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धारा में बार-बार धड़ाम

बिहार में एक निर्माणाधीन पुल का साल भर में दो बार गिरना तंत्र की उस उदासीनता को उजागर कर देता है जिसके कारण राज्य की बुनियादी ढांचा परियोजनाएं प्रभावित होती आई हैं.

दूर हुए दो पाट सुल्तानगंज ब्रिज का क्षतिग्रस्त हिस्सा
दूर हुए दो पाट सुल्तानगंज ब्रिज का क्षतिग्रस्त हिस्सा
अपडेटेड 20 जून , 2023

अमिताभ श्रीवास्तव, भागलपुर में

यह रविवार की उमस भरी शाम थी. अजीत कुमार अपनी कार पोछ रहे थे तभी उन्होंने गगनभेदी आवाज सुनी. शुरू में उन्हें लगा कि बिजली गिरी है लेकिन फिर एहसास हुआ कि आवाज तो निर्माणाधीन अगुवानी-सुल्तानगंज पुल के गिरने की थी. पुल का 575 मीटर हिस्सा (पाया या पाइलॉन नंबर 9 से 13 वाला) टूटकर गंगा में समा गया था. बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज घाट के सामने स्थित होटल अशोका गार्डन के मालिक अजीत याद करते हैं, ''मलबे की धूल कुछ देर तक नदी के ऊपर छाई रही. यह बहुत डरावना था.’’

इस पुल को एस.पी. सिंगला कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड बना रहा है. खगड़िया जिले के सुल्तानगंज और अगुवानी घाट को जोड़ने वाले 3.16 किमी लंबे इस पुल का अब तक का सफर बड़ा मनहूस रहा है. 4 जून की दुर्घटना एक साल से थोड़े अधिक समय के भीतर ऐसी दूसरी बड़ी दुर्घटना थी. इससे पहले, 30 अप्रैल, 2022 को पुल के पाया संख्या 5 के दोनों किनारों के 19 ब्लॉक पर टिके पुल के एक्सट्राडोज्ड स्पैन (पुल को सहारा देने वाले हिस्से) का 162.5 मीटर का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था (देखें ग्राफिक्स: आखिर क्यों गिरा पुल).

विडंबना देखिए कि बिहार अपने कई पुलों के लिए जाना जाता रहा है. अगुवानी-सुल्तानगंज पुल को भी एक असाधारण परियोजना माना जाता था. यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट है, जिसमें उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली गंगा पर चार लेन की एक सड़क भी शामिल है.

मनोरम नदी के ऊपर इस केबल स्टे ब्रिज (ऐसे पुल जिसमें मोटे-मोटे तार का सहारा दिया जाता है) को पांच हिस्सों में कंक्रीट के ढांचे पर बांधा गया है जो उत्तर-पूर्व में कोसी क्षेत्र के खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा और सुपौल जिले और दक्षिण-पूर्व के भागलपुर, मुंगेर और जमुई जिलों को जोड़ेगा. पुल के लिए अनुबंध पर नवंबर 2014 में हस्ताक्षर किए गए थे और छह कंपनियों में से सबसे कम बोली लगाकर सिंगला कंस्ट्रक्शन ने यह ठेका हासिल किया था. इसकी लागत 1,710.8 करोड़ रुपए निर्धारित की गई थी, जिसमें से पुल पर 859 करोड़ रुपए खर्च होने थे. बाकी रकम का इस्तेमाल जमीन अधिग्रहण में किया जाना था.

परियोजना की निगरानी करने वाली सरकारी एजेंसी बिहार राज्य सेतु निर्माण निगम लिमिटेड (बीआरपीएनएनएल) प्रोजेक्ट की धीमी गति को लेकर पहले से ही चिंतित थी (इसे नवंबर 2019 तक तैयार हो जाना था). सरकारी सूत्रों का कहना है कि सिंगला कंस्ट्रक्शन को काम पूरा करने के लिए तीन विस्तार दिए गए थे लेकिन कंपनी देरी का ठीकरा पुल तक पहुंचने वाली सड़कों के लिए भूमि अधिग्रहण में देरी के नाम फोड़कर बार-बार समय मांगती रही.

