ऐसा अक्सर नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट और वह भी भारत के प्रधान न्यायाधीश की पीठ जांच एजेंसी की तरफ से पेश स्टैटस रिपोर्ट से 'विचलित' हो जाए. मगर कोलकाता के सरकारी आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की जूनियर डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या ने मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ को 'विचलित' कर दिया. मामले की सुनवाई करते हुए 17 सितंबर को उन्होंने कहा कि "सीबीआई ने रिपोर्ट में जो खुलासा किया है, वह और भी बदतर और विचलित करने वाला है...हम खुद चिंतित हैं."
चंद्रचूड़ ने कहा कि सीबीआई जांच कर रही है कि क्या अपराध स्थल के साथ छेड़छाड़ की गई, क्या सबूत नष्ट किए गए, क्या अपराध में दूसरे लोगों की मिलीभगत थी और क्या आर.जी. कर में वित्तीय अनियमितताएं थीं? उन्होंने कहा कि 'पूरा सच सामने लाने' के लिए जांच एजेंसी को और वक्त देना होगा. अदालत ने महिलाओं के काम के घंटे कम करने और उनकी नाइट ड्यूटी 'यथासंभव' सीमित करने के सुझावों के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई. सीजेआई ने कहा, "वे (महिलाएं) रियायत नहीं चाहतीं... महिलाएं ठीक उन्हीं पालियों में काम करने को तैयार हैं."
पश्चिम बंगाल सरकार की पैरवी कर रहे वकील कपिल सिब्बल इन सुझावों को छोड़ने के लिए राजी हो गए. पीड़िता की खातिर इंसाफ के लिए आंदोलन चला रहे जूनियर डॉक्टरों की वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि डॉक्टर तभी काम पर लौट सकते हैं जब भरोसा दिलाया जाए कि उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जाएगा. राज्य सरकार ने भी डॉक्टरों की सुरक्षा पक्की करने की विस्तृत योजना कोर्ट के सामने रखी.
उधर, कोलकाता में अपने नए ठिकाने यानी स्वास्थ्य भवन के सामने वाली सड़क पर अपने धरना स्थल से जूनियर डॉक्टरों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बातचीत के बुलावे दो बार ठुकरा दिया. उन्होंने जोर दिया कि "पारदर्शिता पक्की करने के लिए कोई भी बैठक 'इन-कैमरा' होनी चाहिए" और ऐसा न करने के लिए दी गई सरकार की यह दलील खारिज कर दी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है. मजबूर होकर ममता बनर्जी 14 सितंबर को खुद डॉक्टरों के समक्ष आईं और उन्हें इंसाफ का भरोसा दिलाया. कामयाबी 16 सितंबर को मिली, जब स्टेनोग्राफरों के हाथों मिनट लेने यानी बैठक के ब्योरे दर्ज करने पर राजी होकर और इस तरह चला आ रहा गतिरोध तोड़कर दोनों पक्ष आखिरकार मिले.
डॉक्टरों को जीत का तोहफा तब मिला, जब उनकी मांगें आंशिक रूप से पूरी करते हुए ममता कोलकाता के पुलिस कमिशनर विनीत गोयल, मेडिकल शिक्षा के डायरेक्टर कौस्तव नायक, स्वास्थ्य सेवा के डायरेक्टर (डीएचएस) देबाशीष हल्दर और कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमिशनर (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता को हटाने के लिए राजी हो गईं. काम पर लौटने की उनकी गुजारिश पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वादे लागू न होने तक हड़ताल जारी रहेगी.
गोयल को हटाकर मनोज कुमार वर्मा को कोलकाता पुलिस का कमिशनर बना दिया गया, जबकि अभिषेक गुप्ता की जगह दीपक सरकार डीसी नॉर्थ के पद पर जाएंगे. हल्दर की जगह डीएसएच के प्रभारी के तौर पर उनके डिप्टी स्वपन सोरेन को लाया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से काम पर लौटने के लिए कहने के बावजूद हड़ताल पर डटे रहे डॉक्टर अपनी 'पांच सूत्री मांग'—अपराध के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा देना; आर.जी. कर अस्पताल के प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ कड़ी कार्रवाई; गोयल और नॉर्थ तथा मध्य कोलकाता के डिप्टी पुलिस कमिशनरों के इस्तीफे; बंगाल के मेडिकल कॉलेजों में कथित 'धमकी की संस्कृति' को जड़ से खत्म करने; और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों की सुरक्षा के पर्याप्त उपाय—पर अड़े हुए हैं. घोष को सीबीआई ने 14 सितंबर को कथित तौर पर सबूत नष्ट करने के लिए गिरफ्तार कर लिया.
भ्रष्टाचार के आरोपों में वे पहले से कठघरे में हैं. डॉक्टर चाहते थे कि हल्दर और नायक के साथ स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम को भी हटाया जाए. एक डॉक्टर ने इंडिया टुडे से कहा, "राज्य की जन स्वास्थ्य प्रणाली को कुतर रहे एक भी कीड़े को बख्शा नहीं जा सकता."
कोलकाता में स्वास्थ्य भवन के सामने एक गुमनाम-सी सड़क 10 सितंबर को धरना शुरू होने के बाद बसी-बसाई बस्ती की चहल-पहल और माहौल से गुलजार है. समर्थन और एकजुटता के संकेत देश भर से आ रहे हैं. एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर अमृता भट्टाचार्य ने वीडियो संदेश में कहा, "आपका समर्थन हमारे साथ है इसीलिए हम यह लड़ाई जारी रख पा रहे हैं." वे इस आंदोलन की कमान संभाल रहे पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट (डब्ल्यूबीजेडीएफ) की सदस्य हैं.
ममता ने अनेक राजनैतिक आंदोलनों की अगुआई भी की और उनका मुकाबला भी किया. राजनैतिक विश्लेषक बिस्वजीत भट्टाचार्य कहते हैं, "आम लोगों के समर्थन से चल रहा गैर-राजनैतिक विरोध प्रदर्शन उनके लिए भी अजनबी है." फिलहाल सुलह का कदम उठाने में ही उन्हें भलाई दिखी.
- अर्कमय दत्ता मजूमदार

