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'भाजपा का मोहरा' या मारपीट की पीड़िता, क्या है स्वाति मालीवाल का किस्सा?

इस मामले ने भाजपा को आप पर हमला करने और उसके उस नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए एक हथियार दे दिया, जिसे आप ने केजरीवाल की गिरफ्तारी के इर्द-गिर्द बुना था

कथित मारपीट के मामले का सीन रिक्रिएशन के बाद सीएम आवास से निकलतीं मालीवाल
कथित मारपीट के मामले का सीन रिक्रिएशन के बाद सीएम आवास से निकलतीं मालीवाल
अपडेटेड 5 जून , 2024

— अभिषेक जी. दस्तीदार

राजनीति में एक हफ्ता बहुत लंबा वक्त होता है. चुनाव के मौसम में तो और भी. आम आदमी पार्टी (आप) की राज्यसभा सांसद 39 वर्षीया स्वाति मालीवाल 10 मई को तिहाड़ जेल के बाहर खड़ी होकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत पर अस्थायी रिहाई का जश्न मना रही थीं और टीवी कैमरों के सामने ऐलान कर रही थीं, ''हम जीतेंगे, हम भारी अंतर से जीतेंगे.''

एक हफ्ते बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर अपनी प्रोफाइल से केजरीवाल की तस्वीर हटा दी और एक दशक पहले जिस पार्टी को स्थापित करने में मदद की थी, उसी पर चरित्रहनन करने और उनसे कथित मारपीट करने वाले शख्स को बचाने का आरोप लगा रही हैं. वहीं, आप का आरोप है कि मालीवाल 'भाजपा का मोहरा' हैं जिनका इस्तेमाल झूठी शिकायत से केजरीवाल को दबाने और चुनाव प्रचार से रोकने के लिए किया जा रहा है.

दरअसल, तेज-तर्रार ऐक्टीविस्ट-राजनेता और दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) की पूर्व प्रमुख मालीवाल ने 13 मई को शिकायत दर्ज कराई कि केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी विभव कुमार ने सिविल लाइंस दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में उनके साथ मारपीट की. 

पुलिस को दिए बयान में मालीवाल ने कहा, ''उसने मुझे सात या आठ बार थप्पड़ मारे जब मैं चीख रही थी. खुद को बचाने के लिए मैंने उसे पैरों से दूर धकेला. फिर वह मुझ पर झपटा, जान-बूझकर मुझे घसीटा, और मेरी शर्ट खींची, जिससे बटन खुल गए.'' उनके मुताबिक, विभव ने उन्हें धमकी दी, ''हम तुम्हारी हड्डियां तोड़ देंगे और (तुम्हें) ऐसी जगह गाड़ेंगे जहां कोई ढूंढ भी नहीं पाएगा.''

तब से अपने-अपने दावों का दौर जारी है. भाजपा रोमांचित है कि 25 मई को हरियाणा और पंजाब में मतदान से पहले आप पर हमला करने के लिए उसे एक हथियार मिल गया. वहीं, आप ने इसे सियासी साजिश करार दिया. विभव की गिरफ्तारी के एक दिन बाद 12 मई को केजरीवाल ने कहा, ''अब उन्होंने मेरे निजी सहायक को गिरफ्तार कर लिया है. जरा सोचिए. मैं कहता हूं, आप हमारे नेताओं को एक-एक करके क्यों गिरफ्तार कर रहे हो? हम सबको एक बार में ही गिरफ्तार कर लो.'' केजरीवाल ने गिरफ्तारी देने के लिए मध्य दिल्ली में अपने पार्टी मुख्यालय से महज 300 मीटर दूर दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित भाजपा दफ्तर तक मार्च भी निकाला.

घटना के बारे में कुछ तथ्य निर्विवाद हैं. मालीवाल मिलने का वक्त लिए बगैर 13 मई की सुबह 8.40 बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचीं. शुरू में सुरक्षाकर्मियों ने रोका, पर उन्होंने जोर दिया और बाहरी प्रतीक्षा क्षेत्र से ड्रॉइंग रूम तक चली गईं. पर सुबह 9.10 बजे से 9.33 बजे के बीच क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं है.

