
राजकोट के प्रदीपसिंह चौहान को सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में यह कहते सुना जा सकता है कि टीआरपी गेम जोन अग्निकांड का कोई भी आरोपी मुकदमे का फैसला सुनाए जाने से पहले जमानत पा जाता है, तो वे उसे ''छोड़ेंगे नहीं.''
चौहान 25 मई को अपने परिवार के आठ सदस्यों के साथ गेम जोन में थे, जब वेल्डिंग के काम से निकली चिंगारी से पूरा सरंजाम धू-धू कर जल उठा. राजकोट के नाना मावा रोड पर 2021 से अवैध रूप से चल रहा गेम जोन जलकर खाक हो गया और नौ बच्चों सहित 33 जिंदगियां स्वाहा हो गईं.
इस हादसे में पांच लोग 'लापता' हैं, जिनमें चौहान का 15 वर्षीय बेटा और उनका भतीजा भी शामिल है. वे दुख और गुस्से में कहते हैं, ''मेरे पास अब खोने के लिए कुछ भी नहीं बचा.''
घटना के करीब 36 घंटे बाद 27 मई को दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान गुजरात हाइकोर्ट ने राज्य सरकार, राजकोट नगर निगम और स्थानीय पुलिस को अवैध रूप से गेम जोन को ढाई साल से चलने देने के लिए कड़ी फटकार लगाई, ''क्या आप सो रहे थे? हमें इसमें सुधार के लिए राज्य की सरकारी मशीनरी पर कोई भरोसा नहीं रह गया है.''

न्यायाधीश बीरेन वैष्णव और देवन देसाई की अवकाशकालीन पीठ ने पहले 26 मई की सुबह मामले की सुनवाई की और नीतिगत मामलों के अलावा आगजनी के हादसों से बचाव के बुनियादी मानदंडों के अमल में नाकामी के लिए सरकार की सख्त मजम्मत की.
शर्मनाक है कि हाल के दिनों में सरकारी लापरवाही के कारण यह चौथी ऐसी बड़ी घटना है. 2022 में मोरबी पुल ढहने की घटना तो इनमें सबसे ऊपर थी. लोग इस बात से और भी उबाल पर हैं कि इन मामलों में अभी तक कोई इंसाफ नहीं हो पाया है. सभी पुराने मामले अदालतों में लंबित हैं. ज्यादातर आरोपी जमानत पर बाहर हैं और जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है.
गेम जोन के कर्ताधर्ता सात लोगों में से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है और घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन कर दिया गया है. लोगों के भारी गुस्से के मद्देनजर 'ड्यूटी में लापरवाही' के लिए सात मध्यम और निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित भी किया गया है.
लेकिन यह कार्रवाई लोगों या अदालत की नाराजगी शांत करने के लिए काफी नहीं थी. अदालत ने साफ पूछा कि सीनियर अफसरान पर आखिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई? हाई कोर्ट की फटकार के बाद राजकोट के पुलिस कमिशनर राजू भार्गव, डीसीपी जोन 2 सुधीर कुमार देसाई, एसीपी विधि चौधरी और राजकोट नगर आयुक्त आनंद पटेल का तबादला कर दिया गया.
दरअसल, प्रशासन के लिए उस वक्त और मुश्किल खड़ी हो गई, जब मार्च, 2022 में 'टीआरपी_गेम्स_फूड_एंटरटेनमेंट' नाम से एक सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गई. इसमें राजकोट कलेक्टर अरुण महेश बाबू, नगर आयुक्त अमित अरोड़ा और डीसीपी जोन 1 प्रवीण मीना गेम जोन के प्रतिनिधियों के साथ पोज देते नजर आ रहे हैं.
हाई कोर्ट ने इसे भी संज्ञान में लिया और पूछा, ''ये लोग कौन हैं? क्या वे वहां खेलने गए थे?'' इससे यह भी पता चला कि आरएमसी प्रमुख अवैध गेमिंग जोन के उद्घाटन में शामिल हुए थे. न्यायमूर्ति वैष्णव की टिप्पणी थी, ''तीन साल तक आपने इसकी जांच नहीं की. निगम की आंखों के सामने बिना मंजूरी के यह सारी कारगुजारी चल रही थी.'' उन्होंने यह भी कहा कि जून 2021 (जब खेलकूद पहली बार जोन में शुरू हुआ) और अब के बीच पद पर रहे सभी नगर आयुक्तों को इस त्रासदी के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.
