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उत्तर प्रदेश : कार्यसमिति की बैठक में भी नहीं मिला भाजपा की अंदरूनी कलह का समाधान

लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा में मची भीतरी कलह को दूर करने में विफल रही कार्यसमिति की बैठक, शीर्ष नेतृत्व को करना पड़ा हस्तक्षेप

लखनऊ में आयोजित प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दौरान की तस्वीर
लखनऊ में आयोजित प्रदेश भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दौरान की तस्वीर
अपडेटेड 1 अगस्त , 2024

लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पहली प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के लिए जगह तलाशने में पार्टी नेताओं को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. पिछली सभी प्रदेश कार्यसमिति की बैठकों में करीब 600 नेता-कार्यकर्ता बुलाए जाते थे.

इस बार के लोकसभा चुनाव में 62 से घटकर महज 33 सीटों पर सिमटने वाली पार्टी ने ब्लॉक तक के नेताओं को बुलावा भेजा था. ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति में आने वाले नेताओं की संख्या 3,000 तक पहुंच गई थी. काफी खोजबीन के बाद लखनऊ की आशियाना कॉलोनी में डॉ. राममनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय के आंबेडकर सभागार को 14 जुलाई को होने वाली अभूतपूर्व प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के लिए उपयुक्त पाया गया.

इतनी बड़ी कार्यसमिति के आयोजन के पीछे भगवा दल की मंशा कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित कर लोकसभा चुनाव के नतीजों के कारणों पर मंथन करना थी, पर हुआ इसका उलटा. शीर्ष नेताओं में खींचतान, जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष, अंतर्कलह जैसे कई मुद्दों पर प्रदेश कार्यसमिति की बैठक कन्नी काटती हुई दिखी. उत्साहहीन माहौल ने प्रदेश कार्यसमिति को महज औपचारिकता भरा आयोजन बना दिया. 

बैठक में स्पष्ट हो गया कि सरकार और संगठन के बीच सब ठीक नहीं है. इसकी शुरुआत प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के भाषण से शुरू हुई. उन्होंने कार्यकर्ताओं की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि कार्यकर्ता हमारे लिए सबसे बढ़कर हैं. उसके मान-सम्मान से कोई समझौता नहीं हो सकता.

प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मौजूद कार्यकर्ताओं से कहा, ''जो आपका दर्द है, वही मेरा भी दर्द है. सरकार से बड़ा संगठन है, संगठन था और रहेगा.'' मौर्य ने यह भी कहा कि 7 कालिदास मार्ग (लखनऊ में केशव प्रसाद मौर्य का आधिकारिक आवास) कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा खुला है. बैठक में कार्यकर्ताओं के मन की बात कहने पर मौर्य को सबसे ज्यादा तालियां मिलीं.

माना जा रहा है कि चौधरी और मौर्य ने अपने बयान के जरिए इशारों में सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता खुद की सुनवाई न होने का आरोप लगा रहे हैं.

जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बारी आई तो उन्होंने ''अतिआत्मविश्वास से अपेक्षाओं को चोट पहुंची'' को प्रमुखता से कहा. माना गया कि योगी ने अतिआत्मविश्वास शब्द संगठन के लिए ही उपयोग किया. योगी ने यह भी कहा कि चुनाव के नतीजों से किसी को बैकफुट पर जाने की जरूरत नहीं है.

जानकार कहते हैं कि अपने इस बयान के जरिए योगी ने संगठन को स्पष्ट कर दिया कि वे बैकफुट पर नहीं जाने वाले हैं. अंत में मुख्य अतिथि और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने संबोधित किया. उन्होंने सभी को आत्मचिंतन करने की नसीहत दी. हालांकि भाषण की शुरुआत में मंच पर मौजूद सभी नेताओं का नाम लेकर अभिवादन करने के क्रम में मौर्य को 'मेरे मित्र' कहकर नड्डा ने संगठन में उनकी अहमियत भी जता दी. 

कार्यसमिति में भाग लेने पहुंचे पूर्वांचल के एक बड़े नेता पार्टी नेताओं के रवैये से खिन्न थे. उनका कहना था, ''एक दिन की कार्यसमिति करना ही बताता है कि पार्टी केवल औपचारिकता कर रही है.'' सभी नेताओं ने केवल पिछली बातों को ही दोहराया लेकिन उस बात पर चर्चा नहीं हुई जिसकी वजह से 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

बैठक में पहुंचे कार्यकर्ताओं का कहना था कि भाजपा के प्रमुख नेताओं के इलाकों में भाजपा की हार क्यों हुई? दलित और पिछड़ी जातियों के भाजपा से छिटकने के कारणों पर भी कोई मंथन नहीं हुआ. बैठक में पारित राजनैतिक प्रस्ताव में कार्यकर्ताओं के बीच फैली निराशा दूर करने की रणनीति का भी कोई जिक्र न होने से पार्टी के भीतर असंतोष है. 

पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों ने भी भाजपा कार्यकर्ताओं के असंतोष को हवा दी है. भाजपा का वोट शेयर 2019 के लोकसभा चुनाव में 49.98% से घटकर अब 41.37% रह गया है. पार्टी के इतने खराब प्रदर्शन के बाद पिछले 10 दिनों से पूरे राज्य में आयोजित हो रहे अभिनंदन समारोह ने पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ पदाधिकारियों को हैरान कर दिया है.