सुबह 9.34 बजे मालीवाल ने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया और सिविल लाइंस पुलिस थाने गईं, पर घटना को सियासी रंग न देने की इच्छा का हवाला देकर शिकायत दर्ज किए बिना वहां से चली गईं. आप ने अगले दिन विभव की करतूतों का भर्त्सना की और पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि केजरीवाल ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है. संजय ने मालीवाल से मुलाकात भी की. 

मालीवाल ने 16 मई को एफआईआर दर्ज करवा दी और एक्स पर चुप्पी तोड़ी: ''मेरे साथ जो हुआ, वह बहुत बुरा था. मैंने पुलिस को बयान दे दिया है. मुझे उम्मीद है कि उचित कार्रवाई की जाएगी. भाजपा के लोगों से विशेष अनुरोध है कि इस घटना पर राजनीति न करें.'' लगा कि शांति हो गई है.

मगर 17 मई को अचानक हंगामा मच गया. 52 सेकंड की एक वीडियो क्लिप सामने आई, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री के ड्रॉइंग रूम में मालीवाल गुस्से में नजर आईं, जो पुलिस के बड़े अफसरों से बात करने की मांग कर रही थीं, जबकि सुरक्षाकर्मी उनसे वहां से जाने की गुजारिश कर रहे थे. आप का रुख नाटकीय ढंग से बदल गया और वरिष्ठ नेता आतिशी ने दावा किया, ''स्वाति मालीवाल की मंशा मुख्यमंत्री पर आरोप लगाने की थी, पर वे मौजूद नहीं थे, सो बच गए...उस वीडियो से उनके झूठ की पोल खुल गई है.'' आतिशी ने यह भी कहा कि वीडियो में मालीवाल आराम से बैठी दिख रही हैं और उन्हें न कोई चोट है या न उनके कपड़े फटे हैं. 

बाद में 17 मई को विभव ने जवाबी शिकायत दर्ज करवाई और आरोप लगाया कि मालीवाल से कहा गया कि केजरीवाल मौजूद नहीं हैं, तो वे नाराज हो गईं और उन्होंने झूठे आरोप लगाए. शिकायत में दावा किया गया कि मालीवाल ने झूठे आरोप लगाकर विभव को बर्बाद करने की धमकी भी दी. 

दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में स्वाति मालीवाल केस के आरोपी विभव कुमार

इस वीडियो के बाद मालीवाल ने 'पोलिटिकल हिटमैन' विभव पर वीडियो लीक करने का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि सीसीटीवी फुटेज से सच सामने आ जाएगा. पुलिस ने अब अदालत से कहा है कि मुख्यमंत्री आवास का सीसीटीवी फुटेज बिल्कुल मिटा दिया गया है और साथ ही विभव का फोन भी, जो सबूतों के साथ छेड़छाड़ की ओर इशारा करता है.

18 मई को आप ने एक वीडियो क्लिप जारी कर दावा किया कि यह उस दिन का मुख्यमंत्री आवास का सीसीटीवी फुटेज है. इसमें सुरक्षाकर्मियों को मालीवाल को बाहर ले जाते हुए दिखाया गया. आतिशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''वे किसी मारपीट या दर्द के बिना स्थिर कदमों से चल रही हैं. यहां तक कि बाहर जाते हुए वह एक महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसुलूकी भी कर रही हैं.''

इंडिया टुडे की ओर से मालीवाल और विभव दोनों को भेजे गए टेक्स्ट संदेशों और फोनकॉल का जवाब नहीं मिला. विभव का केजरीवाल से 20 साल पुराना नाता है; विभव को उनका सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है और पार्टी में वे काफी ताकतवर शख्स हैं. आप के विरोधियों का आरोप है कि विभव ने सारी करतूतें अपने बॉस के इशारे पर कीं. 

