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सिस्टम कुचलती इन कारों के पीछे दोषी कौन?

पुणे में एक नाबालिग ने कथित तौर पर तेज रफ्तार लग्जरी कार से बाइक को टक्कर मारी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई

पुणे में जानलेवा हादसे की वजह बनी पोर्श टायकन
पुणे में जानलेवा हादसे की वजह बनी पोर्श टायकन
अपडेटेड 12 जून , 2024

पुणे के रईस इलाके में लापरवाह और बिगड़ैल रईसजादों के विशेषाधिकार, कथित लीपापोती और इंसाफ के साथ छेड़छाड़ की एक घिनौनी कहानी सामने आई है. इसके केंद्र में एक प्रमुख रियल एस्टेट परिवार का 17 वर्षीय साहबजादा है. उस पर नशे में धुत होकर अपनी गैरपंजीकृत पोर्श टायकन से दो युवा इंजीनियरों को कुचलने का आरोप है. कानूनी रूप से नाबालिग उस किशोर ने 18 मई की रात को दो महंगे बार में दोस्तों के साथ महंगी शराब पी. बाद में उसकी तेज रफ्तार लग्जरी कार ने एक बाइक में पीछे से टक्कर मार दी. बाइक पर पीछे बैठी अश्विनी कोष्टा की तुरंत मौत हो गई जबकि बाइक चला रहे अनीश अवधिया ने बाद में दम तोड़ दिया. चश्मदीदों के मुताबिक, कार में तीन लड़के थे और वे सभी नशे में थे. पुलिस जांच में पता चला है कि किशोर गाड़ी चला रहा था.

उसके बाद जो कुछ भी हुआ वह उसे बचाने का पूरा एक तमाशा था. उस लड़के के 18 साल के होने में केवल चार महीने बाकी थे और किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने शुरुआत में उसे महज डांटकर छोड़ दिया. उसको मिली जमानत शर्तों में सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखना शामिल था. सत्तारूढ़ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के स्थानीय विधायक सुनील टिंगरे हादसे के बाद पुलिस स्टेशन जा पहुंचे. इस सियासी हस्तक्षेप के अलावा यरवदा पुलिस स्टेशन में लड़के को पिज्जा परोसने के आरोप लगे. किशोर के साथ बरती जा रही इस नरमी से लोगों में गहरा आक्रोश फैलना लाजिमी था.

ब्रह्मा ग्रुप (किशोर के पिता के परदादा ब्रहदत्त के नाम पर रखा गया) को चलाने वाले अग्रवाल परिवार ने पुणे के आईटी बूम की मदद से रियल एस्टेट में अपनी किस्मत चमका ली. आवासीय और वाणिज्यिक संपत्तियां विकसित करने के अलावा अग्रवाल परिवार एक प्राइम क्लब और दो पांच सितारा होटलों का प्रमोटर है. किशोर के दादा सुरेंद्र कुमार दिवंगत ब्रह्मदत्त अग्रवाल के चार बेटों में से एक हैं और उनका काफी दबदबा है. 

लोगों का आक्रोश बढ़ने पर किशोर के पिता विशाल अग्रवाल की तलाश शुरू की गई क्योंकि उसी ने अपने नाबालिग बेटे को कार दी थी. विशाल को 21 मई को छत्रपति संभाजीनगर से गिरफ्तार किया गया. बाद में किशोर की जमानत रद्द कर दी गई और उसे बाल सुधार गृह भेजा गया. एक हैरतअंगेज मोड़ के तहत किशोर के दादा को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उन्होंने कथित तौर पर फैमिली ड्राइवर को हादसे की जिम्मेदारी अपने सिर लेने को मजबूर करने के लिए उसे अगवा कर लिया था. सुरेंद्र पर पहले भी शिवसेना के एक नेता पर हमले के केस में चार्जशीट दाखिल की गई थी. अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से जुड़ा वह केस अभी ट्रायल स्टेज पर है.

