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हरियाणा में क्या 'हाथ' बदल रहा है हालात?

कांग्रेस ने भाजपा के कब्जे वाली 10 में से न सिर्फ आधी सीटें जीतीं, बल्कि 2024 के आखिर में होने जा रहे विधानसभा चुनाव के लिए अपनी मजबूत चुनौती भी पेश की

हरियाणा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
हरियाणा में विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा
अपडेटेड 21 जून , 2024

हरियाणा की कुल 10 लोकसभा सीटों में से आधी यानी पांच पर जीत हासिल करके कांग्रेस छह महीने में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिए अपनी संभावनाओं को और मजबूत मान रही है. हरियाणा में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया था. वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी को सिर्फ एक सीट मिली थी.

पांच सीट के अलावा ताजा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की वोट हिस्सेदारी 2019 के 28 फीसद के मुकाबले बढ़कर 43.67 फीसद पर पहुंच गई. इसके अलावा राज्य में कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाली आम आदमी पार्टी (आप) को 3.94 फीसद वोट मिले. अगर इन दोनों को जोड़ दिया जाए तो यह आंकड़ा 47.61 फीसद बैठता है, जो भाजपा के 46.11 के आंकड़े से ज्यादा है. अगर विधानसभा सीटों के हिसाब से देखें तो राज्य की 90 विधानसभा सीटों में से 46 पर कांग्रेस को इस लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल हुई. 

इन आंकड़ों से कांग्रेसी खेमे में काफी उत्साह है. पार्टी की इस सफलता के बारे में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नई लोकसभा के लिए चुने गए एक सांसद कहते हैं, "हमने पूरे लोकसभा चुनाव को स्थानीय मुद्दों पर ले जाने की रणनीति अपनाई, जो कामयाब रही. भाजपा मोदी की गारंटी, विकसित भारत, विदेशों में भारत का नाम, दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दे उठा रही थी तो कांग्रेस पार्टी ने किसान आंदोलन में केंद्र और राज्य सरकार के रवैए, तथा राज्य में भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठाए."

दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जजपा) की दुर्दशा भी कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा रही. जजपा को 2019 के विधानसभा चुनाव में 14.8 फीसद वोट मिले थे. लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा घटकर 0.87 फीसद रह गया. कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक संदेश यह भी है कि जेजेपी के जो पारंपरिक जाट वोट कम हुए, वे इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) की तरफ नहीं गए. क्योंकि पार्टी की वोट हिस्सेदारी पहले की तरह ही इस चुनाव में भी 1.74 फीसद ही रही.

कांग्रेस इन आंकड़ों का मतलब यह निकाल रही है कि प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथों में पार्टी की कमान आने से न सिर्फ देशवाली क्षेत्र (रोहतक और हिसार का कुछ हिस्सा) के जाट पूरी तरह से कांग्रेस के साथ आ गए बल्कि बागड़ क्षेत्र (हिसार और सिरसा) के जाटों ने भी उसका जमकर समर्थन किया. बागड़ क्षेत्र के जाट पारंपरिक तौर पर चौटाला परिवार की पार्टियों इनेलो और जजपा के साथ रहे हैं.

लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान ही कांग्रेस ने यह माहौल भी बनाया कि यह विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल है. जिस रोहतक से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा राज्य में सबसे अधिक 3.45 लाख के अंतर से लोकसभा चुनाव जीते हैं, उनके चुनाव प्रचार में सीधे तौर पर भूपेंद्र हुड्डा या दीपेंद्र हुड्डा को मुख्यमंत्री बनाने के पोस्टर, नारे और गीत दिख रहे थे.

हरियाणा में कई चुनौतियों से दो-चार भाजपा के लिए अब सरकार की हैट्रिक और मुश्किल हो सकती है.

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