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राजभर वोटों के लिए रस्साकशी

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राजभर मतदाताओं को खींचने के लिए भाजपा और सपा में होड़. गठबंधन को लेकर शशोपंज में सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर

गठबंधन का अवसर: यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ओम प्रकाश राजभर (दाएं, पीले कपड़े में) के बेटे अरुण की शादी के मौके पर नवदंपती को तोहफा भेंट करते हुए
गठबंधन का अवसर: यूपी के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ओम प्रकाश राजभर (दाएं, पीले कपड़े में) के बेटे अरुण की शादी के मौके पर नवदंपती को तोहफा भेंट करते हुए
अपडेटेड 3 जुलाई , 2023

वाराणसी के सिंधोरा थाना क्षेत्र में आने वाला गांव फत्तेपुर (खऊदा) 13 जून की दोपहर 12 बजे से प्रदेश के बड़े नेताओं की अगवानी कर रहा था. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने अपने पैतृक गांव में बेटे अरुण राजभर की शादी के बाद आशीर्वाद समारोह का आयोजन किया था. और शादी की मिठाई में भाजपा-सुभासपा के बीच बढ़ती मिठास भी किसी से छिपी न रही. उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी समेत भाजपा के कई दिग्गज नेता नवदंपती को आशीर्वाद देने जुटे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन पर राजभर को बधाई दी तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सलाहकार अवनीश अवस्थी के हाथों शुभकामना संदेश भेजकर अपनी भावनाएं प्रकट कीं. इस समारोह में समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल समेत कई दूसरे दलों के बड़े नेता भी पहुंचे लेकिन भाजपा नेताओं ने जिस तरह से गर्मजोशी दिखाई उससे सियासी गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई. दो दिन बाद 15 जून की आधी रात वाराणसी सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ राजभर की बंद कमरे में हुई मुलाकात के बाद भाजपा और सुभासपा के बीच चुनावी गठबंधन की अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं.

अगले साल के लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर विजय हासिल करने की योजना तैयार की है. और इस योजना में राजभर वोट अहम हो गए हैं. सुभासपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव भाजपा के साथ गठबंधन करके आठ सीटों पर लड़ा था. इनमें चार पर सुभासपा ने जीत हासिल की थी. मार्च 2017 में यूपी में भाजपा सरकार बनने के बाद राजभर को पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया था. इसके बाद से लगातार राजभर पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाकर योगी आदित्यनाथ सरकार की आलोचना करते रहे. 2019 के लोकसभा चुनाव में राजभर ने भाजपा से गठबंधन तोड़कर 39 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे. चुनाव के नतीजे आने के एक दिन बाद 20 मई, 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजभर को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था. हालां‍कि राजभर दावा करते हैं कि उन्होंने 6 मई, 2019 को खुद योगी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था.

पिछले लोकसभा चुनाव में सुभासपा उम्मीदवारों की सभी सीटों पर जमानत जब्त हो गई थी लेकिन पूर्वांचल की कई सीटों में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए वे भाजपा उम्मीदवारों की हार का कारण भी बने थे. सुभासपा ने 2022 का विधानसभा चुनाव सपा के साथ मिलकर लड़ा. बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ में इतिहास वि‍भाग के प्रोफेसर और ''यूपी की राजनीति में जातियों की भूमिका'' विषय पर शोध करने वाले सुशील पांडेय बताते हैं, ''2022 के विधानसभा चुनाव में राजभर मतदाताओं के प्रभाव वाले आजमगढ़, आंबेडकरनगर, गाजीपुर, बलिया, बस्ती जैसे जिलों में भाजपा के खराब प्रदर्शन ने पार्टी को 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले रणनीति बदलने को मजबूर किया है. इसी कारण भाजपा सुभासपा का साथ लेने को आतुर है.'' पांडेय के अनुसार, राजभर समाज का एकमुश्त वोट मिलने पर भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की घोसी, गाजीपुर, जौनपुर, लालगंज, श्रावस्ती और आजमगढ़ सीट पर फायदा हो सकता है. 

पिछले वर्ष विधानसभा चुनाव बाद सपा और सुभासपा के बीच दूरियां बढ़ते ही भाजपा इसमें अपनी संभावनाएं तलाशने लगी थी. योगी सरकार में उप-मुख्यमंत्री बृजेश पाठक और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह समय-समय पर राजभर से मुलाकात कर दोनों दलों के बीच रिश्ते सामान्य करने में लगे हैं. लेकिन पेच सीटों के बंटवारे में फंसा है. राजभर वोटों की गोलबंदी के लिए भाजपा के अपने प्रयास भी जारी हैं.

