
आनंद दत्त
समूचे झारखंड में आप कहीं भी सफर कर रहे हों, झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना का पोस्टर आपको हर जगह दिख जाएगा. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का दावा है कि उनकी इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत राज्यभर की 15 से 50 वर्ष की 51 लाख से ज्यादा महिलाओं के खाते में हर महीने 1,000 रुपए दिए जा रहे हैं. इसकी दो किस्त दी जा चुकी हैं और तीसरी किस्त दशहरा के मौके पर 8 अक्टूबर से भेजी जा रही है. बीते 18 अगस्त को रक्षाबंधन के मौके पर जब इसकी पहली किस्त जारी हुई, भाजपा में अंदरखाने इसको लेकर खासी बेचैनी रही.
पार्टी नेताओं ने इसकी खामियां गिनाना शुरू किया, तो वह बैकफायर करने लगा. तिस पर भी बात नहीं बनी, तो सिमडेगा जिले के विष्णु साहू ने इस योजना के खिलाफ हाइकोर्ट में पीआइएल दायर कर दी. प्रार्थी के वकील राजीव कुमार इंडिया टुडे से कहते हैं,"'राज्य में 40 फीसद हॉस्पिटल और 60 फीसद स्कूलों में भवन नहीं हैं, पर्याप्त डॉक्टर नहीं हैं, कई स्कूल मात्र एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. ऐसे में इस तरह की योजनाएं राज्य पर आर्थिक बोझ बन जाती हैं. चाहे मंईयां दीदी योजना हो या गोगो दीदी योजना. दोनों बंद होनी चाहिए."
राजीव बताते हैं कि वे गोगो दीदी योजना के खिलाफ भी हाइ कोर्ट जाएंगे. दरअसल, भाजपा ने राज्य में सत्ता में आने पर गोगो दीदी योजना लागू करने का ऐलान किया है, जिसके तहत वह महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपए देने का वादा कर रही है.
उधर, मंईयां योजना की प्रक्रिया में तकनीकी खामियों की वजह से बड़ी संख्या में महिलाओं के खाते में पैसे नहीं जा पाए हैं. डेटा ऑपरेटर ने किसी का आधार नंबर गलत दर्ज किया है, तो किसी का बैंक खाता नंबर. मसलन, पश्चिमी सिंहभूम जिले के मेगाहातूबुरू इलाके के फ्रांसिस मुंडा और उनकी पत्नी तुलसी मुंडा ने जनधन योजना के तहत खाता खुलवाया था. मगर नियम के मुताबिक, खाते में 2,000 रुपए नहीं रहने की वजह से वह बंद पड़ा है, जिससे तुलसी के खाते में मंईयां योजना के पैसे नहीं जा पा रहे हैं.
ऐसे में लाभार्थी महिलाओं के अलावा गैर-लाभार्थी महिलाओं की संख्या भी अच्छी-खासी हो गई है जो काफी नाराज हैं. भाजपा मंईयां योजना की काट ढूंढ ही रही थी और उसे यह मौका मुनासिब लगा. मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना लाकर चुनाव जीतने वाले केंद्रीय कृषि मंत्री और झारखंड के चुनाव प्रभारी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यहां भी वैसी योजना लानी होगी. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने नाम सुझाया गोगो दीदी. दरअसल, संताली में मां को गोगो कहा जाता है.
शेर को सवा शेर
भाजपा गोगो योजना के लिए महिलाओं से फॉर्म भरवाने की शुरुआत कर चुकी है. पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव बताते हैं, "हमने राज्यभर में कार्यकर्ताओं को 25 लाख फॉर्म भरवाने के लिए भेजा था. वह खत्म हो चुका है. लोग प्रिंट आउट निकाल कर फॉर्म भर रहे हैं. हमें इसका जबरदस्त रेस्पॉन्स मिल रहा है." हालांकि, भाजपा केवल फॉर्म में नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करवा रही है, आधार और बैंक खाता नंबर नहीं ले रही. इससे लोग सशंकित भी हैं कि पैसे आखिर कहां भेजे जाएंगे.
यही नहीं, मुस्लिम महिलाओं से यह फॉर्म नहीं भरवाया जा रहा. लातेहार जिले के महुआडांर प्रखंड के डीपाटोली की यास्मीन बीबी के पति चना बेचते हैं. वे बताती हैं, "गांव से हम चार महिलाएं गई थीं गोगो दीदी फॉर्म भरने. लेकिन जो फॉर्म भरवा रहे थे, उन्होंने कहा कि मियां लोगों के लिए यह नहीं है." चतरा जिले के भारतीय जनता युवा मोर्चा के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ये फॉर्म उन महिला मतदाताओं के लिए है जो परंपरागत तौर पर भाजपा की वोटर रही हैं मगर मंईयां योजना की वजह से झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) को वोट देने की सोचने लगी थीं.

