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उत्तर प्रदेश: भाजपा का बूथ विजय अभियान लक्ष्य साधने में कितना होगा सफल?

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के मुताबिक, पार्टी ने पिछले लोकसभा चुनाव में मिले वोटों में 10 फीसद बढ़ोत्तरी करने का लक्ष्य रखा है

उन्नाव में एक बैठक के दौरान भाजपा के प्रदेश महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह
उन्नाव में एक बैठक के दौरान भाजपा के प्रदेश महासचिव (संगठन) धर्मपाल सिंह
अपडेटेड 12 अप्रैल , 2024

उन्नाव के अब्बासपुर इलाके के एक निजी रिजॉर्ट में 17 मार्च को उन्नाव सदर विधानसभा के बूथ अध्यक्षों की बैठक किसी बोर्ड परीक्षा सरीखी थी. सुबह 10 बजे से उन्नाव विधानसभा के 300 से अधिक बूथ अध्यक्ष एक-एक कर पहुंचने लगे थे. हॉल में पड़ी कुर्सियों की बगल में लगे स्टैंड में बूथ नंबर चस्पां देख बूथ अध्यक्ष आश्चर्य में पड़ गए.

सभी बूथ अध्यक्षों को अपने बूथ नंबर वाली कुर्सी पर ही बैठना था. यह कुछ वैसा ही नजारा था जैसा कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान विद्यार्थी अपने रोल नंबर वाली सीट को परीक्षा हॉल में तलाशता है. लोकसभा चुनाव की घोषणा होते ही भाजपा ने बूथ पर संगठन को दुरुस्त करने के लिए इस बार नई रणनीति अपनाई.

इस रणनीति के सूत्रधार उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने स्वयं पहली बैठक उन्नाव में की. इसमें पहली बार बूथ अध्यक्षों के बैठने के लिए सीटें निर्धारित थीं. किसी भी बूथ अध्यक्ष को निर्धारित सीट प्लान से इतर बैठना मना था. दिन में साढ़े ग्यारह बजे जब बैठक शुरू हुई तो मंच पर बैठे पदाधिकारी बूथ नंबर के हिसाब से भाजपा के सभी बूथ अध्यक्षों से मुखातिब हुए.

पदाधिकारियों के पास मौजूद कागज में प्रत्येक बूथ नंबर के आगे उसके बूथ अध्यक्ष का नाम, क्षेत्र और संबंधित अध्यक्ष के दायित्व का जिक्र था. करीब चार घंटे तक चली बैठक में एक-एक करके सभी बूथ अध्यक्षों से उनके इलाके में भाजपा की योजनाओं का हाल जाना गया और लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन का फीडबैक लिया गया. उन्नाव के साथ प्रदेश के सभी 1.64 लाख बूथों में सीटिंग प्लान पर आधारित भाजपा के बूथ सम्मेलनों का आगाज हो गया. 

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी भरकम जीत के बाद पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में संगठन को नए सिरे से तैयार करना शुरू कर दिया था. इसी योजना के तहत भाजपा को उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा और दो विधानसभा चुनावों में विजय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्री सुनील बंसल को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर केंद्रीय संगठन में जगह दी गई.

सुनील बंसल की जगह धर्मपाल सिंह को प्रदेश भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया. साथ ही भूपेंद्र चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई. भूपेंद्र चौधरी और धर्मपाल सिंह की जोड़ी पर प्रदेश में भाजपा के विजय रथ को और तेज दौड़ाने की चुनौती भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन के साथ भाजपा के लिए 370 सीटों और कुल मिलाकर '400 पार' यानी 400 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है.

इसी क्रम में भाजपा ने प्रदेश में 2019 के लोकसभा चुनाव में मिले 49.98 प्रतिशत वोट में 2024 के चुनाव में दस फीसद इजाफा करने का लक्ष्य तय किया है. इसे पूरा करने के लिए भूपेंद्र चौधरी और धर्मपाल सिंह ने प्रदेश के सभी बूथ अध्यक्षों को 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में प्रत्येक बूथ पर वोटों की संख्या 370 तक बढ़ाने का काम सौंपा है. इस बूथ केंद्रित तैयारियों की निगरानी सीधे प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने अपने स्तर से शुरू की है.

उन्नाव के बूथ सम्मेलन में मौजूद भाजपा के बूथ अध्यक्ष

इसी रणनीति के तहत बूथ अध्यक्षों की पहली बैठक उन्नाव में की गई. उत्तर प्रदेश के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ऐसी बैठकें आयोजित की जाएंगी. उन्नाव की बैठक में भाजपा की तरफ से शुरू की गई 'बूथ अध्यक्ष (प्रमुखों)' के लिए बैठने की निर्धारित व्यवस्था अपनी तरह की पहली योजना है और अब हर बूथ स्तरीय बैठकों में भी इसी तरह की बैठने की व्यवस्था की जा रही है. यानी अब पार्टी की बैठकों में शामिल होने वाले सभी बूथ प्रमुखों के लिए एक निर्धारित स्थान होगा. 

