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बंगाल में क्यों दांव पर है सुवेंदु अधिकारी का रसूख?

बंगाल में भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेता सुवेंदु अधिकारी तृणमूल का दम निकालने और 2026 के विधानसभा चुनाव तक जोशो-खरोश कायम रखने के लिए अपना पूरा जोर लगा रहे

बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह (बाएं) और महिला मोर्चा प्रमुख फाल्गुनी पात्रा के साथ सुवेंदु अधिकारी (दाएं)
बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह (बाएं) और महिला मोर्चा प्रमुख फाल्गुनी पात्रा के साथ सुवेंदु अधिकारी (दाएं)
अपडेटेड 28 मई , 2024

केवल एक ऐसा मजबूत नेता ही अपनी पार्टी के भीतर प्रतिद्वंद्वियों के बीच मतभेदों को पाट सकता है, जिसका रौब-दाब हो और जिसका आदर भी किया जाता हो. यह 10 मई को पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट के नैहाटी विधानसभा क्षेत्र में साफ नजर आया.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रचार अभियान की अगुआई कर रहे वाहन में बैरकपुर के उम्मीदवार अर्जुन सिंह और पार्टी की पश्चिम बंगाल महिला मोर्चे की प्रमुख फाल्गुनी पात्रा भी मौजूद थीं. दरअसल, पात्रा बैरकपुर की रहने वाली हैं और सिंह को पार्टी की लोकसभा उम्मीदवारी मिलने से पहले वे अपनी उम्मीदवारी जता रही थीं.

सिंह ने 2019 में भाजपा के लिए यह लोकसभा सीट जीती थी, मगर फिर वे 2022 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए थे. 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए तृणमूल के उम्मीदवारों की सूची से उन्हें हटा दिए जाने के बाद वे भगवा खेमे में लौट आए और उन्हें भाजपा से टिकट भी मिल गया. जाहिर है, यह पात्रा को पसंद नहीं आया.

मगर जिस शख्स ने दोनों को जोड़ते हुए एकीकृत मोर्चा तैयार करने के लिए प्रेरित किया, वे उसी कार में सवार थे. वे थे नेता विपक्ष और भाजपा के बड़े चेहरे सुवेंदु अधिकारी. उन्होंने पात्रा को भीड़ के बीच देखा और फिर उन्हें गाड़ी में चढ़ने के लिए कहा.

दरअसल, नंदीग्राम के विधायक सुवेंदु अधिकारी भाजपा में बिखरे हुए लोगों को एकजुट करने वाले नेता के तौर पर उभरे हैं. पार्टी के कई पुराने दिग्गज नेता - जिनमें कई तो अधिकारी के कटु आलोचक थे - अब तृणमूल से मोर्चा लेने वाले अधिकारी का सहयोग कर रहे हैं. अधिकारी सत्ताधारी पार्टी और उसके नेताओं पर लगातार भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं और उनकी नाक में दम कर रखा है. पार्टी के उम्मीदवारों को जीत दिलाने में मदद करने के लिए 'काम पर लग जाओ' की अधिकारी की अपील पर ज्यादातर भाजपा नेता ध्यान दे रहे हैं. यह दावा करने के लिए कि मानो तृणमूल को हराने का रहस्य उनके पास है, तृणमूल के 53 वर्षीय पूर्व दिग्गज शातिर अंदाज में कहते हैं, "तृणमूल के भीतर मेरे सूत्र (सोर्स) मौजूद हैं."

इसमें शक नहीं कि अधिकारी बंगाल में सबसे लोकप्रिय विपक्षी नेता हैं. वे 2009 से 2016 तक तामलुक से तृणमूल के सांसद और कांठी से विधायक (2006-2009) रहे हैं. फिलहाल पिछले दो बार से वे नंदीग्राम के विधायक (2016 से) हैं. उन्होंने 2021 में तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी को हरा दिया था जिसकी खूब चर्चा हुई. यह भी जाहिर है कि महत्वाकांक्षी इरादों वाले नेता अधिकारी 2024 से आगे का खाका खींच रहे हैं. उनका मुख्य मकसद 2026 के विधानसभा चुनावों में तृणमूल को सत्ता से बाहर करना और बंगाल के सबसे बड़े राजनेता के तौर पर उभरना है. शायद यही वजह थी कि यह साफ हो जाने के बाद कि ममता के भतीजे और तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी मुख्यमंत्री के चुने हुए उत्तराधिकारी हैं, अधिकारी 2020 में भाजपा में शामिल हो गए. 

