
छत्रपति शिवाजी महाराज की मूर्ति गिर जाने का शायद इससे बुरा वक्त नहीं हो सकता था. महज आठ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मूर्ति का अनावरण किया था. विधानसभा चुनाव से बस कुछेक महीने पहले इसके गिरने से सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन मुश्किल में पड़ गया है और विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के लिए सरकार से दो-दो हाथ करने की माकूल स्थिति बन गई है.
महाराष्ट्र के कोंकण समुद्र तट पर मालवन के राजकोट किले में 35 फुट ऊंची यह मूर्ति 26 सितंबर को अपने ऊंचे मचान से औंधे मुंह गिरकर जमीन पर आ गई, जिसका अनावरण नौसेना दिवस 4 दिसंबर को मोदी ने किया था. इस परियोजना की परिकल्पना नौसेना ने की थी और राज्य सरकार ने मूर्ति और मचान के निर्माण में 2.40 करोड़ रुपए खर्च किए थे.
राज्य सरकार के एक बड़े अफसर ने इंडिया टुडे से कहा कि फंड मुहैया कराने के अलावा इस पूरी परियोजना में "राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं थी." नौसेना के बयान ने भी राज्य सरकार का हाथ न होने की तस्दीक की. जारी बयान में कहा गया कि नौसैन्य बल जल्द से जल्द मूर्ति की मरम्मत, बहाली और पुनर्स्थापना में हर तरह की सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है.
इत्तेफाकन मूर्तिकार जयदीप आप्टे ने जून में ही मूर्ति की मरम्मत की थी. मूर्ति के धराशायी होने से महज छह महीने पहले 20 अगस्त को राज्य के लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ने भी नौसेना को पत्र लिखकर बताया था कि किस तरह बारिश और खारी हवाओं की वजह से जोड़ों में लगे नट-बोल्टों में जंग लग गया है. उन्होंने आप्टे को स्थायी उपाय करने के निर्देश देने के लिए भी कहा.
अब जब मूर्ति लुढ़ककर जमीन पर आ गई है, विपक्ष ने विरोध प्रर्दशनों का व्यापक अभियान छेड़ दिया है. शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने मूर्ति के गिरने के लिए काम की लचर गुणवत्ता और "भाजपा के भ्रष्टाचार" को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने आरोप लगाया कि मूर्ति लगाने वाला ठेकेदार एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली सरकार का करीबी था और मूर्ति का अनावरण लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जल्दबाजी में किया गया. महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) के अध्यक्ष नाना पटोले ने आरोप लगाया कि आप्टे आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) का करीबी था. विपक्ष ने पीडब्ल्यूडी मंत्री और सिंधुदुर्ग जिले के संरक्षक मंत्री भाजपा के रवींद्र चव्हाण के इस्तीफे की मांग की.
मराठा समुदाय सत्रहवीं सदी में ताकतवर मुगलों से लोहा लेने वाले और महान योद्धा-राजा के रूप में पूजे जाने वाले शिवाजी की स्मृति और विरासत का जरा भी तिरस्कार और अपमान बर्दाश्त नहीं करता. बस यह याद भर करने की जरूरत है कि मराठा संगठन संभाजी ब्रिगेड ने 2004 में पुणे स्थित भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट (बीओडीआई) में किस कदर तोड़-फोड़ की थी, महज इसलिए कि अमेरिकी लेखक जेम्स लेन की किताब शिवाजी: ए हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया में मराठा योद्धा और उनकी मां राजमाता जीजाबाई के बारे में की गई टिप्पणियां उसे अपमानजनक लगी थीं. उस वक्त उग्र भावनाओं का फायदा उठाते हुए सत्तारूढ़ कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने विपक्ष में बैठी शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. इससे उन्हें मराठों और बहुजनों को तब सत्तारूढ़ गठबंधन के पीछे लामबंद करने में मदद मिली. उस साल हुए चुनाव में राकांपा ने अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया और वह विधानसभा की कुल 288 सीटों में से 71 सीटें जीतने में कामयाब रही थी.
वही कहानी अब फिर दोहराई जा सकती है. इस साल मई में हुए लोकसभा चुनाव में एमवीए महाराष्ट्र की कुल 48 में से 31 सीटें जीत गया था और इससे सत्तारूढ़ महायुति पहले ही बैकफुट पर है. उसके बाद सरकार ने महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए हाल में कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की, ताकि लोगों का दिल जीता जा सके. सरकार इसके जरिए आसन्न राज्य चुनावों में फायदों की उम्मीद कर रही थी, लेकिन मूर्ति ढहने के बाद उन सब पर पानी फिर सकता है.
