वाराणसी के लंका इलाके के 70 वर्षीय विमल रस्तोगी सेंट्रल बैंक में मैनेजर के पद से रिटायर हुए हैं. गठिया की मरीज अपनी 70 वर्षीया पत्नी रीमा को उन्होंने 20 अप्रैल को खास तोहफा देते हुए उनका जन्मदिन शहर के नए नमो घाट पर मनाया. व्हीलचेयर पर बैठ गंगा नदी तक पहुंचीं रीमा ने गंगा की आरती उतारी और आशीर्वाद लिया. विमल शादी के बाद हर खास मौके पर पत्नी के साथ गंगा का आशीर्वाद लेने आते थे. 15 साल पहले पत्नी को गठिया होने के बाद घाटों की सीढ़ियां चढ़-उतर पाना संभव न रह गया था. सालों बाद गंगा तक पहुंच आशीर्वाद लेने से रीमा भी उत्साहित थीं. रीमा ही नहीं, उनके जैसे असंख्य अशक्त लोगों के लिए नमो घाट अनोखे पर्यटन केंद्र के रूप में उभरा है.
वाराणसी में अस्सी घाट से लेकर राजघाट पुल के दूसरी तरफ, वरुणा-गंगा के संगम स्थल की ओर करीब आधे किलोमीटर तक खिड़किया घाट था. इस उजाड़ और बियाबान इलाके की ओर लोग जाने से भी डरते थे. यह घाट 2020 में चर्चा में आया जब 'देव दीपावली' के उत्सव में शामिल होने पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिड़किया घाट से ही गंगा किनारे 'देवलोक' सा नजारा देखा था. इसके बाद स्मार्ट सिटी मिशन के तहत खिड़किरया घाट को नया रूप देने की योजना बनी जिसका पहला चरण पूरा हो चुका है. यहां 21,000 वर्ग मीटर जमीन पर 45 करोड़ रु. की लागत से नमो नम: घाट बनकर तैयार है. यहां सूर्य का अभिवादन और गंगा को प्रणाम की मुद्रा में 25-25 और 15 फिट की नमस्ते करती धातु की तीन मूर्तियां लगाई गई हैं. घाट का यह नया रूप नमो घाट के रूप में प्रसिद्ध हो रहा है. केवल पत्थरों से बने इस घाट पर छोटी-छोटी सीढ़ियां और रैंप की भी सुविधा है जिससे व्हीलचेयर पर भी लोग सीधे गंगा नदी तक पहुंच सकते हैं. ओपन एयर थिएटर, फूड कोर्ट, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, वाइफाइ, आरओ वाटर जैसी सुविधाएं किसी भी दूसरे घाट पर नहीं हैं. दूसरे चरण में 'नमो घाट' पर विसर्जन कुंड, वाटर स्पोर्ट्स एरिया, हेलीपैड, वाकिंग ट्रैक विकसित किया जा रहा है.
यहां पर्यटन के आकर्षण में एक नया आयाम जोड़ने को मोदी ने 24 मार्च को देश के पहले पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोप-वे का शिलान्यास किया तो सबसे ज्यादा खुशी काशी विश्वनाथ धाम के करीब मौजूद गोदौलिया बाजार के व्यापारियों को हुई. पूजा सामग्री व्यापारी रमेश गुप्ता बताते हैं, ''भीषण ट्रैफिक जाम के चलते दिन में गोदौलिया से कैंट रेलवे स्टेशन जाकर वहां पहुंचे सामान को लेकर वापस लौटने में करीब तीन घंटे लग जाते हैं. इसलिए व्यापारी रात में 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच ही सामान उठाने जाते हैं. रोप-वे बन जाने से व्यापारी कभी भी कैंट रेलवे स्टेशन पहुंच सकेंगे.'' 644 करोड़ रुपए की लागत से यह दो साल में बनकर तैयार होगा. इससे कैंट रेलवे स्टेशन से गोदौलिया तक 15 मिनट में पहुंचा जा सकेगा. इससे एक दिन में 30,000 यात्री सफर कर सकेंगे. सबसे ज्यादा फायदा श्रद्धालुओं को होगा जिन्हें स्टेशन से काशी विश्वनाथ धाम के निकट गोदौलिया चौराहे तक पहुंचने में एक-डेढ़ घंटा लगता है.
घाटों की लाइटिंग न होने से रात को न तो नौका विहार होता था न पर्यटक आते थे. लाइटिंग व्यवस्था से पर्यटकों का आना बढ़ा है. सभी प्रमुख घाटों पर शौचालय, चेंजिंग रूम, पुलिस चौकी और पर्यटक सुविधा केंद्र बनाए गए हैं. गोदौलिया चौक से दशाश्वमेध घाट की ओर विश्वस्तरीय पैदल मार्ग बनाया गया है.
काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीइओ) सुनील वर्मा बताते हैं, ''श्रद्धालुओं को गर्मी से बचाने के लिए जर्मन हैंगर की व्यवस्था की जा रही है. साथ ही गोदौलिया और मैदालिन से श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम में लाने के लिए गोल्फ कार्ट की सुविधा देने पर भी विचार चल रहा है.'' वाराणसी में स्मार्ट सिटी मिशन के मुख्य महाप्रबंधक डी. वासुदेवन बताते हैं, ''स्मार्ट सिटी परियोजना में अस्सी घाट और राजघाट की ओर से आठ नए कच्चे घाटों का चयन किया गया है जिन्हें पूर्ण रूप से विकसित किया जाएगा.'' वाराणसी में कुल 84 प्राचीन घाट हैं. नमो घाट बनने से यह संख्या 85 हो गई है. आठ नए घाट बनने से वाराणसी में कुल घाटों की संख्या 93 हो जाएगी.
मोदी के चहेते अफसरों की सूची में शुमार कौशल राज शर्मा वाराणसी मंडल के कमिश्नर हैं. वाराणसी की विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में वे नोडल अफसर की तरह भूमिका निभा रहे है. वे बताते हैं, ''वाराणसी के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने विकास का एक अनूठा मॉडल पेश किया है. यही कि जन आस्था वाली सांस्कृतिक जगह को इस तरह से विकसित किया जाए कि उससे पूरे शहर के लोगों की आर्थिक स्थिति बदले.'' इसी रणनीति के तहत मंदिर और घाटों की भव्यता बढ़ाकर शहर के विकास को नया आयाम दिया गया है.
आंकड़ों के मुताबिक 2022 में वाराणसी में 7.11 करोड़ देशी और 83,741 विदेशी पर्यटक पहुंचे जो कि एक रिकार्ड है. 2014 के मुकाबले पर्यटकों की संख्या करीब 15 गुना बढ़ी है. बनारस होटल एसोसिएशन के पदाधिकारी गोकुल शर्मा बताते हैं, ''काशी विश्वनाथ धाम पर्यटन उद्योग के लिए जैकपॉट साबित हुआ है. वाराणसी की दूसरे शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी, रेल और हवाई सुविधाओं के विस्तार से रोज कम से कम एक लाख पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं.''
प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र होने के कारण वाराणसी में केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रियों और अधिकारियों का नियमित आवागमन बढ़ा है. यात्रियों की संख्या में इजाफा होने से वाराणसी के बाबतपुर हवाई अड्डे से उड़ानों में भी बढ़ोतरी हुई है. 2014 से पहले 15 उड़ानों की संख्या अब 60 पहुंच गई हैं. एयरपोर्ट को इस स्तर का बनाया जा रहा है जिससे एयरबस, बोइंग जैसे एयरक्राफ्ट यहां उतर सकें.
पर शहर के कुछ लोग इस बदलाव को लेकर आशंकित भी हैं. संकट मोचन मंदिर के महंत और आइआइटी बीएचयू में प्रोफेसर विश्वंभर नाथ मिश्र कहते हैं, ''अनियोजित विकास ने काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक पहचान को खत्म करके इसे एक पर्यटन नगरी के रूप में बदलकर रख दिया है. काशी की संस्कृति से छेड़छाड़ एक गंभीर मसला है.''
वर्ष 2014 में वाराणसी का सांसद बनने के बाद से अब तक 40 बार क्षेत्र का दौरा कर चुके मोदी का अगला प्रवास सावन के महीने से पहले प्रस्तावित है. तब 2,000 करोड़ रुपए की योजनाएं उड़ान भरेंगी.
योजनाओं ने दिलाई अलग पहचान
ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर: वाराणसी के बड़ालालपुर में केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने 305 करोड़ रु. की लागत से 7.93 एकड़ में दीनदयाल हस्तकला संकुल बनवाया है. इसमें शापिंग कॉम्प्लेक्स, कॉन्फ्रेंस रूम, संग्रहालय भी हैं.
कैंसर अस्पताल: बीएचयू में 1,171 करोड़ रु. की लागत से मदन मोहन मालवीय कैंसर सेंटर और 183 करोड़ रु. की लागत से 430 बेड वाले सुपरस्पेशिएलिटी अस्पताल की शुरुआत हुई है. लहरतारा में 140 करोड़ की लागत से होमी भाभा कैंसर अस्पताल खुला है.
सारनाथ का सौंदर्यीकरण: प्रो पुअर टूरिज्म योजना के तहत सारनाथ में पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जा रहा है. 7.33 करोड़ रु. की लागत से लाइट ऐंड साउंड शो शुरू हुआ है. सारनाथ के 26 मंदिरों के मार्गों का भी सौंदर्यीकरण किया गया है.
