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राजस्थान : काले पत्थर उजली करेंगे राह?

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले मंत्रियों और विधायकों में विभिन्न परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन की होड़ मची है

कतार में रखे शिलापट्टों को देखते सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना
कतार में रखे शिलापट्टों को देखते सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना
अपडेटेड 18 अक्टूबर , 2023

राजस्थान के सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना पिछले एक माह में अपने विधानसभा क्षेत्र निंबोहड़ा में 800 से ज्यादा कार्यों और परियोजनाओं का लोकार्पण तथा शिलान्यास कर चुके हैं. 2 सितंबर से लेकर 3 अक्तूबर तक उन्होंने हर दिन औसतन 50-60 काले पत्थरों के फीते काटे. कई जगह तो उन्होंने एक साथ 40-50 शिलापट्टों के फीते काट शिलान्यास और लोकार्पण किए. इस दौरान आंजना और उनके समर्थकों को इतनी भी फुरसत न मिली कि वे इन काले शिलापट्टों का सलीके से उद्घाटन कर सकें. अधिकतर जगहों पर तो इन शिलापट्टों को जमीन पर बेतरतीब बिछाकर फीते काटे गए. स्थानीय व्यवसायी मोहन लाल गायरी कहते हैं, ''मंत्री महोदय ने पांच साल काम किया होता तो आज उन्हें एक साथ इतने फीते काटने की नौबत न आती. अब तो वे बस फीते काट रहे हैं.''

ऐसा करने आंजना अकेले मंत्री नहीं हैं. राजस्थान के अधिकतर मंत्री इसी काम में जुटे हैं. सार्वजनिक निर्माण मंत्री भजन लाल जाटव, ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी, खान मंत्री प्रमोद जैन भाया, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री टीका राम जूली से लेकर आपदा प्रबंधन मंत्री गोविंद राम मेघवाल भी काले पत्थरों से जीत की राह पक्की करने में जुटे हैं. असल में, चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले ये मंत्री मतदाताओं को लुभाने के लिए तेजी से शिलान्यास और उद्घाटन कर रहे हैं. राज्य में विधानसभा चुनावों के लिए बहुत कम समय बचा है. चुनावों की तिथियों के ऐलान के साथ ही राज्य में आचार संहिता लागू हो जाएगी. फिर मंत्रीगण न तो किसी योजना का उद्घाटन, शिलान्यास वगैरह न कर सकेंगे, न ही सरकारी आयोजन कर पाएंगे.

आंजना की तरह, मंत्री भजन लाल जाटव अपने विधानसभा क्षेत्र वैर में पिछले एक महीने में 600-700 शिलापट्टों का फीता काट चुके हैं. 25 सितंबर को उन्होंने 50 से ज्यादा कार्यक्रमों का एक साथ उद्घाटन/शिलान्यास किया. करीब 100 मीटर लंबी शिलापट्टों की कतार देखने में जाटव को 10 मिनट से ज्यादा का वक्त लगा. अमूमन शिलान्यास और लोकार्पण कार्य के लिए शिलापट्ट को किसी पत्थर या दीवार के बीच सलीके से लगाया जाता है. पर जाटव ने शिलापट्टों को जमीन पर एक साथ बिछाकर फीते काट दिए. इसी तरह मंत्री राम लाल जाट, जूली, भाटी और महेंद्र चौधरी भी पिछले एक माह में 200-300 शिलान्यास और उद्घाटन कर चुके हैं.

मंत्री ही क्यों, बहुत-से विधायक भी आचार संहिता लागू होने से पहले धड़ाधड़ शिलापट्ट लगाने में जुटे हैं. दूदू के विधायक बाबूलाल नागर, शाहपुरा के आलोक, सवाई माधोपुर के दानिश अबरार, मालपुरा के कन्हैयालाल, जैसलमेर के रूपाराम, लूणकरणसर के सुमित गोदारा, लूणी के महेंद्र विश्नोई, तारानगर के नरेंद्र बुडानिया, डीडवाना के चेतन डूडी और महुआ के विधायक ओमप्रकाश हुडला ने भी पिछले दो माह में 200 से 300 शिलान्यास और उद्घाटन किए हैं.