महायुति को अपने नेताओं की शुरुआती प्रतिक्रिया से भी कोई मदद नहीं मिली. शिंदे ने मूर्ति के गिरने के लिए 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही तेज हवाओं को जिम्मेदार ठहराया. शिंदे सेना के मंत्री दीपक केसरकर को अपने इस बयान के लिए आलोचना झेलनी पड़ी कि ''इस हादसे से कुछ अच्छा जरूर निकलना चाहिए'' और ऐसा कहते हुए उन्होंने वहां 100 फुट ऊंची प्रतिमा लगाने की मांग की. फिर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और रत्नागिरि-सिंधुदुर्ग से भाजपा सांसद नारायण राणे और उनके पूर्व सांसद बेटे नीलेश राणे ने उस वक्त आक्रामक विरोध किया जब आदित्य ठाकरे और विपक्षी नेताओं ने राजकोट किले का दौरा किया. विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं और पुलिस को धमकाने और उनसे भिड़ने के राणे के वीडियो सोशल मीडिया पर घूमने लगे. वहीं, शिवाजी के वंशज माने जाने वाले कोल्हापुर राजघराने के राजकुमार और पूर्व राज्यसभा सांसद युवराज संभाजीराजे छत्रपति ने बताया कि उन्होंने 12 दिसंबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा था कि सौंदर्य के लिहाज से मूर्ति ठीक नहीं है और यह काम ''बहुत कम समय में और जल्दबाजी में किया गया'' लगता है.
मुद्दे को जोर पकड़ता और नुक्सानदेह साबित होता देख शिंदे ने मूर्ति के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए 29 अगस्त को आपातकालीन बैठक बुलाई. उप-मुख्यमंत्री अजित पवार ने महाराष्ट्र के लोगों से सार्वजनिक माफी मांगी और कहा कि घटना की जांच होनी चाहिए और शिवाजी का एक भव्य स्मारक बनना चाहिए. 30 अगस्त को महाराष्ट्र के पालघर की सभा में खुद प्रधानमंत्री ने इस घटना के लिए माफी मांगी. उन्होंने कहा, "शिवाजी महाराज देवता हैं. आज मैं अपने इष्टदेव छत्रपति शिवाजी महाराज के चरणों में अपना सिर झुकाकर माफी मांगता हूं."
अलबत्ता एमवीए इस मुद्दे को इतनी आसानी से भला कैसे हाथ से जाने देता; उसने दबाव बनाए रखा. मुंबई में 1 सितंबर को हुए विरोध प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री, शिवसेना (यूबीटी) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आरोप लगाया कि माफी मांगते हुए प्रधानमंत्री के चेहरे पर 'मगरूरी' (घमंड) थी. कांग्रेस के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने भी कहा कि मोदी की माफी का कोई मतलब नहीं है. उन्होंने कहा, ''दोषियों को सजा देने के लिए कुछ भी ठोस नहीं किया जा रहा है. ठेका देने में भ्रष्टाचार हुआ और अनुभवहीन मूर्तिकार को ठेका दिया गया. दोषियों को सजा मिलनी ही चाहिए.'' राकांपा के शरद पवार धड़े ने भी महाराष्ट्र भर में विरोध प्रदर्शन किए.
इस बीच स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट चेतन पाटील और मूर्तिकार आप्टे के खिलाफ हत्या के प्रयास और गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है. पाटील ने तो समर्पण कर दिया, पर आप्टे को गिरफ्तार कर किया गया. मूर्ति का गिरना सरकार के गिरने का खतरा पैदा कर रहा है.

मूर्ति खड़ी हुई और ढही
> 4 दिसंबर, 2023: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिंधुदुर्ग के राजकोट किले में छत्रपति शिवाजी महाराज की 35 फुट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया. परियोजना नौसेना की थी और राज्य सरकार ने मर्ति और उसके चौखटे के निर्माण में 2.40 करोड़ रुपए खर्च किए थे
> 20 अगस्त, 2024: मूर्ति के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार राज्य लोक निर्माण विभाग ने नौसेना को लिखा कि मूर्ति के नट-बोल्ट जंग खा रहे हैं
> 26 अगस्त, 2024: मुर्ति ढह-ढहाकर गिर पड़ी और टूट-फूट गई

