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राजस्थान : चुनाव प्रचार में नेताओं के गीतों का खुमार

राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान नेताओं के प्रचार अभियान में राजनैतिक गानों की खूब धूम है

किरोड़ी लाल मीणा समर्थकों के साथ अपने प्रचार के लिए बनाए गाने पर थिरकते हुए
किरोड़ी लाल मीणा समर्थकों के साथ अपने प्रचार के लिए बनाए गाने पर थिरकते हुए
अपडेटेड 16 नवंबर , 2023

राज्यसभा सांसद और सवाई माधोपुर से भाजपा उम्मीदवार डॉ. किरोड़ी लाल मीणा इन दिनों जहां भी जाते हैं उनके गाने वहां पहले पहुंच जाते हैं. 'आग्यो राज किरोड़ी को, तगड़ो खेल किरोड़ी को, कई आंख्या माय खटक रह्यो छ लाल किरोड़ी यो, दुनिया बाबो-बाबो कह छै, बाबो चीज प्यारी छै' जैसे गीत सुनकर उनके समर्थक उत्साहित होते दिखते हैं और कई नाचने भी लगते हैं. इस दौरान कई मौके ऐसे भी आते हैं जब किरोड़ी खुद समर्थकों के बीच पहुंचकर डांस करते हैं. डॉ. किरोड़ी लाल मीणा पर मीणावाटी थीम पर रोज नए गाने रचे जा रहे हैं. 

सवाई माधोपुर का इलाका मीणावाटी में आता है, यहां से राजस्थान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित मारवाड़ 400 किलोमीटर दूर है, लेकिन नजारा वहां भी ऐसा ही है. फर्क बस इतना है कि वहां बाबा की जगह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष और सांसद हनुमान बेनीवाल के गीत गूंज रहे हैं. यहां गानों का अंदाज मीणावाटी की जगह मारवाड़ी हो जाता है. 

राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष प्रद्मुन सिंह अब 85 साल के हो चुके हैं. उन्होंने बेटे रोहित बोहरा को अपनी सियासत सौंपकर सक्रिय चुनाव में भाग लेना छोड़ दिया है. लेकिन चुनावी गीतों से उन्हें लगाव आज भी है. पहले खुद के लिए चुनावी गीत तैयार करवाते थे और आजकल अपने बेटे के लिए. वीणा म्यूजिक इंडस्ट्री के हेमजीत मालू कहते हैं, "चुनाव का दौर शुरू होते ही उनका कॉल आ जाता है, हमेशा यही कहते हैं- थांका आळा दो गीत बनार दे दिज्यो (आपके वाले दो गीत बनाकर दे देना)." रोहित कांग्रेस की टिकट पर राजाखेड़ा से उम्मीदवार हैं.  

राजस्थान विधानसभा चुनावों में आजकल ये दृश्य आम हैं. किरोड़ी लाल, प्रद्मुन सिंह और हनुमान बेनीवाल ही नहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रतिपक्ष के नेता राजेंद्र राठौड़, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान के संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल, विधायक राजेंद्र पारीक और मनोज मेघवाल जैसे कई नेता हैं जिन पर चुनावी गीत रचे जा रहे हैं. वीणा के साथ ही राजस्थान की कई म्यूजिक कंपनियां नेताओं पर आधारित गाने तैयार करने में जुटी हैं. 

सरकार जहां अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार वाले गीत तैयार करवा रही है वहीं विपक्ष ने सरकार की कमियों पर आधारित गीत तैयार करवाए हैं. गीत बनाने में स्थानीय बोली, लोक संगीत और लोकप्रिय धुनों का ख्या रखा जाता है. राजस्थान के अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग बोली और वहां प्रचलित धुन भी अलग-अलग हैं. मसलन, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर जैसे मीणावाटी इलाकों में चुनावी गीतों में लोक दंगल की छाप होती है वहीं मारवाड़ में लोक देवता तेजाजी और गोगाजी के लोकगीतों की धुन पर चुनावी गीत तैयार किए जा रहे हैं. 

मेवाड़ में गवरी शैली के गीत प्रचलित हैं तो शेखावाटी के गीतों में चंग-धमाल का असर नजर आता है. राजस्थान में हर इलाके में लोगों की पसंद के गायक कलाकार भी अलग-अलग हैं. मसलन, शेखावाटी में सीमा मिश्रा और सुप्रिया के आवाज को ज्यादा सुना जाता है तो मारवाड़ में श्याम पालीवाल, सतीश और प्रकाश माली के सुरों की स्वर लहरिया गूंजती हैं. हाड़ौती संभाग में तेजकरण राव और रेखा राव जैसे कलाकारों की आवाज को अधिक सुना जाता है. 