मिलीभगत के आरोप उस वक्त और गहरा गए जब सरकारी ससून अस्पताल में किशोर के खून के नमूने को बदलने के आरोप में दो डॉक्टरों के अलावा एक चपरासी को गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तार डॉक्टरों में फॉरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ. अजय तवारे और चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. श्रीहरि हलनोर शामिल हैं. विधायक टिंगरे की परेशानी और बढ़ गई जब एक पत्र सामने आया जिससे पता चला कि पिछले साल दिसंबर में विधायक ने अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट के तौर पर डॉ. तवारे की नियुक्ति की सिफारिश की थी. टिंगरे का कहना है कि उन्होंने हालिया हादसे के मामले में किसी भी तरह का दबाव नहीं डाला और दावा किया कि वे बतौर एक 'जिम्मेदार जन प्रतिनिधि' दुर्घटनास्थल और पुलिस स्टेशन गए थे.

जांच तेज होने के साथ सिस्टम में पनपती सड़ांध का एक पैटर्न सामने आया. नाबालिगों को शराब परोसने की वजह से बार सील कर दिए गए. लापरवाही की वजह से दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. 28 मई तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी. गृह विभाग भी संभाल रहे उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने जेजेबी के 'बेहद नरम नजरिए' को 'चौंकाने वाला' करार दिया और कहा, "उसने लोगों और सरकार के मन में सवाल खड़े किए". उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस चाहती है कि उस किशोर पर वयस्क की तरह केस चलाया जाए. पुणे के पुलिस कमिशनर अमितेश कुमार के मुताबिक, उस किशोर के खिलाफ मामला केवल शराब के नशे में घातक हादसा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिक कठोर गैर-इरादतन हत्या के आरोप पर आधारित है - जिसमें 10 साल तक की कैद की सजा हो सकती है. कुमार ने कहा, "उसने यह कृत्य पूरे होश में अंजाम दिया. उसे अच्छी तरह पता था कि इससे किसी की जान जा सकती है. यहां खून में शराब की मात्रा होना अहम नहीं है."

सामाजिक कार्यकर्ता और आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष विजय कुंभार बार मालिकों, सरकारी अधिकारियों, पुलिस और डॉक्टरों को इसके लिए समान रूप से दोषी ठहराते हुए कहते हैं, "इसमें किसी भी एजेंसी को बाइज्जत बरी नहीं किया जा सकता." वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की उपनेता सुषमा अंधारे ने सवाल पूछा कि क्या आरोपी किशोर के खून के सैंपल इसलिए बदल दिए गए 'क्योंकि उसमें ड्रग की मौजूदगी थी?' राज्य कांग्रेस की महिला शाखा की उपाध्यक्ष संगीता तिवारी ने आरोप लगाया कि पुणे के आसपास में पब आबकारी और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से रात 1.30 बजे की समयसीमा का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं.

अपराधियों को बचाने के लिए व्यवस्था से लगातार खिलवाड़ ने पीड़ितों के परिवारों पीड़ा और बढ़ा दी है. जैसा कि कुंभार पूछते हैं, "अगर वे सभी दोषी हैं तो कौन किसके खिलाफ कार्रवाई करेगा?" जाहिर है, जवाबदेही और न्याय कहीं गुम हो गया है.

रौंदती रफ्तार

पुणे में एक नाबालिग ने कथित तौर पर तेज रफ्तार लग्जरी कार से बाइक को टक्कर मारी जिसमें दो लोगों की मौत हो गई. जानिए इस हादसे ने क्यों इतना तूल पकड़ा

विवाद...

फटाफट जमानत 17 वर्षीय किशोर को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने, बताते हैं, गिरफ्तारी के 15 घंटों के भीतर ही हल्की शर्तों के आधार पर जमानत दे दी. इसके साथ ही आरोप है कि पुलिस थाने में उसके साथ विशेष बर्ताव किया गया जो जनाक्रोश की वजह बना. 

मसला उम्र का महाराष्ट्र में शराब पीने की वैधानिक आयु 21 वर्ष (कम मादक शराब के लिए) और 25 वर्ष (अधिक मादक शराब के लिए) है. फिर भी उसे दो पबों में शराब परोसी गई. कम उम्र का होने के कारण उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं था.

साक्ष्यों से छेड़छाड़ नाबालिग को जब मेडिकल टेस्ट के लिए सरकारी ससून अस्पताल ले जाया गया तो वहां उसके रक्त का नमूना कथित तौर पर कूड़ेदान में फेंक दिया गया और उसकी जगह ऐसे शख्स के रक्त का नमूना रखा गया जिसने शराब नहीं पी थी.

