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जमीन के लिए बहता खून

देवरिया में छह लोगों की जघन्य हत्या ने जमीन से जुड़े विवादों के निबटारे में सरकारी सुस्ती को उजागर किया. राजस्व अधिकारियों और लेखपालों के खाली पदों से बढ़ी समस्या

हिंसक वारदात: देवरिया के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में हत्याकांड के बाद मृतक को ले जाते लोग
हिंसक वारदात: देवरिया के फतेहपुर गांव के लेड़हा टोला में हत्याकांड के बाद मृतक को ले जाते लोग
अपडेटेड 18 अक्टूबर , 2023

देवरिया जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर पश्चिम में रुद्रपुर तहसील के भलुअनी ब्लॉक के फतेहपुर गांव का लेड़हा टोला पुलिस की छावनी में तब्दील हो गया है. वजह गांव के बाहरी इलाके में स्थित साढ़े दस बीघा जमीन है. इसी जमीन का बैनामा लेहड़ा टोला निवासी सत्य प्रकाश दुबे के भाई ज्ञान प्रकाश ने बगल के अभयपुर टोला निवासी प्रेमचंद यादव के भाई रामजी यादव के पक्ष में कर दिया था. ज्ञान प्रकाश उर्फ साधु दुबे अविवाहित हैं.

आरोप है कि समाजवादी पार्टी (सपा) से जिला पंचायत सदस्य रहे प्रेमचंद यादव 2014 में पहचान पत्र बनवाने के बहाने साधु को घर से उठा ले गए और दबाव डालकर जमीन का बैनामा करा लिया. साधु को प्रेमचंद यादव ने बंधक बनाकर अपने घर रख लिया. किसी तरह वहां से छूटकर साधु गुजरात चले गए. सत्य प्रकाश ने भाई की जमीन का धोखे से बैनामा कराने की शिकायत स्थानीय राजस्व अधिकारियों से करने के साथ दीवानी न्यायालय में मुकदमा भी दायर किया था. वहीं से सत्य प्रकाश दुबे और प्रेमचंद यादव के बीच विवाद की शुरुआत हुई. 

प्रेमचंद यादव 2 अक्तूबर की सुबह छह बजे बाइक से पहले विवादित जमीन की निगरानी करने पहुंचे और बाद में सत्य प्रकाश दुबे के घर गए. जमीन को लेकर दोनों लोगों में कहासुनी के बाद मारपीट शुरू हो गई. आरोप है कि सत्य प्रकाश दुबे और उनके परिवार के अन्य लोगों ने मिलकर प्रेमचंद यादव की ईंट तथा धारदार हथियार से हत्या कर दी.

घटना की जानकारी मिलते ही प्रेमचंद यादव से जुड़े दो दर्जन से अधिक लोगों ने सत्य प्रकाश दुबे के घर पर धावा बोल दिया. लाठी-डंडा, धारदार हथियार के साथ फायरिंग करते पहुंचे हमलावर दरवाजा तोड़कर घर के भीतर घुस गए. हमलावर वहां मौजूद परिवार के सभी सदस्यों पर टूट पड़े. सत्य प्रकाश दुबे, उनकी पत्नी, दो बेटियों और एक बेटे को पीट-पीट कर मार डाला. महज आधे घंटे के भीतर छह हत्याओं से हर तरफ कोहराम मच गया.

जब सारा देश अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी का जन्मदिन मना रहा था, उसी वक्त इस जघन्य हिंसक वारदात ने प्रदेश-देश को हिलाकर रख दिया. देवरिया के जिलाधिकारी अखंड प्रताप सिंह और पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा तुरंत फतेहपुर गांव के लिए रवाना हो गए. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ घटनास्थल से करीब 70 किलोमीटर दूर अपने गृह जिले गोरखपुर में मौजूद थे.

