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क्या यूपी की ये 'सुरक्षित' सीटें सुरक्षित कर सकेंगी नया दलित नेतृत्व?

यूपी में राजनैतिक दलों ने आरक्षित लोकसभा सीटों पर उतारे नए युवा उम्मीदवार, ज्यादातर अपने पिता की सियासी विरासत के सहारे चुनाव मैदान में

पुष्पेंद्र सरोज, कौशांबी सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार
पुष्पेंद्र सरोज, कौशांबी सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार
अपडेटेड 16 मई , 2024

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कौशांबी जिले की मंझनपुर (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर इंद्रजीत सरोज समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर भाग्य आजमा रहे थे. सात साल पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में सरोज बहुजन समाज पार्टी (बसपा) उम्मीदवार के तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी लाल बहादुर के मुकाबले हार गए थे. 2022 के चुनाव में एक बार फिर लाल बहादुर और इंद्रजीत सरोज आमने-सामने थे. सरोज बसपा छोड़ सपा में शामिल हो चुके थे.

2022 के विधानसभा चुनाव में इंद्रजीत सरोज के चुनाव अभियान की कमान उनके युवा बेटे पुष्पेंद्र सरोज के हाथ में थी. पुष्पेंद्र 2019 में लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से बीएससी (एकाउंटिंग ऐंड मैनेजमेंट) की पढ़ाई कर सियासत में पिता का हाथ बंटाने प्रयागराज आ गए थे. 2022 के विधानसभा चुनाव में पुष्पेंद्र ने अपने पिता के चुनाव कार्यालय और काल सेंटर की पूरी जिम्मेदारी संभाली. चुनाव में वोटर लिस्ट से लेकर प्रचार का सारा ब्योरा पुष्पेंद्र के लैपटॉप पर था.

यह पुष्पेंद्र के चुनावी प्रबंधन का ही कमाल था कि इंद्रजीत ने 2022 का विधानसभा चुनाव करीब 24 हजार मतों से जीतकर भाजपा प्रत्याशी लाल बहादुर से पांच साल पहले मिली हार का बदला चुकाया. 

कुशल चुनावी प्रबंधन के चलते पुष्पेंद्र सपा नेतृत्व की नजर में चढ़ गए थे. 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए जब सपा ने कौशांबी (सुरक्षित) लोकसभा सीट पर प्रभावी उम्मीदवार की तलाश शुरू की तो सारी कवायद पुष्पेंद्र पर आकर ठहर गई. 1 मार्च, 2024 को पुष्पेंद्र ने चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष की दहलीज जैसे ही पार की, सपा ने उन्हें कौशांबी लोकसभा सीट से सपा का उम्मीदवार घोषित कर दिया. पांचवें चरण के लिए 20 मई को जब कौशांबी सीट पर मतदान होगा तब पुष्पेंद्र की उम्र 25 वर्ष और दो महीने होगी.

सपा नेताओं का दावा है कि देश भर में इतनी कम्र उम्र का कोई भी प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं है. सफेद शर्ट, काली पैंट पहने और गले में गमछा लपेटे पुष्पेंद्र रोज सुबह 10 बजे चुनाव क्षेत्र में निकल पड़ते हैं. "आ गए अउर आवत हैं, साइकिल वाले आवत हैं. दाबौ बटनिया तान के, साइकिल के निशान पे. लाल टमाटर ताजा है, पुष्पेंद्र भैया राजा है." जैसे जुबान पर चढ़ने वाले नारे पुष्पेंद्र के प्रचार अभियान को नई पहचान दे रहे हैं. 

