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बिहार : नौकरी के नाम पर गंदा खेल, 100 से ज्यादा लड़कियों के साथ यौन शोषण की घटनाएं!

एक आयुर्वेदिक कंपनी के तौर पर डीबीआर यूनिक ने बिहार में बेरोजगार युवाओं-युवतियों को नौकरी देने के नाम पर उनके साथ ठगी, यौन शोषण और क्रूरता की घटनाओं को कैसे अंजाम दिया

पटना में नौकरी के नाम पर शोषण करने के आरोपों से घिरी डीबीआर यूनिक कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन
पटना में नौकरी के नाम पर शोषण करने के आरोपों से घिरी डीबीआर यूनिक कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन
अपडेटेड 12 जुलाई , 2024

कमरे में एक युवक चौकी पर बैठा है, दूसरा बेरहमी से लगातार बेल्ट से उसे पीट रहा है और तीसरा किनारे खड़ा होकर उसे बार-बार डांट रहा है. अच्छी खासी पिटाई के बाद पीटने वाला युवक कहता है, "आज के बाद तुम अच्छे से रहेगा, अच्छे से खाना खाएगा और मम्मी-पापा के सपने को सच कर दिखाएगा." यह वीडियो पिछले कुछ दिनों से बिहार में सोशल मीडिया पर वायरल है.

56 सेकंड के इस वीडियो में सपनों के पीछे भागने, छले जाने और शोषण का शिकार होने के लिए मजबूर बिहार के बेरोजगार युवाओं की दास्तान दर्ज है. वीडियो एक आयुर्वेदिक कंपनी डीबीआर यूनिक से संबंधित बताया जा रहा है, जिस पर नौकरी के नाम पर हजारों युवकों को ठगने, उनसे मारपीट कर अन्य युवकों को फंसाकर लाने और सौ से ज्यादा युवतियों के यौन शोषण के आरोप हैं.

वीडियो में अपने स्टाफ की पिटाई करने वाले अजय प्रताप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि कंपनी में नौकरी के नाम पर आए सभी युवक-युवतियों से जॉइनिंग के वक्त 20,500 रुपए लिए जाते हैं. फिर उन्हें अपने जैसे ही युवाओं को कंपनी से जोड़ने का टारगेट दिया जाता है. जो युवक टारगेट पूरा नहीं कर पाते, उनके साथ मारपीट की जाती है.

कंपनी का एक और वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें एक युवक एक लड़की को गालियां देते हुए थप्पड़ लगा रहा है. इस कंपनी में काम करने वाली लड़कियों ने कंपनी के अधिकारियों पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं.

डीबीआर यूनिक में काम करने वाली सारण की एक युवती संगीता (बदला हुआ नाम) ने कंपनी के सीएमडी मनीष सिन्हा और तिलक कुमार सिंह समेत नौ लोगों के खिलाफ ठगी, मारपीट और यौन शोषण का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी. युवती ने बताया कि इस कंपनी की बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में शाखाएं हैं. हर शाखा में हजार से ज्यादा युवा काम करते हैं और इन लोगों ने सौ से ज्यादा लड़कियों का यौन शोषण किया है.

संगीता की शिकायत और स्थानीय सीजेएम कोर्ट के दबाव में मुजफ्फरपुर की पुलिस सक्रिय हुई और युवती के साथ यौन शोषण के आरोपी तिलक कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है. कंपनी के सीएमडी मनीष सिन्हा समेत अन्य आठ आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं. पुलिस बिहार में डीबीआर यूनिक कंपनी की सभी शाखाओं पर छापेमारी करने, उन्हें बंद कराने और आरोपियों की गिरफ्तारी का प्रयास करने का दावा कर रही है.

मगर एक संवाददाता ने पूर्वी चंपारण जिले के सीमावर्ती कस्बे रक्सौल में डीबीआर यूनिक की शाखा में काम-काज होते देखा और वहां के कर्मियों से बातचीत की. जब इस मामले की सूचना मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी अवधेश दीक्षित को दी गई तो उन्होंने कहा, "हम लोग रक्सौल वाले ऑफिस को भी वेरिफाइ करवाते हैं."

