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बुद्धम् शरणम्...

लगता है, कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दोनों उम्मीदवार—मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर—भगवान बुद्ध की दैवीय कृपा पर निर्भर हैं. वयोवृद्ध खड़गे स्व-घोषित बौद्ध हैं

समाचार सारः बुद्ध की कृपा किस पर बरसेगी
समाचार सारः बुद्ध की कृपा किस पर बरसेगी
अपडेटेड 18 अक्टूबर , 2022

लगता है, कांग्रेस के अध्यक्ष पद के दोनों उम्मीदवार—मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर—भगवान बुद्ध की दैवीय कृपा पर निर्भर हैं. वयोवृद्ध खड़गे स्व-घोषित बौद्ध हैं और अक्सर कहते हैं कि बौद्ध धर्म समाज में शांति और सद्भाव प्राप्त करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है. वहीं, दूसरे उम्मीदवार थरूर ने भी एक अक्तूबर को नागपुर स्थित दीक्षाभूमि स्मारक के दर्शन के साथ अपना चुनाव अभियान शुरू किया. दीक्षाभूमि वह स्थल है जहां हमारे संविधान के निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सन् 1956 में अपने अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था. अब बुद्ध की ज्यादा कृपा किस पर बरसेगी, यह जानने के लिए दोनों को परिणाम वाले दिन यानी 19 अक्तूबर तक इंतजार करना होगा.

'मंत्री जी की गाड़ी से न लें टोल टैक्स'

उत्तर प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री बेबी रानी मौर्य पिछले महीने सहारनपुर के दौरे पर थीं. वहां उन्होंने लकड़ी का सामान खरीदा. सहारनपुर से 24 अगस्त को आगरा स्थित मौर्य के आवास के लिए वह सामान भेजा गया. उसके गाड़ी चालक को सहारनपुर की जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा त्रिपाठी ने विभागीय लेटरपैड पर एक पत्र लिख कर दिया, जिसमें लिखा है, ''मंत्री जी का सामान है, रास्ते में किसी प्रकार का अवरोध और टोल टैक्स मुक्त करने का कष्ट करें.'' पत्र के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मौर्य लोगों के निशाने पर आ गईं. वैसे उनके ऑफिस ने ऐसे किसी पत्र की सूचना से इनकार किया है.

स्टार प्रचारक कंगना!

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट पाने के लिए दिल्ली का चक्कर लगा रहे कई लोग पार्टी के आला नेताओं को अभिनेत्री कंगना रनौत से चुनाव प्रचार कराने का सुझाव दे रहे हैं. इनका तर्क है कि रनौत ने जिस तरह भाजपा की विचारधारा के हिसाब से अपनी बातें रखी हैं, उससे प्रदेश के युवाओं और महिलाओं में उनकी अच्छी फॉलोइंग बन गई है. कुछ नेता तो 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें मंडी से पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के विरुद्ध भाजपा उम्मीदवार बनाने की बात भी कह रहे हैं.

दो नावों की सवारी

कभी-कभी दो नावों की सवारी भारी पड़ जाती है. ऐसा ही कुछ राजस्थान सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री रमेश मीणा के साथ हुआ. सचिन पायलट के समर्थक रहे मीणा को जुलाई 2020 में बगावत और फिर सुलह के बाद मंत्री पद मिला था. लेकिन बीते 25 सितंबर को संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के बंगले पर पहुंचकर इस्तीफा देने वालों में वे भी थे. वहां इस्तीफे के प्रारूप पर हस्ताक्षर करवाने के बाद जब सभी विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी के आवास पर ले जाया जा रहा था, तब मौका पाकर मीणा वहां से खिसक लिए. लेकिन उनका इस्तीफा बस की सवारी करते हुए जोशी के पास पहुंच गया. अब सियासी रणनीतिकार कह रहे हैं कि दो नावों की सवारी में मीणा न इधर के रहे, न उधर के.

जाएंगे बिजुरिया बाबा?

बक्सर के 'बिजुरिया बाबा' जगदानंद सिंह अभी-अभी राजद के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं, अब उनके जाने की खबर भी आने लगी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विरोधी रहे जगदानंद को अब राजद में मिसफिट माना जा रहा. उनके बेटे सुधाकर सिंह ने भी मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह नया कृषि मंत्री भी बन गया है. यह सब इतनी सहजता से हुआ, जैसे राजद इसके लिए तैयार था. लालू परिवार नहीं चाहता है कि अभी कोई राजद नेता नीतीश के खिलाफ टिप्पणी करे, पर जगदानंद करें भी तो क्या. नीतीश उनको सुहाते नहीं. वे इस गठबंधन के पक्ष में थे भी नहीं. इसलिए अभी भी उनके बयानों में नीतीश के प्रति कटुता छलक पड़ती है.

—साथ में आशीष मिश्र, हिमांशु शेखर, पुष्यमित्र और आनंद चौधरी

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