पुष्पेंद्र की तरह मछलीशहर (सुरक्षित) लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार प्रिया सरोज की भी यही कहानी है. 1998 में उनके जन्म के बाद पिता तूफानी सरोज के तो भाग्य ही खुल गए. अगले ही वर्ष 1999 में तूफानी गाजीपुर जिले की सैदपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए. वे लगातार तीन बार सांसद रहे. इसी वजह से प्रिया की शिक्षा दिल्ली और नोएडा में हुई. नोएडा के एक निजी विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद प्रिया ने सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की. प्रिया की तेज-तर्रार छवि को देखते हुए सपा नेतृत्व ने उन्हें मछलीशहर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है.

अब प्रिया पर पिता तूफानी को 2014 के लोकसभा चुनाव में मछलीशहर लोकसभा सीट पर मिली हार का बदला लेने और इसी चुनाव क्षेत्र से लगातार दो बार चुनाव हारने वाली सपा को जीत की राह पर लाने की कठिन चुनौती है. प्रिया बताती हैं, "मैं 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार क्षेत्र में लोगों के बीच जाकर उनके लिए आवाज उठा रही हूं. इस बार जनता के समर्थन से मछली शहर सीट पर सपा का परचम लहारएगा."

पुष्पेंद्र और प्रिया पर अगर अपने पिता को लोकसभा चुनाव में मिली हार का बदला लेने की जिम्मेदारी है तो बहराइच (सुरक्षित) लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार आनंद कुमार गोंड को अपने पिता को मिली जीत को बरकरार रखने की जिम्मेदारी है. यूपी की बहराइच संभवत: इकलौती सीट है जहां भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद अक्षयबर लाल गोंड की जगह उनके बेटे आनंद कुमार गोंड को उम्मीदवार बनाया है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग में एमबीए, गोरखपुर विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएट, वाराणसी के काशी विद्यापीठ से पीएचडी और उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा करने वाले आनंद कुमार गोंड ने भाजपा संगठन में जिले से लेकर प्रदेश तक अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारी निभाई है. बहराइच सीट पर भाजपा ने पिछले दो चुनाव में दोनों बार नए चेहरे पर दांव लगाकर जीत हासिल की. वर्ष 2024 के चुनाव में भी भाजपा ने आनंद कुमार गोंड के रूप में तीसरी बार नए चेहरे पर भरोसा जताया है. आनंद के कंधों पर बहराइच सीट पर भाजपा की हैट्रिक जमाने की बड़ी जिम्मेदारी है.

यूपी में आरक्षित लोकसभा सीटों की कुल संख्या 17 है. इनमें से एक-तिहाई पर विभिन्न राजनैतिक दलों ने नए और युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. हालांकि इनमें से ज्यादातर चुनावी राजनीति की पैतृक विरासत को थामकर लोकसभा चुनाव में उतरे हैं. बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग में प्रोफेसर सुशील पांडेय बताते हैं, "दलित राजनीति के पुराने नेता अब बुजुर्ग हो चुके हैं. उनका स्थान भरने के लिए नया नेतृत्व सामने आ रहा है. इसकी झलक इस बार के लोकसभा चुनाव में दिखाई दे रही है. यह रुझान जारी रहा तो भविष्य में होने वाले चुनाव में युवा दलित नेताओं की एक बड़ी संख्या चुनावी राजनीति में भाग्य आजमाते हुए दिखेगी."

दलित जाति में नए नेतृत्व की शुरुआत पश्चिमी यूपी के सहारनपुर से हुई जहां चटमलपुर के पास धडकूलि गांव के रहने वाले चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण ने भीम आर्मी नामक संगठन बनाकर दलित विशेषकर जाटव समाज के युवाओं को जोड़ना शुरू किया. चंद्रशेखर पहली बार 2015 में विवादों में घिरे थे जब उन्होंने अपने गांव के बाहर एक बोर्ड लगाया था, जिसमें 'धडकाली वेलकम्स यू द ग्रेट चमार्स' लिखा था. इस कदम ने गांव में दलितों और ठाकुरों के बीच तनाव पैदा कर दिया था. इसके बाद चंद्रशेखर ने आजाद समाज पार्टी बनाकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा. 2022 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया के जरिए काफी सुर्खियां बटोरी हैं.

