scorecardresearch

पंजाब : बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ कैसे अपनी ही पार्टी के लिए बन गए हैं गले की फांस

बीजेपी नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि साल 2022 में पार्टी छोड़ने से पहले जाखड़ ने कांग्रेस आलाकमान को भी इसी तरह की मुश्किल में डाल दिया था

पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़
अपडेटेड 21 अक्टूबर , 2024

पतझड़ की शुरुआत पंजाब में हो चुकी है और बीजेपी चिरपरिचित परेशानी का सामना कर रही है. वह आंतरिक कलह में उलझी हुई है जबकि एक अन्य अहम चुनाव होने जा रहा है. 15 अक्टूबर को पंचायत चुनाव होने हैं, उसके बाद चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होंगे, इसलिए पार्टी का ध्यान अपने ग्रामीण आधार को मजबूत करने पर होना चाहिए. मगर नेतृत्व संकट के कारण उसके प्रयास बेपटरी हुए जा रहे हैं.

हाल में राज्य के तीन दिवसीय दौरे पर आए पंजाब में बीजेपी मामलों के प्रभारी विजय रूपाणी ने अहम बैठकों से स्थानीय इकाई के प्रमुख सुनील जाखड़ के साफ तौर पर गैरहाजिर रहने का बचाव करने की पुरजोर कोशिश की. गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री ने उस वक्त खुद को असुविधाजनक स्थिति में पाया जब उन्होंने सवालिया नजर से उनकी ओर ताक रहे पत्रकारों को बताया कि जाखड़ 'व्यक्तिगत कार्य' से दिल्ली गए हुए हैं.

लेकिन इतनी आसान मालूम पड़ने वाली इस बात के पीछे असंतोष और रणनीतिक रूप से गलत कदमों का जाल बिछा हुआ है.

कांग्रेस से 2022 में बीजेपी में आए जाखड़ को एक साल के भीतर ही बीजेपी की पंजाब इकाई का मुखिया बना दिया गया. पार्टी में नए आने वालों को लेकर अपने सतर्क रवैए के लिए जानी जाने वाली बीजेपी के लिए यह दुर्लभ कदम था. केंद्रीय नेतृत्व को बड़ी उम्मीद थी कि दिग्गज किसान नेता बलराम जाखड़ का यह बेटा ग्रामीण वोट बैंक, खासकर जट सिखों के बीच के वोट बैंक को साधने में अहम भूमिका निभाएगा. मगर यह दांव एकदम से उलटा पड़ चुका है. पार्टी के अंदरूनी सूत्र अब दुख के साथ स्वीकार करते हैं कि नई समझ की बजाए जाखड़ अपने साथ 'पक्षपात की कांग्रेसी संस्कृति' लेकर आए हैं.

पहला झटका पिछले साल अक्टूबर में उस वक्त लगा जब जाखड़ की नियुक्ति के कुछ ही महीनों बाद गुरप्रीत कांगड़, बलबीर सिद्धू और राज कुमार वेर्का सहित कांग्रेस से आए कई नेताओं ने बीजेपी छोड़ दी. अभी हाल में लोकसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन चिंता का विषय रहा है. पार्टी ने अपने पुराने सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के अलग होने के बाद पहली बार सभी 13 सीटों पर चुनाव लड़ा. एक ओर जहां बीजेपी 18.56 फीसद वोट हासिल करने में सफल रही, वहीं इनमें से अधिकांश वोट शहरी हिंदू मतदाताओं से आए. बीजेपी के यही पारंपरिक मतदाता हैं. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में वोटों में भारी गिरावट के कारण उन्हें छह सीटों पर हार का सामना करना पड़ा. ये वही क्षेत्र थे जहां पर जाखड़ से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की गई थी.

पंजाब में बीजेपी नेताओं ने जाखड़ पर केवल अपनी चलाने की नीति अपनाने की शिकायत की है. बीजेपी नेताओं को लगता है कि काडर और विचारधारा आधारित पार्टी के लिए यह 'खतरनाक' है. यहां तक कि राज्य में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेताओं का भी मानना है कि वे अक्सर संघ विरोधी रवैया अपनाते हैं और महत्वपूर्ण मुद्दों पर उनसे कभी परामर्श नहीं करते. आरएसएस और बीजेपी के पुराने नेता पंजाब में 'ऊर्जावान और प्रतिबद्ध' नेता की तलाश में जुट गए हैं और संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

दूसरी ओर, स्वयं जाखड़ को लग रहा है कि उन्हें किनारे लगाया जा रहा है. उनका कहना है कि पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया है. किसान यूनियनों से निबटने से लेकर लोकसभा उम्मीदवारों के चयन और प्रतिद्वंद्वी दलों से दलबदल कराने तक के मामलों से उन्हें दूर रखा गया है. जाखड़ के जख्म पर नमक छिड़कते हुए रवनीत सिंह बिट्टू को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया, जबकि वे लुधियाना से लोकसभा का चुनाव हार चुके हैं. बिट्टू को राजस्थान से राज्यसभा की सीट भी दे दी गई, जिससे जाखड़ को लगा कि उनकी अनदेखी की जा रही है और उनकी बेकद्री की जा रही है. यह बात उनके एक करीबी सहयोगी ने स्वीकार की.

पिछले एक महीने में जाखड़ ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से दिल्ली में मुलाकात की. उन्होंने बीजेपी के शीर्ष नेताओं के साथ अपने मन की बात साझा की. चंडीगढ़ से प्राप्त रिपोर्टों से संकेत मिल रहे हैं कि जाखड़ इस्तीफा देने की पेशकश कर रहे हैं. लेकिन राज्य और केंद्रीय स्तर पर बीजेपी नेताओं ने इन दावों का खंडन किया है, जबकि जाखड़ उनके लिए समस्या बनते जा रहे हैं. बीजेपी नेताओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि साल 2022 में पार्टी छोड़ने से पहले जाखड़ ने कांग्रेस आलाकमान को भी इसी तरह की मुश्किल में डाल दिया था.

भीतरी संघर्ष

> पंजाब बीजेपी प्रमुख सुनील जाखड़ पंचायत चुनावों से पहले अहम बैठकों से नदारद हैं. इससे उनके इस्तीफे और सांगठनिक फेरबदल के कयास लगाए जा रहे हैं

> पूर्व कांग्रेसी जाखड़ की नियुक्ति का दांव उलटा पड़ा क्योंकि वे लोकसभा चुनावों में ग्रामीण वोट नहीं दिला पाए, और दूसरी तरफ बीजेपी के पुराने दिग्गजों में भी नाराजगी पैदा हो गई

Advertisement
Advertisement