इंडिया टुडे से बातचीत में पीड़िता संगीता कुमारी ने आपबीती बताते हुए कहा, "मेरा यौन शोषण करने वाले तिलक कुमार सिंह ने ही सबसे पहले फेसबुक के जरिए मुझे इस कंपनी में जॉब करने का ऑफर दिया था. उसने बताया था कि यह मेडिसिन कंपनी है. ऑफिस का काम है. रहने-खाने की सुविधा है. ड्यूटी के बाद पढ़ाई भी कर सकती हो. यहां जॉइनिंग के नाम पर मुझसे 20,000 रुपए लिए गए, जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई. लेकिन जॉब ट्रेनिंग के दौरान मुझे सिर्फ फ्रॉड कॉल करना सिखाया गया."

संगीता आगे दावा करती हैं कि "जब मैंने सैलरी की मांग की तो मुझसे कंपनी के सीएमडी मनीष सिन्हा और तिलक ने कहा कि तुम पचास लोगों को कंपनी से जोड़ो तो तुम भी कंपनी की शेयर होल्डर हो जाओगी. फिर अपने सामने दबाव बनाकर फोन का स्पीकर ऑन करके मुझसे ये कॉल करवाने लगे. इनके दबाव में मैंने अपने बहन और भाई समेत कई रिश्तेदारों को यहां नौकरी के नाम पर बुलाया. इस बीच मेरे साथ मारपीट और यौन शोषण भी होने लगा."

संगीता के मुताबिक, मई, 2023 में एक लड़के (ओंकारनाथ पांडेय) की शिकायत पर जब कंपनी की मुजफ्फरपुर शाखा पर छापा पड़ा तो उन्हें और दूसरे लोगों को हाजीपुर ले जाया गया. वहां संगीता की शादी तिलक से जबरन करवा दी गई. वे एक दफा कंपनी से भागकर घर चली गईं तो "इमोशनल ब्लैकमेल" करके उन्हें फिर बुलवाया गया और उन्हीं के शब्दों में, "मेरा फोन रिसेट किया, सिम तोड़ी और मुझे रात दो बजे मुजफ्फरपुर के बैरिया बस स्टैंड पर छोड़ दिया." उसके बाद संगीता ने पुलिस में शिकायत की.

इस तरह की शिकायत सिर्फ संगीता ने नहीं की है. मुजफ्फरपुर पुलिस ने स्वीकार किया है कि कंपनी के खिलाफ अररिया, दरभंगा, रक्सौल और गोपालगंज में भी शिकायतें हुई हैं. मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी अवधेश दीक्षित कहते हैं, "आयुर्वेदिक दवा का काम सिर्फ दिखावटी है, इनका मुख्य काम मनी सर्कुलेशन का है. यहां स्टाफ को टारगेट दिया जाता है कि इन्हें महीने में इतने नए लड़के या लड़कियों को जोड़ना है. किसी को पचास, किसी को चालीस. ये जितना जोड़ते हैं, उसी के हिसाब से इन्हें सैलरी दी जाती है."

ऐसी ही एक शिकायत उत्तर प्रदेश के महाराजगंज के रहने वाले ओंकारनाथ पांडे ने 19 मई, 2023 को मुजफ्फरपुर के अहियापुर थाने में दर्ज कराई थी. एक दोस्त के बहकावे पर वे अपने एक अन्य दोस्त के साथ यहां आए थे. दोनों से 21,500 रुपए लिए गए और 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद दोनों को कहा गया कि वे दो-दो दोस्त बुलाएं. उन्होंने तीन दोस्तों को बुलाया. फिर तीनों से 21,500 लेकर उन्हें भी दो-दो दोस्तों को बुलाने कहा गया. उन्होंने इनकार किया तो जमकर पिटाई की गई. खाना-पीना बंद कर दिया. मार कर फेंक देने की धमकी दी गई. पांचों किसी तरह जान बचाकर भागे.

