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केजरीवाल का इस्तीफा: मास्टरस्ट्रोक या महज शिगूफा?

जमानत पर जेल से बाहर आते ही आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की घोषणा कर विरोधियों को चौंका दिया

13 सितंबर को जेल से छूटने के बाद समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते आप नेता अरविंद केजरीवाल
13 सितंबर को जेल से छूटने के बाद समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते आप नेता अरविंद केजरीवाल
अपडेटेड 3 अक्टूबर , 2024

राजधानी की नई मुख्यमंत्री आतिशी ने घोषणा की, "दिल्ली में एक ही मुख्यमंत्री है और उनका नाम है अरविंद केजरीवाल." केजरीवाल के अचानक इस्तीफा देने की घोषणा के 48 घंटे बाद 17 सितंबर को जब केजरीवाल के उत्तराधिकारी के रूप में आम आदमी पार्टी (आप) ने उनको मनोनीत किया तो उसके तुरंत बाद उन्होंने यह घोषणा की.

इसके साथ ही केजरीवाल ने ऐलान कर दिया है कि दिल्ली में चुनाव का मौसम आ गया है, यह उससे काफी पहले है जिसका उनके आलोचकों ने अनुमान लगाया होगा. हालांकि 'राजनैतिक हथियार के रूप में यह इस्तीफा', जैसा कि कुछ विश्लेषक कहते हैं, नया नैरेटिव गढ़ने की कोशिश है, साथ ही यह भी सच है कि आप को चुनाव से पहले आबकारी नीति मामले के साये से छुटकारा पाने की जरूरत है. केजरीवाल तक ने भी जल्द चुनाव कराने की मांग की है—नवंबर में महाराष्ट्र के चुनाव के साथ—लेकिन चुनाव आयोग की ओर से इस मांग को माने जाने की संभावना नहीं है (दिल्ली में पांच महीने बाद अगले साल फरवरी में चुनाव होने हैं).

आप विधायक दल की बैठक में चुने जाने के बाद आतिशी ने यह भी कहा, "यह बहुत अफसोस की बात है कि दिल्ली के प्रिय मुख्यमंत्री को भाजपा की साजिश के कारण आज इस्तीफा देना पड़ा है." लेकिन इसका मतलब यह भी है कि दिल्ली को एक दशक बाद, जब केजरीवाल ने कांग्रेस की शीला दीक्षित को सत्ता से बेदखल करते हुए कुर्सी हासिल की, तीसरी महिला मुख्यमंत्री मिली है. कुछ राजनैतिक पंडित कह रहे हैं कि यह कोई 'जुआ' नहीं.

चुनाव से पहले भाजपा के तूफानी हमलों से बचने का यही एकमात्र तरीका था. केजरीवाल की जमानत की शर्तों में अन्य बातों के साथ-साथ यह भी है कि वे मुख्यमंत्री कार्यालय नहीं जाएंगे और महत्वपूर्ण फाइलों पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे. जब केजरीवाल को 13 सितंबर को जमानत मिली तो भाजपा की प्रतिक्रिया तल्ख थी, उसने कहा था कि इतनी बंदिशों के बाद वे महज 'दिखावे के तौर पर' मुख्यमंत्री रहेंगे. दो दिन बाद ही उन्होंने अपनी पार्टी को दूसरे तरीकों से लाभ पहुंचाने के लिए इसका रास्ता निकाल लिया.

मुख्यमंत्री बदलने से केजरीवाल पर हमले कम हो जाएंगे, वे कार्यालय की जिम्मेदारियां से मुक्त होकर चुनाव अभियान में—पहले हरियाणा विधानसभा के लिए फिर दिल्ली में—ज्यादा सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे. आप सुप्रीमो ने 'अग्नि परीक्षा' की बात की है जिसमें वे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए 'जनता की अदालत' में जाएंगे और कहा है कि वे केवल तभी मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेंगे जब इसमें पास हो जाएंगे. प्लान एकदम सिंपल है. उनके इस्तीफेने भ्रष्टाचार के आरोपों को आप के चुनावी मुद्दे में बदल दिया है, उतना ही जितना भाजपा ने बदला है. अगर आप सत्ता में लौटती है तो यह जनता का फैसला होगा और उसकी अदालत में केजरीवाल और उनके साथी बेगुनाह होंगे. मौजूदा अदालती मामलों पर भी राजनैतिक खतरे के रूप में निर्णायक तरीके से विराम लग जाएगा.