चंद्रशेखर लंबे समय से नगीना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए मेहनत कर रहे थे. उन्हें राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी का समर्थन हासिल था. जयंत ही चंद्रशेखर को इंडिया गठबंधन में शामिल कर नगीना से उम्मीदवार बनाने के सबसे बड़े पैरोकार थे. लेकिन जयंत के भाजपा के साथ चले जाने से चंद्रशेखर के समीकरण गड़बड़ा गए. नगीना लोकसभा सीट पर सपा का उम्मीदवार उतार कर अखिलेश यादव ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के विपक्षी इंडिया गठबंधन के रूप में चुनाव मैदान में उतरने के रास्ते बंद कर दिए.

इसके बाद चंद्रशेखर आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे. भाजपा सरकार ने चंद्रशेखर को वाइ प्लस श्रेणी की सुरक्षा देकर जाटव बिरादरी को एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की. चंद्रशेखर की युवा दलितों के बीच लोकप्रियता ही वह वजह थी जिस से बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने 6 अप्रैल से यूपी में अपने चुनावी अभियान की शुरुआत नगीना लोकसभा सीट से की. आकाश ने लोगों से चंद्रशेखर का नाम लिए बगैर इशारों में उनसे सावधान रहने की अपील की. पहले चरण के चुनाव में शामिल नगीना लोकसभा सीट पर 19 अप्रैल को मतदान हो चुका है. 36 वर्षीय आजाद दलित और मुस्लिम मतदाताओं, विशेषकर दलित युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता पर भरोसा कर रहे हैं. 

चंद्रशेखर की तरह ही जनता के बीच सीधे जाकर कनेक्ट करने में माहिर लालगंज से बसपा उम्मीदवार इंदु चौधरी हैं. मूल रूप से आंबेडकर नगर जिले के राजेसुल्तानपुर इलाके की रहने वाली इंदु पहली बार तब चर्चा में आईं जब 2007 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर जॉइन किया था.

इंदु बताती हैं, "दलित जाति की होने की वजह से मेरा सामान हॉस्टल से फेंक दिया गया था. इसके खिलाफ मैंने आवाज उठाई और जीती भी." सामाजिक कार्यों में रुचि रखने वाली इंदु ने 2021 में 'बहुजन शक्ति' नाम से एक संगठन बनाया. इसके जरिए गांवों में जातिवाद, ऊंच-नीच और रूढ़ियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करना शुरू किया. लालगंज से बसपा सांसद संगीता आजाद ने जब पार्टी छोड़ भाजपा जॉइन की तो बसपा प्रमुख मायावती ने 21 मार्च को इंदु चौधरी को दिल्ली बुलवाया. करीब दो हफ्ते बाद 3 अप्रैल को बसपा ने इंदु को लालगंज से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया. 

लोकसभा चुनाव में लगातार उम्मीदवार बदलने के सपा के तौर-तरीकों ने शाहजहांपुर लोकसभा सीट से ज्योत्सना गोंड के चुनाव लड़ने की हसरत को परवान चढ़ा दिया. 26 वर्षीया ज्योत्सना गोंड, जो सपा के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के अध्यक्ष व पूर्व एमएलसी राज पाल कश्यप की भानजी हैं, पूरे उत्साह के साथ चुनाव मैदान में डट गई हैं. उन्हें राजपाल कश्यप के अनुभव का लाभ भी मिल रहा है. ज्योत्सना बताती हैं, "मामा (राजपाल कश्यप) की शादी में मैं अखिलेश यादव जी से मिली थी. तभी से मैंने राजनीति में आने का मन बना लिया था." ज्योत्सना के युवा कंधों पर शाहजहांपुर लोकसभा सीट पर भाजपा को हैट्रिक जमाने से रोकने की कठिन चुनौती है.

