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उत्तर प्रदेश में पेपर लीक के बाद अब सामने आया कॉपीकांड

यूपी लोक सेवा आयोग के न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिवीजन भर्ती 2022 की मुख्य परीक्षा में कॉपी की अदला बदली का आरोप, हाइकोर्ट ने मांगीं उत्तर पुस्तिकाएं

प्रयागराज में यूपीपीएससी का दफ्तर
प्रयागराज में यूपीपीएससी का दफ्तर
अपडेटेड 12 जुलाई , 2024

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) 2023 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर लीक होने के आरोप ने उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे. कई दिनों तक अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बाद लोकसभा चुनाव नजदीक आता देख आखिरकार 2 मार्च को आयोग ने अपने इतिहास की सबसे बड़ी परीक्षा को निरस्त कर दिया. आरओ-एआरओ (2023) के 411 पदों के लिए 10,76,004 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए थे.

यह परीक्षा 11 फरवरी को प्रदेश के 58 जिलों में 2,387 केंद्रों पर संपन्न हुई थी. आरओ-एआरओ परीक्षा से पहले उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज जूनियर डिविजन (पीसीएस-जे) भर्ती 2023 की मुख्य परीक्षा में भी गड़बड़ी की बू आने लगी थी. आयोग ने दिसंबर, 2022 में पीसीएस-जे के तहत 303 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन छापा था. 24 मई, 2023 को मुख्य परीक्षा का आयोजन हुआ. आयोग ने 30 अगस्त, 2023 को इस परीक्षा का नतीजा प्रकाशित किया.

पीसीएस-जे परीक्षा का परिणाम आने के बाद इसकी मुख्य परीक्षा में शामिल रहे अभ्यर्थी श्रवण पांडेय को अपने अंकों पर जरा भी विश्वास नहीं हुआ. उनका पेपर अच्छा हुआ था और उन्हें पूरी उम्मीद थी कि वे इस बार आयोग की परीक्षा में सेलेक्ट होकर जज बन जाएंगे. श्रवण को मुख्य परीक्षा में मिले अंकों में कुछ गड़बड़ी की आशंका हुई तो उन्होंने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत आयोग से छह प्रश्नपत्रों में मिले प्राप्तांक की जानकारी मांगी तो पता चला कि अंग्रेजी में उन्हें 200 में केवल 47 अंक मिले हैं. श्रवण ने आरटीआई के तहत सभी छह उत्तर पुस्तिकाएं दिखाए जाने की मांग की.

वे जब उत्तर पुस्तिकाएं देखने आयोग पहुंचे तो वे चकित रह गए. अंग्रेजी विषय की उत्तर पुस्तिका पर उनकी हैंडराइटिंग ही नहीं है जो कि उन्होंने अन्य प्रश्नपत्रों में लिखी है. साथ ही हिंदी की उत्तर पुस्तिका में तीन चार पन्ने फटे हुए पाए गए. उन्होंने आयोग से इसकी शिकायत की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. अंतत: श्रवण ने हाइकोर्ट की शरण ली. न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार वर्मा की खंडपीठ ने 5 जून को आयोग की पीसीएस जे परीक्षा के अभ्यर्थी श्रवण की सभी छह प्रश्नपत्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को कोर्ट के सामने पेश करने का आदेश दिया.

उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदलने की बात सामने आने पर अन्य अभ्यर्थियों में हड़कंप मच गया. जो अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन इंटरव्यू के लिए सफल घोषित नहीं किए जा सके, अब उन्हें भी आशंका है कि कहीं उनकी कॉपियों में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई. मुख्य परीक्षा में 3,019 अभ्यर्थी शामिल हुए थे, जिनके छह विषयों की कुल 18,042 उत्तर पुस्तिकाएं हैं और इन सभी की जांच होनी है. मुख्य परीक्षा में शामिल अन्य अभ्यर्थियों को आशंका है कि अगर किसी एक अभ्यर्थी के साथ ऐसा हो सकता है तो दूसरे अभ्यर्थी भी इस गड़बड़ी का शिकार हो सकते हैं. ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने अपनी कॉपियां देखने के लिए सूचना के अधिकार के तहत आवेदन नहीं किए थे, अब वे भी अपनी कॉपियां देखना चाहते हैं.

उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग का मिलान न होने या कॉपियों की अदला बदली जैसे आरोपों से सकते में आए यूपी लोकसभा आयोग ने पीसीएस जे मुख्य परीक्षा की सभी कॉपियों का वेरिफिकेशन शुरू करा दिया. यानी आयोग कॉपी बदले जाने के आरोपों को अभी खारिज नहीं कर रहा. आयोग की ओर से न्यायालय में दिए गए हलफनामे में बताया गया है कि अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं पर अनुक्रमांक के स्थान पर फेक मास्टरकोड अंकित होता है. आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि फेक मास्टरकोड को डिकोड करने के बाद ही वास्तविक उत्तर पुस्तिका का पता चल सकेगा.

इसके बाद ही 18,042 उत्तर पुस्तिकाओं में से अभ्यर्थी की अंग्रेजी विषय की कॉपी निकाली जा सकेगी. इसके साथ ही आयोग को न्यायालय में अभ्यर्थी की सभी छह विषयों की उत्तर पुस्तिकाएं प्रस्तुत करनी हैं. मामले का सच सामने आने के बाद आयोग अपने स्तर से बड़ी कार्रवाई कर सकता है. फिलहाल, बीते दिनों आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण के बाद विवादों में घिरे आयोग को अब एक और चुनौती का सामना करना पड़ रहा है.

यूपीपीएससी की कई भर्ती परीक्षाओं में मुख्य परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी और हाइकोर्ट में एडवोकेट जयेंद्र कृष्ण गिरि बताते हैं, "आयोग के भीतर कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं. विभिन्न मामलों में ये गड़बड़ियों में शामिल भी रहे हैं. इसके बावजूद आयोग अपने भीतर कर्मचारियों के रैकेट पर अंकुश नहीं लगाया पाया है.'' आयोग की भर्ती परीक्षाएं 2011 से ही सवालों के घेरे में हैं. एपीएस के साथ पीसीएस- 2011, 2013 व 2015 की मुख्य परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें हुई थीं. पक्षपात करते हुए कई अभ्यर्थियों को ज्यादा अंक दिए जाने की शिकायत की गई थी.

वहीं, कुछ को कम अंक दिए जाने की भी शिकायत हुई थी. इसके आधार पर अभ्यर्थियों ने दोबारा परीक्षा कराने की भी मांग की थी. अभ्यर्थियों की यह मांग तो नहीं मानी गई, लेकिन लगातार आंदोलनों के बाद सीबीआई जांच बैठा दी गई. पूरे मामले की प्रारंभिक जांच के आधार पर सीबीआइ की ओर से एपीएस-2011 और पीसीएस-2015 मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन में गड़बड़ी की बात करते हुए एफआईआर लिखाई गई.

सीबीआई 2011 से 2015 के बीच करीब 600 भर्तियों की जांच कर रही है. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय कहते हैं, "सीबीआई आयोग के कई अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा लिखाए जाने की अनुमति मांग रही है, लेकिन इस दिशा में कोई पहल नहीं हुई. आयोग की शुचिता के लिए ऐसे अफसरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए."

उधर, पीसीएस-जे में शामिल अभ्यर्थी आयोग के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर मोर्चा खोल चुके हैं. प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति ने कॉपियों की जांच के बजाए नोटिस जारी करते हुए सभी अभ्यर्थियों को बुलाकर कॉपी दिखवाने की मांग उठा दी और राजभवन पत्र भेजकर जांच की मांग भी कर दी. डिकोडिंग की गोपनीय प्रक्रिया के बाद भी गड़बड़ी का पता लगाने में मुश्किल आ रही थी.

चौतरफा बढ़ते दबाव के मद्देनजर आयोग ने परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने का निर्णय लिया है. विशेष अभियान 20 जून से शुरू होकर 30 जुलाई तक चल रहा है. अभ्यर्थियों को अपनी कॉपी देखने के लिए 30 मिनट मिल रहे हैं.

इस तरह अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका में हैंडराइटिंग बदलने का आरोप उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के गले की फांस बन गया है. आरओ-एआरओ पेपर लीक और पीसीएस जे की उत्तर पुस्तिकाओं में गड़बड़ी से जुड़े प्रकरणों की वजह से प्रदेश में 2017 में सरकार बदलने के बाद से नियमित भर्तियां कर रहे आयोग की रफ्तार पर भी ब्रेक लग गया है. इसने लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अंधकारमय कर दिया है.

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