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झारखंड की सिपाही बहाली कैसे अभ्यर्थियों के लिए बन गई जानलेवा?

झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से उत्पाद विभाग के सिपाही पद पर बहाली के लिए आयोजित दौड़ में अब तक 12 युवा अपनी जान गंवा चुके हैं

भर्ती के लिए दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर पलामू सदर अस्पताल में इलाज कराते युवा
भर्ती के लिए दौड़ के दौरान तबीयत बिगड़ने पर पलामू सदर अस्पताल में इलाज कराते युवा
अपडेटेड 27 सितंबर , 2024

अगस्त की 29 तारीख को जब सुमित यादव घर से निकले तो उन्होंने अपनी मां रूबी देवी से जाते-जाते कहा, "गे हम पुलिस बनिये जेबई (मां, मैं पुलिस बनकर ही रहूंगा)." झारखंड के गोड्डा जिले में एक गांव है केरवार. इसी गांव का यह इंटर का छात्र उस दिन अपने घर से 146 किलोमीटर दूर गिरिडीह जिले में चल रहे उत्पाद विभाग के सिपाही पद पर बहाली के लिए आयोजित दौड़ में हिस्सा लेने वहां पहुंचा था.

महज 19 साल का यह युवा इतनी दूर आया तो था जिंदगी बनाने, नसीब हुई मौत. भर्ती के लिए निर्धारित 10 किलोमीटर की दौड़ एक घंटे में पूरा करने के बाद सुमित बेहोश हो गए. आनन-फानन में उन्हें गिरिडीह सदर अस्पताल पहुंचाया गया. फिर वहां से धनबाद रेफर किया गया लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई. सुमित के पिता गोरेलाल यादव खेती और दिहाड़ी मजदूरी कर अपने तीन बेटों को पढ़ा रहे थे और उन्हें अपने इस बेटे से बड़ी उम्मीदें थीं.

झारखंड में बीते 22 अगस्त से झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से उत्पाद विभाग के सिपाही पद पर बहाली के लिए कई जगह दौड़ आयोजित हो रही हैं. तय मानक के मुताबिक लड़कों को एक घंटे में 10 किमी, तो लड़कियों को 40 मिनट में 5 किमी दौड़ना है.

हालांकि सात जिलों में आयोजित कुल तीन चरणों—दौड़, लिखित परीक्षा और फिर मेडिकल—के पहले चरण को ही पार करने में अब तक 12 युवाओं की जान जा चुकी है. इनमें भी सबसे ज्यादा पलामू में पांच, हजारीबाग और गिरिडीह में दो-दो, रांची, जमशेदपुर और साहिबगंज में एक-एक युवा की मौत हो गई. हालांकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी 17 युवाओं की मौत का दावा कर रहे हैं.

मृतकों में झारखंड के अलग-अलग जिलों के अलावा बिहार के युवक भी शामिल हैं. सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक, 583 पदों पर भर्ती के लिए कुल 5,13,832 आवेदन आए हैं. यानी एक सीट के लिए 850 युवा प्रतिस्पर्धा में हैं. झारखंड में इस पद पर 44 साल बाद रिक्तियां आई हैं.

पलामू जिले के 31 वर्षीय अरुण कुमार मृतकों में शामिल हैं. वे अपने चार भाई-बहनों में सबसे छोटे थे. उनके पिता गिरिजा राम बताते हैं, "हम किसानी से गुजारा करते हैं. ऐसे पदों पर बहाली के लिए बड़े घर के बच्चे नहीं जाते. हम जैसे गरीब के बच्चे ही जाते हैं. मेरा बेटा पांच साल से रांची में रहकर झारखंड पब्लिक सर्विस कमिशन (जेपीएससी) की तैयारी कर रहा था. दौड़ पूरी करने के बाद वह बेहोश हो गया. तत्काल कोई इलाज न मिला क्योंकि वहां कोई मेडिकल टीम न थी. बाद में सदर अस्पताल में, फिर वहां से एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया. वहीं उसकी मौत हो गई."

कैसे हुई इतनी मौतें?

भर्ती में शामिल हुए एक युवक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जो युवा नियमित तौर पर दौड़ का अभ्यास नहीं करते, वे भी इस दौड़ में शामिल हो गए. अचानक इतनी दूरी की दौड़ लगाना ऐसे लड़कों के बस की बात नहीं. भारी उमस ने इसे और मुश्किल बना दिया था. साथ ही दौड़ वाली जगह पर मेडिकल टीम भी तैनात नहीं थी. वहीं एक दूसरे युवक योगेश कुमार ने बताया कि दौड़ के लिए रात 12 बजे से ही लाइन लगनी शुरू हो जाती थी. सुबह काफी देर तक बड़ी संख्या में लोग भूखे रह जाते थे और दौड़ने के दौरान उनमें से कई बेहोश हो गए.

पलामू मेडिकल कॉलेज में कुछ मृतकों का पोस्टमॉर्टम हुआ. यहां के मेडिसिन डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राजेश्वर कुमार रंजन बताते हैं, "जितने भी केस हमारे यहां आए, उनमें लगभग सभी के शरीर में बीपी, ऑक्सीजन और ग्लूकोज की भारी कमी दिखी. उनके दिल की धड़कन भी मंद पड़ चुकी थी. इसके अलावा कई युवक बिना अभ्यास के लंबी दौड़ में शामिल होते हैं. यही नहीं, वे यह भी सोचते हैं कि खाली पेट दौड़ने पर दौड़ जल्दी पूरी हो जाएगी, जबकि यह गलत है. इसके अलावा, दौड़ में प्रदर्शन को बेहतर करने वाली दवाओं के इस्तेमाल की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता. वैसे भी, कोविड के बाद लोगों के शरीर की बर्दाश्त करने की क्षमता कमजोर ही हुई है."

