
बांसवाड़ा जिले की बागीदौरा तहसील के लक्ष्मी नगर के रहने वाले विकेश और अंजलि की दो माह पहले शादी हुई है. सगाई के वक्त जब दोनों के परिजन कुंडली मिलाने की तैयारी कर रहे थे तभी विकेश और अंजलि बागीदौरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक दूसरे की मेडिकल रिपोर्ट मिलान कर रहे थे.
दरअसल, विकेश और अंजलि ने सिकल सेल एनीमिया की जांच कराई थी और रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही दोनों ने शादी की सहमति दी. विकेश कहते हैं, "हमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम ने सिकल सेल बीमारी के बारे में जानकारी दी थी. अगर हम दोनों में से किसी की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आती तो हम शादी नहीं करते."
विकेश और अंजलि इसलिए सतर्क थे क्योंकि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई जांच में उनके गांव में 20 से ज्यादा लोग सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित पाए गए, लेकिन तीन साल पहले इसी गांव में ब्याहकर आई 22 साल की शीला इस बीमारी से अनभिज्ञ थीं जिसके कारण अब उनके दो साल के बेटे जय को जिंदगीभर इस लाइलाज बीमारी से जूझना पड़ेगा. शीला और उनके पति ललित को सिकल सेल एनीमिया था, लेकिन जांच की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें इस बीमारी का पहले पता नहीं चल पाया. सिकल सेल एनीमिया के लक्षण अब उनके दो साल के बेटे जय में पहुंच गए हैं. इस नन्ही उम्र में वह भी सिकल सेल पॉजिटिव हो गया है.
शीला की तरह ही चोखला गांव के डेढ़ साल के जीनल को यह बीमारी माता-पिता से विरासत में मिली है. जीनल की माता संतोष कचरा और उसके पति सिकल सेल एनीमिया पॉजिटिव थे, जिसके कारण अब जीनल में भी यह लाइलाज बीमारी पाई गई है.
चोखला के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी जयप्रकाश कटारा कहते हैं, "भविष्य में किसी को जय और जीनल जैसी जिंदगी विरासत में न मिले, इसके लिए हम गांव में जितने भी शादी योग्य युवक-युवतियां हैं उन्हें सिकल सेल एनीमिया की जांच कराने और पॉजिटिव युवक-युवती को शादी नहीं करने की सलाह दे रहे हैं."
चिकित्सा विभाग के इस अभियान और सलाह का असर नजर आने लगा है. बांसवाड़ा के सज्जनगढ़, कुशलगढ़, बागीदौरा और आनंदपुरी उपखंडों में स्क्रीनिंग में सिकल सेल एनीमिया की पुष्टि होने के बाद कई युवक-युवतियों ने आपस में शादी नहीं की. बागीदौरा के खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण लबाना कहते हैं, "हमारे पास आए दिन शादी से पूर्व सिकल सेल एनीमिया जांच के लिए युवक-युवतियां आ रहे हैं और वे एक-दूसरे की जांच रिपोर्ट देखकर ही शादी कर रहे हैं."
बागीदौरा ही नहीं, सूबे के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़ और सिरोही जिलों में भी स्वास्थ्य महकमा इन्हीं प्रयासों में जुटा है कि सिकल सेल एनीमिया पॉजिटिव युवक-युवती आपस में शादी न करें. राजस्थान के इन पांच जिलों में सिकल सेल एनीमिया की अब तक करीब 21 लाख जांच हुई है, जिनमें 10,000 से ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं. 8,000 से ज्यादा मामले तो डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों में ही सामने आए हैं. राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के लक्ष्य के तहत मार्च 2025 तक इन जिलों के सभी आदिवासी परिवारों की स्क्रीनिंग की जाएगी.