मुख्यमंत्री योगी ने तत्काल प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार को लखनऊ से घटनास्थल पहुंचने का आदेश दिया. पुलिस ने दोनों पक्षों के 32 लोगों को नामजद करते हुए देवरिया हत्याकांड पर कड़ी कार्रवाई करते हुए मक्चयमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रुद्रपुर तहसील के उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी समेत दो तहसीलदार, तीन लेखपाल, एक थाना प्रभारी, एक हेडकांस्टेबल, चार कांस्टेबल समेत कुल 15 अधिकारी-कर्मचारी को निलंबित कर दिया है.

मुआयना: घटना स्थल की जांच करते प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद और विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार

यह ऐसा पहला मामला नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले आए हैं जिनमें जघन्य हत्याकांड के पीछे जमीन से जुड़ा अंतहीन विवाद रहा है. इनसे सबक न लेना भी सरकार के लिए समस्याएं पैदा कर रहा है (देखें बॉक्स). देवरिया में सिविल मामलों के वरिष्ठ वकील सुधांशु ओझा बताते हैं, ''जमीन के विवादों का समय से निस्तारण करने में अधिकारियों की ओर से रुचि न लिया जाना कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहा है. राजस्व विभाग में सुनवाई न होने से दबंग जमीन पर कब्जा कर लेते हैं.

यहीं से अपराध की पृष्ठभूमि तैयार होने लगती है." ऐसी ही सुस्ती कौशांबी जिले के एक दलित परिवार पर भारी पड़ गई. वहां के मोहीउद्दीनपुर गौस गांव में जिस जमीन पर कब्जे को लेकर तीन दलितों की 15 सितंबर को हत्या हो गई, उस जमीन का पट्टा 14 साल पहले हुआ था. यह 10 बिस्वा जमीन गांव के रहने वाले दलित लालचंद निर्मल को पट्टे पर मिली थी. लालचंद राजस्व अधिकारियों के चन्न्कर लगाते रहे लेकिन उन्हें अपनी जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका.

इसी बीच उसने वह जमीन गांव के ही रहने वाले अन्य दलित शिवसरन को सौंप दी. उस जमीन के पास आइटीआइ का निर्माण कराया गया है जिससे उसकी कीमत काफी बढ़ गई थी. इसी वजह से गांव के दबंगों की उस पर नजर थी. शिवसरन का उस जमीन पर झोपड़ी डाल कर रहना दबंगों को बेहद नागवार गुजरा. उन्होंने शिवसरन, उसकी पत्नी और ससुर की हत्या कर दी. इस प्रकार पट्टाधारकों को उनकी जमीन पर काबिज कराने में राजस्व विभाग और पुलिस की कथित सुस्ती ने एक जघन्य हत्याकांड को जन्म दिया.

पट्टाधारक दलित को जमीन पर कब्जा दिलाने में प्रशासन की लापरवाही बरेली में भी हत्याकांड की वजह बनी थी. बरेली के फरीदपुर स्थित गांव रायपुर हंस की दलित प्रधान जावित्री देवी बताती हैं, ''2007 में राजस्व विभाग ने उनके पति जगदीश के पक्ष में 10 बीघा जमीन का पट्टा किया था. प्रशासन ने पट्टा तो कर दिया लेकिन 15 साल में भी कब्जा नहीं दिला पाया. कुछ समय बाद इस जमीन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया. अगर प्रशासन ने समय पर कब्जा दिया होता तो कोई विवाद नहीं होता."

ग्राम समाज की जमीन से जुड़े विवाद सबसे ज्यादा सिरदर्द बने हुए हैं. अलीगढ़ जिले के दादों थाना क्षेत्र के गांव नवीपुर में ग्राम सभा की हजारों बीघा जमीन है. करीब चार साल पहले वहां रैपिड ऐक्शन फोर्स (आरएएफ) के ट्रेनिंग सेंटर के लिए जमीन तलाशी जा रही थी. राजस्व विभाग ने जब नवीपुर ग्राम सभा का रिकॉर्ड खंगाला तो वहां डेढ़ हजार बीघा से अधिक जमीन ग्राम समाज में दर्ज मिली.

