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लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे तय करेंगे पूर्वी यूपी में इन दिग्गजों का कद

उत्तर प्रदेश में लोकसभा के चुनावी रण में पिछड़ी जाति के दिग्गज नेताओं का असल इम्तिहान पूर्वांचल में हो रहा है

आजमगढ़ की एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी के साथ ओमप्रकाश राजभर (पीले कुर्ते में) और दारा सिंह चौहान (सबसे दाएं)
आजमगढ़ की एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी के साथ ओमप्रकाश राजभर (पीले कुर्ते में) और दारा सिंह चौहान (सबसे दाएं)
अपडेटेड 7 जून , 2024

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 मई को आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट के गंधुवई क्षेत्र में चुनावी रैली करके पूर्वी यूपी के जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की. प्रधानमंत्री मोदी की यह रैली आजमगढ़ और लालगंज लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी दिनेश लाल यादव 'निरहुआ’ और नीलम सोनकर के समर्थन में थी.

लेकिन मोदी ने मंच पर यूपी में भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान को प्रमुखता देकर पूर्वी यूपी में जातिगत समीकरणों को दुरुस्त करने की कोशिश की. ये समीकरण आजमगढ़ से सटी घोसी लोकसभा सीट पर कसौटी पर हैं. लोकसभा चुनाव की घोषणा के बाद भाजपा ने अपने गठबंधन की सबसे नई सहयोगी सुभासपा को पूर्वी यूपी की घोसी लोकसभा सीट सौंप दी, जिस पर ओम प्रकाश ने अपने बेटे अरविंद राजभर को उतारा है.

तमसा नदी के किनारे बसे पूर्वांचल के मऊ जिले की घोसी लोकसभा सीट कांग्रेस के विकास पुरुष कहे जाने वाले कल्पनाथ राय के नाते जानी जाती रही है. यह सीट राम मंदिर आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भाजपा से दूर रही. इस सीट पर भाजपा ने जीत का स्वाद 2014 में चखा जब मोदी लहर में पार्टी के उम्मीदवार हरिनारायण राजभर विजयी हुए.

लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वे सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार अतुल राय से हार गए. घोसी सीट को दोबारा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के झंडे तले लाने के लिए ओम प्रकाश राजभर अपने साथी दारा सिंह चौहान के साथ-एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं. इस सीट पर सुभासपा उम्मीदवार अरविंद का मुकाबला सपा उम्मीदवार राजीव राय और बसपा उम्मीदवार बालकृष्ण चौहान से है. यहां राजभर और लोनिया चौहान ओबीसी मतदाताओं की संख्या करीब तीन लाख है. इस तरह से घोसी लोकसभा सीट ओमप्रकाश राजभर और दारा सिंह चौहान की साख का इम्तिहान भी ले रही है.

राजभर और चौहान दोनों ही भाजपा के मिशन-पूर्वांचल के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव की 16 मार्च को घोषणा से 10 दिन पहले 5 मार्च को इन दोनों नेताओं को योगी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था. विभाग बंटवारे में इनको तवज्जो मिली. राजभर को पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण, हज, मुस्लिम वक्फ और चौहान को कारागार जैसा महत्वपूर्ण विभाग मिला.

मऊ में टैक्स बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह बताते हैं, "घोसी लोकसभा सीट पर राजभर और चौहान की अपने स्वजातीय मतों पर वैसी पकड़ नहीं रह गई है जैसी पहले हुआ करती थी. इसकी वजह इन दोनों नेताओं का लगातार दल बदलना है. ऐसे में इनके योगी सरकार में शामिल होने से कोई बहुत फर्क नहीं पड़ने वाला."