वैसे इस मिशन में राजस्थान के आठ जिले शामिल हैं: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और पाली. संपूर्ण स्क्रीनिंग होने पर इन जिलों में सिकल सेल एनीमिया के मामलों में और बढ़ोतरी की संभावना है. डूंगरपुर जिले में अब तक 6,94,202 लोगों की जांच हुई है, जिनमें 4,900 सिकल सेल एनीमिया पॉजिटिव मामले सामने आए हैं. बांसवाड़ा में 9,84,000 जांच हुई, जिनमें 3,156 पॉजिटिव पाए गए. सबसे ज्यादा मामले बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ और कुशलगढ़ उपखंड में सामने आए हैं.
सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित अधिकांश लोग आदिवासी हैं. जानकारी का अभाव और सिकल सेल पॉजिटिव लोगों की आपस में शादियां होने के कारण यह बीमारी फैलती गई. यही कारण है कि पिछले कुछ अरसे में राजस्थान के आदिवासी इलाकों में बहुत तेजी के साथ यह बीमारी फैली है. कुछ साल पहले तक राजस्थान में सिकल सेल एनीमिया की जांच और इसकी पहचान के लिए किसी तरह के उपकरण और संसाधन नहीं थे. सबसे पहले गुजरात ने राजस्थान को इस बीमारी के प्रति आगाह किया. राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर और सिरोही जिलों से इलाज के लिए बड़ी तादाद में लोग गुजरात जाते हैं. यहां से प्रसव के लिए गुजरात के दाहोद, हिम्मतनगर, मेहसाणा जिलों में जाने वाली कई प्रसूताओं और नवजात शिशुओं में जब 100 मिलीलीटर खून में हीमोग्लोबीन की मात्रा 4-5 ग्राम के बीच पाई गई तो गुजरात के स्वास्थ्य महकमे ने इनमें सिकल सेल की पुष्टि की.
सिकल सेल एनीमिया की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन बनाया गया है. देश में अब तक 4.27 करोड़ लोगों, खासकर आदिवासियों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है जिनमें से 11 लाख लोगों में इस बीमारी के लक्षण पाए गए हैं और 1,66,164 लोग सिकल सेल एनीमिया पीड़ित मिले हैं.
सिकल सेल एनीमिया खून की आनुवंशिक बीमारी है. यह शरीर के सभी भागों में ऑक्सीजन ले जाने वाली लाल रक्त कोशिकाओं के आकार को प्रभावित करती है. ये कोशिकाएं आमतौर पर गोल और लचीली होती हैं. लेकिन सिकल सेल एनीमिया में कुछ लाल रक्त कोशिकाएं दरांती या अर्धचंद्राकार आकार की होती हैं. ये सिकल कोशिकाएं कठोर और चिपचिपी भी हो जाती हैं, जो रक्त प्रवाह को धीमा कर सकती हैं. सामान्य लाल रक्त कोशिका 120 दिनों तक रहती है, लेकिन सिकल सेल 10-20 दिनों में टूट जाती है, जिससे एनीमिया या रक्त की कमी हो जाती है.
सिकल सेल एनीमिया के लक्षण आमतौर पर छह महीने की उम्र के आसपास दिखाई देते हैं. इसके लक्षणों में एनीमिया के अलावा, तेज दर्द, हाथ-पैर में सूजन, बार-बार संक्रमण, विकास रुकना और नजर कमजोर होना आदि है. इन सबकी वजह से तरह-तरह की बीमारियां लग जाती हैं, और पीड़ित व्यक्ति की अपेक्षाकृत कम उम्र में मृत्यु हो जाती है. सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित लोगों को दर्द से राहत देने के लिए हाइड्रॉक्सी कार्बो यूरिया टेबलेट दी जाती है, लेकिन राजस्थान में अभी तक इस दवा का वितरण शुरू नहीं हो पाया है. चिकित्सा विभाग के सूत्रों का कहना है कि स्क्रीनिंग का काम पूरा होने के बाद सिकल सेल एनीमिया पीड़ित लोगों को यह दवा उपलब्ध कराई जाएगी.
