
फरवरी की 5 तारीख को जब हेमंत सोरेन झारखंड विधानसभा में अपने चुने हुए उत्तराधिकारी चंपाई सोरेन की ओर से लाए गए विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिए खड़े हुए तो इस पूर्व मुख्यमंत्री ने बार-बार अपने आदिवासी मूल पर जोर दिया. साथ ही सोरेन ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे लोग आदिवासियों के खिलाफ हैं. अपने भावनात्मक भाषण की दिशा तय करते हुए उन्होंने कहा, "भाजपा एक आदिवासी मुख्यमंत्री को गिरफ्त में लेने की कोशिश कर रही है. भाजपा नहीं चाहती कि झारखंड में कोई आदिवासी मुख्यमंत्री पांच साल पूरा करे; यहां तक कि उन्होंने अपने शासनकाल में भी ऐसा होने नहीं दिया." उम्मीद के अनुरूप, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की अगुआई वाले गठबंधन के 47 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में और 29 विपक्षी विधायकों ने उसके खिलाफ मतदान किया.
इस तरह नई चंपाई सरकार ने शक्ति परीक्षण जीत लिया. भूमि घोटाले में कथित संलिप्तता से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 31 जनवरी को गिरफ्तार सोरेन को रांची की एक अदालत की ओर से पांच दिन की रिमांड पर भेजे जाने के बाद वे पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में हैं. न्यायिक अनुमति मिलने के बाद उन्होंने शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया में हिस्सा लिया.
अपने रिमांड नोट में ईडी ने दावा किया है कि भूमि घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक-राजस्व सब-इंस्पेक्टर भानु प्रताप प्रसाद-ने गैर-सूचीबद्ध संपत्तियों को जबरदस्ती या सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके और/या राजस्व दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करके अवैध रूप से हासिल करने की साजिश रची थी. सोरेन के खिलाफ ईडी का मामला रांची के बड़गाई सर्कल में कुल 8.5 एकड़ जमीन के 12 भूखंडों के अवैध अधिग्रहण से संबंधित है और कथित तौर पर उसकी व्यवस्था प्रसाद ने सोरेन के लिए की थी. ईडी ने आरोप लगाया है कि सोरेन उस कथित घोटाले में अधिग्रहण, कब्जे और लाभ के उपयोग से सीधे जुड़े थे. सोरेन ने इस दावे का खंडन किया है और एजेंसी को अपने नाम पर कोई स्थानांतरण पत्र दिखाने की चुनौती दी है. उन्होंने कहा, "अगर आरोप साबित हो जाते हैं, अगर वे अवैध रूप से किसी जमीन का मालिक होने से संबंधित एक भी कागज रिकॉर्ड पर रख देते हैं, तो मैं केवल राजनीति ही नहीं, झारखंड छोड़ दूंगा."
वहीं, ईडी की रिमांड नोट में लिखा है, "सोरेन जानबूझकर अपने अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति को बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करने के लिए मूल रिकॉर्ड को छुपाने से जुड़ी गतिविधियों में भानु प्रताप प्रसाद के साथ एक पक्ष हैं."
ईडी ने 29 जनवरी को नई दिल्ली में झारखंड सरकार की ओर से किराए पर लिए गए सोरेन के निजी आवास पर छापा मारा था और एक आलमारी में 36,34,500 रुपए नकद जब्त किए थे. सोरेन ने आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनके पास कभी कोई अवैध नकदी नहीं थी. रांची की एक अदालत में अपनी पेश याचिका में ईडी ने कहा कि उन्होंने "धोखाधड़ी से भूमि संपत्तियों के अधिग्रहण के मामले में जारी जांच से जुड़े अन्य दस्तावेज" भी बरामद किए हैं. अपनी गिरफ्तारी से पहले सोरेन ने गठबंधन - जेएमएम, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) - विधायकों की ओर से अपने पिता शिबू सोरेन के भरोसेमंद साथी चंपाई सोरेन को गठबंधन के नेता और जेएमएम विधायक दल के नेता के रूप में नामित कर लिया था. 67 वर्षीय चंपाई सोरेन ने 2 फरवरी को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.