मालीवाल और केजरीवाल का भी एनजीओ परिवर्तन और इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दिनों से ही पुराना नाता है. महिला अधिकार कार्यकर्ता के तौर पर उनके प्रमुखता से उभरने के बावजूद आप के भीतर नए-नए नेताओं ने मालीवाल से ज्यादा रसूख हासिल कर लिया. सियासी पर्यवेक्षकों का कहना है कि उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलने के बावजूद उन्हें दरकिनार किए जाने की पर्याप्त भरपाई होती नहीं जान पड़ी. 

केजरीवाल के जेल में रहने के दौरान ज्यादातर वक्त मालीवाल की गैरमौजूदगी पर बरबस पार्टी का ध्यान गया. वे अपनी बहन के इलाज के लिए अमेरिका में रुकी रहीं, इस तथ्य की बदौलत ही भाजपा के अमित मालवीय ने दावा किया कि आप ''डूबता हुआ जहाज'' है. दरअसल, संजय सिंह—जो खुद आबकारी नीति केस में जमानत पर हैं—और पार्टी महासचिव संदीप पाठक को छोड़कर आप का कोई भी राज्यसभा सांसद केजरीवाल की गिरफ्तारी का विरोध करता नहीं दिखा.

आंख की सर्जरी के लिए लंदन गए राघव चड्ढा 18 मई को लौटे और केजरीवाल से मिले. पार्टी पदाधिकारियों का दावा है कि केजरीवाल की रिहाई से कुछ दिन पहले लौटने के बावजूद मालीवाल उनकी नजरों में चढ़ न सकीं. पार्टी के एक पदाधिकारी कहते हैं, ''यही वजह है कि वे चुनाव प्रचार की गतिविधि में बमुश्किल दिखाई दीं.'' मालीवाल के इस जंग में सिर्फ डीसीडब्ल्यू की साथी सदस्य और लंबे वक्त से आप वॉलंटियर वंदना सिंह सोशल मीडिया पर उनका समर्थन कर रही हैं.

आप का दावा है कि भाजपा मालीवाल पर चल रहे भ्रष्टाचार के एक पुराने मामले का फायदा उठा रही है. आतिशी ने कहा, ''मालीवाल ऐंटी-करप्शन ब्यूरो की ओर से दर्ज कथित भर्ती घोटाले के मामले से घिरी हैं जिसमें डीसीडब्ल्यू में संविदा कर्मचारियों की भर्ती गैरकानूनी तरीके से की गई. यह मामला अब खत्म होने के करीब है. इसलिए भाजपा विभिन्न नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज करने का अपना फॉर्मूला उन पर लागू करती नजर आ रही है. वे महीनों से भाजपा के संपर्क में हैं. उनके कॉल रिकॉर्ड चेक कर लें.''

इस आरोप से आहत मालीवाल ने 17 मई की शाम एक्स पर लिखा, ''कल पार्टी में आए नेताओं ने 20 साल पुरानी पार्टी कार्यकर्ता को भाजपा का एजेंट घोषित कर दिया.'' आप सरकार के साथ हमेशा टकराव में रहने वाले दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी 21 मई को बयान जारी कर पार्टी की भर्त्सना की, ''सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि वारदात की कथित जगह मुख्यमंत्री का ड्रॉइंग रूम था, वह भी तब जब वे घर में मौजूद थे...मुझे तो यही उम्मीद थी कि कम से कम मर्यादा और औचित्य की खातिर मेरे मुख्यमंत्री टालमटोल और छल-कपट करने के बजाए अपने को पाक-साफ साबित करते.''

यह किस्सा फिलहाल तो भाजपा का ही मकसद पूरा कर रहा है; यह अलग बात है कि चुनाव के बाद इसे हल करने में किसी की दिलचस्पी होगी या नहीं.

—साथ में कौशिक डेका और अनिलेश एस. महाजन

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