अंतिम समय सीमा (जून 2022) समाप्त होने से कुछ महीने पहले ही पाया नंबर 5 पर टिका हिस्सा गिर गया. इसके बाद बीआरपीएनएनएल ने काम बंद करा दिया और पुल गिरने के कारणों की जांच के लिए आइआइटी रुड़की से संपर्क किया.

उमेश शर्मा और संजय चिकरमाने (दोनों आइआइटी रुड़की) और भारतीय रेलवे के सेवानिवृत्त सदस्य (इंजीनियरिंग) सुबोध जैन की ओर से तैयार जांच रिपोर्ट आंखें खोलने वाली थी. इसने ''मैच कास्टिंग प्रक्रिया में आंशिक विफलता को इसका कारण माना क्योंकि इसके कारण भार का असमान वितरण हुआ और एक हिस्से पर ज्यादा दबाव पड़ा.’’

सीधे शब्दों में कहें तो पहले से ढले हुए हिस्सों को आपस में फिट होकर पुल पर पड़ने वाले भार को बराबर-बराबर साजा करना था लेकिन खामियों की वजह से वैसा हो न सका. रिपोर्ट के साथ कुछ तस्वीरें भी दी गई हैं जिनके आधार पर कहा गया है कि टांका (जो जोड़ को बनाए रखता है और कंक्रीट के स्लैब का दरारों की ओर बढ़ना कम करता है) गीला था. इसलिए यह जोड़ को बनाए रखने में नाकाम रहा और प्रीकास्ट कंक्रीट की सतह से ''अलग’’ हो गया.

रिपोर्ट कहती है कि ''एक अच्छा ज्वाइंट बनाने का सिद्धांत यह है कि ज्वाइंट टूटने से पहले बेस मटीरियल बिखर जाए. लेकिन गीले टांके वाली जगहों पर ऐसा नहीं हुआ.’’ रिपोर्ट यह भी कहती है कि ''कुछ गीले टांके वाली जगहों’’ का एनडीटी  यानी कंक्रीट की मजबूती जांचने का परीक्षण भी कराया गया तो, उसमें मजबूती की कमी पाई गई.

यह बताती है कि जोड़ पक्के नहीं थे. एनडीटी परीक्षण मौजूदा संरचनाओं के गिरने से पहले भार थामने की क्षमता और दूसरे गुणों का पता लगाने के लिए किया जाता है. अधिकारियों का मानना है कि जिस वजह से पाया संख्या 5 ढहा, वही खामियां दूसरी दुर्घटना के लिए भी जिम्मेदार हैं. दोनों मामलों में एक्स्ट्राडोज्ड मॉड्यूल ध्वस्त हो गया था.

पांच खंडों (1 से 5) में विभाजित, पुल को रीइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) पद्धति पर बनाया जा रहा है, जिसमें कई खंड में निर्माण शामिल है. पुल के नीचे कुल 29 खंभे या पाये हैं, जिन पर 672 प्री-कास्ट ब्लॉक रखे जाएंगे. इनमें से, पहली दुर्घटना के कारण 54 खंडों में नुक्सान हुआ, जबकि 4 जून को दूसरी दुर्घटना में 108 खंड ध्वस्त हो गए. इंडिया टुडे ने दुर्घटनाओं पर एस.पी. सिंगला कंस्ट्रक्शन की प्रतिक्रिया जानने के लिए सवालों की सूची भेजी थी लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया.