इस शिकायत के बाद मुजफ्फरपुर में कंपनी की शाखा पर छापेमारी हुई और दस में से सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इस मामले में भी कंपनी का सीएमडी मनीष सिन्हा आरोपी था मगर बताया जाता है कि उसे जांच के नाम पर छोड़ दिया गया.

इससे ठीक पांच दिन पहले 14 मई, 2023 को पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में भी झारखंड की एक नाबालिग आदिवासी युवती की मां ने इस कंपनी में काम करने वाली अपनी बेटी के साथ नशे की दवा देकर यौन शोषण का आरोप लगाया था. 19 मई, 2023 को रक्सौल से ट्रेन से आ रही कंपनी की 12 युवतियों को मुजफ्फरपुर रेल पुलिस ने मुक्त कराया.

इन लड़कियों ने भी डीबीआर यूनिक में यौन शोषण की शिकायत की थी. संगीता का कहना है कि वहां गैंगरेप हुआ था. ऐसी शिकायतें गोपालगंज, दरभंगा और रोहतास जिले में भी हुईं. गोपालगंज, जो मनीष सिन्हा का अपना जिला है, वहां डीबीआर यूनिक के दो दफ्तरों पर छापे भी पड़े.

मगर इतनी शिकायतों के बाद भी कंपनी के खिलाफ बिहार की पुलिस अब तक ठोस कार्रवाई करती नजर नहीं आ रही. सूचना है कि बिहार में अभी भी कंपनी की कई शाखाओं में हजारों युवक यह काम कर रहे हैं. ये अभी भी मारपीट और शोषण का शिकार हो रहे हैं और दूसरे युवाओं को ठगने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं. मुख्य आरोपी कंपनी के सीएमडी मनीष सिन्हा समेत ज्यादातर लोग खबर लिखे जाने तक पुलिस की पकड़ से बाहर थे.

पुलिस की सुस्त कार्रवाई

पूरे मामले में पुलिस के रवैये का पता इस बात से चल जाता है कि पीड़िता संगीता ने जनवरी, 2024 में सबसे पहले एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की थी मगर उसकी शिकायत पुलिस ने नहीं ली. कई बार कोशिश करने पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो वह फरवरी में अदालत की शरण में गई. फिर कोर्ट ने मार्च महीने के आखिर में अहियापुर थाने को मामला दर्ज करने का आदेश दिया.

इस आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई. फिर अप्रैल में अदालत ने मुजफ्फरपुर पुलिस को शोकॉज नोटिस जारी किया. तब जाकर 5 अप्रैल को संगीता की एफआईआर दर्ज हुई. फिर चुनावी व्यस्तता के नाम पर जून तक मामला लटका रहा. 6 जून, 2024 को पुलिस ने लड़की को गवाह लेकर आने को कहा.

8-9 जून को गवाहियां हुईं, फिर मीडिया में खबर आने के बाद 18 जून को पुलिस ने तिलक को यूपी के गोरखपुर से गिरफ्तार किया. दो दिन बाद अजय प्रताप की गिरफ्तारी हुई. इस सब में कंपनी को छह महीने से अधिक का वक्त मिल गया.

हालांकि, मुजफ्फरपुर पुलिस अभी भी यौन शोषण की बात को स्वीकार नहीं करती. इस केस को देख रहे मुजफ्फरपुर के सिटी एसपी अवधेश दीक्षित इंडिया टुडे से बातचीत में कहते हैं, "कंपनी के लोगों से मारपीट की बात तो सामने आ रही है, मगर सेक्सुअल असॉल्ट की बात अभी तक नहीं आई है. आरोप था कि सौ से दो सौ लड़कियों के साथ यौन शोषण हुआ है, वह भी निकलकर नहीं आया है."

वे आगे कहते हैं, "अभी तक हम लोगों को सिर्फ इसी लड़की की शिकायत मिली है. हमने पूछताछ की तो लोगों ने मारपीट होने और पैसा न दिए जाने की बात तो मानी, मगर यौन शोषण की बात नहीं कही."