हालांकि भाजपा की अगुआई वाले विपक्ष को हराकर चंपाई की शक्ति परीक्षण में जीत जेएमएम के लिए स्थिरता की गारंटी नहीं, और खासकर यह देखते हुए कि राज्य में संसदीय चुनावों के अलावा अक्तूबर में विधानसभा चुनाव भी होने हैं.
दरअसल, आने वाले कुछ महीने हेमंत सोरेन के लिए बेहद अहम हैं. उनके पिता शिबू सोरेन सियासत में पूरी तरह शामिल नहीं हैं और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन, जिन्हें वे कथित रूप से अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे, अभी भी एक गृहिणी हैं. ऐसे में अगर सोरेन न्यायिक राहत या जमानत हासिल करने में नाकाम रहते हैं तो जेएमएम को प्रचारक के रूप में उनकी कमी खलेगी. सोरेन की भाभी और जेएमएम विधायक सीता सोरेन (उनके भाई दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी) कल्पना को पार्टी या सरकार में किसी तरह की नेतृत्वकारी भूमिका दिए जाने के खिलाफ हैं. ऐसे में सोरेन की गैरमौजूदगी में पार्टी में वर्चस्व की जंग शुरू हो सकती है. 29 विधायकों के साथ सोरेन की जेएमएम विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है. वैसे, जेएमएम का मानना है कि लोकसभा चुनावों से कुछ ही समय पहले सोरेन की गिरफ्तारी राज्य में संख्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण आदिवासी समुदाय को आक्रोशित कर सकती है और जेएमएम के पक्ष में सहानुभूति वोट का रुझान पैदा कर सकती है. झारखंड में 28 फीसद आदिवासी आबादी है और राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से 28 और 14 लोकसभा सीटों में से पांच अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित हैं.

संथाल समुदाय से आने वाले सोरेन और उनकी पार्टी उनकी गिरफ्तारी को केंद्र की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की आदिवासी विरोधी नीति के एक कदम के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं. अगर यह बात लोगों के मन में बैठ गई तो भाजपा की अगुआई वाली एनडीए के लिए बड़ी चुनौती के रूप में उभर सकती है. इसके झारखंड से 12 लोकसभा सांसद (भाजपा से 11 और ऑल झारखंड स्टुडेंट्स यूनियन से एक) हैं. एक अन्य संथाल आदिवासी नेता बाबूलाल मरांडी की अगुआई में झारखंड भाजपा सोरेन की गिरफ्तारी को भ्रष्टाचार मामले की तार्किक नतीजे के रूप में पेश करने की पूरी कोशिश कर रही है. लेकिन पार्टी को आदिवासियों की नाराजगी रोकने के लिए कहीं अधिक प्रयास करने की दरकार है.
चंपाई का विश्वास प्रस्ताव में जीत हासिल करना न केवल एक अनिवार्य विधायी प्रथा का पूरा होना था, बल्कि यह विधानसभा में अटूट पूर्ण बहुमत को लेकर सत्ताधारी गठबंधन का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी था.
नवंबर 2000 में झारखंड के गठन के बाद से राज्य में 12 सरकारें आ चुकी हैं और तीन बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है. ऐसे में यह राज्य सियासी अनिश्चितता की एक मिसाल नजर आता है.
इसके 12 मुख्यमंत्रियों में से केवल भाजपा के रघुबर दास ने पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है. फिलहाल, विश्वास प्रस्ताव में जेएमएम गठबंधन की जीत ने सियासी अनिश्चितता पर विराम लगा दिया है.
क्या-क्या हुआ
> 47 विधायकों के समर्थन के साथ नई चंपाई सरकार ने झारखंड विधानसभा में विश्वासमत हासिल कर लिया.
> मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 31 जनवरी को जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद यह जरूरी था.
> सोरेन ने भाजपा पर 'आदिवासी विरोधी' होने का आरोप लगाया और उन्हें उम्मीद है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में आदिवासी वोट पर इसका असर पड़ेगा.
> लेकिन सोरेन को अगर कानूनी राहत नहीं मिली तो जेएमएम अपने स्टार प्रचारक से वंचित रह सकता है.