मौके पर पहुंची राजस्व विभाग की टीम को ग्राम समाज की महज 400 बीघा जमीन ही खाली मिली और बाकी पर अवैध कब्जे मिले. जिला प्रशासन की एक टीम ने जब अवैध कब्जों की जांच की तो पता चला कि ग्राम पंचायत की 1,040 बीघा जमीन, जिसकी कीमत 300 करोड़ रुपए से अधिक है, पर तत्कालीन ग्राम प्रधान कुंवर पाल सिंह यादव समेत कुल 77 लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए हैं. राजस्व विभाग को सौंपी गई रिपोर्ट में जांच दल ने ग्राम प्रधान, लेखपाल और चकबंदी अधिकारी को राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ करके ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा करने का दोषी पाया.

इस प्रकरण में कुल 80 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की गई है. ग्राम समाज की जमीन पर हुए अवैध कब्जों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हाइकोर्ट के एडवोकेट शैलेंद्र कुमार ङ्क्षसह बताते हैं, ''ग्राम प्रधान और लेखपाल की मिलीभगत से गांव की जमीन पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं. सरकार अगर सभी लेखपालों की संपत्ति की जांच करा ले तो बहुत बड़ा भ्रष्टाचार सामने आ जाएगा.’’

हाउसिंग सोसाइटी के नाम पर भी ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जे की बहुत सारी शिकायतें  मंत्री के ''इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सेल’’ (आइजीआरएस) पोर्टल को मिली हैं. राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ऐसे ही कई सोसाइटियों की जांच कर रहे हैं. वह अधिकारी बताते हैं, ''भूमाफिया वहीं जमीनें खरीदते हैं जहां आसपास कोई विवादित या ग्राम समाज की जमीन हो.

वे खरीदार को दस्तावेज तो अपनी जमीनों के दिखाते हैं लेकिन उसकी आड़ में बगल की ग्राम सभा की जमीनें बेच देते हैं. इन बेची गई जमीनों के बैनामा में गाटा संख्या बिल्डर की अपनी खरीदी जमीन का होता है. बाद में जब जांच होती है तो फंसता खरीदार है क्योंकि उसका ग्राम समाज की जमीन पर अवैध कब्जा होता है और भूमि के दस्तावेज फर्जी होते हैं.’’ 

वर्ष 2017 में पहली बार यूपी के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने वाले योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, 2017 में गृह विभाग की पहली समीक्षा बैठक में अलग-अलग अपराधियों और माफियाओं को उनकी श्रेणी के हिसाब से चिह्नित कर सूची बनाने का निर्देश दिया था. इसके बाद हर जिले में भूमाफिया, खनन माफिया, शराब माफिया, वन माफिया जैसी श्रेणियों में अपराधियों को सूचीबद्ध किया गया. इसी के साथ 1 मई, 2017 से चार स्तरीय—राज्य, मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर ऐंटी भूमाफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया.

लोकसभा चुनाव के बाद 17 जुलाई, 2019 को सोनभद्र के उम्भा गांव में हुए नरसंहार के बाद मुख्यमंत्री योगी ने भूमाफिया समेत सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. पिछले छह वर्षों में प्रदेश के ऐंटी भूमाफिया पोर्टल पर अवैध कब्जे से संबंधित कुल 3,64,457 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 3,63,047 शिकायतें निस्तारित की गईं और 1,410 निस्तारण के लिए बाकी हैं. ऐंटी भूमाफिया अभियान के तहत साढ़े 66 हजार हेक्टयर से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है.

योगी सरकार की सख्ती के बावजूद जमीन की हेराफेरी करने वाले शांत नहीं बैठे हैं. अयोध्या के साकेत महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य वी.एन. अरोड़ा बताते हैं, ''प्रदेश में विकास योजनाओं के गति पकड़ने से जमीन की मांग बढ़ी है. जमीन की निगरानी और उसके रेखांकन की प्रभावी व्यवस्था न होने से भी जमीन से जुड़ी धांधलियों और विवादों की नींव पड़ी है.’’ राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद अयोध्या में जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों ने भी तेजी पकड़ी है.