इधर पीड़िता संगीता अभी भी इस बात पर कायम है कि कंपनी में सौ से अधिक लड़कियों के साथ यौन शोषण हुआ है. उनका कहना है, "रक्सौल में गैंपरेप, रेल पुलिस के 12 लड़कियों को रेस्क्यू करने, नाबालिग लड़की की शिकायत आदि मामले तो सामने हैं. मेरे पास कई दूसरे सबूत भी हैं, जो मैंने पुलिस को दिए हैं."

वे बताती हैं, "दरअसल, लोक-लाज और कंपनी के लोगों के दबाव के कारण लड़कियां सामने नहीं आ रहीं. खुद शिकायत के बाद मुझे भी कंपनी के लोगों ने किडनैप किया था. मेरे परिवार को धमकी दी, मेरे भाई को जान से मारने की धमकी दी गई है. ऐसे में जब तक पुलिस लड़कियों को सुरक्षा की गारंटी नहीं देगी, आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करेगी, लड़कियां सामने आने में हिचकेंगी."

बिहार के महिला संगठनों ने भी पुलिस के लापरवाह रवैये के खिलाफ सोमवार 24 जून को राजधानी पटना में विरोध प्रदर्शन किया. विरोध प्रदर्शन के दौरान भाकपा-माले की विधान पार्षद शशि यादव भी मौजूद थीं. शशि इस घटना को लेकर पार्टी की जांच टीम के साथ मुजफ्फरपुर भी गई थीं.

वे कहती हैं, "जिस बिल्डिंग में घटना हुई, उसे सील तक नहीं किया गया. वहां कई लड़के तब भी रह रहे थे. मुख्य आरोपी को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है. एक साल पहले जिस बिल्डिंग में पुलिस ने छापा मारा था, वहां अभी भी दफ्तर चल रहा है. यह बिना किसी राजनैतिक संरक्षण के संभव नहीं. प्रशासन के लोग पीड़ितों को ही धमका रहे हैं. सिटी एसपी इस पूरी घटना को प्रेम प्रसंग बता रहे हैं. पुलिस लीपापोती कर रही है."

शशि कहती हैं, "मुजफ्फरपुर के बालिका गृह कांड में भी ऐसा ही हुआ था. पहले लड़कियां सामने नहीं आ रही थीं. इसलिए अभी जो लड़की हिम्मत करके सामने आई है, उसे सुरक्षा मिले, उसकी बातों पर गंभीरता से जांच हो तो सारी चीजें सामने आ जाएंगी."

बिहार में महिलाओं के एक संगठन बिहार महिला समाज की कार्यकारी अध्यक्ष निवेदिता कहती हैं, "अभी हम लोग बालिका गृह कांड से उबरे नहीं हैं. मगर उसी शहर में ऐसी घटना हुई जिसमें पुलिस सरकार, दलालों और राजनेताओं का पूरा नेटवर्क शामिल लगता है. यह केस सिर्फ बिहार का नहीं है, इनका नेटवर्क पूरे देश में हैं. केस की उच्चस्तरीय जांच हो और यौन हिंसा से गुजरी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए."

कंपनी के अधिकारियों की बिहार के बड़े राजनेताओं तक पहुंच की बात भी हो रही है. सीएमडी मनीष सिन्हा के फेसबुक पेज पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और केंद्रीय राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ उसकी तस्वीरें हैं. इनमें मनीष उन्हें मंत्री बनने की बधाई देता नजर आ रहा है. इससे पहले उस पर ठगी और मारपीट का केस दर्ज हो चुका था.

कंपनी के पहले वार्षिकोत्सव में उस वक्त बिहार के उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद मुख्य अतिथि थे. इस मौके की उनकी तसवीर भी फेसबुक पेज पर है. इस मामले में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह अचानक सक्रिय हो गए. एक आयोजन में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा था, "इस मामले में लव जिहाद की आशंका लगती है, इसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए."