भाजपा के एक सूत्र का कहना है, "उम्मीदवारों की सूची तय करने में सुवेंदु दा ने अहम भूमिका निभाई." पार्टी के 42 उम्मीदवारों में से सात भाजपा के मौजूदा विधायक और सुवेंदु अधिकारी के वफादार हैं, वहीं कम से कम पांच उम्मीदवार तृणमूल के दलबदलू हैं जो अधिकारी के साथ या फिर बाद में भाजपा में शामिल हो गए थे. कई अन्य सीटों पर उम्मीदवार तय करने में अधिकारी ने पार्टी के संसदीय बोर्ड के साथ तालमेल बिठाया. सूत्र बताते हैं, "अगर ये उम्मीदवार जीतते हैं तो राज्य इकाई में सुवेंदु दा का प्रभुत्व स्थापित हो जाएगा. पर अगर ऐसा नहीं होता है तो चीजें उनके हाथ से निकल सकती हैं."

बंटी हुई बंगाल भाजपा इकाई में अधिकारी का अधिकांश प्रभाव इस वजह से है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनका अच्छा तालमेल है. इन दिनों अधिकारी आत्मविश्वास से लबरेज हैं. उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, "हम उन सभी छह सीटों पर जीत हासिल करेंगे जहां पहले दो चरणों में मतदान हुआ था. तीसरे चरण की चार में से कम से कम एक सीट पर हम जीत दर्ज करेंगे. मुकाबला दो-ध्रुवीय है. ज्यादातर सीटों पर जंग हमारे और तृणमूल के बीच है. यहां तक कि वाम-कांग्रेस की रैलियों में जाने वाले लोग भी हमें ही वोट देंगे. मुर्शिदाबाद और बहरामपुर जैसी सीटों पर वाम-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ मोर्चे पर हम हैं. तृणमूल की वहां कोई जगह नहीं है."

हालांकि, अधिकारी पर संदेशखाली में तृणमूल नेताओं की ओर से महिलाओं के खिलाफ किए गए कथित अत्याचार के भाजपा के मौजूदा शीर्ष चुनावी मुद्दे को लेकर सियासी छल करने का आरोप है. हाल ही में तृणमूल ने सिलसिलेवार कई 'स्टिंग ऑपरेशन' वीडियो जारी किए जिसमें भाजपा के कार्यकर्ताओं ने कथित रूप से 'स्वीकार' किया कि उस पूरे मामले की साजिश दरअसल अधिकारी ने रची थी. आरोप है कि 72 महिलाओं को यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने की शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रति महिला 2,000 रुपए दिए गए थे और शिकायतकर्ताओं से कोरे कागज पर दस्तखत कराए गए थे. मगर अधिकारी ने दावा किया कि उन वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की ओर से उनकी जांच की जानी चाहिए.

मगर सबसे पहले अधिकारी को अपने गृह जिले पूर्व मेदिनीपुर की दो लोकसभा सीटों - कांठी और तामलुक - पर जीत पक्की करनी होगी, जहां उनके परिवार का व्यापक प्रभाव है. सुवेंदु अधिकारी के पिता शिशिर अधिकारी कांठी के तो उनके भाई दिव्येंदु तामलुक से निवर्तमान सांसद हैं. हालांकि पार्टी ने इस बार दूसरे उम्मीदवारों को यहां से मैदान में उतारा है. इस बार सुवेंदु के सबसे छोटे भाई सौमेंदु कांठी से तो पूर्व न्यायाधीश अभिजीत गांगुली तामलुक से भाजपा उम्मीदवार बनाए गए हैं.

जाहिर है, सुवेंदु अधिकारी निर्विवाद रूप से पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े नेता हैं. मगर लोकसभा चुनावों में अच्छे नतीजे ही केवल उनके मुख्य मकसद को साकार करने में मदद कर पाएंगे.

- अर्कमय दत्ता मजूमदार

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