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र: वाराणसी के चांदपुर में फिलीपींस की मदद से, 93 करोड़ रु. की लागत से बने देश के पहले अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र की स्थापना गई है. यहां चावल की गुणवत्ता पर शोध हो रहा है.
क्रूज बोट और मल्टी मॉडल टर्मिनल: वाराणसी से असम के डिब्रूगढ़ तक 3,200 किमी तक दुनिया की सबसे लंबी रिवर क्रूज यात्रा शुरू हुई है. 10 करोड़ रु. की लागत से अस्सी घाट से राजघाट तक अलकनंदा क्रूज बोट शुरू हुई है. गंगा नदी के किनारे 416 करोड़ रुपए की लागत से देश के पहले इंटरनेशनल वाटर ट्रांसपोर्ट मल्टी माडल टर्मिनल की शुरुआत हुई है. इस पर नवंबर, 2018 से 8 'कार्गो मूवमेंट' से 129 मीट्रिक टन माल ढुलाई हुई है.
रिंग रोड: वाराणसी के चारों तरफ 5,000 करोड़ रु. से ज्यादा की लागत से रिंग रोड का निर्माण किया गया है.
कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर: नगर निगम मुख्यालय के सामने शहीद उद्यान में 172 करोड़ रु. की लागत से सिटी कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर बनाया गया है. यहां से शहर में लगे 4,500 सीसीटीवी कैमरों के जरिए नजर रखी जा रही है.
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर: जापान के सहयोग से 2.87 हेक्टेयर जमीन पर 186 करोड़ रु. की लागत से रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर बनाया गया है. यह जापानी तकनीक और वास्तुकला का नायाब नमूना है.
इंटीग्रेटेड पैक हाउस: फलों-सब्जियों के संरक्षण के लिए करखियांव इंडस्ट्रिणयल एरिया में इंटीग्रेटेड पैक हाउस बनाया गया है. रामनगर में 19 करोड़ रु. की लागत से बायोगैस आधारित विद्युत उत्पादन संयत्र का निर्माण अंतिम चरण में है.
ट्विन रेल इंजन: वाराणसी के डीजल रेल इंजन कारखाने ने फरवरी 2019 में डीजल से विद्युत में परिवर्तित दुनिया का पहला 10,000 हॉर्सपावर का ट्विन रेल इंजन बनाना शुरू किया.
स्मार्ट स्कूल: 10 करोड़ से अधिक की लागत से मछोदरी, राजघाट और महमूरगंज में वातानुकूलित, लिफ्ट सुविधा युक्त स्मार्ट स्कूल की स्थापना. बीएचयू में 136 करोड़ रुपए का अंतरराष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र तैयार.
एटीसी भवन: वाराणसी एयरपोर्ट से सुरक्षित यातायात के लिए 28 करोड़ की लागत से 500 किमी की रेंज वाले नए अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) भवन और टेक्निकल ब्लॉक का निर्माण.
और जयापुर का क्या?
अप्रैल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के जयापुर गांव को गोद लेने का ऐलान करते ही इसकी किस्मत बदल गई थी. कई केंद्रीय मंत्रालय और एनजीओ योजनाएं लेकर पहुंचने लगे थे. पटेल, ब्राह्मण, भूमिहार, यादव और दलितों की 5,000 आबादी वाले इस गांव में सड़क, बैंक, एटीएम, सोलर प्लांट, पानी की टंकी सब फटाफट हो गया. पर आठ साल बाद? भयंकर उपेक्षा का आलम. मोदी ने जिस कन्या विद्यालय का शिलान्यास इंटरमीडिएट तक शिक्षा के लिए किया था वहां अब खादी कताई-बुनाई और गेहूं क्रय केंद्र खुल गया है. किसान गोपाल गु्प्ता बताते हैं, ''आधारभूत ढांचे में कोई सुधार नहीं हुआ. न नाली बनी, न जल निकासी के लिए नाला.
बारिश में यहां पानी भर जाता है. अब कोई अधिकारी भी जांच को नहीं आता.'' एक जर्जर हालनुमा कमरे में पसीना-पसीना 65 वर्षीय मूलचंद का पूरा समय यहां डंप धागों के बंडलों के ढेर की रखवाली करने में बीत रहा है. सोलर चरखा प्रशिक्षण केंद्र बंद पड़ा है. धागों के हजारों बंडल अब सड़ चुके हैं. ज्ञानती देवी बताती हैं, ''2016 में कई महिलाओं ने 4-4 हजार रुपए में मोदी चरखा लिया था. बाकी पैसा सरकार को देना था. कुछ साल काम चला. अखबारों में खूब फोटो छपी. बाद में संस्था के लोग गायब हो गए.'' 50 से अधिक महिलाएं बैंकों की कर्जदार हो गई हैं. पर लोकसभा चुनाव नजदीक आता देख प्रशासन फिर से चौकन्ना हो उठा है.

