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मुख्यमंत्री को धमकी देने से फिरौती वसूलने तक...राजस्थान की जेलों से कैसे चल रहा अपराधियों का नेटवर्क?

राजस्थान की जेलों में कुख्यात अपराधियों तक आसानी से पहुंच रहे हैं मोबाइल फोन, जेलों से वसूल रहे हैं रंगदारी और फिरौती

राजस्थान के जोधपुर केंद्रीय कारागार में लोगों की जांच करते सुरक्षाकर्मी
अपडेटेड 23 अगस्त , 2024

केस—एक: 

24 जनवरी 2024 की सुबह तकरीबन 10 बजे का वक्त. जयपुर के पुलिस कंट्रोल रूम में एक कॉल आई. उस अनजान कॉल को रिसीव करते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. उस कॉल की लोकेशन और अन्य जानकारी जुटाई गई तो पुलिस के पैरों तले से जमीन खिसक गई. दरअसल, वह कॉल जयपुर सेंट्रल जेल से आई थी और कॉल करने वाले ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को गोली मारने की धमकी दी थी.

पांच घंटे में कॉल से संबंधित जानकारियां जुटाने के बाद पुलिस ने जयपुर सेंट्रल जेल में छापा मारकर धमकी देने वाले व्यक्ति मुकेश और उसके दो अन्य साथियों को गिरफ्तार कर लिया. मुकेश बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) के मामले में पांच साल से जेल में बंद था. जेल प्रशासन ने कार्य के प्रति कोताही बरतने पर जयपुर सेंट्रल जेल के कार्यवाहक अधीक्षक ओम प्रकाश और हेड वार्डन अजय सिंह राठौड़ तथा मनीष यादव को निलंबित कर दिया गया.

केस—2:

27 जुलाई 2024 की रात 3 बजे जयपुर पुलिस के कंट्रोल रूम में फोन करके मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जान से मारने की धमकी दी गई. उससे पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई. लोकेशन और अन्य जांच में यह सामने आया कि वह कॉल राजस्थान की स्पेशल जेल श्यालावास में बलात्कार के मामले में बंद नीमो नामक व्यक्ति ने की थी.

धमकी देने वाले की पहचान होते ही पुलिस और जेल प्रशासन की ओर से दौसा जेल में सर्च अभियान चलाया गया जिसमें 10 कैदियों के पास मोबाइल फोन बरामद हुए. श्यालावास गांव की यह स्पेशल सेंट्रल जेल जयपुर केंद्रीय कारागार से ट्रांसफर होने वाले गंभीर प्रवृत्ति के अपराधियों के लिए बनाई गई थी. ऐसे में सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद जेल के कार्यवाहक अधीक्षक कैलाश प्रसाद, जेलर बिहार लाल और जेल के हेड वार्डन अवधेश को निलंबित कर दिया गया.

ये दो घटनाएं तो बानगी भर हैं. असल में, राजस्थान की जेलें इस समय कुख्यात अपराधियों की सबसे महफूज जगह और सैरगाह साबित हो रही हैं. गैंगवार से बचने के लिए बड़े अपराधी जेल को अपना ठिकाना बना रहे हैं और वहीं से वे हत्या, अपहरण और रंगदारी जैसे अपराधों को अंजाम दे रहे हैं. पुलिस सूत्रों की मानें तो जेलों में ही बड़े गैंगस्टर्स का दूसरे गैंग्स के साथ संपर्क होता है जिसके जरिए वे कहीं भी किसी भी व्यक्ति को आसानी के साथ अपना टारगेट बना सकते हैं.

जेलों में इन्हें मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य आपत्तिजनक वस्तुएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं. राज्य में पिछले 8 साल में जेलों से 2,100 मोबाइल फोन और 3 हजार से ज्यादा सिम कार्ड बरामद हो चुके हैं. वर्ष 2020 से लेकर जुलाई 2024 तक अकेले अलवर जेल में ही 85 मोबाइल बरामद हुए हैं.