आप के एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं, "अरविंद जी संगठन पर फोकस करेंगे, पार्टी को मजबूत करने के लिए हरियाणा की तरह देश के दूसरे हिस्सों की यात्रा करेंगे. आतिशी जी यह सुनिश्चित करेंगी कि सरकारी सेवाएं मुहैया कराने में सरकार की तरफ से कोई कमी न रहे." जनता को बेरोकटोक सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी चाहे चाहे वह मोहल्ला क्लिनिक, अस्पताल हो और बिजली तथा पानी के बिलों पर भारी सब्सिडी हो जो खासतौर पर शहरी गरीबों के बीच आप के आकर्षण का केंद्रबिंदु है. ऐसा इसलिए ताकि प्लान में कोई बाधा न आए.

हालांकि यह सफलता का पक्का फॉर्मूला नहीं है लेकिन फिर भी राजनीति में कुछ भी नामुमकिन नहीं होता. इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन की जड़ों से निकली आप के लिए गर्व की बात स्वच्छ सरकार, पारदर्शिता और मतदाताओं से सीधे जुड़ाव के उसके दावे रहे हैं. 'शराब कांड' पर केजरीवाल की मौजूदा कानूनी परेशानियां इस संदेश को कमतर कर सकती हैं.

उनके दूसरे नंबर के साथी मनीष सिसोदिया भी 'जनता की अदालत' और 'ईमानदारी पर फैसला' जैसी वही बातें दोहराते हैं लेकिन उनका भी अपना दर्द है. दूसरा वक्त होता और उन पर भ्रष्टाचार का साया नहीं होता तो सिसोदिया, जो इसी मामले में जमानत पर हैं, केजरीवाल की जगह के लिए स्वाभाविक पसंद होते. लेकिन अब नहीं. केजरीवाल ने कहा, "मनीष ने भी फैसला किया है कि लोग जब उन्हें ईमानदारी का सर्टिफिकेट देकर सदन में वापस भेजेंगे, तभी वे फिर से उपमुख्यमंत्री का पद संभालेंगे."

आम आदमी पार्टी की रणनीति एकदम स्पष्ट है. दिल्ली के शहरी गरीबों के बीच उसके मुख्य आधार को केजरीवाल, सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेता एकजुट करेंगे जबकि दूसरे नेता कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करेंगे. इस बीच, मुख्यमंत्री आतिशी बिना बाधा के सरकार चलाती रहेंगी. पार्टी की मुख्य प्राथमिकता अब मुख्यमंत्री महिला सम्मान—महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए की मदद—जैसी योजनाओं पर तेजी से अमल करने की होगी और इसमें राजधानी की 67 लाख महिला मतदाताओं को लक्ष्य किया जाएगा.

जहां तक नई मुख्यमंत्री की बात है, वे शुरू से लेकर अभी तक केजरीवाल के प्रति वफादार रही हैं. अकादमिक के रूप से कामयाब (दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज और ऑक्सफोर्ड, जहां वे रोड्स स्कॉलर थीं) आतिशी के राजनैतिक ग्राफ में आप और दिल्ली सरकार में चौंकाने वाले तरीके से बढ़ोतरी देखी गई है. सिसोदिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं की गैर मौजूदगी में 43 वर्षीया पहली बार की विधायक आतिशी को वित्त, सार्वजनिक निर्माण और शिक्षा समेत 13 विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी और ये सब आप के कुछ करने की योजनाओं में महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं.

उन्होंने पार्टी का आदेश मिलने के बाद कहा, "मैं एक साधारण परिवार से आती हूं. अगर मैं किसी दूसरी पार्टी में होती तो मुझे चुनाव का टिकट भी नहीं मिलता. लेकिन केजरीवाल जी ने मुझ पर भरोसा किया, मुझे विधायक बनाया, मंत्री बनाया और आज मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी है."

