इन गर्मियों में गुजरात में पारा ज्यों-ज्यों रोज ऊपर चढ़ रहा है, लोकसभा चुनाव से पहले जमीन पर भारतीय जनता पार्टी की ताबड़तोड़ गतिविधियां बढ़ रही हैं. प्रदेश अध्यक्ष सी.आर. पाटील और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल राज्य के चप्पे-चप्पे की खाक छानते हुए दिन में बूथ कार्यकर्ता समितियों की तीन से चार सभाओं को संबोधित कर रहे हैं. उनका लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह - जो गांधीनगर सीट से उम्मीदवार भी हैं - की विशाल रैलियों से पहले पन्ना समितियों के 74 लाख सदस्यों से जुड़ना है. - राज्य की मतदाता सूची के हर पन्ने पर दर्ज 30 में से पांच चुनिंदा वोटर इन पन्ना समितियों के सदस्य हैं. इस बार भाजपा का लक्ष्य हर सीट पर पांच लाख वोट बटोरना है. इसका मतलब है हर बूथ पर पार्टी को 2019 में मिले वोटों से 370 वोट ज्यादा बटोरना.
भाजपा ने मार्च के मध्य तक सभी 26 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया. कांग्रेस मध्य अप्रैल तक अपने 24 उम्मीदवारों पर आखिरी फैसला नहीं ले पाई. इंडिया गठबंधन का हिस्सा होने के नाते आप ने दो सीटों - भावनगर और भरूच - से उम्मीदवार उतारे हैं.
गुजरात ने 2014 में भाजपा की 282 सीटों में अपनी सभी 26 सीटों का योगदान किया था. फिर 2019 में भी राज्य ने भाजपा में पूरा भरोसा जताया. राज्य में 7 मई को एक ही चरण में मतदान होगा और शुरुआती अनुमान एक और क्लीन स्वीप की भविष्यवाणी कर रहे हैं. दिसंबर, 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 52.5 फीसद वोट हिस्सेदारी के साथ 156 सीटें जीतीं. कांग्रेस और आप की वोट हिस्सेदारी मिलाकर 40.2 फीसद थी. गुजरात का राजनैतिक फलक मोदी की लोकप्रियता की विराट छाया तले है और ऐसे में मतदाता के मन में एक ही भावना उमड़ रही है कि गुजराती प्रधानमंत्री के लिए वोट डालना उसका सौभाग्य है. गुजराती अस्मिता की भावना मोदी और शाह के गृह राज्य में भाजपा की अपराजेयता का मुख्य कारण है.
अलबत्ता, गुजरात में भाजपा की सफलता की कहानी में बारीक रणनीति और लचीले फैसलों का भी योगदान है. बीते तीन दशक से विश्वसनीय नेतृत्व देने में कांग्रेस या किसी भी दूसरी पार्टी की नाकामी से इसमें और बढ़ोतरी ही हुई है. एम.एस. विश्वविद्यालय बड़ोदा में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रमुख अमित ढोलकिया कहते हैं, "सवाल यह है कि कोई भाजपा को वोट क्यों न दे और इसका कोई भरोसेमंद जवाब नहीं है. बेरोजगारी को लेकर चिंता है, पर कांग्रेस इसका समाधान पेश नहीं कर पाई है. लोकतंत्र बचाना मतदाताओं की प्राथमिक चिंता नहीं है."
इतना ही नहीं, कांग्रेस पहले मिले फायदों को आगे बढ़ाने से भी चूक गई. इनमें 2017 के चुनाव में मिली बढ़त भी है, जब भाजपा 99 सीटों पर सिमट गई और कांग्रेस ने 77 सीटें जीती थीं. यह उलटफेर हार्दिक पटेल की अगुआई में पाटीदार आरक्षण आंदोलन की बदौलत हुआ था. मगर फिर भाजपा के वोटर भगवा पाले में लौट गए. उनमें खुद हार्दिक भी थे, जो 2022 के चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए. पार्टी की ढलान पर विचार करते हुए एक तपे-तपाए कांग्रेस नेता ने इसके लिए पार्टी में गहरी जड़ें जमाए बैठी भाई-भतीजावाद की संस्कृति, '90 के दशक व उसके बाद के बौने नेतृत्व और जमीनी जड़ों से कटे होने को दोषी ठहराया.
विकास के कामों को गिनवाना भी मुश्किल नहीं है जो भाजपा की सरकारों ने किए हैं और जिनसे पार्टी की पकड़ मजबूत हुई है. मसलन, नर्मदा नहर का जाल गुजरात के सुदूर उत्तरी कोनों तक फैल गया है, जिनमें पहले बारिश के पानी पर निर्भर कच्छ और सौराष्ट्र भी हैं. भाजपा को इससे उपजी जबरदस्त सद्भावना का फायदा मिला है. फिर प्रधानमंत्री मोदी की लाडली परियोजनाएं हैं - जीआईएफटी या गिफ्ट सिटी, धोलेरा औद्योगिक शहर, दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और बंदरगाहों का विस्तार, जिनकी वजह से बुनियादी ढांचे का ताबड़तोड़ विकास हुआ और रोड कनेक्टिविटी बढ़ी. इन परियोजनाओं की बदौलत राज्य भर में रियल एस्टेट की कीमतों में इजाफा हुआ.
मतदाताओं में कानून और व्यवस्था के तंत्र के प्रति सुरक्षा और विश्वास की धारणा भी बनी है. हालांकि ध्रुवीकरण है - जिसका प्रमाण 2002 के बाद अधिसूचित 'अशांत क्षेत्रों' की संख्या में हुई बढ़ोतरी से मिला, यानी ऐसे क्षेत्र जहां हिंदुओं और मुसलमानों के बीच जमीन-जायदाद के सौदे अशांत क्षेत्र कानून से प्रबंधित होते हैं और इस तरह समुदायों के बीच पृथकता की लकीर को गहरा कर देते हैं - लेकिन सांप्रदायिक दंगों की घटनाओं में खासी कमी आई है.
गुजरात सरकार की स्थिर कार्यप्रणाली ने भी विश्वास जगाया है. इसकी कुंजी सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं जो किसी हस्तक्षेप के बिना प्रशासन चला रहे हैं. 2014 और 2022 के बीच पूर्व अफसरशाह के. कैलाशनाथन ने मुख्यमंत्री के दफ्तर में प्रमुख प्रिंसिपल सेक्रेटरी के पद से प्रशासन का संचालन किया. दिसंबर 2022 में दो और सेवानिवृत्त अफसरों हसमुख अधिया और एस.एस. राठौड़ को मुख्यमंत्री का सलाहकार नियुक्त कर दिया गया.