जेलों में जुर्म की दुनिया की इस हकीकत को पिछले दिनों अजमेर की हाइ सिक्योरिटी जेल में हुए खुलासे से बेहतर तरीके से समझा जा सकता है. दरअसल, जयपुर पुलिस कमिशनरेट के डीसीपी (पश्चिम) अमित कुमार के नेतृत्व में बनाई गई पुलिस की स्पेशल टीम ने मई से जुलाई 2024 तक खुफिया पड़ताल के जरिए अजमेर की हाइ सिक्योरिटी जेल से रंगदारी, फिरौती, हत्या की योजना बनाने वाले कुख्यात अपराधियों और उन अपराधियों तक मोबाइल फोन तथा अन्य आपत्तिजनक सामान पहुंचाने तथा उनके इशारे पर काम करने वाले 45 अपराधियों को गिरफ्तार किया.

जयपुर पुलिस की पड़ताल में यह सामने आया कि हाइ सिक्योरिटी जेल में बंद सुखदेव सिंह गोगामेड़ी हत्याकांड के आरोपी नितिन फौजी, सुमित यादव और रोहित राठौड़ जेल से कॉल करके फिरौती मांग रहे हैं. ऐसे ही एक मामले में उन्होंने वैशाली नगर के एक व्यापारी से फिरौती की बड़ी रकम मांगी और रकम नहीं देने पर उसे जान से मारने की योजना बनाई. इस वारदात को अंजाम देने के लिए राजस्थान के मोस्ट वांटेड डकैत जगन गुर्जर के जरिए सीकर जिले के बहुचर्चित राजू ठेहट हत्याकांड के आरोपी विक्रम सिंह गुर्जर तक हथियार पहुंचाए गए.

विक्रम को चोरी के वाहन के जरिए वैशाली नगर के व्यापारी पर हमला करना था. वाहन चुराने की जिम्मेदारी अजमेर जेल से कुछ दिन पहले ही बाहर आए एक कुख्यात वाहन चोर को सौंपी गई. जयपुर पुलिस ने घटना को अंजाम देने से पहले ही विक्रम गुर्जर और वाहन चोर को दबोच लिया. ऐसे ही दो मामले चित्रकूट और हरमाड़ा थाना इलाके में सामने आए जिनमें फिरौती की रकम नहीं देने पर व्यापारियों पर फायरिंग की जानी थी, लेकिन पुलिस ने घटना को अंजाम देने से पहले ही अपराधियों को हथियारों के साथ धर-दबोचा. इन तीनों मामलों में 50 पुलिसकर्मियों की टीम ने जिन 45 लोगों को गिरफ्तार किया है उन पर 450 से ज्यादा मुकदमें दर्ज हैं.

पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) अमित कुमार का कहना है, "हरमाड़ा, चित्रकूट और वैशाली नगर की इन घटनाओं में जो एक खास पैटर्न नजर आया वह यह था कि कुख्यात अपराधी जेल से फोन करके व्यापारियों को जबरन वसूली के लिए धमकाते हैं. वसूली की रकम मिल जाने पर उसका कुछ हिस्सा जेलकर्मियों तक पहुंचाया जाता है ताकि जेल में बंद इन अपराधियों को मोबाइल फोन, बेहतर खाना और अन्य लग्जरी सुविधाएं मिल सकें. अगर कोई व्यापारी रंगदारी देने में मना करता है तो ये जेल से बाहर अपने गैंग के सदस्यों के जरिए उस पर हमला करने की योजना बनाते हैं."

इस मामले में दो जेलकर्मियों समेत जेल में कैंटीन चलाने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. कैंटीन संचालक पैसे लेकर गोगामेड़ी हत्याकांड के आरोपियों को 3,500 रुपए महीने की जगह 10 हजार रुपए महीने का लजीज खाना उपलब्ध करा रहा था. जयपुर पुलिस की कार्रवाई में जेल में मोबाइल पहुंचाने वाले गैंग का भी खुलासा हुआ. राजू ठेहट हत्याकांड का आरोपी विक्रम सिंह अजमेर जेल में मोबाइल पहुंचाने का काम कर रहा था. पुलिस ने ड्रिल मशीन में मोबाइल छिपाकर जेल में ले जाने के मामले का खुलासा किया. इसी तरह का एक मामला बीकानेर जेल में भी सामने आया जिसमें कैदियों के मनोरंजन के लिए बाहर से मंगवाए गए एलईडी टीवी में 30 मोबाइल छिपाकर भेजे जा रहे थे.