अभी तक केस में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. इसके कई सेंटर बिहार में चल ही रहे हैं. यह संवाददाता जब रक्सौल में कंपनी के एक सेंटर पर गया तो वहां सोना सिनेमा हॉल के बगल में खुले सेंटर में दो दर्जन से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे थे. सेंटर के फोटो, वीडियो और कंपनी के स्टाफ से बातचीत के ऑडियो इंडिया टुडे के पास हैं. संवाददाता के पहुंचने पर नए स्टाफ को वहां से हटा दिया गया.

सीनियर स्टाफ ने कंपनी के कुछ प्रोडक्ट दिखाए, जिनमें कुछ आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ शूटिंग, शर्टिंग और रेडीमेड कपड़े थे. वहां स्टोर इंचार्ज रंजीत कुमार और सेल्स के गगनजीत दोनों ने खुद को बिहटा, पटना का रहने वाला बताया और कहा कि यह शाखा कभी बंद नहीं हुई. एक साल से हम लोग यहां हैं. यहां कभी पुलिस का छापा भी नहीं पड़ा.

उन्होंने कंपनी के एक दूसरे अधिकारी से फोन पर बात कराई, उसने कहा कि कुछ व्यक्तिगत मामले हैं, पूरी कंपनी में दिक्कत नहीं है. कंपनी का एक प्रतिद्वंद्वी इसे बदनाम करने की साजिश रच रहा है. देखते हैं इस सनसनीखेज मामले में पुलिस को सख्त कार्रवाई कर निष्कर्ष तक पहुंचने में कितना वक्त लगता है.

ठगी की ट्रेनिंग, कुटाई और यौन शोषण

इस कंपनी का पूरा नाम डीबीआर बायोरिसर्च आयुर्वेदा प्राइवेट लिमिटेड है. 28 जून, 2020 को रजिस्टर्ड यह कंपनी 'बीमारी और बेरोजगारी से मुक्त भारत' को अपना संकल्प बताती है. इसका हेड ऑफिस गुजरात के सूरत शहर में है. डीबीआर यूनिक के फेसबुक पेज पर कंपनी के कई लोगों की उपलब्धियां दर्ज हैं, कोई अपनी कमाई से महंगी कार खरीद रहा है तो कोई महीने के दस लाख तक कमा रहा है. अभी इन लोगों के खिलाफ मुकदमे चल रहे हैं. इनमें कन्हैया कुशवाहा और हृदयानंद सिंह के नाम प्रमुख हैं.

पीड़िता संगीता कहती हैं, "कंपनी कर्मियों को एक फ्लैट में रखती है. थोड़ी बहुत ट्रेनिंग के बाद उन्हें लोगों को बुलाने के काम में लगा दिया जाता है. ट्रेनिंग भी इसी की होती है."

कर्मियों को लाइव ठगी सिखा रहे एक ट्रेनर का ऑडियो एक व्यक्ति ने इंडिया टुडे को उपलब्ध कराया है. इसमें इच्छुक उम्मीदवारों को दो ऑप्शन दिए जाते हैं. अस्थायी और स्थायी नौकरी के. स्थायी नौकरी के लिए 20,500 देने की मांग की जाती है. इसमें पीएफ, ग्रेच्युटी, हेल्थ इंश्योरेंस, चालीस साल तक मुफ्त भोजन और आवास और आठ घंटे की नौकरी के सपने दिखाए जाते हैं. यह ऑडियो डीबीआर यूनिक का ही है, इसकी पुष्टि इंडिया टुडे नहीं करता है.

संगीता कहती हैं, "महिला और पुरुष सभी कर्मियों को एक ही साथ एक फ्लैट में रखा जाता है. एक फ्लैट में तीस से अधिक लोग होते हैं. इनमें आठ से दस लड़कियां होती हैं. सभी पूरे दिन साथ रहते और खाते-पीते हैं. लड़कियों के लिए सिर्फ सोने का एक अलग कमरा होता है, जिसमें सभी लड़कियां सोती हैं. हर फ्लैट को टारगेट दिया जाता है कि वे एक महीने में अपनी संख्या दोगुनी कर लें, नहीं तो खाना-पीना बंद और मारपीट शुरू हो जाती है."