सीटिंग प्लान के महत्व को समझाते हुए प्रदेश भाजपा के मीडिया सहप्रभारी हिमांशु दुबे बताते हैं, ''भाजपा का ध्यान बूथ स्तरीय गतिविधि पर है और सीटिंग प्लान बूथ स्तर पर फोकस को मजबूत करेगा. साथ ही प्रत्येक बूथ पर कैडर को दिए गए महत्व को समझने में मदद करेगा.'' हालांकि सीटिंग प्लान का उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि भाजपा का प्रत्येक बूथ अध्यक्ष बैठकों में स्वयं मौजूद रहे. भाजपा नेतृत्व को पिछले वर्षों में हुई बूथ स्तरीय बैठकों से कई बूथ अध्यक्षों के गायब रहने की शिकायतें कई जिलों से मिली थीं. इससे न केवल पार्टी की जमीनी तैयारियों पर असर पड़ रहा था बल्कि फीडबैंक तंत्र की व्यापकता भी प्रभावित हो रही थी.

इसी को ध्यान में रखते हुए संगठन ने बूथ अध्यक्षों की बैठक में सीटिंग प्लान की योजना पेश की. इसमें बैठक से बिना बताए, अकारण गायब रहने वाले बूथ अध्यक्ष पर कार्रवाई का भी प्रावधान है. प्रत्येक बूथ पर 370 अतिरिक्त वोट जोड़ने के लिए बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों को जिम्मेदारी दी गई है (देखें: बूथ का माइक्रो मैनेजमेंट प्लान). उन्नाव में बैठक के दौरान बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए, धर्मपाल ने यह भी कहा कि सभी बूथ कार्यकर्ता घर का बना खाना लाएंगे और दोपहर के भोजन के दौरान सब साथ बैठकर खाएंगे. धर्मपाल ने कहा, ''एक साथ दोपहर का भोजन करने से लेकर प्रत्येक बूथ में मतदाताओं को बुलाने तक, प्रत्येक बूथ में सूचीबद्ध लाभार्थियों से जुड़ना नियमित अभ्यास का हिस्सा होगा.'' 

भूपेंद्र चौधरी और धर्मपाल सिंह ने प्रदेश संगठन का कामकाज संभालते ही अक्तूबर 2022 में प्रदेश के सभी बूथों की समीक्षा शुरू कर दी थी. इसमें पाया गया कि बूथ समितियों में बड़ी संख्या में सदस्यों के पद खाली थे. इस समस्या से निबटने के लिए उन्होंने फरवरी 2023 में भाजपा की बूथ संरचना में भी परिवर्तन करके इन्हें और प्रभावी बनाने की कोशिश की थी. उत्तर प्रदेश में करीब 1.64 लाख बूथों में से प्रत्येक बूथ कमेटी में अध्यक्ष और पदाधिकारियों के साथ सदस्यों की संख्या 21 से घटाकर 11 कर दी गई. बूथ पर असरदार जाति के कार्यकर्ता को अध्यक्ष और बाकी सदस्य अलग-अलग जातियों के बनाने का प्रावधान किया गया है. कमेटी में सभी मोर्चों की भागीदारी तय की गई.

बूथ कमेटियों के गठन के बाद भाजपा ने बूथ सशक्तीकरण अभियान भी शुरू किया था. पूरे प्रदेश में चले अभियान को युवाओं और महिलाओं पर केंद्रित करके उन्हें भाजपा से जोड़ा गया. भाजपा के बड़े नेताओं ने बूथ अध्यक्षों और कार्यकर्ताओं के घर भोजन कर जमीनी संगठन और सरकार के बीच एक समरसता पैदा करने की कोशिश की. इसके अलावा हर बूथ पर प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने के साथ 'मोदी के राजदूत' जैसी योजनाओं से भी भाजपा ने बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया. लोकसभा चुनाव के पहले एक बार फिर भाजपा ने बूथ पर फोकस किया है. 

बूथ समितियों और पन्ना प्रमुख की व्यूह रचना को और प्रभावी बनाने की कोशिश की गई है. लोकसभा चुनाव के दौरान इन पन्ना प्रमुखों की मंडलवार बैठक करने की भी योजना बन रही है ताकि इनसे नई चुनौतियों से निबटने और चुनावी तैयारियों के बारे में फीडबैक लिया जा सके. पार्टी ने सभी वरिष्ठ नेताओं को भी पन्ना प्रमुख की जिम्मेदारी निभाने का निर्देश दिया है. जिन वरिष्ठ नेताओं के पास कई सारे दायित्व हैं, वे अपने साथ एक सहपन्ना प्रमुख बनाकर अपने पन्ने के 60 मतदाताओं की जिम्मेदारी देख सकते हैं. मतदाता सूची के एक पन्ने पर 60 मतदाता होते हैं. इन सभी 60 मतदाताओं से निरंतर संपर्क करते हुए इन्हें भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी पन्ना प्रमुख को सौंपी गई है. भूपेंद्र चौधरी बताते हैं, ''बूथ पर बनाए गए पन्ना प्रमुख लोकसभा चुनाव में भाजपा की एक बड़ी ताकत हैं.''