अजमेर और बीकानेर जेल के ये मामले कोई नए नहीं हैं. राजस्थान की जेलों में बंद रहे गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई, संपत नेहरा, राजू ठेहट, आनंदपाल सिंह, कुलदीप उर्फ डॉक्टर, विक्रम गुर्जर उर्फ लादेन और श्याम पूनिया जैसे अपराधी जेलों से अपनी जुर्म की दुनिया चलाते रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा नाम लॉरेंस विश्नोई का है. उसने राजस्थान की जेलों में लंबा समय काटा है और यहां की जेलें उसकी अहम पनाहगाह रही हैं. भरतपुर जिले की सेवर और अजमेर की हाइ सिक्योरिटी जेल में रहते हुए लॉरेंस ने अपने जुर्म के काले साम्राज्य का खूब विस्तार किया. गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद जब पुलिस ने गैंगवार खत्म होने का दावा किया तब भी विश्नोई राजस्थान में रंगदारी वसूलने में लगा हुआ था. दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रहते हुए भी उसके निशाने पर राजस्थान के ही व्यापारी रहे. ऐसे ही एक मामले में 7 सितंबर 2021 को उसने जयपुर की पॉश कॉलोनी जवाहर नगर में रहने वाले निश्चल भंडारी नामक बिल्डर को कॉल करके दो करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी.

राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के तत्कालीन एडीजी अशोक राठौड़ ने 8 जुलाई 2020 को जेल डीजी को पत्र लिखकर यह उल्लेख किया, "भरतपुर जेल में बंद लॉरेंस विश्नोई अपने गैंग के जरिए सीकर के कुछ बड़े व्यवसाइयों के अपहरण की योजना बना रहा है. लॉरेंस जेल के भीतर से मोबाइल फोन के जरिए वॉट्सअप कॉल के जरिए अपने गिरोह से संपर्क में है. अत: अपराधी लॉरेंस की इस साजिश पर अंकुश लगाने के लिए उसका स्थानांतरण भरतपुर जेल से अजमेर हाइ सिक्युरिटी जेल में किया जाए."

इसी तरह का एक पत्र 21 जुलाई 2021 को तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अजयपाल लांबा ने जेल महानिदेशक को लिखा जिसमें यह हवाला दिया गया था कि जेलों में बंद गैंगस्टर गिरोह बनाकर संगठित अपराध करने का प्रयास कर रहे हैं.

विश्नोई का गुर्गा संपत नेहरा जेल में बंद रहते हुए लोगों को डरा-धमकाकर रंगदारी वसूलने के मामले में कुख्यात रहा है. निश्चल भंडारी से फिरौती मांगने के मामले में भी राजस्थान पुलिस नेहरा को दिल्ली की मंडोली जेल से प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाई थी.

साल 2017 में 24 जून को उसके एनकाउंटर से पहले तक राजस्थान में जुर्म की दुनिया के सबसे बड़े खिलाड़ी रहे आनंदपाल सिंह के लिए जेल घर से भी ज्यादा सुरक्षित जगह थी. उसे जेल में उसके ऐशो-आराम की हर चीज उपलब्ध थी. 7 हत्याओं सहित कुल 40 से ज्यादा आपराधिक मामलों में वांछित रहा आनंदपाल जब अजमेर की हाइ सिक्युरिटी जेल में बंद था तो जेल प्रशासन उसकी आवभगत में जुटा रहता था.

इसी तरह 3 दिसंबर 2022 को सीकर में गैंगस्टर के हाथों मारे गए कुख्यात गैंगस्टर राजू ठेहठ पर जेल में रहते हुए जबरन रंगदारी वसूली और अन्य गंभीर श्रेणी के 30 से ज्यादा मामले दर्ज थे. 2014 में ठेहठ ने बीकानेर जेल में बंद आनंदपाल और बलबीर बानूड़ा पर अपने गुर्गे भेजकर हमला कराया. मेवात में सक्रिय कुलदीप उर्फ डॉक्टर गैंग पर भी जेल में रहते हुए रंगदारी और फिरौती वसूलने के कई मामले हैं. कुलदीप काफी समय से जेल में बंद है, पर जेल से ही उसकी जुर्म की करतूतें जारी हैं. जाहिर है, जेलों से जरायम की यह दुनिया अरसे से बदस्तूर जारी है.

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