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उत्तर प्रदेश में हलाल टैग वाले उत्पादों पर क्यों मचा हुआ है बवाल

सरकार ने उक्त कंपनियों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी है, जिसके सामने पूरे मामले का तार्किक खुलासा करने की चुनौती है

सही या गलत? गोरखपुर में 21 नवंबर को एक मॉल में उत्पादों की पड़ताल करते अधिकारी
अपडेटेड 14 दिसंबर , 2023

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीमें इन दिनों हर जिले में हलाल टैग (सर्टिफिकेट) वाले उत्पादों की खोज में दिन-रात एक किए हुए हैं. इन टीमों ने 29 नवंबर तक तीन दर्जन से अधिक जिलों में 100 से अधि‍क छापे मारे, 500 से अधिक प्रतिष्ठानों की जांच की और 3,000 किलोग्राम से अधि‍क के उत्पाद जब्त किए हैं. दरअसल, 17 नवंबर को भाजपा नेता शैलेंद्र कुमार शर्मा ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया. इनमें हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड चेन्नै, जमीयत उलेमा हिंद हलाल ट्रस्ट दिल्ली एवं लखनऊ, हलाल काउंसिल ऑफ इंडिया मुंबई और जमीयत उलेमा मुंबई तथा कुछ अन्य कंपनियां शामिल हैं. मामला दर्ज होने के अगले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर हलाल टैग वाले उत्पादों पर रोक लगा दी.

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि हलाल सर्टिफिकेट युक्त खानपान की वस्तुओं, औषधि चिकित्सा के लिए प्रयुक्त अन्य समाग्री और प्रसाधन सामग्रियों के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं क्रय-विक्रय करते पाए जाने पर कार्रवाई होगी. अधि‍सूचना के मुताबिक, उक्त सामग्रियों की लेबलिंग संगत नियमों में निर्धारित प्रावधान के अनुसार न करना औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, वर्ष 1940 की धारा-17 और धारा-17 सी के अंतर्गत मिथ्याछाप की श्रेणी में आता है. उत्पादों के लेबल पर हलाल सर्टिफिकेट का अंकन करने का कोई प्रावधान अधिनियम में नहीं है, ऐसे में वह मिथ्याछाप बताया जा रहा है. खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, "मिथ्याछाप औषधि एवं चिकित्सा में प्रयुक्त अन्य सामग्री एवं प्रसाधन सामग्रियों का निर्माण, भंडारण, वितरण एवं क्रय-विक्रय करना अधिनियम की धारा-18 के अनुसार प्रतिबंधित है और धारा-27 के तहत दंडनीय अपराध है. ऐसे में इसका निर्माण-बिक्री आदि करने पर कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी." 

इस सरकारी फरमान की व्यापक प्रतिक्रिया हुई है. हलाल सर्टिफि‍केशन देने वाली कंपनि‍यों का तर्क है कि इस्लाम धर्म के अनुसार, हलाल का मतलब जायज होता है. इसके प्रमाणपत्र का मतलब है कि उत्पाद मुसलमानों के इस्तेमाल के लिए जायज है और हराम की चीजें इसमें नहीं हैं. देवबंद (सहारनपुर) में जमीयत उलमा-ए-हिंद (महमूद मदनी) के हलाल ट्रस्ट के सीईओ मौलाना नियाज फारूकी ने 2010 से मान्यता प्राप्त होने का दावा करते हुए प्रतिबंध के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही है. फारूकी के अनुसार, भारतीय कृषि उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण और दुनियाभर में भारतीय दूतावासों के साथ सहयोग करते हुए वैश्विक बाजारों में भारतीय हलाल प्रमाणित उत्पादों को बढ़ावा दिया गया है. फारूकी बताते हैं,

"जमीयत उलमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट विश्व हलाल खाद्य परिषद का सदस्य है. 2010 से जमीयत देश में निर्मित उत्पादों पर हलाल सर्टिफिकेट जारी करती है जिसे विश्व में मान्यता प्राप्त है." वहीं, भाजपा नेता शैलेंद्र शर्मा कहते हैं, "कंपनियां उन उत्पादों को भी हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रही हैं जो शुद्ध शाकाहारी हैं. आखिर वह किस नियमावली के तहत हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रही हैं. उत्पादों की जांच किन लैब में होती है?" प्रतिबंध को समर्थन देने वाले हलाल सर्टिफिकेट देने वाली कंपनियों पर अवैध ढंग से पैसे बनाने और आतंकी संगठनों की फंडिंग करने का आरोप भी लगा रहे हैं. 

ऑल इंडिया जमीयतुल कुरैश के प्रदेश अध्यक्ष मो. यूसुफ कुरैशी कहते हैं, "किसी उत्पाद पर हलाल लिखने से किसी को क्या दिक्कत हो सकती है. असल में, सरकार यह संदेश देना चाहती है कि हम हलाल को मानने वालों को दबाना चाहते हैं." बहरहाल, सरकार ने उक्त कंपनियों की जांच स्पेशल टास्क फोर्स को सौंप दी है, जिसके सामने पूरे मामले का तार्किक खुलासा करने की चुनौती है.

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