फीते काटने में महिला विधायक भी पीछे नहीं हैं. ऐसा करने वालों में जोधपुर जिले के ओसियां से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा, जयपुर के बगरू से गंगा देवी, चूरू जिले के सार्दुलपुर से कांग्रेस की कृष्णा पूनिया, उदयपुर के वल्लभनगर की प्रीति गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कई नाम शामिल हैं.

दिव्या मदेरणा इन दिनों जहां भी जाती हैं उनकी दर्जनों काले शिलापट्टों के साथ तस्वीरें सामने आती हैं. उन्होंने पिछले एक माह में 400 से ज्यादा शिलान्यास और लोकार्पण किए हैं. पूनिया भी दो माह में 300 से ज्यादा शिलापट्ट लगवा चुकी हैं. प्रीति गजेंद्र सिंह शेखावत सार्वजनिक कार्यक्रमों में घूंघट में नजर आती हैं. फीते भी वे घूंघट में रहते हुए ही काटती हैं. हालांकि, उनके साथ खड़ी रहने वाली आदिवासी महिलाएं बिना घूंघट के नजर आती हैं. प्रीति सभा को संबोधित करने और मंच पर बैठने के दौरान भी लंबे घूंघट में ही रहती हैं.

मंत्रियों और विधायकों में इतनी होड़ मची है कि प्रदेश में पिछले एक माह में 5,000 से ज्यादा शिलान्यास और लोकार्पण कार्यक्रम हो चुके हैं. जानकारों की मानें तो इस तरह के जितने कार्यक्रम पूरे एक साल में नहीं हुए थे, उससे ज्यादा पिछले एक माह में हो चुके हैं. विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में पुराने चल रहे कार्यों का लोकार्पण और मतदाताओं को लुभाने के लिए धड़ाधड़ नए शिलान्यास कर रहे हैं. कई विधायक तो एक-एक दिन में 100-100 करोड़ रुपए तक के शिलान्यास और लोकार्पण कर चुके हैं. 2 अक्तूबर को देवली-उनियारा विधायक हरीश मीणा ने अपने क्षेत्र में 245 करोड़ रुपए की परियोजनाओं के फीते काटे. उन्होंने पिछले एक साल में इतने रुपए के शिलान्यास और लोकार्पण नहीं किए थे.

इस सप्ताह टोंक जिले के चार विधानसभा क्षेत्रों में विधायकों ने 500 करोड़ रुपए के शिलापट्टों के फीते काटे. इसी तरह करौली जिले के एक मंत्री और विधायक ने पिछले 10 दिन में 50 से ज्यादा उद्घाटन और शिलान्यास किए. कुछ ऐसा ही हाल अन्य जिलों का भी है. राजनैतिक विश्लेषक मिलाप चंद डंडिया कहते हैं, ''पिछले कुछ वर्षों में यह परंपरा-सी बन गई है कि चुनाव नजदीक आते ही एक-एक नेता 500-500 शिलान्यास और उद्घाटन कर देते हैं. पहले शिलापट्ट के लिए अलग से दीवार या पक्का स्टैंड बनाया जाता था, लेकिन अब इन्हें जमीन पर फैलाकर खानापूर्ति कर दी जाती है. फीता काटने के बाद ये शिलापट्ट वहीं पड़े रह जाते हैं, सरकार बदलते ही इन्हें कचरे में फेंक दिया जाता है.''

सरकार भी पीछे नहीं

पिछले दिनों राजस्थान सरकार ने सभी विभागों से उनके यहां सितंबर के अंत तक पूरे होने वाले कार्यों और परियोजनाओं की रिपोर्ट मांगी थी. इसके पीछे सरकार की मंशा यही थी कि प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले इन कार्यों और परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा सके. कुछ दिन पूर्व ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक साथ 232 नगरीय निकायों में 4,101 कार्यों का शिलान्यास किया था. इन पर 1,500 करोड़ रु. खर्च होने हैं. इसी कड़ी में सरकार ने पिछले माह जयपुर के लक्ष्मी मंदिर तिराहे पर सिग्नल फ्री जंक्शन और जयपुर मेट्रो के कार्य विस्तार का लोकार्पण किया. 

ऐसा नहीं है कि मौजूदा सरकार ही शिलान्यास और उद्घाटन कार्यों में लगी है. पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे सरकार में भी अंतिम समय पर इसी तरह के कार्यक्रम हुए थे. राजे और उनके विधायकों ने साल 2018 में आचार संहिता लगने से पहले करीब 3,000-4,000 कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण किया था.

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