दिल्ली में 1.47 करोड़ मतदाता हैं जिनमें करीब 45 फीसद महिलाएं हैं. पार्टी के एक तबके का मानना है कि आतिशी को बड़े पद की जिम्मेदारी दो कारणों से सामयिक है—उन पर कोई आरोप नहीं लगा है और वे दो क्षेत्रों को संबोधित करेंगी, महिला मतदाता और मध्य वर्ग के मतदाताओं को, जिनका शायद आप से थोड़ा मोहभंग हुआ है. हाल में दिल्ली नगर निगम की स्थानीय वार्ड समितियों के चुनाव में भाजपा ने 12 म्युनिसिपल जोन में जीत दर्ज की, आप सिर्फ पांच ही जीत सकी.

भाजपा पहले ही अपने हमले तेज कर चुकी है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने आतिशी को जिम्मेदारी सौंपने के दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "वे उसी भ्रष्ट कैबिनेट का हिस्सा हैं जिसने दिल्ली के लोगों को लूटा है." इस बीच आप के पूर्व विधायक और भाजपा के बयानबाज कपिल मिश्र ने आतिशी के माता-पिता—जो दिल्ली विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं और वामपंथी रुझानों के हैं— को लेकर हमला बोला है, जिन्होंने 2001 में संसद पर हमले के आरोपी 'आतंकवादी' अफजल गुरु की दया याचिका पर दस्तखत किए थे. अफजल को 2013 में फांसी दे दी गई थी.

आप की राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल, जो पार्टी में अलग-थलग हैं, ने इन्हीं आरोपों को दोहराते हुए वीडियो भी जारी किया है. उन्होंने कहा है, ''यह दिल्ली के लिए दुर्भाग्यपूर्ण दिन है." इस पर आप ने मालीवाल पर आरोप लगाया कि वे भाजपा की लिखी स्क्रिप्ट पर अभिनय कर रही हैं. पार्टी विधायक दिलीप पांडे ने पलटकर जवाब दिया, "अगर उनमें कुछ भी शर्म बची है तो उनको राज्यसभा से इस्तीफा दे देना चाहिए और भाजपा से टिकट मांगना चाहिए." भाजपा ने भी सोशल मीडिया के जरिए आतिशी पर मार्क्सवादी-लेनिनवादी होने का आरोप लगाया है—उनके सरनेम मार्लेना पर पुराना आरोप जो मार्क्स और लेनिन नाम से मिलकर बना है.

लेकिन यह शुरुआत भर है, जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे नई मुख्यमंत्री पर हमले तेज होते जाएंगे. आतिशी को सतर्कता के साथ बढ़ने की सलाह पर अमल करना होगा और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज और उनके 52 दिन के कार्यकाल को जेहन में रखना होगा. स्वराज को 1998 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, भ्रष्टाचार में घिरी भाजपा सरकार के आखिरी दिनों में भेजा गया था. तब उनको प्याज की आसमान छूती कीमतों के साथ-साथ अन्य मसलों पर भी लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ी. इसका अंत अच्छा नहीं हुआ. आप उम्मीद कर रही होगी कि बतौर मुख्यमंत्री आतिशी से बेहतर नतीजे मिलें.

नई सरकार नामित सीएम आतिशी आप नेताओं के साथ मीडिया से मुखातिब

केजरीवाल की गिरफ्तारी और उसके बाद...

31 मार्च 2024: दिल्ली आबकारी नीति में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में सीएम अरविंद केजरीवाल को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया 

2 अप्रैल: अक्तूबर 2023 से जेल में बंद आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को जमानत मिली

10 मई 2024: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी और आम चुनाव में प्रचार की मंजूरी भी

1 जून: अंतरिम जमानत अवधि खत्म होने के बाद आप सुप्रीमो सरेंडर कर तिहाड़ जेल पहुंचे

26 जून: भ्रष्टाचार के आरोपों में सीबीआइ ने गिरफ्तार किया

12 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी के केस में जमानत दी लेकिन सीबीआइ की हिरासत में होने के कारण उन्हें जेल में रहना पड़ा 

9 अगस्त: एक साल से ज्यादा जेल में रहने वाले आप में नंबर 2 मनीष सिसोदिया को जमानत मिली

13 सितंबर: सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल को सीबीआइ केस में सशर्त जमानत दी

15 सितंबर: केजरीवाल ने सीएम पद से इस्तीफा दिया, आतिशी इस पद के लिए मनोनीत

- अभिषेक जी. दस्तीदार

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