राजस्थान के नागौर जिले के नावां कस्बे से एक किलोमीटर दूर खारे पानी की विश्व प्रसिद्ध सांभर झील के लाल, नीले, सफेद पानी के बीच स्टील के बड़े-बड़े सोपानों वाला पुल देखकर लगता ही नहीं है कि यह भारत में बना है. इस दिलकश नजारे को देखकर ऐसा लगना लाजमी भी है, क्योंकि यह कोई साधारण पुल नहीं बल्कि उस डेडिकेटेड हाइस्पीड ट्रेन टेस्टिंग ट्रैक का हिस्सा है जो 220 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाली गाड़ियों के परीक्षण के लिए बनाया जा रहा दुनिया का सबसे लंबा और आधुनिकतम ट्रैक है. पुल पर स्टील के बड़े सोपान और गर्डर इसलिए लगाए गए हैं ताकी जब इस उन्नत किस्म के ट्रैक से 220 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन गुजरे तो किसी तरह का वाइब्रेशन न हो.
यह ट्रैक इसलिए भी खास है क्योंकि भारत में अब तक किसी भी तरह की ट्रेनों के ट्रायल के लिए अलग से कोई ट्रैक नहीं था. अब तक ट्रेनों का सामान्य रूट पर ही परीक्षण किया जाता रहा है जिसके कारण उस रूट पर चलने वाली यात्री और मालगाड़ियों के संचालन में दिक्कत आती थी. इस ट्रैक की खासियत यह भी है कि यहां जिस भी ट्रेन का परीक्षण होगा उसमें सुरक्षा और यात्रियों के आराम का खास ख्याल रखा जाएगा. यहां हाइ स्पीड ट्रेनों का ट्रायल होने के बाद देश में अब ऐसे ट्रैक बनाए जाएंगे जिस पर 200 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेनें दौड़ सकेंगी.
ट्रेनों की स्पीड के अलावा यहां ब्रेकिंग सिस्टम, लोकोमेटिव, कोच, सिग्नलिंग, व्हील ऑफलोडिंग, हाइ एक्सल लोड वैगन और रेलवे की ओर से विकसित की जाने वाली नई तकनीकी का भी परीक्षण होगा. इस ट्रैक पर हाई स्पीड, दुरंतो, वंदेभारत, बुलेट ट्रेन और नियमित ट्रेनों का ट्रायल होगा. भविष्य में यहां मेट्रो ट्रेनों अन्य देशों की रेलगाड़ियों का भी ट्रायल हो सकेगा.
काबिलेगौर है कि भारत में अब तक ट्रेनों की अधिकतम स्पीड 160 किलोमीटर से ज्यादा नहीं है और ना ही देश में हाइ स्पीड ट्रेन को दौड़ाने लायक ट्रैक हैं. वर्षों पहले बनाए गए कई ट्रैक तो ऐसे हैं जिस पर 80-90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने पर भी झटके महसूस होते हैं. इन सामान्य ट्रैक की बनावट ऐसी है, जहां हाइस्पीड ट्रेनों का संचालन संभव नहीं है. जल्द ही भारत में बुलेट ट्रेन दौड़ने वाली हैं, ऐसे में डेडिकेटेड हाइ स्पीड ट्रायल ट्रैक की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. नागौर जिले के गुढ़ा ठठाना से शुरू होकर मीठड़ी तक बनाया जा रहा यह 64 किलोमीटर लंबा ट्रैक भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. 64 किलोमीटर लंबा यह ट्रैक एकदम सीधा और सपाट नहीं है, बल्कि इसमें कई घुमावदार पॉइंट व लूप बनाए गए हैं. इसके जरिए यह परीक्षण होगा कि हाई स्पीड ट्रेन बिना गति कम किए घुमावदार ट्रैक से कैसे गुजरेगी. इस ट्रैक में 23 किलोमीटर लंबी सीधी लाइन, 13 किलोमीटर लंबा हाइस्पीड लूप, तीन किलोमीटर लंबा त्वरित टेस्टिंग लूप और 20 किलोमीटर लंबाई का कर्व (घुमावदार) टेस्टिंग लूप बनाया गया है. इन लूप का घुमाव अलग-अलग जगह पर अलग-अलग डिग्री का रखा गया है.
