साइंस ग्रेजुएट तेजस मजीठिया गुजरात के ऊना शहर के निवासी हैं और उनके पास साइंस की मास्टर्स डिग्री भी है. उन्होंने एजुकेशन में बैचलर (बीएड) कोर्स भी किया है और 2023 में सरकारी या सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए शिक्षक योग्यता परीक्षा (टीएटी) भी उत्तीर्ण कर लिया है. मगर, इन योग्यताओं के बावजूद 28 वर्षीय मजीठिया को नौकरी नहीं मिली और सरकार की शिक्षक भर्ती में देरी को इसका जिम्मेदार बताया जा रहा है.
उनकी तरह साबरकंठा जिले के 28 वर्षीय जयमिन पटेल और अहमदाबाद के 29 वर्षीय दिलीप सिंह राठौड़ ने भी टीएटी और शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण किया है. दोनों ने क्रमश: बीएड, और बीकॉम तथा एमकॉम कर रखा है, पर उन्हें भी शिक्षक की नौकरी पाने के लिए इंतजार करना पड़ रहा है.
टीएटी और टीईटी 2023 में उत्तीर्ण कर चुके, मगर फिर भी नौकरी की बाट जोह रहे लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. गुजरात सरकार की ओर से शिक्षक भर्ती की धीमी गति को लेकर असंतोष जून में चरम पर पहुंच गया और गांधीनगर में हजारों लोग प्रदर्शन करने जुट गए. सरकार ने एक महीने से अधिक वक्त के बाद ऐलान किया कि आने वाले तीन महीनों में 32,200 शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, पर यह मुद्दा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. अगर इसे पूरा किया जाता है तो यह हाल के वर्षों में राज्य में शिक्षकों का सबसे बड़ा भर्ती अभियान होगा. आखिरी भर्ती 2022 में हुई, तब 2,600 शिक्षकों को नौकरी मिली.
राज्य ने माना है कि राज्यभर में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में 39,016 शिक्षक पद खाली पड़े हैं. ऐसे में 32,200 शिक्षकों की भर्ती हो जाती है तो भी 6,816 पद खाली रह जाएंगे. हकीकत इससे भी अधिक गंभीर हो सकती है. परीक्षा पेपर लीक घोटाले के व्हिसलब्लोअर और शिक्षक प्रदर्शनकारियों को लामबंद करने में अहम भूमिका निभाने वाले युवराज सिंह जडेजा के मुताबिक, मौजूदा रिक्तियों की कम गणना की गई है क्योंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के लागू करने के हिसाब से शिक्षक-छात्र अनुपात मौजूदा 1:30 के बजाए 1:25 होनी चाहिए.
उनका कहना है, "अगर मौजूदा रिक्तियां नहीं भरी जातीं और अगले साल की रिटायरमेंट की गणना कर लें, तो अगले साल 1.5 लाख रिक्तियां हो जाएंगी." वे कहते हैं कि हर साल तकरीबन 2.5 लाख युवा बीएड करते हैं और उनमें से अधिकतर सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते हैं.
राज्य में 15 महीने बाद स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं और ऐसे में इन प्रदर्शनों का समय भाजपा के लिए ठीक नहीं है. भाजपा के एक वरिष्ठ नेता नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहते हैं, "भाजपा सरकार पर सियासी दबाव है क्योंकि विभिन्न शिक्षक संगठन 2017 से विरोध जता रहे हैं. हमने अतीत में सियासी रणनीति के तहत धार्मिक-सामुदायिक नेताओं के जरिए उनसे बातचीत की और उन्हें शांत किया है. मगर हालिया (लोकसभा) चुनाव नतीजों ने संकेत दिया कि हम सत्ता विरोधी गंभीर लहर से जूझ रहे हैं."
मजीठिया का कहना है कि जब तक "भर्ती अधिसूचना जारी नहीं होती" सरकार की भर्ती घोषणा महज 'खोखला वादा' है. अगर नौकरी का वादा पूरा किया जाता है तो उनकी तरह कई लोगों के लिए यह रोजगार से कहीं बढ़कर होगा. यह उनकी जिंदगी के अन्य पहलुओं में भी नई उम्मीद लेकर आएगा. मजीठिया बताते हैं कि उनकी शैक्षणिक योग्यता और उनके पिता की स्थिर आय के बावजूद, बेरोजगार होने की वजह से करीब आधा दर्जन भावी दुल्हनों ने उनसे शादी करने से इनकार कर दिया.
अहम बातें
> साल 2023 में पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके, मगर फिर भी नौकरी की बाट जोह रहे लोग गांधीनगर में जुटे और जून में उनका विरोध-प्रदर्शन चरम पर पहुंच गया
> गुजरात सरकार ने अगले तीन महीनों में 32,200 शिक्षकों की भर्ती करने का ऐलान किया है, मगर कई लोगों का मानना है कि जब तक उसकी अधिसूचना नहीं जारी की जाती, यह महज "खोखला वादा" भर है