भाजपा ने पूर्वी यूपी में छोटी जातियों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति के तहत ही घोसी विधानसभा उपचुनाव हारने के बाद भी चौहान पर दांव लगाया. उसने उनको न केवल विधान परिषद सदस्य बनाया बल्कि योगी सरकार में बतौर कैबिनेट मंत्री की जगह दी. आजमगढ़ के गोलवारा गांव के रहने वाले पूर्व बसपा सांसद चौहान बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के करीबी नेताओं में शुमार थे.

वे फरवरी 2015 में भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा ने उन्हें पिछड़ी जाति प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया. 2017 के विधानसभा चुनाव में मधुबन विधानसभा सीट से पहली बार भाजपा उम्मीदवार जीता था. इस जीत के तोहफे के रूप में चौहान को योगी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री की जगह दी गई. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वे सपा मे जा पहुंचे. पूर्वांचल की लोनिया चौहान ओबीसी बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दारा सिंह को सपा ने पिछले विधानसभा चुनाव में घोसी से उम्मीदवार बनाया.

उन्होंने भाजपा उम्मीदवार विजय राजभर को 22,000 से अधिक वोटों से हराकर जीत हासिल की. लेकिन चुनाव में सपा की हार के बाद से वे सपा में उपेक्षित महसूस कर रहे थे. वे जुलाई 2022 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने घोसी विधानसभा सीट से विधायक के रूप में भी इस्तीफा दे दिया.

इसके बाद घोसी सीट पर सितंबर 2023 में हुए विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार के रूप में वे सपा उम्मीदवार सुधाकर सिंह से 42,000 मतों से हार गए. हालांकि ओम प्रकाश राजभर बताते हैं, "घोसी उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार को राजभर और चौहान मतदाताओं का पूरा समर्थन मिला था. ठाकुर और अन्य सवर्ण जाति के मतदाताओं का समर्थन सपा उम्मीदवार को मिलने से सिंह की जीत हुई थी."

उधर, बसपा ने घोसी लोकसभा सीट पर लोनिया चौहान बिरादरी पर पकड़ रखने वाले पूर्व सांसद बालकृष्ण चौहान पर दांव लगाया है. वे घोसी सीट के मतदाताओं के बीच खुद को स्थानीय और दारा सिंह को बाहरी तथा बिना जनाधार वाला नेता बता रहे हैं. बालकृष्ण तो इस पर भी सवाल खड़ा करते हैं कि राजभर और चौहान का अपनी-अपनी जाति के मतदाताओं के बीच कोई असर है भी. उन्हीं के शब्दों में, "सितंबर, 2023 में घोसी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में आखिर दारा सिंह हारे ही न! जबकि ओम प्रकाश राजभर तो उन्हें पूरा सहयोग दे रहे थे. और इसके बावजूद कि उस सीट पर राजभर और चौहान मतदाताओं की तादाद 20 फीसद से भी ज्यादा है."

विपक्षी दावों से इतर ओम प्रकाश लोकसभा चुनाव में राजभर और लोनिया चौहान बिरादरी का पूरा वोट अपने बेटे और उम्मीदवार अरविंद को मिलने का दम भरते हैं. राजभर के इस दावे में उनका चिर-परिचित बड़बोलापन भी आड़े आ रहा है. प्रदीप सिंह स्पष्ट करते हैं, "कभी खुद को भाजपा का बाप बताने और कभी मुख्यमंत्री योगी के बाद दूसरा सबसे पावरफुल मंत्री बताने जैसे बयान राजभर को विवादों में खींच रहे हैं. इससे भाजपा का परंपरागत मतदाता उनसे कट रहा है. इसका खामियाजा उनके बेटे को उठाना पड़ सकता है."

उनका अंदेशा निराधार नहीं है. अरविंद को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने के लिए खुद उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को आगे आना पड़ा. सियासी मजबूरियों का वह एक किस्म का सिग्नेचर सीन था.