वहीं अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) मुख्यालय, राजकुमार मलिक कहते हैं, "जिन जिलों में मौत हुई हैं, वहां पोस्टमॉर्टम हुआ है. विसरा को एफएसएल में जांच के लिए भेजा गया है. उन जिलों के एसपी जब रिपोर्ट सौंपेंगे, तभी इसका कारण पता चल पाएगा."

मौत पर चुनावी बयानबाजी

झारखंड में आने वाले कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव हैं और विपक्ष को मुद्दे की तलाश है, युवाओं को उनके हक-हुकूक की आवाज उठाने वालों की जरूरत है. जाहिर है, मामले में राजनैतिक रंग चढ़ना ही था. असम के मुख्यमंत्री और भाजपा की तरफ से झारखंड में चुनाव सह-प्रभारी बनाए गए हेमंत बिस्व सरमा मृतकों के परिजनों से घर जाकर मिल रहे हैं. वे 9 सितंबर को रांची के जिराबर गांव के मृतक अजय महतो के घर पहुंचे थे. सरमा राज्य सरकार से सभी मृतकों के परिजनों के लिए 50 लाख रुपए और एक नौकरी की मांग कर रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि बिना तैयारी के हड़बड़ी में दौड़ आयोजित कराई गई थी.

इसके जवाब में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि दौड़ की नियमावली भाजपा सरकार ने बनाई है. इन मौतों की जांच के लिए उन्होंने राज्य स्तरीय मेडिकल बोर्ड के गठन की बात कही है. हालांकि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही मुख्यमंत्री इन मौतों के लिए कोविड वैक्सीन को जिम्मेदार बता चुके हैं. उनका दावा है, "मौत सिर्फ दौड़ से ही नहीं हो रही है. चलते-चलते लोगों की मौत हो जा रही है. पता चला है कि कोविड के समय भाजपा के लोगों ने इस देश के लोगों को जो टीका लगाया है, वह गलत टीका लगाया है. उस टीके को पूरी दुनिया में बंद कर दिया गया था. बस हमारे भारत में उसकी सप्लाइ की गई. नतीजा, आज देश के अंदर अनेक लोगों की मौत हो रही है."

पलटवार सरमा ने भी किया. उन्होंने कहा, "उस टीके का इस्तेमाल तो हेमंत सोरेन ने भी किया था. ऐसे में टीके को दोष देना ठीक नहीं." वहीं भाजपा की सहयोगी ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) पार्टी के प्रमुख सुदेश महतो इस बहस में बेरोजगारी का मुद्दा जोड़ते हुए कहते हैं कि आज पूरे राज्य में 1.49 करोड़ युवा बेरोजगार हैं.

फिलहाल सरकार और विपक्ष दोनों की तरफ से मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे के तौर पर एक-एक लाख रुपए देने की घोषणा की गई है.

बेरोजगारी बड़ा चुनावी मुद्दा

आगामी विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को अगर कोई मुद्दा सबसे अधिक परेशान करने वाला है, तो वह है बेरोजगारी. दरअसल, हेमंत सोरेन ने बीते विधानसभा चुनाव में प्रति वर्ष पांच लाख रोजगार देने का वादा किया था. इसके अलावा, सालाना पांच हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने की भी घोषणा हुई थी. बाद में कहा गया कि वे युवा जो तकनीकी तौर पर प्रशिक्षित हैं और राज्य सरकार के रोजगार पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं, भत्ता उन्हें ही मिलेगा. लेकिन ऐसे बेरोजगारों को अभी तक एक भी किस्त जारी नहीं की गई है.

राज्य के बेरोजगार युवा बीते कई सालों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं. झारखंड सरकार के विभिन्न विभागों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, पूरे राज्य में कुल 4,66,494 सरकारी पद स्वीकृत हैं. इनमें से 1,79,365 पद भरे हैं, जबकि 2,87,129 खाली हैं.

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सोरेन के कार्यकाल में साल 2020 से 2024 के जून तक विभिन्न सरकारी विभागों में लगभग 26,443 हजार लोगों को नियुक्ति पत्र दिया गया है. जेएसएससी के तहत 40,000 पदों के लिए परीक्षा होनी है. जेएसएससी की ओर से जारी परीक्षा कैलेंडर के मुताबिक, ये सभी परीक्षाएं छह विभागों के लिए सितंबर से नवंबर माह तक होनी हैं. इन सब के बीच लगातार हो रही मौतों को देखते हुए भर्ती प्रक्रिया को रोक दिया गया था. अब इसे 10 सितंबर से दुबारा शुरू किया गया है. पलामू, जहां सबसे अधिक पांच मौत हुई हैं, वहां दौड़ बंद करा दी गई है.

सोरेन सरकार आने वाले दो-तीन महीनों में हजारों पदों की भर्ती के लिए परीक्षा कराने जा रही है. लेकिन जैसे हादसे सितंबर की शुरुआत में देखने को मिले, वे इस पूरी कवायद का चुनावी फायदा उठाने की उनकी मंशा पर पानी फेर सकते हैं.

- आनंद दत्त

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