वहां पर जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ी अनियमितताएं लगातार सामने आ रही हैं. अयोध्याधाम से सटे माझा जमथरा इलाके में आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर की संस्था व्यक्ति विकास केंद्र को महज पांच बिस्वा जमीन 21 बीघा दिखाकर 10 करोड़ रुपए में बेच दी गई थी. इस वर्ष अप्रैल में जब जमीन के नामांतरण का वाद सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) अयोध्या के न्यायालय में दायर किया गया तो यह गड़बड़ी सामने आई.

अयोध्या में तैनात एक राजस्व अधिकारी बताते हैं, ''अयोध्या में माझा जमथरा इलाके में जमीन खरीदने वाले कई लोगों के साथ गड़बड़ी हुई है. इसकी जानकारी होने के बाद भी ये लोग अपनी जमीन के नामांतरण का आवेदन नहीं कर रहे हैं. इन्हें डर है कि नामांतरण की प्रक्रिया में इनकी कलई खुल जाएगी और जमीन हाथ से निकल जाएगी.’’

राजस्व से जुड़े अधिकारियों की भारी कमी ने जमीन संबंधी विवादों के समयबद्ध निबटारे को मुश्किल बना दिया है. मिसाल के तौर पर यूपी के सबसे हाइप्रोफाइल जिले वाराणसी को ही लीजिए. यहां बड़े पैमाने पर विकास कार्यों के लिए जमीन की जरूरत है और इनके विवाद रहित प्रबंध के लिए लेखपाल की बड़ी भूमिका है. लेकिन वाराणसी मंडल में राजस्व लेखपालों के कुल 135 पद खाली चल रहे हैं.

राजस्व अधिकारियों को कामकाज समय पर संपादित करने के लिए प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक, आशुलिपिक, संग्रह अमीन, राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की जरूरत पड़ती है. वाराणसी में इन कर्मचारियों के 30 प्रतिशत पद खाली हैं. जिले की राजातालाब तहसील में पिछले 25 वर्ष से वकालत कर रहे रामसमुझ राय बताते हैं, ''जैसे-जैसे भूमि संबंधी विवाद बढ़ते जा रहे हैं. राजस्व अधिकारियों की संख्या घटती जा रही है. राजस्व कार्यों में लगे अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ता जा रहा है.

इससे जमीन से जुड़े विवादों का निस्तारण बाधित हुआ है. नतीजा जमीन से जुड़े विवाद संगीन आपराधिक वारदातों की वजह बन रहे हैं.’’ यूपी राजस्व विभाग में लेखपाल के कुल 30,887 पद स्वीकृत हैं. इनमें से 16 हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं. पिछले साल यूपी अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 8,085 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की. परीक्षा जुलाई 2022 में हुई और नतीजा इस वर्ष मई में आया. अभी काउंसिलिंग और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के लंबित होने से लेखपाल के पद पर अंतिम चयन नहीं हो पाया है.

लेखपाल संघ के अध्यक्ष राममूर्ति यादव कहते हैं, ''प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में सभी को घरौनी तैयार करके दी जानी है. खसरा खतौनी ऑनलाइन करने की प्रक्रिया भी चल रही है. लेखपाल की भारी कमी से जमीन से जुड़ीं ये प्रक्रियाएं सुस्त गति से चल रही हैं. भूमि विवादों के निस्तारण में भी विलंब हो रहा है.’’ 

अब देवरिया हत्याकांड के बाद योगी सरकार ने हर जिले में जमीन से जुड़ी शिकायतों और उनके निस्तारण का ब्योरा तलब किया है. इन विवादों का न्यायपूर्ण और समयबद्ध निस्तारण ही प्रदेश सरकार की जमीन मजबूत करेगा. 

 देवरिया हत्याकांड ने योगी सरकार की नाकामी जाहिर कर दी है. जमीन विवाद के निबटारे में विफल राजस्व विभाग की जांच होनी चाहिए 
—अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष, यूपी कांग्रेस कमेटी

 जमीन के विवाद में यदि घटनाएं हुईं तो संबंधित जिले और तहसील के अफसर सीधे तौर पर नपेंगे. भूमि विवाद का निस्तारण प्राथमिकता पर किया जाएगा 
—योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश.

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