यह भी पता चला कि गेमिंग जोन ने अनिवार्य फायर एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) के लिए कभी अर्जी दी ही नहीं. राजकोट पुलिस ने इसे वाणिज्यिक संचालन की अनुमति देते हुए 'बुकिंग लाइसेंस' जारी किया था, लेकिन शहर के अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के प्रमुख आईवी खेर ने कहा कि शहर की पुलिस ने उनसे तो कभी सलाह ली ही नहीं.
लाइसेंस पहली बार 2023 में दिया गया था और इस साल जनवरी में इसका नवीनीकरण किया गया था. यहां करीब 2,000 लीटर डीजल, 1,500 लीटर पेट्रोल और कई एलपीजी सिलेंडर रखे हुए थे. इस घटना ने अब ईंधन की खरीद और भंडारण के मानदंडों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालांकि, समस्या की असल जड़ है ऐसे 'मनोरंजन केंद्रों' के लिए सरकार की नीति. 2014 में जारी व्यापक सामान्य विकास नियंत्रण विनियमन (सीजीडीसीआर) में खामियों के कारण दर्जनों ऐसे गेमिंग जोन अवैध रूप से चल रहे हैं. सीजीडीसीआर मंजूरी से बचने के लिए ये कारोबार अस्थायी ढांचों से चलते हैं. मॉल के भीतर उसका संचालन करने वाले लोग उसमें अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर होते हैं.
घटना के बाद राज्य भर में सभी 101 गेमिंग आर्केड को अग्नि सुरक्षा और एसओपी के अनुपालन के लिए निरीक्षण और प्रमाणन तक बंद कर दिया गया था. लेकिन फिर राज्य सरकार की इस लापरवाही की भी आलोचना हुई है. कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी कहते हैं, ''2019 में सूरत में अवैध ट्यूशन सेंटर में आग लगने के बाद (जिसमें 22 बच्चों की जान चली गई थी), राज्य भर में सभी कोचिंग कक्षाएं एक पखवाड़े के लिए बंद कर दी गई थीं. हरनी नाव दुर्घटना के बाद, सभी नौका विहार को बंद कर दिया गया और मोरबी पुल की घटना के बाद सभी पैदल यात्री पुल. पर उसके बाद? वे निरीक्षण या बिना निरीक्षण के फिर से खुल गए.'' जिंदगियां लुट जाती हैं पर सब कुछ ज्यों का त्यों चलता रहता है.''
सबक लेने से इनकार
> मई 2019, सूरत
तक्षशिला बिल्डिंग की छत पर अवैध कोचिंग सेंटर में आग लगने से 22 बच्चों की मौत
आरोपी: 8 सरकारी अधिकारियों सहित 13
फिलहाल: 12 आरोपी जमानत पर बाहर. तीन निलंबित अधिकारी 2021 में बहाल हो गए
> जुलाई 2019, अहमदाबाद
कांकड़िया में एम्यूजमेंट पार्क का झूला टूटने से दो लोग मरे, 27 गंभीर जख्मी
आरोपी: सुपरस्टार एम्यूजमेंट प्राइवेट लि. के मालिक और पदाधिकारी समेत छह लोग. इसे नगर निगम ब्लैकलिस्ट कर चुका था
फिलहाल: ठेकेदार ने कामकाज शुरू कर दिया
> अक्तूबर 2022, मोरबी
मच्छू नदी पर पैदल पुल ढहा, 135 लोग मरे
आरोपी: टिकट काटने वाले, गार्ड और मालिक जयसुख पटेल समेत 10 लोग. किसी सरकारी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया
फिलहाल: पटेल समेत नौ आरोपी जमानत पर बाहर
> जनवरी 2024, वडोदरा
हरनी झील में खचाखच भरी नाव पलटी, 12 स्कूली बच्चों सहित 14 मरे
आरोपी: 20, कोई सरकारी अधिकारी आरोपी नहीं
फिलहाल: 17 आरोपी जमानत पर बाहर
मार्च 2022 की एक सोशल मीडिया पोस्ट में राजकोट के उच्च प्रशासनिक अधिकारी गेम जोन के कर्ताधर्ताओं के साथ पोज देते दिखते हैं.