पुष्पेंद्र सरोज, 25 वर्ष

कौशांबी सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार
योग्यता: लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से बीएससी अकाउंटिंग ऐंड मैनेजमेंट
पिछला नतीजा: कौशांबी सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार विनोद सोनकर ने सपा उम्मीदवार इंद्रजीत सरोज को 39 हजार मतों से हराया था
वर्तमान चुनौती: कौशांबी सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार पुष्पेंद्र सरोज को भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान सांसद विनोद सोनकर और बसपा उम्मीदवार शुभनारायण से चुनौती मिल रही है 

पूजा सरोज, 28 वर्ष 

पूजा सरोज, मछली शहर सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार


मछली शहर सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार 
योग्यता: सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट
पिछला नतीजा: मछलीशहर सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार बी.पी. सरोज ने बसपा उम्मीदवार त्रिभुवन राम को महज 181 वोटों के अंतर से हराया था 
वर्तमान चुनौती: मछलीशहर सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार पूजा सरोज को भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान सांसद बी. पी. सरोज और बसपा उम्मीदवार व पंजाब कैडर के रिटायर्ड आइएएस अधिकारी कृपा शंकर सरोज से चुनौती मिल रही है

ज्योत्सना गोंड, 26 वर्ष

शाहजहांपुर सुरक्षित लोकसभा सीट से सपा उम्मीदवार  
योग्यता: मास्टर्स इन लॉ
पिछला नतीजा: शाहजहांपुर सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अरुण कुमार सागर ने बसपा उम्मीदवार अमर चंद्र जौहर को 2.6 लाख मतों से हराया था 
वर्तमान चुनौती: शाहजहांपुर सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा उम्मीदवार ज्योत्सना गोंड को भाजपा उम्मीदवार और वर्तमान सांसद अरुण कुमार सागर और बसपा उम्मीदवार दोदराम वर्मा से चुनौती मिल रही है

इंदु चौधरी, 40 वर्ष

लालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से बसपा उम्मीदवार
योग्यता: असिस्टेंट प्रोफेसर, अंग्रेजी विभाग, बीएचयू
पिछला नतीजा: लालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से 2019 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार संगीता आजाद ने भाजपा उम्मीदवार नीलम सोनकर को 1.60 लाख से अधिक मतों से हराया था 
वर्तमान चुनौती: लालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार इंदु चौधरी को भाजपा उम्मीदवार नीलम सोनकर, सपा के दारोगा सरोज से चुनौती मिल रही है

चंद्रशेखर आजाद, 36 वर्ष 

चंद्रशेखर आजाद, नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार


नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार 
योग्यता: पेशे से वकील
पिछला नतीजा: नगीना सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार गिरीश चंद्रा ने भाजपा उम्मीदवार यशवंत सिंह को 1.67 लाख मतों से हराया था 
वर्तमान चुनौती: लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 19 अप्रैल को हुए मतदान में नगीना सुरक्षित सीट पर चंद्रशेखर आजाद को भाजपा के ओम कुमार, सपा के मनोज कुमार और बसपा के सुरेंद्र पाल सिंह से चुनौती मिली

आनंद कुमार गोंड, 40 वर्ष 

बहराइच सुरक्षित लोकसभा सीट से उम्मीदवार 
योग्यता: एमबीए (मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग), पीएचडी
पिछला नतीजा: बहराइच सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2019 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार अक्षयबर लाल गोंड ने सपा उम्मीदवार शब्बीर अहमद को 1.28 लाख मतों से हराया था 
वर्तमान चुनौती: बहराइच सुरक्षित लोकसभा सीट पर 2024 के लोकसभा चुनाव में वर्तमान सांसद अक्षयबर लाल गोंड के बेटे और भाजपा उम्मीदवार आनंद कुमार गोंड को सपा उम्मीदवार रमेश गौतम और बसपा उम्मीदवार बृजेश कुमार सोनकर से चुनौती मिल रही है.

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