जम्मू-कश्मीर का विकास और यहां की अवाम का कल्याण एनडीए सरकार की गारंटी है. 20 फरवरी को जम्मू स्थित मौलाना आजाद स्टेडियम में एक रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन का मुख्य विषय यही था.
अब जब लोकसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं, अगस्त 2019 में पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने तथा इसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटे जाने के बाद से मोदी की यह दूसरी जम्मू यात्रा थी. रैली में उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर के विकास में सबसे बड़ी बाधा था. भाजपा ने वह दीवार गिरा दी. अब विकास से जुड़ी सभी पहल एक साथ लागू हो रही हैं."
अनुच्छेद 370 निरस्त होने के सकारात्मक नतीजों को रेखांकित करते हुए मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के विकास से दुनियाभर में उत्साह नजर आता है और खाड़ी देश यहां निवेश में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. उन्होंने कहा, "देश और श्रीनगर में सफल जी20 बैठक की गूंज पूरी दुनिया में सुनी गई. बीते एक साल में रिकॉर्ड दो करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर पहुंचे." साथ ही, उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रीनगर से जम्मू तक और वहां से पूरे देश में ट्रेन नेटवर्क के विस्तार से पर्यटकों की संख्या और बढ़ेगी.
रैली एक तरह से जम्मू-कश्मीर में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत थी, जो संसद के निचले सदन में अपने छह प्रतिनिधि भेजता है. इनमें तीन जम्मू और तीन कश्मीर से चुने जाते हैं.
जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में बदलाव और इससे जुड़े विवादों के मद्देनजर आगामी चुनाव को सियासी दलों, खासकर भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है. काफी अर्से से लंबित विधानसभा चुनाव पर इसका असर तय माना जा रहा है, जो 2014 के बाद से नहीं हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सितंबर 2024 से पूर्व विधानसभा चुनाव कराने को कहा है.
विकास परियोजनाओं के जरिए जम्मू-कश्मीर को लुभाना मोदी के एजेंडे में शीर्ष पर था. इसी क्रम में एक बेहद अहम परियोजना 48.1 किलोमीटर लंबी बनिहाल-खारी-सुंबर-संगलदान रेलवे लाइन का उद्घाटन किया गया, जो कश्मीर को शेष भारत से जोड़ने वाले 272 किलोमीटर लंबे उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेलवे लिंक (यूएसबीआरएल) के कटरा-बनिहाल खंड का हिस्सा है.
इसमें हिमालयी क्षेत्र में निर्मित भारत की सबसे लंबी परिवहन सुरंग भी है, जो कि भारतीय रेलवे की एक खास उपलब्धि है. 12.7 किमी लंबी यह सुरंग टी-49 रामबन जिले में सुंबर और अरपिंचला स्टेशनों के बीच दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है. प्रधानमंत्री ने कुल 185.66 किलोमीटर लंबे मार्गों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई. बारामुला-श्रीनगर-बनिहाल-संगलदान खंड हर मौसम में कश्मीर को रेल नेटवर्क के जरिए देश के बाकी हिस्सों से जोड़े रखने की दिशा में अहम कदम है.
मोदी ने रैली में कहा, "भारतीय जनता पार्टी जम्मू-कश्मीर में लोगों के उन सपनों को पूरा कर रही है जो बीते 70 वर्ष से अधूरे थे. यह मोदी की गारंटी है...सभी के सपने पूरे होंगे." उन्होंने कहा कि बम धमाकों, अलगाववाद और अपहरण की खबरों की जगह अब शिक्षा, कनेक्टिविटी और विकास पर बात होती है.
उन्होंने जम्मू में 32,000 करोड़ रुपए से अधिक की 209 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन/शिलान्यास भी किया. इसमें सांबा जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), आईआईएम जम्मू कैंपस और जम्मू हवाई अड्डे में नए टर्मिनल जैसे प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं. इस मौके पर उन्होंने कहा, "बुनियादी ढांचे का विकास होने से लोग स्विट्जरलैंड को भूल जाएंगे और जम्मू-कश्मीर आएंगे."
मोदी ने आजादी के बाद से जम्मू-कश्मीर पर शासन करने वाले कुछ परिवार लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दिए बिना सत्ता में रहने की आलोचना भी की. कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस या पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, "मुझे खुशी हो रही है कि जम्मू-कश्मीर को अब वंशवादी राजनीति से आजादी मिल रही है."
प्रधानमंत्री मोदी के हरी झंडी दिखाने के बाद अब बारामुला से बनिहाल के बीच आठ इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलेंगी. उनमें से चार को संगलदान तक बढ़ा दिया गया है. अभी तक, घाटी से आने वाली ट्रेन का आखिरी पड़ाव बनिहाल होता था. अब, ट्रेनें संगलदान स्टेशन तक जाएंगी और वहीं से चलेंगी.
