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राजस्थान: ड्रोन के जरिए सीमापार से पहुंच रहा ड्रग्स, राज्य के लिए ये कितनी बड़ी चुनौती?

राजस्थान के गंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़, बाड़मेर और जैसलमेर जैसे सरहदी जिलों में ड्रोन के जरिए सीमापार से नशे की खेप आ रही है जो युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेल रही है

पाकिस्तान से ड्रग्स की खेप के साथ सीमा के इस पार आकर गिरा ड्रोन, पास में खड़े सुरक्षा बल
पाकिस्तान से ड्रग्स की खेप के साथ सीमा के इस पार आकर गिरा ड्रोन, पास में खड़े सुरक्षा बल
अपडेटेड 15 मार्च , 2024

पंजाब में सतलज-व्यास के संगम से निकलकर भारत-पाकिस्तान सरहद के अंतिम छोर तक पहुंचने वाली इंदिरा गांधी नहर को थार की जीवनदायिनी माना जाता है. मगर एक कड़वा सच यह भी है कि इस नहर के कारण जिस तरह से खेतों और गांवों में समृद्धि आई है, वहीं नहर के आस-पास के क्षेत्रों में नशे की फसल भी खूब लहलहा रही है.

क्या आम आदमी और क्या पुलिस प्रशासन! जिससे भी बात कीजिए, इसकी एक के बाद एक बस परतें ही उधड़ती हैं. आईपीएस राजीव पचार ने पिछले साल हनुमानगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक रहते हुए नशे के कारोबार के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया था. अभी वे इंटेलिजेंस महकमे के डीआईजी हैं. वे कहते हैं, "थार के जिन भी इलाकों में नहर का पानी आया है वहां हेरोइन, स्मैक और कोकीन जैसा खतरनाक नशा भी पहुंचा है. जिन इलाकों में अभी नहर का पानी नहीं पहुंच पाया है, वहां नशा अपनी जड़ नहीं जमा पाया है."

सीमावर्ती और नहरी क्षेत्रों में बॉर्डर पार से आई नशे की खेप पचार के इस तर्क की पुष्टि करती है. राजस्थान पुलिस ने रायसिंहनगर, अनूपगढ़, करणपुर, गजसिंहपुर, केशरीसिंहपुर, रावला, घड़साना, खाजूवाला, मोहनगढ़, बाखासर, गिराब, बिजराड जैसे इलाकों में पिछले तीन साल में 300 किलो से ज्यादा हेरोइन पकड़ी है.

इस दौरान गंगानगर और अनूपगढ़ जिलों में 170 किलोग्राम, जैसमलेर, बाड़मेर और बीकानेर जिलों में 130 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई. पिछले तीन साल में इन जिलों में पकड़ी गई अफीम की मात्रा 5,000 किलो से ज्यादा है. पिछले तीन साल में बीएसएफ ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में 180 किलोग्राम से ज्यादा हेरोइन बरामद की है.

हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के गोलूवाला गांव के अनुराग बासिड़ा कहते हैं, "नशा यहां नस-नस में फैल चुका है. नहर के आस-पास के इलाकों में स्मैक, हेरोइन चिट्ठा बिकता है, वहीं नहर के दूसरी तरफ मेडिसिन ड्रग्स का नशा. पिछले दिनों पुलिस की पड़ताल में गोलूवाला गांव में ही 150 से ज्यादा युवा हेरोइन, स्मैक जैसे नशे के आदी पाए गए."

और गोलूवाला गांव ही क्यों! पूरे सीमावर्ती क्षेत्र की यही हकीकत है. राजस्थान के गंगानगर, अनूपगढ़, हनुमानगढ़, बाड़मेर और जैसलमेर जिलों में सीमापार से नशे की खेप आ रही है जो युवा पीढ़ी को नशे के दलदल में धकेल रही है. इन इलाकों में नशा किस कदर हावी हो चुका है, इसका अंदाजा यहां की जेलों का जायजा लेकर लगाया जा सकता है. पाकिस्तान सीमा से सटे पांच जिलों की जेलों में इस वक्त 60 से 80 फीसद कैदी नशे से संबंधित अपराधों के चलते यहां हैं. इनमें आधे कैदी खुद नशे के आदी हैं तो आधे इसकी तस्करी करने वाले माफिया.