संगीता कहती हैं, "अक्सर रात बारह बजे के बाद सीनियर अधिकारी मीटिंग करते हैं. मीटिंग में अगर उन लोगों को कोई लड़की पसंद आ जाती है तो उसे अपने कमरे में बुलाने का दबाव उसे कंपनी में लाने वाले पर बनाते हैं. ज्यादातर लड़कियां इस तरह यौन शोषण के चंगुल में फंस जाती हैं."

गैस चूल्हा मैकेनिक का बेटा है मनीष सिन्हा

इस कंपनी का सीएमडी मनीष सिन्हा गोपालगंज के कररिया गांव के पूर्वी टोला का रहने वाला है. इस टोले में सभी लोग अवधिया कुर्मी जाति के हैं. टोले में कोई नहीं जानता कि मनीष सिन्हा इतनी बड़ी कंपनी चलाता है, जिसकी देश के इलाकों में शाखाएं हैं. रिश्ते में मनीष के चाचा शिवनाथ प्रसाद और संजय पाल बताते हैं कि उसके पिता गोपालगंज की एक दुकान में गैस चूल्हे की मरम्मत का काम करते थे. मनीष की भाभी भी उसके बारे में कुछ नहीं बता पाती हैं.

गांव का एक व्यक्ति जो कभी किसी फाइनेंस कंपनी में मनीष के साथ रहा था, नाम न उजागर करने की शर्त पर कई महत्वपूर्ण सूचनाएं देता है. उसने बताया कि "महज बीए पास मनीष ने सबसे पहले कोलकाता की हुगली एग्रोटेक में काम किया था. फिर मेरे जरिए उसे सिलिकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर में काम मिला. इस कंपनी के जरिए उसने अपना नेटवर्क बनाना शुरू किया. वह किसी से भी मिलता है तो उसका पता और फोन नंबर अपने पास रख लेता है. यही उसकी सबसे बड़ी खूबी है. इस कंपनी के बाद उसने एक बाइनरी प्लान वाली कंपनी खोली. उसके बाद यह कंपनी शुरू की है."

डीबीआर: सिलसिला शिकायतों का

1 जून 2022; अररिया - विनय कुमार ने नौकरी के नाम पर बुलाकर कमरे में बंद रखने की शिकायत की.

14 मई 23; रक्सौल : दुमका झारखंड की एक नाबालिग आदिवासी बच्ची ने दवा खिलाकर यौन शोषण का आरोप लगाया.

19 मई 2023; मुजफ्फरपुर : ट्रेन से रक्सौल से आ रही 12 लड़कियों को रेलवे पुलिस ने रेस्क्यू किया. इन लड़कियों ने डीबीआर यूनिक में काम के नाम पर यौन शोषण की शिकायत की.

19 मई 2023; मुजफ्फरपुर : महाराजगंज यूपी के ओंकारनाथ पांडेय ने एफआइआर दर्ज कराई. इस पर कंपनी के मुजफ्फरपुर आफिस में छापेमारी हुई और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया.

27 अगस्त 2023; दरभंगा : साहेबगंज, झारखंड के मो. हक साहेब ने नौकरी के नाम पर 16,500 रुपए वसूलने और बंधक बनाकर रखने की शिकायत की. दो लोग गिरफ्तार.

5 नवंबर, 2023; गोपालगंज : पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी शुभम शेख और अशफाक आलम ने कंपनी पर नौकरी के नाम पर झांसा देने और जबरन ठगी का गैंग चलवाने की शिकायत की. कंपनी के दो ठिकानों पर स्थानीय पुलिस और एटीएस ने छापेमारी की. दो ट्रेनिंग सेंटर में 36 लोगों को पकड़ा गया. 27 को थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया.

अगस्त 2023; रोहतास : मध्य प्रदेश के एक युवक को काम के बदले 15,000 रुपए देने के लिए जबरन रोका गया था. उसे रोहतास पुलिस ने छुड़वाकर घर भेजा.

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