कुछ महीनों में एक और उपलब्धि यूएसबीआरएल की शोभा बढ़ाती नजर आएगी, और यह है, रियासी जिले में स्टील निर्मित शानदार 1.3 किमी लंबा आर्च ब्रिज. चिनाब नदी पर बने इस पुल की नदी तल से ऊंचाई 359 मीटर है. यह दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है.
टी-49 सुरंग और चिनाब पुल रेल लिंक का हिस्सा हैं, जिनका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के दूरदराज या आवाजाही के बेहद सीमित साधन वाले क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुविधाएं स्थापित करना है. इससे जहां पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, वहीं पूरे क्षेत्र में आर्थिक विकास की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.
2002 में एक 'राष्ट्रीय परियोजना' घोषित यूएसबीआरएल के निर्माण पर करीब 37,012 करोड़ रुपए की लागत आने का अनुमान है. इस परियोजना का क्रियान्वयन चार चरणों में किया गया, उधमपुर-कटरा (जुलाई 2014 में पूरा), बनिहाल-काजीगुंड (जून 2013 में पूरा), काजीगुंड-बारामुला (अलग-अलग चरणों में 2009 तक) और कटरा-बनिहाल, जो कि इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण चरण है.
111 किमी लंबे कटरा-बनिहाल गलियारे के भूकंपीय क्षेत्र-4 में होने के कारण यहां निर्माण संबंधी चुनौतियों और ज्यादा कठिन हैं. यही नहीं, चारों तरफ घाटियों से घिरे इस क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है, और बीच-बीच से गुजरती नदियां इसे और भी दुर्गम बनाती हैं. आधिकारिक आंकड़े दर्शाते हैं कि इस रेल खंड के 97 किमी हिस्से में सुरंगें हैं.
इस खंड में 37 पुल भी हैं, जिनमें केबल-आधारित पुल अंजी पुल (अंजी नदी पर बना) और बेहद खूबसूरत चिनाब पुल भी शामिल हैं. उत्तर रेलवे के एक इंजीनियर का कहना है, "बनिहाल-कटरा कॉरिडोर निर्माण में फॉल्ट जोन को ध्यान में रखने के अलावा पहाड़ों की कमजोर परतों और पानी को रोकने जैसी भूवैज्ञानिक जटिलताओं पर काबू पाना आसान काम नहीं रहा."
तमाम चुनौतियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर की रणनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए केंद्र यूएसबीआरएल पर जोर दे रहा है. यह रेल लिंक विकास को गति देने में अहम साबित होगा. रेल मंत्रालय की 2021 की रिपोर्ट में कहा गया है, "यह (यूएसबीआरएल) तेजी से औद्योगीकरण, जम्मू-कश्मीर से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही, व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहित करने तथा रोजगार के अवसर देने में अहम भूमिका निभा सकता है."
इसमें कोई दो राय नहीं कि कश्मीर के व्यापार निकायों को पूर्ण रेल कनेक्टिविटी का बेसब्री से इंतजार है. कश्मीर घाटी राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के माध्यम से शेष भारत से जुड़ी है लेकिन भूस्खलन के कारण यह रास्ता अक्सर बंद हो जाता है. वहीं, श्रीनगर-दिल्ली मार्ग पर उच्च किराये की वजह से हवाई यात्रा अधिकांश लोगों की पहुंच से दूर है. कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री के महासचिव फैज अहमद बख्शी कहते हैं, "ट्रेन निवेश को बढ़ावा देगी और यात्रा में लगने वाला समय भी घटाएगी. इससे सेब जैसी बागवानी/कृषि उपजों को आसानी से गंतव्यों तक भेजा जा सकेगा."
रेल लिंक और विकास परियोजनाएं भाजपा की चुनावी संभावनाओं को भी बढ़ा सकती हैं. पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता निर्मल सिंह कहते हैं, "हमने इसे कागजों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि वास्तव में निर्माण के चरण तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है. यह ट्रेन इस क्षेत्र को सामाजिक और राजनैतिक तौर पर मजबूत करेगी...यह एक सपने के सच होने जैसा है."
राजनैतिक विश्लेषक रेखा चौधरी का कहना है कि प्रचार के दौरान इस उपलब्धि को पूरे भारत में भुनाया जाएगा. रेल परियोजना का इस्तेमाल पूरी दुनिया को यह बताने में भी किया जाएगा कि अनुच्छेद 370 हटाने का असल उद्देश्य सामाजिक-विकासात्मक था. वे कहती हैं, "अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के अलावा इसका कश्मीरियों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ेगा क्योंकि यह लोगों को देश के बाकी हिस्सों के करीब लाएगा."
मोअज्जम मोहम्मद