राजभर समाज बहराइच जिले की पौराणिक शख्सियत राजा सुहेलदेव को अपना आदर्श मानता है. योगी सरकार बहराइच में राजा सुहेलदेव का भव्य स्मारक बनवाने के साथ आजमगढ़ में महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय का निर्माण करा रही है. अप्रैल में भाजपा ने आजमगढ़ के रामसूरत राजभर को विधान परिषद सदस्य मनोनीत कराया था. वाराणसी की शि‍वपुर विधानसभा सीट से विधायक अनिल राजभर को सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में जगह दी गई है. इससे पहले पूर्वांचल के राजभर मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा ने मार्च, 2018 में बलिया जिले के नेता सकलदीप राजभर को राज्यसभा भेजा था. ये नेता राजभर समाज के बीच वैसा प्रभाव छोड़ने में कामयाब नहीं हो सके जैसा ओम प्रकाश राजभर का अपने समाज पर है.  

पिछले साल विधानसभा चुनाव में सपा को राजभर समाज का एकतरफा समर्थन मिलने के पीछे सुभासपा से गठबंधन के अलावा इस बिरादरी के दूसरे प्रभावी नेताओं का साइकिल पर सवार होना भी था. बसपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने एक भावनात्मक पत्र लिखकर अपने बेटे कमलाकांत राजभर को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के पास भेजा था. आजमगढ़ की दीदारगंज सीट से विधायक बने कमलाकांत की युवाओं के बीच लोकप्रियता भी सुभासपा नेताओं को खटक रही है.

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले सपा में शामिल होने वाले पूर्व वरिष्ठ बसपा नेता राम अचल राजभर ने भी आंबेडकरनगर और आसपास के जिलों में राजभर मतों को साइकिल की तरफ मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई थी. आंबेडकर नगर की अकबरपुर विधानसभा सीट से विधायक राम अचल को सपा ने ओम प्रकाश राजभर के प्रभाव वाली गाजीपुर, घोसी, बलिया और आंबेडकर नगर संसदीय सीटों का प्रभारी बनाया है. रामअचल बताते हैं, ''ओम प्रकाश राजभर की खुद की कोई खास राजनैतिक पकड़ नहीं है. अगर उनके राजनैतिक ग्राफ को देखा जाए तो वे किसी अन्य दल के साथ ही चुनाव में कुछ सीटें जीत पाते हैं.''

सपा ने मई में हुए विधान परिषद के उपचुनाव में मऊ के रामजतन राजभर को चुनाव में उतारा था. संख्या बल के आधार पर इस चुनाव में सपा की हार तय थी लेकिन राजभर उम्मीदवार के जरिए सपा की रणनीति ओम प्रकाश राजभर से सीधा मोर्चा लेने की थी. इसके काउंटर अटैक के रूप में ओम प्रकाश ने विधान परिषद उपचुनाव में भाजपा का समर्थन किया.

लोकसभा चुनाव के लिए जैसे-जैसे समय नजदीक आता जा रहा है सभी पार्टियां अपने जनाधार में बढ़ोतरी करने का हरसंभव प्रयास कर रही हैं. सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने गठबंधन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उन्हें किस तरफ जाना चाहिए, वे इसके नफे-नुक्सान का आकलन करने में जुटे हैं. 2024 का लोकसभा चुनाव बताएगा कि राजभर वोट पर किसका 'राज' है.

''राजभर समाज को सत्ता में वैसी भागीदारी नहीं मिली है जैसे दूसरी प्रभावी पिछड़ी जातियों को मिली. इसी कारण राजभर मतदाताओं में दुविधा है. यही 'फ्लोटिंग वोटर' अब हर दल के निशाने पर है.''
सुशील पांडेय, प्रोफेसर, बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ

अहम है वोट इस बिरादरी का
सामाजिक न्याय समिति, 2001 की रिपोर्ट के अनुसार, यूपी की पिछड़ी जातियों में राजभर (भर) जाति का प्रतिशत 2.44 है. हालांकि पूर्वांचल की 28 लोकसभा सीटों पर राजभर मतदाता 10 से 20 प्रतिशत के बीच हैं.

अर्कवंशी, बारी, खरवार, बियार जातियों को यूपी में भर या राजभर की समकक्ष बिरादरी में गिना जाता है. अर्कवंशी जाति के मतदाता पश्चिमी, मध्य यूपी और बुंदेलखंड में अच्छी संख्या में हैं. बारी और खरवार मतदाता पूरे प्रदेश में हैं.