5 मार्च को मऊ दौरे पर पहुंचे पाठक ने अरविंद को भाजपा कार्यकर्ताओं के सामने सिर झुकाने और फिर घुटनों के बल बैठकर माफी मांगने को कहा. मरता क्या न करता, अरविंद ने वह सब किया. उसके बाद से अरविंद अपने पिता से अलग जनता के बीच छोटी-छोटी सभाएं करके लोगों की नाराजगी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. इस तरह घोसी लोकसभा सीट अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को साधने की भाजपाई कवायद की कड़ी परीक्षा ले रही है.

पूर्वी यूपी के 21 जिलों में कुल 27 लोकसभा सीटें हैं जिनमें लोकसभा चुनाव के छठे और सातवें चरण में मतदान है. ये सीटें भाजपा के मिशन-2024 के लिहाज से काफी अहम हैं. 2019 का लोकसभा चुनाव सुभासपा ने भाजपा से अलग होकर 39 सीटों पर लड़ा था. सभी सीटों पर भले ही सुभासपा उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई हो लेकिन पूर्वांचल की मछलीशहर, गाजीपुर और बलिया लोकसभा सीट पर सुभासपा के प्रदर्शन ने चौंका दिया था.

मछलीशहर लोकसभा सीट पर भाजपा के बी.पी. सरोज ने बसपा के त्रिभुअन राम को बेहद नजदीकी मुकाबले में 181 वोटों से हराया था. इस सीट पर सुभासपा को 11,000 से ज्यादा वोट मिले थे. इसके बाद अक्तूबर, 2019 के जलालपुर विधानसभा उपचुनाव में सुभासपा प्रत्याशी को मिले कुल वोट विजयी सपा उम्मीदवार की जीत के अंतर से काफी अधिक थे. इसी तरह 2019 में हुए घोसी विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर सुभासपा को मिले कुल वोटों से काफी कम था. 2022 का विधानसभा चुनाव सुभासपा ने सपा के साथ मिलकर लड़ा और छह सीटों पर जीत हासिल की थी.

बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के इतिहास विभाग में प्रोफेसर और 'यूपी की राजनीति में जातियों की भूमिका’ विषय पर शोध करने वाले सुशील पांडेय बताते हैं, "2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर मतदाताओं के प्रभाव वाले आजमगढ़, आंबेडकरनगर, गाजीपुर, बलिया, बस्ती जैसे जिलों में भाजपा के खराब प्रदर्शन ने पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रणनीति बदलने को मजबूर कर दिया था. इसी कारण भाजपा सुभासपा का साथ लेने को बेताब थी."

अब ओम प्रकाश राजभर एनडीए के स्टार प्रचारक की हैसियत से पूर्वी यूपी की लोकसभा सीटों पर राजभर मतदाताओं को भगवा खेमे के साथ जोड़ने की कोशिश में लगे हैं. प्रोफेसर पांडेय बताते हैं, "इस बार पूर्वी यूपी में भाजपा का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टी के साथ जुड़े ओबीसी नेता अपनी जाति का कितना वोट एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में ट्रांसफर करा पाते है."

उत्तर प्रदेश में लोकसभा के चुनावी रण में पिछड़ी जाति के दिग्गज नेताओं का असल इम्तिहान पूर्वांचल में हो रहा है. सपा और भाजपा से जुड़े पिछड़े वर्ग के कई नेता अपनी-अपनी जाति का असली नेता होने का दम भरते हैं. इस आम चुनाव के नतीजों के बाद इन सभी का कद भी सामने आ जाएगा.

अनुप्रिया पटेल: कुर्मी बहुल सीटों पर नजर 

यूपी में एनडीए के सबसे पुराने सहयोगी अपना दल (एस) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल पर कुर्मी मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी है. पूर्वांचल की लोकसभा सीटों पर कुर्मी बिरादरी के मतदाताओं की संख्या एक से तीन लाख तक है. 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) ने 12 सीटों पर विजय हासिल की थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज (सुरक्षित) सीट पर अपना दल (एस) चुनाव लड़ रहा है. भाजपा की सबसे मजबूत सहयोगी के तौर पर अनुप्रिया अब तक यूपी में दो दर्जन से अधिक सीटों पर सभाएं कर चुकी हैं जहां कुर्मी मतदाता प्रभावी भूमिका में हैं.