कार...

बिना नंबर प्लेट 2 करोड़ रुपए कीमत की पोर्श टायकन में स्थाई नंबर प्लेट नहीं लगी थी. यह मार्च से बिना रजिस्ट्रेशन के दौड़ रही थी क्योंकि इसके लिए 1,758 रु. का भुगतान बाकी था.

कहानी उस रात की

कहानी उस रात कीः ग्राफिक्स नीलांजन दास

18 मई रात 9:30 बजे: 17 साल 8 महीने का किशोर दोस्तों के साथ 12वीं के रिजल्ट का जश्न मनाने पुणे के मुंडवा इलाके में स्थित रेस्तरां-बार कोजी में गया.

आधी रात को: रेस्तरां ने उन्हें और शराब परोसने से मना कर दिया. पुलिस के मुताबिक, नाबालिग ने पिता के क्रेडिट कार्ड से बिल चुकाया और दोस्तों के साथ चला गया.

19 मई तड़के एक बजे: नाबालिगों का यह समूह उसी इलाके के ब्लैक क्लब में गया जहां उन्होंने कथित तौर पर और शराब पी और करीब 1 बजे निकले.

तड़के 2:15 बजे: नाबालिग दादा से जन्मदिन पर मिली पोर्श कार चलाता हुआ अपने निवास वडगांव शेरी की ओर बढ़ा.

करीब उसी समय: कल्याणी नगर में टेक प्रोफेशनल अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा बजाज पल्सर मोटरसाइकिल से एक पार्टी अटेंड कर लौट रहे थे.

2:30 बजे: नशे में धुत नाबालिग ने कथित तौर पर तेज रफ्तार कार पर से नियंत्रण खो दिया और कार बाइक से टकरा गई. बाइक पर पीछे बैठीं अश्विनी हवा में 20 फुट उछल गईं; उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई. अनीश को अस्पताल ले जाया गया जहां उन्होंने भी दम तोड़ दिया. नाबालिग को भीड़ ने पीटा और पुलिस के हवाले कर दिया.

सड़क हादसे और लाइंसेंस धारकों की श्रेणी

वैध ड्राइविंग लाइसेंस वाले 69.4%

लर्नर्स लाइसेंस वाले 4%

बगैर वैध लाइसेंस वाले 7.8%

जानकारी नहीं 18.8%

160 किमी/प्रति घंटा रफ्तार थी कार की जब उसने मोटरसाइकिल को टक्कर मारी, ऐसा बताया गया

68,000 रु. खर्च किए नाबालिग ने पुणे के मुंडवा इलाके में स्थित दो पबों में: 48,000 रु. कोजी में और 20,000 रु. ब्लैक क्लब में

301 सड़क हादसे भारत में रोज होते हैं अधिक रफ्तार की वजह से; जबकि रोज 9 और हादसे शराब पीकर वाहन चलाने से होते हैं

कठघरे में...

किशोर उसे जेजेबी ने 5 जून तक के लिए सुधार गृह भेजा

उसका परिवार नाबालिग बेटे को कार सौंपने और उसे जोखिम में डालने के आरोप में पिता गिरफ्तार. किशोर के दादा ड्राइवर को हादसे का इल्जाम अपने सिर लेने के लिए उकसाने में गिरफ्तार

पब किशोर को शराब परोसने में दोनों पब सील; मालिक और दो स्टाफ समेत पांच लोग नियमों के उल्लंघन में गिरफ्तार

डॉक्टर दो डॉक्टर और एक चपरासी खून की जांच रिपोर्ट की अदला-बदली में गिरफ्तार

पुलिस दुर्घटनास्थल पर पहुंचने के बाद पीसीआर को फोन न करने में यरवदा थाने के दो पुलिसकर्मी निलंबित

अगर सत्र न्यायालय ने किशोर को वयस्क मानकर अभियोजन की स्वीकृति दी तो दोषी ठहराए जाने पर उसे गैर इरादतन हत्या में पूरे 10 साल की सजा हो सकती है. पुलिस फिलहाल कोर्ट की मंजूरी के इंतजार में. चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद उस पर केस जेजेबी में चलेगा

स्रोत: रोड एक्सीडेंट्स इन इंडिया-2022, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय

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