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मध्य प्रदेश के चुनावी मैदान में भाजपा के दिग्गज

मध्य प्रदेश में केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को चुनावी मैदान में उतारकर भाजपा ने तय कर लिया है कि वह कोई भी कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती

ऊंचे दांव (बाएं से दाएं) केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते
ऊंचे दांव (बाएं से दाएं) केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद सिंह पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते
अपडेटेड 11 अक्टूबर , 2023

भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को भोपाल में थे. उस सभा का आयोजन पार्टी की जन आशीर्वाद यात्रा के समापन के मौके पर हुआ था. उसमें शामिल होने केबाद मोदी उसी शाम दिल्ली लौट गए. तब तक राज्य भाजपा के अधिकतर नेताओं को अंदाजा भी नहीं होगा कि जल्द ही केंद्रीय आलाकमान का कोई फैसला उन्हें चौंकाने वाला है.

दरअसल, उसी शाम पार्टी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 39 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, जिसमें तीन केंद्रीय मंत्रियों समेत सात लोकसभा सदस्यों के नाम थे. अगले दिन भाजपा ने एक अन्य प्रत्याशी की घोषणा की और इसके साथ पार्टी अब तक कुल 79 प्रत्याशी घोषित कर चुकी है. यानी उसने 230 सीटों में से एक-तिहाई पर अपने प्रत्याशी तय कर दिए हैं. वहीं कांग्रेस ने अभी तक अपनी पहली सूची भी जारी नहीं की है.

भाजपा ने 17 अगस्त को मध्य प्रदेश में 39 उम्मीदवारों के अलावा पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ के लिए 21 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी. ऐसा लगता है कि प्रत्याशियों की जल्द घोषणा और वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारना, दोनों राज्यों में उसकी रणनीति का मुख्य हिस्सा है.

भाजपा मध्य प्रदेश में सत्ता में है और छत्तीसगढ़ में मुख्य विपक्ष दल है. लेकिन दोनों राज्यों में उसकी जीत की राह आसान नहीं है. पार्टी की पहली सूची में ज्यादातर वे सीटें शामिल हैं जहां उसका प्रदर्शन कमजोर रहा था. वहीं, दूसरी सूची से एक बात साफ है कि पार्टी जीत की कोशिशों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. मैदान में उतारे गए दिग्गजों में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (दिमनी), प्रह्लाद सिंह पटेल (नरसिंहपुर) और फग्गन सिंह कुलस्ते (निवास सीट) शामिल हैं. भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय (इंदौर-1) के अलावा लोकसभा सदस्यों रीति पाठक (सीधी), गणेश सिंह (सतना), राकेश सिंह (जबलपुर पश्चिम) और राव उदय प्रताप सिंह (गाडरवारा) को भी मैदान में उतारा है.

इससे पहले, 2003 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान—जो उस समय विदिशा से सांसद थे—को भी राघोगढ़ सीट से तत्कालीन कांग्रेसी मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ उतारा गया था. वैसे, वे चुनाव हार गए थे. हालिया उदाहरण में, पार्टी ने 2021 में पश्चिम बंगाल चुनाव में पांच सांसदों को मैदान में उतारा था, जिसमें केवल दो ही जीत हासिल कर सके. भाजपा ने यह प्रयोग केरल और उत्तर प्रदेश में भी किया, पर सफलता नहीं मिली.

फिर, मध्य प्रदेश में इस कदम के पीछे भाजपा की सोच क्या है? पार्टी की कार्यशैली की जानकारी रखने वालों का कहना है कि यह दोहरी रणनीति का हिस्सा है. एक तो चौहान, जो सत्ता-विरोधी लहर का सामना कर रहे हैं, पर थोड़ा दबाव बनाना. दूसरा, जहां दिग्गजों को मैदान में उतारा गया है, उससे सटी सीटों पर उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाना.

कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के लिए हर चुनाव से पहले होने वाली जन आशीर्वाद यात्रा को पांच चरणों में बांटा गया था, और हर चरण का नेतृत्व अलग-अलग नेताओं ने किया. इसमें चौहान शामिल नहीं थे. पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व चौहान को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने से परहेज कर रहा है. अब दिग्गज नेताओं को उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने जीत की स्थिति में सीएम पद के लिए उन्हें भी रेस में ला दिया है. तोमर मुरैना जिले के दिमनी से चुनाव लड़ रहे हैं, जिससे ग्वालियर-चंबल बेल्ट की अन्य सीटों पर सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है. पार्टी को उम्मीद है कि इंदौर से विजयवर्गीय की उम्मीदवारी मालवा क्षेत्र में प्रभाव डालेगी और वरिष्ठ आदिवासी नेता कुलस्ते की वजह से महाकौशल के आदिवासी बेल्ट में भाजपा की संभावनाएं बेहतर होंगी. विजयवर्गीय कहते हैं, ''जब मेरी उम्मीदवारी घोषित की गई तो मुझे काफी आश्चर्य हुआ. पर पार्टी का वफादार सिपाही होने के नाते, मैं वही करूंगा जो मुझसे उम्मीद की जाएगी.''

वहीं, कांग्रेस नेताओं को लगता है कि भाजपा ने हार को भांपकर 'पैनिक बटन' दबा दिया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा कि भाजपा उम्मीदवारों की सूची पिछले 15 वर्षों में विकास के चौहान सरकार के दावों को झुठलाती है. लेकिन अपनी पार्टी की सूची अभी तक जारी करने में नाकाम रहने पर कमलनाथ ने कहा, ''हमने पहले ही अनौपचारिक तौर पर उन उम्मीदवारों को सूचित कर दिया है जिनका नाम तय कर लिया गया है. उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में काम भी शुरू कर दिया है.'' लेकिन क्या भाजपा ने कांग्रेस को भी हैरत में डाल दिया है?'' 

छत्तीसगढ़ का रण :

मध्य प्रदेश की तरह, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा 17 अगस्त को 21 उम्मीदवारों की सूची जारी करके इसमें बढ़त हासिल कर रखी है

इनमें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रतिनिधित्व वाली पाटन सीट से उतारे गए दुर्ग सांसद विजय बघेल (इनसेट, दाएं) शामिल हैं

ये वे 21 सीटें हैं जहां भाजपा अपेक्षाकृत कमजोर है, और मतदाताओं को साधने के लिए वह अपने उम्मीदवारों को पर्याप्त समय देना चाहती है

अगर कोई नकारात्मक फीडबैक मिलता है तो इससे पार्टी के पास सुधार करने का मौका होगा

राज्य में भाजपा के पास दुर्ग सीट के अलावा आठ लोकसभा सांसद हैं. उनमें से कुछ को टिकट मिल सकता है

मध्य प्रदेश की तरह छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है. आंतरिक सर्वेक्षण 71 मौजूदा विधायकों में से अधिकतर के खिलाफ लोगों में नाराजगी की ओर इशारा करते हैं. हालांकि मुख्यमंत्री के खिलाफ ऐसी नाराजगी नहीं है

सूत्रों का कहना है कि पार्टी सबसे पहले तो टिकट कटने से नाराज विधायकों की बगावत से निबटने की योजना बनाना चाहती है

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