कहीं अंग्रेजी के एस के आकार का घुमाव है तो कहीं यू के आकार का मोड़ दिया गया है. एक जगह 8 के आकार का घुमाव भी है. विश्व में कहीं भी हाई स्पीड ट्रेन ट्रायल ट्रैक पर इस तरह के लूप और घुमाव नहीं हैं. यहां 250 मीटर से लेकर 1000 मीटर तक के लूप बनाए गए हैं, जिनमें 250 से 400 मीटर की दूरी के बहुत छोटे लूप, 400 से 600 मीटर दूरी के छोटे लूप, 600 मीटर से ज्यादा दूरी वाले बड़े लूप और 600 मीटर से ज्यादा दूरी के बहुत बड़े लूप शामिल हैं. इस तरह का यह पूरे विश्व का इकलौता ट्रैक है. इस हाइस्पीड डेडिकेटेड ट्रायल ट्रैक पर सात बड़े पुल और 129 छोटे पुल तथा गुढ़ा, जाबड़ी नगर, नावां और मीठड़ी कस्बों में चार स्टेशन बनाए जा रहे हैं. नावां स्टेशन को मुख्य स्टेशन बनाया जा रहा है जहां स्टेशन के साथ ही प्रयोगशाला, कार्यशाला और कार्मिकों के आवास बनाने का काम भी जारी है. पहले चरण का काम लगभग पूरा हो चुका है और दूसरे चरण का काम दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
उत्तर-पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ कहते हैं, "भारतीय रेलवे के रिसर्च ऐंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरएसडीओ) की ओर से रोलिंग स्टॉक के परीक्षण के लिए देश के पहले डेडिकेटेड हाई स्पीड टेस्टिंग ट्रैक का निर्माण किया जा रहा है. यह ट्रैक रेल संचालन में नई तनकीकी के उपयोग और सुरक्षा में अहम भूमिका निभाएगा. इससे भारतीय रेलवे का आधारभूत ढांचा और रोलिंग स्टॉक नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा."
इस ट्रायल ट्रैक के लिए राजस्थान को ही क्यों चुना गया, इस सवाल के जवाब में उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कैप्टन शशि किरण कहते हैं, "मिट्टी के परीक्षण और जमीन की उपलब्धता के आधार पर हाइस्पीड टेस्टिंग ट्रैक के लिए राजस्थान के नावां क्षेत्र का चयन हुआ है. यह ऐसा क्षेत्र है जहां रेलवे की आजादी से पहले की 50 किलोमीटर लंबी जमीन थी. उस वक्त सांभर से नमक परिवहन के लिए जयपुर-जोधपुर के बीच रेलवे लाइन बिछी हुई थी. जोधपुर-जयपुर के बीच नया रेलवे ट्रैक बनने के बाद पुरानी रेल लाइन जमीन के नीचे दब गई और इस पर अतिक्रमण कर नमक की अवैध क्यारियां बना दी गईं. सेटेलाइट सर्वेक्षण के आधार पर रेलवे ने अपनी पुरानी जमीन को वापस खोज लिया और नमक की अवैध क्यारियां हटाकर जमीन पर फिर अपना कब्जा ले लिया."
इस रेलवे ट्रैक के लिए राजस्थान का चयन इसलिए भी हुआ है क्योंकि इसमें ज्यादा जमीन का अधिग्रहण की पेचीदगियां नहीं थीं. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के काम में देरी की मुख्य वजह जमीन अधिग्रहण ही था. जमीन अधिग्रहण में आने वाली परेशानियों के कारण 2022 तक पूरी होने वाली इस परियोजना के काम में पांच साल की देरी हुई है. आजादी से पहले के समय से ही गुढ़ा से मीठड़ी तक रेलवे की 50 किलोमीटर लंबी जमीन उपलब्ध होने के कारण डेडिकेटेड हाइ स्पीड ट्रायल ट्रैक के लिए यहां का चयन किया गया. इसी के चलते ट्रैक का निर्माण कर रहे रिसर्च ऐंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरएसडीओ) को महज आठ गांवों की ही कुछ जमीन का अधिग्रहण करना पड़ा है.
इस ट्रैक की और भी कई खासियतें हैं. 64 किलोमीटर लंबे इस ट्रैक का ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड है जो सांभर झील के आस-पास बनी नमक की क्यारियों के साथ-साथ चलता है. एलिवेटेड होने के कारण बरसात के वक्त सांभर झील में पानी की ज्यादा आवक होने पर भी यहां ट्रेनों के ट्रायल पर कोई असर नहीं होगा. हाइ स्पीड ट्रायल टैक के साथ ही मीठड़ी कस्बे के पास एक ऐसा ट्रैक भी बनाया जा रहा है जो खराब स्थिति में और उबड़-खाबड़ जमीन पर होगा. यहां ट्रेनों के इंजन, वैगन और कोच की गुणवत्ता आंकी जाएगी. ट्रायल खास ट्रैक पर होने से ट्रेनों की गुणवत्ता का आकलन करने में मदद मिलेगी.
राजस्थान को बुलेट ट्रेन की भी सौगात
राजस्थान को डेडिकेटेड हाइस्पीड ट्रायल ट्रैक के अलावा बुलेट ट्रेन की भी सौगात मिल रही है. केंद्र सरकार ने दिल्ली और अहमदाबाद के बीच 875 किलोमीटर लंबे रूट पर बुलेट ट्रेन चलाने का फैसला किया है, उसका भी 75 फीसद हिस्सा राजस्थान से होकर गुजरेगा. राजस्थान में यह बुलेट ट्रेन 657 किलोमीटर की दूरी तय करेगी. यह रूट राजस्थान के अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर और डूंगरपुर जिलों के 335 गांवों से होकर गुजरेगा. इस रूट पर दिल्ली से अहमदाबाद तक जो 11 स्टेशन होंगे उसमें से सात स्टेशन राजस्थान में होंगे: उदयपुर, डूंगरपुर (खैरवाड़ा), भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर और अलवर (बहरोड़).

