- अजय सुकुमारन
स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में मैसूरू को 23वें स्थान पर रखा गया था. केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय साल 2014 से सालाना स्वच्छता सर्वेक्षण आयोजित करता है. कर्नाटक के इस 'महलों के शहर' के लिए रैंकिंग की यह पायदान बेहद तेज गिरावट थी क्योंकि सर्वेक्षण के पहले संस्करण में उसे देश का सबसे स्वच्छ शहर माना गया था.
यह शहर अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने को उत्सुक है और 600 साल से अधिक पुराने मैसूरू शाही परिवार के प्रतीकात्मक प्रमुख यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार भी इसकी मिसाल नजर आ रहे हैं.
शहर में महाराजा कॉलेज के मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मेगा रैली के एक दिन बाद 15 अप्रैल को पूर्व शाही परिवार के 32 वर्षीय वंशज यदुवीर को आयोजन स्थल की सफाई करते नगर निगम कार्यकर्ताओं का हाथ बंटाते देखा गया. मैसाचुसेट्स यूनिवर्सिटी से स्नातक यदुवीर को मई 2015 में वाडियार परिवार का 27वां संरक्षक नियुक्त किया गया था.
हालांकि यदुवीर के लिए वह स्वच्छता अभियान साफ-सफाई को लेकर मैसूरू की खोई हुई चमक को वापस लाने की कोशिश से कहीं बढ़कर है. इसे शाही वंशज की ओर से उन विरोधियों को गलत साबित करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है जो दावा करते हैं कि 'महाराजा' आम पहुंच से बाहर रहने वाले शख्स हैं क्योंकि वे 'महल में रहते हैं.' वहीं, इन आम चुनावों में मैसूरू-कोडागु लोकसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार यदुवीर को एक ऐसे नेता के तौर पर देखा जाना जरूरी है जो जनता तक पहुंच सके और उनका प्रतिनिधित्व कर सके.
20 अप्रैल को मैसूरू शहर के बाहरी इलाके के गांवों में ऊपर से खुले वाहन के जरिए अपने प्रचार के दौरान भाजपा उम्मीदवार ने कुछ ऐसा ही दिखाने की कोशिश की. उन्होंने कहा, ''मेरे पूर्वज भी महल में पैदा हुए और पले-बढ़े, फिर भी उन्होंने लोगों के बीच काम किया. मैं भी उन्हीं सिद्धांतों का पालन करूंगा.'' उन्होंने कहा कि मैसूरू के पूर्ववर्ती शासकों ने इस इलाके में स्वर्ण युग की शुरुआत की थी, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के लिए स्वर्ण युग का आगाज कर रहे हैं. हम सभी को उनका समर्थन करना है.
मैसूरू-कोडागु संसदीय सीट पर 2014 से भाजपा की मजबूत पकड़ है. पिछले दोनों चुनावों में पार्टी के मौजूदा सांसद प्रताप सिंह ने कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी को 2014 में 31,000 तो 2019 में 1.38 लाख से अधिक वोटों से हराया था. हालांकि, इस बार भाजपा इस निर्वाचन क्षेत्र में यदुवीर के रूप में एक नया चेहरा लेकर आई है. पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यदुवीर को मैसूरू से चुनावी मैदान में उतारना मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है क्योंकि स्थानीय लोगों में पूर्व शाही परिवार के सदस्यों के प्रति सम्मान है.
32 वर्षीय यदुवीर अपने परिवार से राजनीति में किस्मत आजमाने वाले पहले शख्स नहीं हैं. उनसे पहले उनके दादा श्रीकांत दत्ता नरसिंहराजा वाडियार मैसूरू से चार बार सांसद रहे थे. इस सीट पर 26 अप्रैल को लोकसभा 2024 के लिए दूसरे चरण में मतदान है (रिपोर्ट लिखे जाने तक वोटिंग नहीं हुई थी) और यदुवीर के खिलाफ कांग्रेस के एम. लक्ष्मण मैदान में हैं. लक्ष्मण अपनी पार्टी के प्रवक्ता और इलाके का स्थानीय चेहरा हैं.
हालांकि वाडियार वंशज को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से पार पानी होगी. मैसूरू दिग्गज कांग्रेसी नेता सिद्धारमैया का गृहनगर है और यह दो लोकसभा क्षेत्रों मैसूरू-कोडागु और चामराजनगर में फैला हुआ है. सिद्धारमैया ने लक्ष्मण और चामराजनगर से उम्मीदवार सुनील बोस के पीछे अपनी सारी ताकत झोंक दी है. मैसूरू-कोडागु उम्मीदवार ने जब अपना नामांकन दाखिल किया तो मुख्यमंत्री ने 3 अप्रैल को एक रैली में कहा, ''अगर आप सिद्धारैमया की विश्वसनीयता बरकरार रखना चाहते हैं तो आपको लक्ष्मण को जिताना होगा. अगर लक्ष्मण जीतते हैं तो वह मेरे जीतने सरीखा होगा.''
कांग्रेस जहां अपनी कल्याणकारी वादों और मैसूरू में सिद्धारमैया की लोकप्रियता पर भरोसा कर रही है, वहीं वह समान रूप से जाति कार्ड भी खेल रही है. दरअसल, लक्ष्मण प्रभावशाली वोक्कालिगा समुदाय से हैं जिसे कर्नाटक में दूसरा सबसे बड़ा जाति समूह माना जाता है. इस बीच, विरासत और विकास, यदुवीर के दो चुनावी मुद्दे हैं और उनका कहना है कि ये मैसूरू की मुख्य चिंताएं हैं.
उन्होंने इंडिया टुडे से कहा, ''हम अपनी विरासत और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इस निर्वाचन क्षेत्र का प्राकृतिक विकास करना चाहते हैं तथा आगे बढ़ना चाहते हैं. हमारे गांव के वातावरण और पर्यावरण को भी संरक्षण की जरूरत है, मगर हमें शहरी केंद्रों को भी सभी सुविधाओं और विकास की आवश्यकता है. इसलिए हमें वह दोनों काम करने की जरूरत है और अपनी प्राचीन परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक आवश्यकताओं को भी पूरा करने की जरूरत है.''
राजनैतिक विश्लेषक मुजफ्फर असादी का कहना है कि विजेता का फैसला करने में एक अहम कारक यह होगा कि महिलाएं किस तरह मतदान करती हैं जो कांग्रेस की गारंटियों की लाभार्थी हैं. यह बताते हुए कि दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर है, असादी कहते हैं, ''यह एक नजदीकी लड़ाई होने वाली है.''