अब ढाई चाल चलने की बारी हेमंत सोरेन की थी. केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से बीती 2 मई को जारी एक प्रेस बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा किसी तरह का फॉर्म नहीं भरवाया जा सकता. आयोग ने उस पत्र में सियासी दलों और उम्मीदवारों की ओर से प्रस्तावित लाभार्थी योजना के लिए विभिन्न सर्वेक्षणों की आड़ में मतदाताओं का विवरण मांगने को लोक अधिनियम 1951 की धारा 123 (1) के तहत रिश्वतखोरी और भ्रष्ट आचरण माना है. हेमंत यहीं नहीं रुके, उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि आयोग के नियमों का पालन हो और ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए.
प्रशासन ने तेजी दिखाई और गिरिडीह जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग ने एक पत्र जारी किया. उसमें कहा गया कि सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत जिले मंक गोगो दीदी योजना नाम की कोई योजना नहीं चलाई जा रही है, न ही प्रशासन ने कोई आवेदन प्रपत्र जारी किया है. साथ ही, लोगों से भ्रामक विज्ञापन से सावधान रहने का अनुरोध किया गया है.
भाजपा इसी ताक में थी. मरांडी ने कहा कि वे खुद फॉर्म भरवाने जाएंगे, हेमंत चाहें तो मुकदमा करें या जेल भेजें. नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने कहा कि कुछ अधिकारी जेएमएम कार्यकर्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं. उन्होंने सवाल किया कि जब राहुल गांधी का टकाटक फॉर्म असंवैधानिक नहीं था तो गोगो दीदी फॉर्म असंवैधानिक कैसे हो गया?
रेवड़ियां अभी बाकी हैं
बीती 5 अक्टूबर को रांची में भाजपा ने इस साल के अंत तक होने वाले झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए पंच प्रण जारी किया. इसके तहत गोगो दीदी योजना के अलावा राज्यभर के ग्रेजुएट और पोस्ट-ग्रेजुएट छात्रों को दो साल तक हर माह 2,000 रुपए बेरोजगारी भत्ता, पीएम आवास के लिए मुफ्त बालू, सभी घरों में 500 रुपए में गैस सिलेंडर और साल में दो मुफ्त सिलेंडर के साथ पांच साल में 2.87 लाख सरकारी पद भरने का वादा किया गया है. पार्टी ने झारखंड के 25 साल पूरे होने पर 25 संकल्प और फिर बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर 150 घोषणाएं करने का वादा भी किया है.
जेएमएम ने पंच प्रण को कॉपी पेस्ट करार दिया है. पार्टी के विधायक सुदिव्य कुमार सोनू कहते हैं, "हमारी सरकार 14 से 18 साल तक की बच्चियों के लिए सावित्री बाई फुले योजना, 18 से 50 साल तक की महिलाओं के लिए मंईयां सम्मान योजना और 50 पार के लिए सर्वजन पेंशन योजना चला रही है. कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को हम पूरी तरह सच कर रहे हैं." इस बीच बीते एक महीने में हेमंत सरकार ने ताबड़तोड़ घोषणाएं करते हुए 1.77 लाख किसानों का 400 करोड़ रुपए का कृषि लोन और 38 लाख उपभोक्ताओं का 3,565.5 करोड़ रु. का बिजली बिल माफ कर दिया है. इस बीच, कांग्रेस इस भरोसे है कि भैया-भाभी (हेमंत-कल्पना सोरेन) ही उनकी नैया पार लगाएंगे.
इंडिया एलायंस और माकपा के विधायक विनोद सिंह कहते हैं, "कमजोरों के पक्ष में खड़ा होना वेलफेयर स्टेट की ड्यूटी है. कभी साइकिल बांटने की योजना को क्रांतिकारी कहा गया. आज जब वह बच्ची स्कूल से कॉलेज जाने को तैयार है, तो मंईयां योजना का पैसा उन्हें कॉलेज जाने में मदद करेगा." हालांकि, एनडीए के साथी आजसू के प्रमुख सुदेश महतो का कहना है कि महज कुछ रुपयों से महिलाओं का सम्मान नहीं होगा, बल्कि उन्हें स्थायी और नियमित आमदनी वाली व्यवस्था से जोड़ना होगा. इतना तो स्पष्ट है कि महिला मतदाता एक बार फिर चुनावी बिसात पर हैं.
राज्य के मतदाता
2.58 करोड़ कुल मतदाताओं की संख्या
1.31 करोड़ पुरुष मतदाता
1.27 करोड़ महिला मतदाता
434 थर्ड जेंडर मतदाता
10.74 लाख मतदाता 18-19 आयुवर्ग के
स्रोत: झारखंड चुनाव आयोग