संजय निषाद: कसौटी पर बिरादरी में पैठ

एनडीए के सहयोगी 'निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल’ यानी निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद का राजनैतिक कद 2024 के लोकसभा चुनाव में दांव पर है. उन पर पूर्वांचल की लोकसभा सीटों पर 25,000 से लेकर डेढ़ लाख तक की संख्या वाले निषाद मतदाताओं को साधने की जिम्मेदारी है. 2022 के विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी ने पूर्वांचल की छह सीटों पर जीत हासिल की थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीवार के तौर पर संतकबीर नगर लोकसभा सीट से चुनाव जीतने वाले उनके बेटे प्रवीण निषाद एक बार फिर उम्मीदवार हैं.

आर.पी.एन. सिंह: सैंथवार वोट कितने साथ 

कांग्रेस से 42 वर्ष का नाता तोड़कर पड़रौना राजघराने के कुंवर आर.पी.एन. सिंह 2022 में भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा ने उन्हें राज्यसभा भेजकर पार्टी के साथ निष्ठा से जुड़ने का ईनाम दिया है. उन पर सैंथवार-चनेऊ मतों को भाजपा के पक्ष में सहेजने का जिम्मा है जो कुशीनगर समेत महाराजगंज, देवरिया, बस्ती, गोरखपुर लोकसभा सीटों पर कम से कम 25,000 की तादाद में हैं. वे रोज 10 जगहों पर सभाएं कर भाजपा उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटा रहे हैं.

स्वामी प्रसाद मौर्य: अकेले निकलना कितना फायदे का

स्वामी प्रसाद मौर्य 2017 के विधानसभा और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा में रहकर भी खुद को बतौर बड़े ओबीसी नेता के तौर पर पेश करते रहे हैं. इसी के आधार पर वे 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी बेटी संघमित्रा मौर्य को बदायूं से जिताने में कामयाब हुए थे. अब 2024 के लोकसभा चुनाव में वे कुशीनगर लोकसभा सीट से खुद की राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के उम्मीदवार हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव मौर्य ओबीसी मतों पर उनकी पकड़ की परीक्षा लेगा.

पल्लवी पटेल: पीडीए के सामने पीडीएम

सपा के पीडीए के खिलाफ एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के साथ मिलकर पिछड़ा, दलित, मुस्लिम (पीडीएम) न्याय मोर्चा का गठन करने वालीं अपना दल (कमेरावादी) की अध्यक्ष कृष्णा पटेल और पल्लवी पटेल लोकसभा चुनाव में सियासी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर सिराथू विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार और उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को हराकर पल्लवी पटेल विधायक बनी थीं. कुर्मी-मुस्लिम गठजोड़ के भरोसे लोकसभा चुनाव में पीडीएम ने पूर्वांचल की 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं.

संजय चौहान: लोनिया चौहान मतदाताओं के सहारे

यूपी में भाजपा की सबसे ताजा सहयोगी जनवादी पार्टी ने 15 मई को एनडीए में शामिल होने की घोषणा की. जनवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय चौहान 2019 में चंदौली सीट पर भाजपा उम्मीदवार महेंद्र नाथ पांडेय से करीब 14,000 वोटों से हारे थे. प्रदेश में लोनिया चौहान मतदाताओं की संख्या करीब 40 लाख बताई जाती है. इनमें ज्यादातर पूर्वी यूपी के गोरखपुर, आजमगढ़ और वाराणसी मंडल में केंद्रित हैं. चौहान के सामने पूर्वी यूपी में लोनिया चौहान मतदाताओं के बीच पकड़ साबित करने की चुनौती है.

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