चुनावी गीत आमतौर पर तीन से चार मिनट तक के होते हैं. चुनाव में मार्चिंग सान्ग यानी, तेज बीट वाले गीत लोगों को ज्यादा पसंद आते हैं. लोक गीत और देशभक्ति गानों की धुन पर तैयार किए जाने वाले गीत भी चुनावी रैलियों में ज्यादा सुनाई देते हैं. 

राजस्थान की सबसे पुरानी वीणा म्यूजिक इंडस्ट्री के हेमजीत मालू बताते हैं, "चुनाव से पहले ही नेता हमसे संपर्क कर गाने तैयार करने के लिए कह देते हैं. हमारे राइटर, सिंगर और म्यूजिक डायरेक्टर तीनों मिलकर गीत की रचना करते हैं. गानों के लिरिक्स से लेकर धुन तैयार करने और गायकों का चयन तक कंपनी ही करती है. सबसे मुश्किल काम होता है गाने के बोल लिखना. इसमें नेताओं की ओर से किए गए कार्यों और चुनाव में उनकी ओर से की जा रही घोषणाओं को आधार बनाया जाता है. गीत ऑडियो और वीडियो दोनों माध्यम में तैयार हो रहे हैं."

बीकानेर में पैरोडी गीतों की धूम 

कुछ साल पहले तक बीकानेर का चुनाव आमतौर पर घरों के बाहर बने चबूतरों पर चर्चाओं के लिए जाना जाता था, लेकिन अब पैरोडी गीतों से प्रचार ज्यादा हो रहा है. जैसे भाजपा की तरफ से एक गाना चल रहा है, 'कांग्रेस रो फाटक बंद, आ गयो आनंद ही आनंद.' वहीं कांग्रेस की तरफ से आया एक गाना है, 'छह बार चुन लिया है, अब सातवीं बार चुन, चुन, चुन... चुन बाबा चुन.'

फिल्मी गानों पर बनाई गई ये चुनावी पैरोडी लोगों के बीच खूब चर्चा में हैं. बीकानेर पश्चिम सीट पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला और भाजपा के उम्मीदवार जेठानंद व्यास के ऊपर बनाए गए पैरोडी गीत इन दिनों हर गली-मुहल्ले में बज रहे हैं. इस बार भी कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में एक दर्जन से ज्यादा पैरोडी बन चुकी हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने इन चुनावी पैरोडी गीतों को घर-घर तक पहुंचा दिया है. 

भाड़े के डांसर बुला रहे नेता 

हरियाणा से सटे मेवात और शेखावाटी इलाकों में भीड़ जुटाने के लिए नेता प्रोफेशनल डांसर भी बुला रहे हैं. ये डांसर आमतौर पर हरियाणवी गीतों पर ही डांस करते हैं. पिछले दिनों अलवर में एक राजनैतिक पार्टी के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए एक प्रख्यात डांसर को बुलाया गया. भीड़ जुट गई तो आयोजकों ने डांसर को प्रस्तुति के लिए नहीं बुलाया. कार्यक्रम समाप्त होने पर आयोजकों ने डांसर को जब तय की गई राशि नहीं दी तो डांसर ने सोशल मीडिया पर अपना वीडियो अपलोड कर दिया. इसके बाद आयोजकों ने सामने आकर डांसर को कार्यक्रम के लिए तय की गई रकम देने की बात कही. 

शेखावाटी में चुनावों पर कई साल से पैनी नजर रखने वाले जी.एल. कालेर कहते हैं, "पहले नेता ऊंट-गाड़ियों में बैठकर चुनाव प्रचार के लिए आते थे, लेकिन आजकल एसयूवी कारों के काफिले के साथ आते हैं. पहले नेता चौक में बैठकर लोगों के साथ दुख-दर्द की बात करते थे, लेकिन अब काफिले के साथ बजने वाले कानफोड़ू गीतों के कारण कुछ भी सुनाई नहीं देता. विधानसभा क्षेत्र में इनके प्रचार के लिए जब भी कोई बड़ा नेता आता है तो हरियाणा से भाड़े पर डांसर बुला लेते हैं. अब चुनाव उत्सव नहीं रहा."

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