अप्रैल 2022 में पुल का एक हिस्सा गिरने के बाद बीपीआरएनएनएल स्पष्ट रूप से चिंतित था. सरकारी रिकॉर्ड बताते हैं कि 14 दिसंबर, 2022 को एक समीक्षा बैठक में विभाग ने एस.पी. सिंगला की डिजाइन और तकनीकी सलाहकार कनाडाई फर्म मैकएलहैनी के इस तर्क को खारिज कर दिया कि अप्रैल 22 की दुर्घटना के बाद आईं हल्की दरारें संरचनात्मक प्रकृति की नहीं थीं और इनसे पुल की सुरक्षा प्रभावित नहीं होने वाली.

बीआरपीएनएनएल ने आधिकारिक रूप से रिकॉर्ड में दर्ज किया है कि ध्वस्त खंडों के कारण पैदा हुए तनाव से केबल पर असर पड़ा होगा. इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि पाया 5 पर खड़े खंड में सूक्ष्म दरारें इसकी पूरी परिधि में फैली हुई हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 17 जनवरी को पथ निर्माण विभाग के सचिव संदीप के.आर. पुडाकलकट्टी ने एक आदेश पर हस्ताक्षर किए जिसमें पाया 5 पर शेष खंडों को हटाने और इसके पुनर्निर्माण के लिए कहा गया.

जब मार्च 2023 में इन खंडों को हटाया जा रहा था, आइआइटी रुड़की टीम को पूरे पुल की जांच करके अंतिम रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया था. अब 4 जून की दुर्घटना ने परियोजना पर ही बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. विभागीय अफसरों का सुझाव है कि जिन बिंदुओं पर विचार किया जा रहा है, उनमें से एक यह है कि क्या डिजाइन में ही कोई दोष था (जैसा कि आइआइटी-रुड़की की रिपोर्ट बताती है) जो इसे अव्यावहारिक बनाता है.

बिहार सरकार के लिए राहत की एक बात यह है कि अनुबंध में पुल के ईपीसी (इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण) की जिम्मेदारी सिंगला के ऊपर थी इसलिए जोखिम की जिम्मेदारी ठेकेदार की है. अनुबंध में पांच साल तक की अवधि के लिए किसी भी खामी की जिम्मेदारी भी निर्माण कंपनी पर डाली गई है जिसका अर्थ है कि ठेकेदार को परियोजना के पूरा होने के बाद भी अगर कोई खामी सामने आती है तो उसे दूर करने की जिम्मेदारी कानूनी रूप से ठेकेदार की होगी. बैंक गारंटी के रूप में कंपनी के 100 करोड़ रुपए भी जमा हैं, जिसे परियोजना के विफल रहने की स्थिति में राज्य जब्त कर सकता है.

बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के पास पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) का प्रभार भी है. उन्होंने आइआइटी रुड़की की रिपोर्ट के बाद पुल के डिजाइन को लेकर संदेह होने की बात स्वीकार की है. जैसा कि उन्होंने संकेत दिया, इस बात की भी संभावना है कि सरकार मौजूदा ढांचे को गिराने और इसे फिर से शुरू करने का आदेश दे सकती है, जो सिंगला के लिए अच्छी खबर नहीं होगी.

इसी बीच पटना हाइकोर्ट ने सुल्तानगंज से चुनाव लड़ चुके ललन कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सिंगला कंस्ट्रक्शन को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तथा खरीदी गई साम्रगी की रसीद तथा अन्य ब्यौरों के साथ 21 जून को कोर्ट में उपस्थित होने को कहा है.अदालत ने यह माना कि राज्य सरकार ने पुल गिरने की घटना को गंभीरतापूर्वक लेते हुए सरकारी अधिकारियों और कंपनी पर कार्रवाई भी की है. अगली सुनवाई में सरकार को ऐक्शन टेकेन रिपोर्ट पेश करने को कहा है. सरकार ने परियोजना के प्रभारी और बीआरपीएनएनएल के कार्यपालक अभियंता योगेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया है और एमडी नीरज सक्सेना को भी हटा दिया है.

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