अभी पिछली 5 फरवरी को ही इंडिया टुडे की टीम अपनी पड़ताल के सिलसिले में सरहदी इलाकों में थी. उसी दिन अनूपगढ़ जिले की रायसिंहनगर तहसील के 44 पीएस गांव में पुलिस और बीएसएफ की संयुक्त टीम ने 35 करोड़ रुपए कीमत की हेरोइन बरामद की. जीरो लाइन से 1,800 मीटर भीतर भारतीय सीमा में मिली पांच किलोग्राम हेरोइन की यह खेप ड्रोन के जरिए सीमा के दूसरी ओर से इधर गिराई गई थी.  

राजस्थान पुलिस की अपराध शाखा की ओर से 9 अप्रैल और 2 मई, 2023 को जैसलमेर और श्रीगंगानगर जिलों में अंतरराष्ट्रीय तस्कर भुट्टो सिंह और उसके साथियों से पकड़ी गई 20 किलो हेरोइन सीमावर्ती जिलों में ड्रोन से भेजी गई जो कि पिछले दो साल की सबसे बड़ी खेप थी. यह खेप एडीजी क्राइम दिनेश एमएन के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के दौरान पकड़ी गई थी.

1 किलो हेरोइन भुट्टो सिंह ने अपने गांव मिठड़ाऊ में एक पेड़ के नीचे जमीन में छिपा रखी थी और नौ किलो हेरोइन 9 अप्रैल, 2023 को गिरफ्तार किए गए उसके चार साथियों से बरामद हुई थी. यहां से नशे की यह खेप पंजाब, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली तक पहुंचाई जानी थी. पुलिस जांच में सामने आया कि जनवरी-फरवरी में घने कोहरे के दौरान यह खेप ड्रोन से भारत में पहुंचाई गई. वहीं से इसे अलग-अलग जगहों पर भेजने की तैयारी थी.

वैसे भी श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ जिलों में सीमा पार से नशे की खेप पहुंचाने की अधिकांश वारदात जनवरी-फरवरी में ही सामने आती है. बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर जिलों में रेतीली आंधी और बरसात के दौरान मई से जुलाई के बीच इन वारदात को अंजाम दिया जाता है.

अनूपगढ़ के पुलिस अधीक्षक रह चुके राजेंद्र कुमार बताते हैं, "जनवरी-फरवरी में नशीले पदार्थों की तस्करी की वारदात इसलिए सामने आती हैं क्योंकि उस दौरान सर्दी और कोहरे के कारण श्रीगंगानगर, अनूपगढ़ जैसे सरहदी इलाकों में दृश्यता तीन मीटर से भी कम होती है. और यही वह वक्त होता है जब अफीम की नई फसल पककर तैयार होती है."

बीएसएफ ने तीन साल पहले 3 जून, 2021 को खाजूवाला में पाइप के जरिए राजस्थान सीमा में पहुंचाई जा रही 56 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी थी, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत 270 करोड़ रुपए से भी ज्यादा थी. राजस्थान में बीएसएफ की ओर से पकड़ी गई यह सबसे बड़ी खेप थी. आंधी-तूफान का फायदा उठाकर इसे राजस्थान में भीतर तक पहुंचाने की तैयारी थी. 

सीमा पार से नशा भारत में लाए जाने के तरीके भी लगातार बदलते रहे हैं. तारबंदी से पहले ट्रक, जीप और ऊंटों पर नशे की खेप लाई जाती थी. तारबंदी के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक फेंसिंग के बीच पाइप फंसाकर उसमें से नशे के पैकेट बॉर्डर के इस पार डाले जाते थे. पाइप से बॉर्डर के इस पार 2-3 मीटर तक ही पैकेट डाले जा सकते थे, ऐसे में तस्करों की ओर से डिस्कस थ्रोअर या दूर तक वजन फेंकने वाले लोगों की मदद से पैकेट भारतीय सीमा में फेंके जाने लगे.

