबर आते-आते जमानत पर बाहर आकर ब्रान्ड आप को नई ऊर्जा देने की कोशिश में वे एक बार फिर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा की सड़कों पर उतर पड़े.
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब उन्हें तथाकथित 'शराब घोटाले' से जुड़े आरोपों में गिरफ्तार किया और वह भी लोकसभा चुनाव से ऐन पहले, तो केजरीवाल ने उसे राजनैतिक अवसर में तब्दील कर लिया. उनकी पत्नी सुनीता केजरीवाल दोनों हाथ जोड़कर विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में घूमीं और अपने पति के लिए 'इंसाफ' की गुहार लगाई. सुनीता हरेक जनसभा में लोगों से कहती नजर आईं, ''उन्होंने (भाजपा की अगुआई वाली केंद्र सरकार ने) उन्हें महज इसलिए जेल में डाल दिया क्योंकि उन्होंने दिल्ली के लिए स्कूल और अस्पताल बनाए.''
कहना मुश्किल है कि 'शराब घोटाले' का चुनाव पर अब क्या असर पड़ेगा. वास्तव में छह महीने पहले के मुकाबले आप अभी कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में है. केजरीवाल के नंबर 2 मनीष सिसोदिया समेत उनके सभी नेताओं को जमानत मिल गई है, और जैसा कि आप प्रमुख कभी दोहराते नहीं थकते कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की दो साल की जांच के बाद भी ''(अवैध ढंग से हासिल धन का) एक पैसा तक नहीं मिला है.''
केजरीवाल को 50 दिन की कैद के बाद आखिरकार लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मिल गई थी. इसका उन्होंने भरपूर इस्तेमाल किया. अगले ही दिन उन्होंने भाजपा खेमे में उथल-पुथल मचा दी. एक संवाददाता सम्मेलन में केजरीवाल ने कहा, ''अगले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 के हो जाएंगे. उनका अपना नियम है कि 75 का होने के बाद कोई आधिकारिक पद पर नहीं रह सकता. इसलिए मोदी रिटायर हो जाएंगे और अमित शाह पीएम बनेंगे.''
यह साफ नहीं है कि मतदाताओं ने केजरीवाल के इस बयान को गंभीरता से लिया या नहीं और आप-कांग्रेस का गठजोड़ दिल्ली की सभी सातों सीटें हार गया, मगर इससे कम से कम अगले कुछ दिनों के लिए भगवा खेमे में हड़कंप तो मच ही गया. अमित शाह, पार्टी प्रमुख जे.पी. नड्डा और पार्टी के अन्य बड़े नेताओं को सफाई देने के लिए मीडिया में आना पड़ा कि मोदी के रिटायर होने का सवाल ही नहीं उठता. हालांकि केजरीवाल ने भाजपा के एक अनकहे, असहज और अनसुलझे मसले को जनता के सामने ला दिया.
केजरीवाल के लिए अपना घर दुरुस्त रखना भी मुश्किल रहा है. मई में लंबे वक्त की साथी और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल आप प्रमुख के निजी सहायक विभव कुमार के हाथों मुख्यमंत्री आवास के भीतर हमला किए जाने का आरोप लगाते हुए पार्टी से धड़धड़ाते हुए कूच कर गईं. पार्टी के नेता भी भाजपा का रुख करते रहे हैं, जिनमें ताजातरीन दिल्ली के पूर्व मंत्री कैलाश गहलोत हैं. यह भरोसेमंद सिपहसालार आतिशी को कामचलाऊ मुख्यमंत्री बनाने का संभावित नतीजा भी हो सकता है.
फिलहाल आप के लिए सबसे जरूरी यह है कि साल 2025 के चुनाव में वह दिल्ली की सत्ता बरकरार रखे. केजरीवाल ने आप की पारंपरिक बढ़त वाले दिल्ली के अर्ध-अधिकृत मुहल्लों और झुग्गी बस्तियों में संपर्क अभियान शुरू करके दूसरों से पहले ही लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है. इन दिनों वे सत्ता में लौटने पर लोगों पर न्योछावर की जाने वाली मुफ्त रेवड़ियों का खुलासा करने में मशगूल हैं. महिलाओं को 1,000 रुपए महीने की खैरात का ऐलान हो ही चुका है, साथ ही पार्टी के चुनाव जीतने पर इसे तकरीबन दोगुना करने का वादा भी किया गया है. फिर, वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त इलाज, ऑटो ड्राइवरों के लिए 10 लाख रुपए का जीवन बीमा और 5 लाख रुपए के दुर्घटना बीमा की योजना भी है और यह सूची बढ़ती जा रही है.
वहीं, जवाब में राज्य भाजपा मुख्यमंत्री के आवास को सजाने-संवारने पर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए खर्च करने, शराब 'घोटाले' सरीखे पुराने मुद्दे उठाती रही है. मगर वे फिर केजरीवाल को शायद वही सब दे रहे हैं जो वे चाहते हैं: चर्चाओं को अपने इर्द-गिर्द केंद्रित रखना. अब अच्छा हो या बुरा, मगर 2024 में केजरीवाल को ठीक यही तो मिला.
केजरीवाल की गुगली
› केजरीवाल विवादित शराब नीति के मामले में गिरफ्तार होकर जेल जाने वाले भारत के पहले मुख्यमंत्री बने
› सितंबर में जमानत मिलने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ दी और कहा कि जनसमर्थन से दोबारा चुने जाने के लिए चुनाव लड़ेंगे
› पार्टी के आंतरिक बदलावों को कुशलता से संभाला, ज्यादा वरिष्ठ नेताओं के बीच आतिशी को आगे लाए
› दिल्ली की स्वायाता केजरीवाल का मुख्य मुद्दा रही है, केंद्रशासित प्रदेश की प्रशासनिक सेवाओं को अपने हाथ में लेने की केंद्र की कोशिश का प्रतिरोध करते रहे हैं
› अपनी गिरफ्तारी और नेतृत्व के रिकॉर्ड का इस्तेमाल मजबूत नैरेटिव गढ़ने और जन सहानुभूति हासिल करने के लिए किया
यह भले उनके जीवन का सबसे कठिन साल और भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाना उनके सियासी फलसफे के विपरीत रहा हो, पर चतुर केजरीवाल इसका भी चुनावी लाभ उठाने की जुगत में.
अभिषेक जी. जस्तीदार