बूथ कमेटियों और पन्ना प्रमुखों को केंद्र में रखते हुए भाजपा 6 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर त्रिस्तरीय बूथ विजय अभियान की शुरुआत करेगी. पहला चरण जनसंपर्क अभियान का होगा. इस दौरान सभी पन्ना प्रमुख अपने दायरे में आने वाले मतदाताओं से संपर्क कर उनके घरों पर न केवल पार्टी का झंडा लगाएंगे बल्कि मतदाताओं के मोबाइल नंबर भी वोटर लिस्ट के पन्ने पर अंकित करेंगे. यह जनसंपर्क अभियान 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर के जन्मदिन के मौके पर प्रत्येक बूथ पर समरसता दिवस मनाने के साथ संपन्न होगा. इसी दिन बूथ कमेटी और पन्ना प्रमुखों की बैठक होगी. हर पन्ना प्रमुख मतदाताओं के मोबाइल नंबर वाले मतदाता सूची के पन्ने की फोटो अपने बूथ से संबंधित विधानसभा कमेटी और लोकसभा कमेटी को व्हाट्सऐप के माध्यम से मुहैया कराएंगे.

इन मतदाताओं के मोबाइल नंबरों को भाजपा के कॉल सेंटर से जोड़ा जाएगा. इस तरह कॉल सेंटर भी मतदाताओं से सीधे जुड़कर उनसे भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील करेगा. हर बूथ पर भाजपा का एक 'व्हाट्सऐप प्रमुख' भी बनाया गया है. यह व्हाट्सऐप प्रमुख दो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाएगा. एक में बूथ कमेटी और पन्ना प्रमुख शामिल होंगे. दूसरा ग्रुप 'मोदी का परिवार' जिसमें बूथ पर मौजूद मतदाताओं के मोबाइल नंबर जुड़े होंगे. 

लोकसभा चुनाव के लिए दूसरा बूथ विजय अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील पत्र के साथ एक परिवार में मतदाताओं का ब्योरा देने वाली परिवार पर्ची को घर-घर पहुंचाने के लिए शुरू होगा. इसके बाद तीसरा बूथ विजय अभियान लोकसभा चुनाव की वोटिंग से तीन दिन पहले शुरू होगा. इसमें हर वोटर की मतदान पर्ची और संबंधित भाजपा प्रत्याशी के बैलेट पेपर का नूमना घर-घर बांटा जाएगा. इस तरह तीन बूथ विजय अभियान चलाकर एक-एक मतदाता को भाजपा के पक्ष में मतदान करने के लिए पोलिंग बूथ तक रणनीति तैयार की गई है. बूथ पर भाजपा की तैयारी पार्टी के 'मिशन-80' को पूरा करने में कितना कामयाब होती है, यह 4 जून को लोकसभा चुनाव के नतीजे वाले दिन ही पता चलेगा.

बूथ का माइक्रो मैनेजमेंट प्लान

> श्रेणीवार निगरानी: भाजपा ने यूपी के सभी 1.68 लाख बूथों को चार ग्रेड में बांटा है. 'ए' यानी बहुत मजबूत, 'बी' यानी मजबूत लेकिन लापरवाही से हार की संभावना, 'सी' यानी पिछले चुनाव में नजदीकी लड़ाई में जीते गए बूथ, 'डी' वे बूथ जहां भाजपा पिछले चुनाव में हार गई थी. 

> संपर्क पर फोकस: हर बूथ पर 11 सदस्यीय कमेटी के साथ महिलाओं से संपर्क के लिए महिला प्रमुख, युवा वोटरों से संपर्क के लिए युवा प्रमुख और जातियों के प्रमुख लोगों को जोड़ने का जिम्मा सामाजिक संपर्क प्रमुख को दिया गया है. 

>पन्ना प्रमुख: हर बूथ की वोटर लिस्ट में जितने भी पन्ने हैं उतने पन्ना प्रमुख बनाए गए हैं. ये मतदाता सूची के एक पन्ने पर मौजूद 60 वोटरों से निरंतर संपर्क में रहेंगे.

>बूथ सम्मेलन: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री व अन्य वरिष्ठ मंत्री और वरिष्ठ पदाधिकारी बूथ सम्मेलनों को संबोधित करेंगे.  

> त्रिस्तरीय रणनीति: प्रत्येक बूथ पर तीन प्रकार के आयोजन हो रहे हैं. इनमें प्रदेश और केंद्र की विभिन्न योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों के सम्मेलन शामिल हैं. 

> 100 फीसद मतदान: मतदान वाले दिन हर पन्ने से जुड़ी टीम को अपने पन्ने के वोटरों का 100 फीसद मतदान कराना होगा.

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