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केरल : आखिरकार 'लाल' किले में भगवा झंडा लहराने में कामयाब रही भाजपा

फिर से राहुल की लहर लेकिन केरल में आखिरकार भाजपा ने अपना झंडा गाड़ ही दिया. पार्टी ने त्रिशूर लोकसभा सीट से अपनी पहली जीत दर्ज की

सुरेश गोपी, भाजपा
सुरेश गोपी, भाजपा
अपडेटेड 24 जून , 2024

आखिरी किले को भेद लिया गया है. भगवा हवाएं आखिरकार केरल पहुंच गई हैं. भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा में त्रिशूर से अपना खाता खोल लिया है और इसके लिए उसने मलयाली फिल्मों के बुजुर्ग सुपरस्टार की मदद ली है.

एक्शन थ्रिलर फिल्मों के सदाबहार हीरो, 65 वर्षीय सुरेश गोपी ने तीसरी बार में राजनैतिक बॉक्स ऑफिस पर 74,686 वोटों की जीत के साथ कामयाबी का झंडा गाड़ा है.

उन्होंने यह सफलता भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वीएस सुनील कुमार और कांग्रेस के पूर्व सांसद तथा दिवंगत मुख्यमंत्री के करुणाकरन के पुत्र मुरलीधरन जैसे दो प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ हासिल की है. 

पार्टी वोटों में विभाजन के कारण ऐसा हुआ जो मध्य केरल के अपने गढ़ में कांग्रेस को हार मिली. इंडिया टुडे से बात करते हुए गोपी काफी उत्साहित नजर आए, लेकिन इस उत्साह में वे जीत के लिए अपनी दो आस्था धुरी को धन्यवाद देना नहीं भूले. उन्होंने कहा, ''जीत के लिए भगवान कृष्ण और मदर ऑफ लॉर्ड (मदर मैरी) को धन्यवाद.'' आम राय यह है कि ऊंची जातियों के हिंदू वोटों और ईसाई समुदाय के एक हिस्से ने गोपी की जीत में मदद की. (लेडी ऑफ द लॉर्ड कैथेड्रल त्रिशूर का बड़ा चर्च है.)

कांग्रेस में यह सवाल उठेंगे कि पार्टी की अगुआई में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (यूडीएफ) की लहर के बावजूद वह मध्य केरल के अपने ही गढ़ में कैसे हार गई. इस गठजोड़ ने राज्य की 20 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की है. गोपी 2016 से ही त्रिशूर फतह करने की कोशिश कर रहे थे. तब उन्हें यहां से पहली बार विधानसभा चुनाव में उतारा गया था.

उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाग्य आजमाया लेकिन नतीजा वही रहा. इस बार भी उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी टीम का पूरा समर्थन था. (प्रधानमंत्री तीन बार इस सीट पर प्रचार के लिए आए, वे जनवरी में गुरुवायुर मंदिर में गोपी की बेटी के विवाह में भी शामिल हुए).

गोपी की जीत ही भाजपा के लिए एकमात्र अच्छी खबर नहीं है. उद्योगपति और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने राजधानी तिरुवनंतपुरम सीट से तीन बार के सांसद शशि थरूर को कड़ी टक्कर दी और मतगणना के आखिरी दौर में तटवर्ती पट्टी के वोट थरूर की जीत में मददगार बने. पार्टी का तेजी से बढ़ता वोट प्रतिशत (16.7 फीसद तक) और कम से कम दो अन्य लोकसभा सीटों पर जोरदार लड़ाई से भाजपा कार्यकर्ताओं का दिल खुश हो जाना चाहिए. 

इसलिए केरल में कांग्रेस जहां राहुल गांधी की एक और लहर (राहुल गांधी वायनाड से 3,64,422 वोटों के भारी बहुमत से जीते) का जश्न मना रही है, वहीं उन्हें और कम्युनिस्टों को चिंता जरूर होगी. वाम मोर्चे के फिर से निराशाजनक प्रदर्शन (महज एक सीट: अलातुर) से राज्य में पिनारई विजयन सरकार को लेकर कुछ बेचैनी तो होगी ही.

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