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अपने चौथे कार्यकाल में आंध्र प्रदेश के लिए क्या है चंद्रबाबू नायडू का प्लान?

74 साल की उम्र में अपने राजनैतिक करियर के करीब-करीब आखिरी पड़ाव में नायडू निश्चित ही राज्य के इतिहास में अपनी स्थायी छाप छोड़ना चाहेंगे

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण शपथ ग्रहण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ
अपडेटेड 25 जून , 2024

आंध्र प्रदेश के नए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अक्सर भावनाओं में बह जाते हैं. ऐसा ही 12 जून को हुआ, जब दोपहर से ठीक पहले राज्यपाल सैयद अब्दुल नजीर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई. उसके पल भर बाद नायडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुलदस्ता भेंट किया और जोर से गले लग गए.

गन्नावरम हवाई अड्डे के पास केसरपल्ली सूचना प्रौद्योगिकी पार्क में नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), अभिनेता पवन कल्याण की जनसेना पार्टी (जेएसपी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्साही समर्थकों की मौजूदगी में राज्य की पहली गठबंधन सरकार का आगाज हुआ.

नायडू ने सौहार्द की यह भावना अपने 24 सदस्यीय मंत्रिमंडल में भी दिखाई. उसमें जेएसपी से पवन कल्याण समेत तीन मंत्री और भाजपा से एक मंत्री हैं. उप-मुख्यमंत्री कल्याण और नायडू के बेटे नारा लोकेश पदानुक्रम में तीसरे नंबर पर हैं, और पहली बार विधायक बने हैं. 175 सीटों वाली विधानसभा में टीडीपी के 135 और जेएसपी के 21 विधायक हैं. संतुलन साधने का चतुराई भरा काम पूरा करने के बाद नायडू को उम्मीद है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बैनर तले गठबंधन सरकार राज्य के कायाकल्प में मददगार साबित होगी.

11 जून को विधायक दल का नेता चुने जाने के फौरन बाद उन्होंने ऐलान किया, "हमारा लक्ष्य और चुनौती आंध्र प्रदेश का पुनर्निर्माण करना है." यह नायडू का चौथा कार्यकाल होगा और अपनी इस भूमिका से वे बखूबी वाकिफ हैं, हालांकि उन्हें राज्य के खाली खजाने और राजकाज के नए मुद्दों से रूबरू होना होगा. 

नायडू कुर्सी संभालने के दिन ही सचिवालय पहुंचे और चुनावी वादों से जुड़ी फाइलों पर हस्ताक्षर किए. इसमें शिक्षकों की भर्ती और भूमि स्वामित्व अधिनियम को निरस्त करना शामिल था, जिसे पिछली युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी सरकार लागू करने की कोशिश कर रही थी. उनके अन्य आदेशों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 3,000 रुपए से बढ़ाकर 4,000 रुपए प्रति माह करना और राज्य में कौशल जनगणना शुरू करना शामिल था.

नायडू अपनी पसंदीदा परियोजनाओं - अमरावती और पोलावरम लिफ्ट सिंचाई योजना को नए सिरे से शुरू करने के लिए भी दृढ़ हैं. अपने पूर्ववर्ती जगन मोहन की त्रि-राजधानी योजना को दरकिनार करते हुए नायडू ने जोर देकर कहा कि अमरावती राज्य की एकमात्र राजधानी बनी रहेगी. लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि विशाखापत्तनम को आंध्र की वित्तीय राजधानी के रूप में विकसित किया जाएगा.

यहां जगन ने राज्य प्रशासन को स्थानांतरित करने की योजना बनाई थी. नायडू ने कुर्नूल की विकास आवश्यकताओं को भी पूरा किया करने की बात कही, जिसे जगन ने राज्य की न्यायिक राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया था. ऐसा करके नायडू राज्य में क्षेत्रीय आकांक्षाओं के प्रति सचेत हैं और कुछ हद तक जगन जो हासिल करने की कोशिश कर रहे थे, उस पर ध्यान दे रहे हैं.

बेशक, टीडीपी गठबंधन की अगुआई करेगी. हैदराबाद के नालसार विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाले हरथी वागीशन कहते हैं, "भाजपा और जेएसपी के साथ थोड़ा-बहुत तालमेल कायम रखा जाएगा और दोनों दलों के लिए साथ चलना भी जरूरी है." राजधानी की पहेली को सुलझाने के अलावा, नायडू की प्राथमिकताओं की सूची में संगठित क्षेत्र में रोजगार बढ़ाना, सड़कों जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार करना और सबसे अहम, अपने राज्य के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा प्राप्त करना शामिल है, जिसके धन का उपयोग वे विकास को गति देने के लिए कर सकते हैं.

नायडू ने कहा है, "लोगों ने राज्य को बचाने के लिए अपना काम किया है. अब यह तय करने की जिम्मेदारी हम पर है कि लोगों की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं पूरी हों." गठबंधन ने 57 फीसद भारी वोट शेयर हासिल किया और सिर्फ 11 विधानसभा सीटें खोईं. यह ऐसा जोरदार बहुमत है, जो टीडीपी को पिछले किसी भी जनादेश में नहीं मिला था.

आंध्र प्रदेश के मतदाताओं के भारी भरोसे और उम्मीद के मद्देनजर 74 साल की उम्र में अपने राजनैतिक करियर के करीब-करीब आखिरी पड़ाव में नायडू निश्चित ही राज्य के इतिहास में अपनी स्थायी छाप छोड़ना चाहेंगे. राजनैतिक टिप्पणीकार डेंडुकुरी गौतम कहते हैं, "अब वे खुद को सबसे बेहतर स्थिति में पाते हैं. उनके पास राज्य में मजबूत जनादेश है और केंद्र में महत्वपूर्ण सहयोगी हैं, जहां उनके समर्थन पर ही सरकार टिकी है."

एक कुशल प्रशासक के रूप में नायडू की कार्यशैली पहले जैसी रहने की संभावना है, लेकिन वे निश्चित रूप से राज्य के लिए धन जुटाने में आक्रामक होंगे, ताकि यह तय हो सके कि वे इस कार्यकाल के भीतर आंध्र प्रदेश की विकास आकांक्षाओं को पूरा करें. गौतम कहते हैं, "वे निश्चित रूप से स्थिति का पूरा लाभ उठाएंगे और यह देखना बाकी है कि भाजपा समय-समय पर उन्हें कितना लाभ पहुंचाती है. चुनावी पराजय के बाद और मजबूत विपक्ष के साथ भाजपा को पूरे देश का ख्याल रखना है." हालांकि ये हालात भी नायडू को अपना हक मांगने से नहीं रोक पाएंगे.

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