सिकल सेल के रोगी दो प्रकार के होते हैं. एक सिकल सेल वाहक (कम लक्षणों वाले) और दूसरे सिकल सेल रोगी (गंभीर लक्षणों वाले). सिकल सेल वाहक में गंभीर लक्षण नहीं होते, लेकिन उससे इस असामान्य जीन के अगली पीढ़ी में जाने की आशंका बनी रहती है जबकि सिकल सेल रोगी से यह रोग अगली पीढ़ी में जाने की पूरी संभावना रहती है.
अगर माता और पिता सिकल सेल पीडि़त नहीं हैं तो उनके बच्चों को यह रोग नहीं होता. अगर माता या पिता दोनों में से कोई भी सिकल वाहक होता है तो भी आधे बच्चों के सिकल वाहक होने और आधे बच्चों के सामान्य गुण वाले पैदा होने की संभावना होती है.
अगर माता-पिता दोनों ही सिकल वाहक होंगे तो उनके 25 फीसद बच्चों को सिकल रोग, आधे बच्चे सिकल वाहक और मात्र 25 फीसदी बच्चे सामान्य होने की संभावना रहती है और अगर माता-पिता में से कोई भी एक व्यक्ति सिकल रोगी है और दूसरा सामान्य है तो सभी बच्चे सिकल वाहक हो सकते हैं लेकिन सिकल रोगी नहीं होंगे. अगर माता-पिता दोनों में से एक व्यक्ति सिकल रोगी और एक सिकल वाहक है तो उनके आधे बच्चे सिकल रोगी और आधे सिकल वाहक पैदा होंगे और अगर माता-पिता दोनों सिकल रोगी हैं तो उनके 100 फीसद बच्चे सिकल रोगी पैदा होंगे. यही वजह है कि चिकित्सक अब सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित लोगों को आपस में शादी नहीं करने की सलाह दे रहे हैं.
डूंगरपुर जिले के आसपुर के खंड मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी नगेंद्र सिंह कहते हैं, "हमें पता है कि हम इस बीमारी को खत्म नहीं कर सकते, लेकिन पॉजिटिव लोगों को आपस में शादी से दूर रखकर इसके प्रसार को तो रोक सकते हैं."
चिकित्सा विभाग के इन प्रयासों को देखकर यह तो भरोसा किया ही जा सकता है कि आने वाले वक्त में उनकी यह मुहिम सिकल सेल की रोकथाम में जरूर असरदार साबित होगी. इससे खासकर आदिवासी समुदाय को बीमारी से बचाया जा सकेगा.

सिकल सेल एनीमिया में ध्यान रखने वाली बातें
> सिकल सेल एनीमिया के मरीज को दिन भर में कम से कम 10 से 15 ग्लास पानी पीना चाहिए
> रोजाना एक गोली फॉलिक एसिड (5 मिलीग्राम) की जरूर लेनी चाहिए जो एनीमिया को कम करेगी और खून में नई लाल रक्त कोशिका बनाने में मदद करती है
> उलटी-दस्त और पसीने से शरीर का ज्यादा पानी बाहर निकल जाता हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
> शराब, धूम्रपान या अन्य नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए
> सिकल सेल मरीज को विटामिन से भरपूर संपूर्ण संतुलित भोजन लेना चाहिए
> सिकल सेल एनीमिया के मरीज को हर तीन महीने में हीमोग्लोबिन और श्वेत रक्त कोशिकाओं के स्तर की जांच करानी चाहिए
> सिकल सेल एनीमिया पीड़ित व्यक्ति को ज्यादा गर्मी, धूप और सर्दी में बाहर नहीं निकलना चाहिए
> गर्भवती महिला अगर सिकल सेल पॉजिटिव है तो उसके पति की सिकल सेल जांच तुरंत करानी चाहिए और अगर पति भी पॉजिटिव है तो गर्भस्थ शिशु की भी जांच होनी चाहिए
> यदि माता-पिता दोनों सिकल सेल पॉजिटिव हों और महिला गर्भवती है तो गर्भस्थ शिशु का निदान कराना उचित होगा
> सिकल सेल एनीमिया बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता, परिवार के अन्य सदस्य तथा दूर के रिश्तेदारों का सिकल सेल का परीक्षण कराया जाना चाहिए