इसके जरिए भी महज 10-20 मीटर तक ही पैकेट फेंके जा सकते थे. लेकिन ड्रोन टेक्नोलॉजी आ जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय तस्करों की जैसे पौ बारह हो गई. उनकी बांछें खिल गईं. ड्रोन की मदद से वे सीमा के भीतर 8-10 किलोमीटर दूर तक पैकेट डाल सकते हैं. भारतीय सीमा में सक्रिय तस्कर इन पैकेट्स को आसानी से पहचान सकें, इसके लिए हर पैकेट पर चमकीले रंग का रेफ्लेक्टर लगा होता है. अंधेरे में रेफ्लेक्टर नजर नहीं आता, लेकिन टॉर्च की रोशनी में यह चमकता है. ड्रोन के जरिए जैसे ही पैकेट गिराए जाते हैं, भारतीय सीमा में सक्रिय तस्कर उसे टॉर्च की रोशनी से तुरंत खोज लेते हैं.

अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर सरहद के पार नशा पहुंचाने के लिए हाईटेक हेक्साकॉप्टर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. इस ड्रोन की खासियत यह है कि यह एक से डेढ़ घंटे तक हवा में रह सकता है और 10 किलोमीटर दूर तक उड़ सकता है और एक साथ 20-25 किलोग्राम तक वजन ले जा सकता है. राजस्थान के श्रीगंगानगर और अनूपगढ़ क्षेत्र में बीएसएफ और पुलिस ने दर्जनों ऐसे ड्रोन पकड़े हैं.

इनमें से कई ड्रोन ऐसे भी हैं जिनसे एक साथ तीन से चार ठिकानों पर नशे के पैकेट गिराए जा सकते हैं. अधिकांश ड्रोन नेविगेशन तकनीक पर आधारित हैं जो लांगीट्यूड और लेटीट्यूड के जरिए निर्धारित जगह पर पैकेट गिराने की क्षमता रखते हैं. जमीन से पांच-छह किलोमीटर ऊपर उड़ने वाले ये ड्रोन नजर नहीं आते.

इतनी ऊपर से ही रात के अंधेरे या घने कोहरे के बीच ये नशे के पैकेट गिराने की क्षमता रखते हैं. राजस्थान की सीमा में हाल ही पकड़े गए अधिकांश ड्रोन 6 से 8 रोटर (पंखे) वाले हैं. कुछ साल पहले तक चार रोटर वाले ड्रोन काम में लिए जाते थे. उनके जरिए एक दो किलोमीटर क्षेत्र तक ही पैकेट पहुंचाए जा सकते थे और नीचे उड़ने के कारण ये पुलिस और बीएसएफ की नजर में भी रहते थे.

सीमा सुरक्षा बल के लिए इस समय ड्रोन ही सबसे बड़ा खतरा हैं. ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से नशा और हथियार लेकर आने वाले हेक्साकॉप्टर ड्रोन को मार गिराने के लिए बीएसएफ ने ऐंटी ड्रोन सिस्टम अपनाया है. ऐंटी-ड्रोन तकनीक किसी भी मानव रहित हवाई यंत्र पर चौबीसों घंटे नजर रखने और उन्हें कुछ ही समय में नष्ट करने की क्षमता रखती है.

सीमा सुरक्षा बल ने 2023 में भारत-पाक सीमा पर 450 से अधिक ड्रोन देखे जाने की सूचना दी थी, जिनमें से आधे ड्रोन बीएसएफ ने मार गिराए. राजस्थान सीमा में भी पिछले दो-तीन साल में 50 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए जा चुके हैं जबकि 20-30 ड्रोन संपर्क टूटने या बैट्री खत्म होने के कारण अपने आप गिर गए.

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