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प. बंगाल : अभिनय से सियासी मैदान में उतरे सितारों की कैसी रही भिड़ंत?

हुगली में लॉकेट चटर्जी और रचना, तो घाटल में हिरन चटर्जी और देव. अभिनय से सियासत में उतरी ये दो जोड़ियां इस बार के लोकसभा चुनाव में थीं आमने-सामने

हुगली लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी की उम्मीदवार अभिनेत्री रचना बनर्जी
हुगली लोकसभा क्षेत्र से टीएमसी की उम्मीदवार अभिनेत्री रचना बनर्जी
अपडेटेड 5 जून , 2024

-- अर्कमय दत्ता मजूमदार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 3 मार्च को महिलाओं के लोकप्रिय गेम शो दीदी नं. 1 में नमूदार हुईं. टीवी के लाखों दर्शकों के सामने तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कविताएं सुनाईं, तस्वीरें बनाईं, आदिवासी महिलाओं के साथ नृत्य किया और खेलों में हिस्सा लिया.

कइयों को उत्सुकता हुई कि उनके अचानक टीवी पर आने के पीछे क्या राज था. जवाब हफ्ते भर बाद मिला जब दीदी नं. 1 की होस्ट रचना बनर्जी को हुगली लोकसभा क्षेत्र से टीमएसी उम्मीदवार घोषित किया गया.

रचना ओडिया सिनेमा की हस्ती रही हैं और बंगाली, हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अदाकारी की है. हुगली में 20 मई को मतदान हुआ. रचना ने वहां मौजूदा सांसद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार लॉकेट चटर्जी को टक्कर दी, जो खुद अभिनेत्री से राजनेता बनी हैं.

ममता ने यही सोचा होगा कि मनोरंजन जगत् का एक लोकप्रिय नाम टीवी के एक पूर्व सितारे को बढ़िया टक्कर दे सकता है. हुगली वापस जीतने के लिए टीएमसी को यह रणनीति सूझी तो यही मंसूबा भाजपा के दिमाग में भी था. उसने अभिनेता से भाजपा विधायक बने हिरनमय (या हिरन) चटर्जी को घाटल सीट से मैदान में उतारा, जहां से बंगाली सिनेमा के सितारों में से एक दीपक अधिकारी अभी सांसद हैं.

परदे पर देव नाम से लोकप्रिय दीपक टीएमसी के लिए 2014 से यह सीट जीत रहे हैं. घाटल में 25 मई को मतदान हुआ. मशहूर हस्तियों की दोनों जोड़ियों ने रुपहले परदे पर साथ काम किया है. लॉकेट और हिरन ने सियासी करियर टीएमसी से शुरू किया और क्रमश: 2015 और 2021 में भाजपा में आए. 

लॉकेट चटर्जी

लॉकेट ने 2019 में हुगली सीट टीएमसी की रत्ना डे नाग से 73,362 वोटों के शानदार अंतर से जीती. 2017 से 2020 तक वे भाजपा की राज्य इकाई की महिला शाखा की प्रमुख रहीं और बाद में उन्हें पार्टी के पांच महासचिवों में से एक बनाया गया. मगर जल्द ही पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं से उनका मनमुटाव हो गया. 2021 में टीएमसी ने हुगली की सभी विधानसभा सीटें जीतीं; लॉकेट खुद चुनचूरा से टीएमसी के असित मजूमदार से हार गईं.

दरअसल हुगली में उनकी बढ़ती अलोकप्रियता ने भाजपा नेतृत्व को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या उन्हें किसी नए उम्मीदवार से बदलना चाहिए. टीएमसी के सर्वेक्षणों से भी पता चला कि उनके मतदाताओं में लॉकेट की एप्रूवल रेटिंग सभी 42 सांसदों में सबसे कम में से एक थी. टीएमसी के सूत्र कहते हैं, ''रचना के शो ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय नाम बना दिया है. महिलाएं तुरंत उनसे जुड़ जाती हैं. चूंकि लॉकेट पहले ही बैकफुट पर हैं, हम मानते हैं कि हम रचना के जरिए मतदाताओं को रिझा सकते हैं.''

रचना को कुछेक शर्मिंदगियों का भी सामना करना पड़ा. प्रचार अभियान के दौरान जब बंगाल में औद्योगीकरण की कथित कमी के बारे में पूछा गया. तो रचना ने यह बताने के लिए कि बंगाल में काफी उद्योग हैं, रास्तों से गुजरते हुए उन्हें दिखाई दी कई सारी फैक्टरियों के धुएं का जिक्र किया—और इसे जोरदार ढंग से दिखाने के लिए दोनों हाथ लहराते हुए कहा, ''धुआं... धुआं.''

देखते ही देखते इसे कंटेंट क्रिएटरों ने उठा लिया और इस उम्मीदवार का मजाक उड़ाते हुए तरह-तरह के मीम में बदल दिया. गौरतलब कि जिस सिंगूर से ममता ने टाटा-विरोधी आंदोलन शुरू किया था और जिसकी बदौलत बंगाल की बागडोर हासिल की थी, वह हुगली निर्वाचन क्षेत्र में आता है.

हिरन चटर्जी

वहीं, घाटल में लड़ाई तीखी है. वहां हिरन चटर्जी भ्रष्टाचार और प्रशासनिक गड़बड़ी के हर आरोप की कड़ी सीधे देव से जोड़ते हैं, जिन्होंने घाटल मास्टर प्लान—यानी मेगा फूड मैनेजमेंट कार्यक्रम—को अपना चुनावी नारा बनाया है. हालिया अतीत में देव के एक विश्वासपात्र पर सरकारी नौकरी के वादे के बदले घूस लेने के आरोप लगे.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मवेशियों की तस्करी के मामले में दो बार उनसे पूछताछ कर चुका है और इससे भी भाजपा को उन्हें असरदार तरीके से निशाना बनाने में मदद मिली है. इस बीच अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि हिरन टीएमसी में लौटने की उम्मीद के साथ उनके कोलकाता दफ्तर में उनसे मिले थे.

हिरन ने आरोप को सिरे से खारिज कर दिया. हिरन ने 2021 में विधानसभा की खड़गपुर सदर सीट भाजपा के टिकट पर जीती थी. सितारों के बीच तलवारें खिंचने के तमाशे की वजह से हुगली और घाटल की सीटों ने सबका ध्यान खींचा. आखिरकार 4 जून को पता चलेगा कि कौन-सा अभिनेता अपनी सीट पर राजनेता नंबर वन बना.

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