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दिल्ली में नए प्रत्याशियों को टिकट देने का दांव भाजपा के लिए साबित होगा बैकफायर?

दिल्ली की सात सीटों में से छह पर उम्मीदवार बदलने की भाजपा की रणनीति जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए साबित होगी चुनौती?

नई दिल्ली सीट से भाजपा प्रत्याशी बांसुरी स्वराज
नई दिल्ली सीट से भाजपा प्रत्याशी बांसुरी स्वराज
अपडेटेड 23 अप्रैल , 2024

केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अब तक 400 से ज्यादा लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है. अधिकतर राज्यों में मोटे तौर पर मौजूदा सांसदों को फिर से टिकट दिए गए हैं. पर दिल्ली और छत्तीसगढ़ इस मामले में अपवाद दिखते हैं.

दिल्ली की सात लोकसभा सीटों में से छह पर पार्टी ने उम्मीदवार बदल दिए हैं. उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद, भोजपुरी गायक-अभिनेता मनोज तिवारी ही टिकट बचा पाए. जिनके टिकट कटे उनमें गौतम गंभीर और हंसराज हंस 2019 में पहली बार सांसद बने थे. फिर भी उन्हें यहां मौका नहीं दिया गया. अब दिल्ली प्रदेश भाजपा के अंदर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि बिल्कुल नए उम्मीदवारों को उतारने की रणनीति जमीनी स्तर पर भाजपा के लिए चुनौती बन रही है.

दिल्ली की सातों सीटों पर 25 मई को चुनाव होना है. भाजपा ने यहां उम्मीदवारों का ऐलान करीब ढाई महीने पहले कर दिया. 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी सातों सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला हुआ था. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग लड़ रही थीं. इस बार दोनों में गठबंधन हो गया है.

गठबंधन के तहत आप को चार और कांग्रेस के खाते में तीन सीटें आई हैं. आप ने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं जबकि कांग्रेस ने उत्तर पूर्वी दिल्ली से मनोज तिवारी के खिलाफ कन्हैया कुमार, उत्तर पश्चिमी दिल्ली से उदित राज और चांदनी चौक से जयप्रकाश अग्रवाल मैदान में हैं.

आप के प्रत्याशियों में महाबल मिश्र को छोड़कर कोई भी सांसद नहीं रहा है, पर बाकी तीन भी दिल्ली की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं. 70 साल के मिश्र 1998 में पहली बार विधायक चुने गए थे. 2009 में वे कांग्रेस के टिकट पर पश्चिमी दिल्ली सीट से लोकसभा पहुंचे थे. बाद में वे आप में आ गए. एक बार फिर वे पश्चिमी दिल्ली से प्रत्याशी हैं. यहां उनका मुकाबला भाजपा की कमलजीत सहरावत से है. सहरावत दक्षिणी दिल्ली की मेयर रही हैं. सहरावत के अलावा भाजपा ने दो और पूर्व मेयर योगेंद्र चंदोलिया को उत्तर पश्चिमी दिल्ली और हर्ष मल्होत्रा को पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार बनाया है.

नई दिल्ली से आप के उम्मीदवार सोमनाथ भारती बतौर विधायक तीसरे कार्यकाल में हैं. वे दिल्ली सरकार में मंत्री भी रहे हैं. उनके मुकाबले में भाजपा से बांसुरी स्वराज हैं जिनके पास अपनी मां और भाजपा दिग्गज सुषमा स्वराज की विरासत तो है पर पहली बार मैदान में उतरने की चुनौती भी है.

दरअसल, दिल्ली में नए उम्मीदवारों को उतारने की रणनीति खासकर उन सीटों पर पार्टी के लिए चुनौती बन रही है, जहां स्थापित नेताओं का टिकट काटा गया है. इनमें पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और चांदनी चौक का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा पश्चिमी दिल्ली से 2014 और 2019 में सांसद चुने गए थे. इसी तरह से दक्षिणी दिल्ली से पिछले दो बार से रमेश विधूड़ी चुनाव जीत रहे थे. चांदनी चौक का प्रतिनिधित्व डॉ. हर्षवर्धन कर रहे थे.

दिल्ली प्रदेश भाजपा के एक पदाधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, "हमारे अधिकांश उम्मीदवार पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. यह अपने आप में एक चुनौती है. हमें गंभीर, मीनाक्षी लेखी और हंस की सीटों पर ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही क्योंकि ये तीनों पार्टी के सांगठनिक ढांचे से नहीं बल्कि बाहर से लाए गए थे. बड़ी चुनौती हमें खासतौर पर पश्चिमी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और चांदनी चौक में प्रचार के दौरान महसूस हो रही है क्योंकि यहां हमारे स्थापित नेता सांसद थे. इन सीटों का प्रतिनिधित्व करने वाले हमारे तीनों नेताओं के समर्थकों की अच्छी-खासी संख्या है. इनमें से एक वर्ग में इनका टिकट कटने से नाराजगी भी है."

तो क्या यह नाराजगी चुनावी नुकसान पहुंचा सकती है, इसके जवाब में वे कहते हैं, "दिल्ली में मतदान होने में अब भी डेढ़-एक महीने का समय है. ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर कर लिया जाएगा."

लेकिन पार्टी चुनौती की बात को खुले में फिर भी स्वीकार नहीं रही. उसे नहीं लगता कि नए उम्मीदवारों की वजह से जमीनी स्तर पर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कहना है कि हम मोदी की गारंटी को लेकर चुनाव मैदान में हैं. हमारा प्रचार अभियान बिल्कुल सही ढंग से चल रहा है और पूरा भरोसा है कि सभी सात सीटों पर भाजपा जीत की हैट्रिक लगाएगी.

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