2019 के लोकसभा चुनाव में मछली शहर सीट पर भाजपा ने महज 181 वोटों से जीत हासिल की थी. इस सीट पर सुभासपा को 11,223 वोट मिले थे.

बलिया लोकसभा सीट पर भाजपा ने सपा को 15,519 वोटों से हराया था. इसी सीट पर सुभासपा उम्मीदवार को 35,900 वोट मिले थे.

2017 के विधानासभा चुनाव में सुभासपा ने भाजपा से गठबंधन कर आठ सीटों पर चुनाव लड़ा और चार सीटें जीतीं. 2022 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा ने सपा से गठबंधन कर 16 सीटों पर लड़ा और छह सीटें जीतीं.

'बड़ी पार्टियां हर बार गठबंधन बदलें तो सही, हम बदलें तो गलत!'

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने एसोसिएट एडिटर आशीष मिश्र से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की. कुछ अंश:

लोकसभा चुनाव से पहले सभी दलों के लिए राजभर वोट क्यों जरूरी हो गए हैं?
पूर्वांचल की 32 लोकसभा सीटों पर राजभर मतदाता महत्वपूर्ण हैं. राजभर समाज का वोट लिए बगैर कोई भी दल पूर्वी यूपी में लोकसभा चुनाव जीत कर दिखाए तो मान जाऊंगा.

क्या राजभर समाज का सारा वोट ओम प्रकाश राजभर के ही पास है?
जो भी राजनैतिक व्यक्ति फैजाबाद लोकसभा सीट पर कदम रखता है वह सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और ओम प्रकाश राजभर की आंच जरूर महसूस करने लगता है.

आपके अलावा भी राजभर समाज से कई नेता सामने आए हैं.
हमारे समर्थक, वोटर दिन दूना रात चौगुना बढ़ रहे हैं. उन्हें विश्वास है कि सत्ता के तलवे चाटने वाले दूसरे नेताओं के विपरीत मैं उनके लिए लड़ता हूं. सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू कराने के लिए ही मैंने योगी सरकार से इस्तीफा दिया था. 

आप भाजपा विरोधी गठबंधन का हिस्सा नहीं बन पा रहे हैं?
मायावती जी, सोनिया जी, अखि‍लेश जी, नीतीश जी, जयंत जी जिस दिन एक मंच पर आ जाएं, मुझे दो घंटा पहले सूचना दे दें, मैं पहुंच जाऊंगा.

आपकी भी छवि एक अस्थिर नेता की बन गई है.
सपा, बसपा जैसी बड़ी पार्टियां हर चुनाव में गठबंधन बदलें तो सही और हम छोटी पार्टियां ऐसा करें तो गलत.

अखिलेश यादव से क्या नाराजगी है?
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने मेरे साथ धोखा किया था. सपा ने सुभासपा को 16 सीटें दी थीं और इन पर 12 डमी उम्मीदवार अपने दिए थे. अखिलेश के पास किसी दल को साथ लेकर चलने का सामर्थ्य नहीं है.

भाजपा आपके प्रति नरम रुख क्यों दिखा रही है?
भाजपा को एहसास हो गया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल में जीत हासिल करनी है तो मौजूदा साथियों के अलावा ओम प्रकाश राजभर को भी साथ लेना होगा. 

क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा से गठबंधन करेंगे?
राजनीति में कोई अछूत नहीं है. भाजपा में मेरी केशव मौर्य, बृजेश पाठक, दयाशंकर सिंह से बातचीत होती है. लेकिन ये लोग अपनी पार्टी के मालिक थोड़े ही हैं.

मुख्यमंत्री योगी से आपकी नाराजगी दूर हुई क्या?
हमारा विचारों का झगड़ा है. सामाजिक न्याय समि‍ति की रिपोर्ट लागू कराने की मेरी लड़ाई है. यूपी में देश भर से सबसे महंगी बिजली है. ऐसी कई समस्याओं को लेकर मेरा विवाद है. 

योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद आपका विरोध कर रहे हैं. 
निषाद जाति के लोग अनुसूचित जाति में आरक्षण की मांग पूरी न होने पर संजय निषाद का विरोध कर रहे हैं. इससे ध्यान भटकाने के लिए संजय निषाद मेरा विरोध कर रहे हैं.

गठबंधन के लिए प्राथमिकता में कौन-सा दल है? 
मेरी प्राथमिकता बसपा है. मैं तो बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को प्रधानमंत्री बनाना चाहता हूं. 

क्या मायावती से बातचीत चल रही है?
जब कुछ फाइनल होगा तो बताएंगे.

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