कुछ जगहों से असंतोष की छिटपुट आवाजें भी उठ रही हैं. सलेमपुर में भाजपा उम्मीदवार और दो बार के सांसद रवींद्र कुशवाहा सपा के रमाशंकर राजभर से मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे. यहां आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम के दौरान कई कार्यकर्ताओं ने इसके विरोध में आवाज उठाई. उनके मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि सलेमपुर में समारोह कुशवाहा की हार का मजाक उड़ाने के लिए आयोजित किया गया था.

कार्यकर्ताओं ने यहां तक आरोप लगाया कि कुशवाहा की हार के लिए यूपी के एक मंत्री और स्थानीय विधायक विजय लक्ष्मी गौतम के समर्थक जिम्मेदार हैं.

लखनऊ में कैंट से विधायक और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कार्यकर्ताओं पर फूल बरसाकर उनका अभिनंदन किया. कार्यक्रम खत्म होने के बाद घर लौट रहे एक भाजपा कार्यकर्ता का एक अन्य यात्री से वाहन की टक्कर को लेकर झगड़ा हो गया; कार्यकर्ता को पुलिस थाने ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उसकी पिटाई की गई. कैंट क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि जब भाजपा नेतृत्व फूल बरसा रहा था, तब पुलिस उन पर लाठियां बरसा रही थी.

कार्यक्रम में पाठक ने पुलिस की कार्रवाई की भर्त्सना की और कार्यकर्ता को न्याय दिलाने का अश्वासन दिया. मेरठ की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख अतवीर सिंह यादव बताते हैं, ''भाजपा संगठन में आंतरिक लोकतंत्र नहीं है. जब तक पार्टी अच्छा कर रही थी तब तक सभी चुप रहे लेकिन अब जब प्रदर्शन कमजोर हुआ है तो कार्यकर्ता और नेता भी आवाज उठा रहे हैं. अगर समय रहते पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं का असंतोष दूर करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई तो आगे उसे और भी ज्यादा नुक्सान उठाना पड़ सकता है.'' 

बैठक शुरू होने के तीन दिन पहले 11 जुलाई को भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह ने अपनी ही सरकार में अफसरों के कामकाज पर नाराजगी जताकर हलचल मचा दी. प्रतापगढ़ के पट्टी इलाके में आयोजित कार्यकर्ता सम्मान समारोह में पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच उन्होंने कहा, ''मुझे कहने में संकोच नहीं है कि मेरे राजनैतिक जीवन के 42 सालों में तहसील और थानों में ऐसा भ्रष्टाचार न सोच सकते थे... न देख सकते थे, यह अकल्पनीय है.''

भाजपा अपने वरिष्ठ नेता के बयान की पड़ताल कर ही रही थी कि अगले दिन जौनपुर में बदलापुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रमेशचंद्र मिश्र का एक वीडियो वायरल हो गया. इसमें दो बार के विधायक मिश्र यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि केंद्र सरकार को कुछ बड़े फैसले लेने होंगे, तभी 2027 में भाजपा की यूपी में सरकार बन सकेगी.

हालांकि, बाद में पार्टी के बड़े नेताओं के हस्तक्षेप के बाद इन दोनों नेताओं ने अपने बयान से पल्ला झाड़ लिया. इससे पहले कन्नौज के निवर्तमान सांसद सुब्रत पाठक, भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद, अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल समेत कई नेता अलग-अलग मुद्दों पर सरकारी कामकाज पर उंगली उठा चुके हैं.

लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के कारणों की पड़ताल करने निकली टीम-40 को भी कई जिलों में कार्यकर्ताओं के असंतोष की जानकारी मिली थी. टीम में शामिल एक नेता बताते हैं, ''कार्यकर्ता थाने और तहसील पर लोगों का सही काम भी ना कर पाने की वजह से चुनाव में शांत रहा, भाजपा के खराब प्रदर्शन के पीछे यह भी एक बड़ा कारण था. लेकिन इस मुद्दे पर प्रदेश कार्यसमिति पर कोई चर्चा न होने से कार्यकर्ताओं में निराशा और बढ़ी है.''

इतना ही नहीं टीम-40 के मुताबिक, आधे जिलों में प्रत्याशियों, क्षेत्रीय पार्टी विधायकों और संगठन के स्थानीय पदाधिकारियों के बीच शीत युद्ध की बात सामने आई है. हालांकि, टीम-40 को यह भी जानकारी मिली है कि कई उम्मीदवार जिनकी खुद की कार्यप्रणाली से जनता में गुस्सा था, वे इससे ध्यान भटकाने के लिए अधिकारियों पर आरोप लगा रहे हैं. यूपी भाजपा में मची अंतर्कलह से निबटने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा ने 16 जुलाई को प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को दिल्ली तलब किया.

नड्डा ने इन नेताओं से विवाद खड़ा करने वाले बयानों को विराम देकर सरकार और संगठन में समन्वय के साथ काम करने को कहा. अगले दिन भूपेंद्र चौधरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिले. चौधरी ने दोनों नेताओं को लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की जानकारी दी. 

इतना तो तय है कि पार्टी के भीतर नेताओं के बीच खिंची तलवारों को म्यान में रखवाने के लिए भाजपा संगठन को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. अगर इसमें कामयाबी नहीं मिली तो आने वाले दिनों में भगवा दल में और भी उठापटक देखने को मिलेगी.

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